Thursday, 3 November 2022

Article: How to Apply Perfume

आज का हमारा यह article, आपको मनमोहक खुशबू की दुनिया में ले जाएगा। और आपको पता है, उस दुनिया की धुरी आप ही होंगे।

तो चलिए बताते हैं कैसे...

हम सभी चाहते हैं कि हम जब कहीं पहुंचे तो, सब लोग हमारे होने के एहसास से ही खुश हो जाएं। इसके लिए, perfume बहुत करगर सिद्ध होगा। 

अब आप बोलेंगे कि perfume कैसे?

तो वो ऐसे की, कि अब पसीने से लथपथ, बदबूदार इंसान से तो कोई भी मिलना नहीं चाहता है।

आज कल हर कोई उनसे ही मिलना चाहता है, जिसके पास से भीनी-भीनी खुशबू आ रही हो, दूसरे शब्दों में कहें तो perfume, आपकी strong persona को enhance करता है। आप में confidence level को boost करता है, पर यह भी नहीं है की, कि perfume से ही पूरा नहा लें।

अब सवाल यह उठता है कि, कितना और कहाँ-कहाँ perfume लगाया जाए, जो आपकी personality को enhance करे और long lasting भी हो।

 तो चलिए आप को perfume लगाने का Step By Step तरीक़ा बताते हैं, जिससे, ख़ुशबू लंबे समय तक टिकी रहे।

How to Apply Perfume 



Office जाना हो या फिर Party, आज के वक़्त में perfume एक ज़रूरी चीज़ बन गई है. इसकी ख़ास वजह ये है कि कोई नहीं चाहता कि शरीर की दुर्गंध की वजह से सामने वाला उसे जज करें।

वहीं, शरीर व कपड़ों से आती सुगंध personality को निखारने का काम भी करती है। इसलिये, ladies हो या gents, perfume अपने पास रखते ही रखते हैं।

लेकिन दोस्तों, जैसे हर काम को करने का एक तरीक़ा होता है, ठीक उसी तरह perfume लगाने का भी एक सही तरीक़ा होता है। अधिकतर लोग सही जानकारी के अभाव में perfume के कई spray और कहीं भी apply कर लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए।

आइये, इस ख़ास article में हम आपको Step By Step, Perfume apply करने का सही तरीका क्या है बता देते हैं। 

Perfume लगाने का सही तरीक़ा जानने से पहले आइये जानें कि perfume लगाने की तैयारी कैसे करें :

 Top Note and Base Note 

अगर आप चाहते हैं कि party या office में आपसे आती ख़ुशबू लोगों को प्रभावित करें या उन्हें भी आपकी perfume अच्छी लगे, तो perfume का चयन करने से पहले उसकी top note & base note को check कर लें। Top note यानी perfume spray  करते ही तुरंत आने वाली ख़ुशबू। वहीं, Base note यानी fragrance का base, जो देर तक बना रहता है. इसे पाने के लिए कलाई के पीछे spray करें और 15-20 मिनट बाद सूंघें।

Daytime and Nightime Perfume: 

ऑफ़िस के लिए day perfume को choose करें और अगर रात का plan है, तो night perfume को choose करें।

 दिन और रात के हिसाब से अपने perfumes को चुनना ज़्यादा सही रहेगा।

After bathing : perfume लगा ने से पहले स्नान ज़रूर करें, क्योंकि चिपचिपे और पसीने वाले शरीर पर perfume की ख़ुशबू सही से समा नहीं पाती है। वहीं,  त्वचा अगर साफ़ हो, तो skin अच्छी तरह perfume को absorb कर लेती है।

Dry your skin properly : नहाने के बाद त्वचा को अच्छी तरह सुखा लें, ताकि perfume अच्छी तरह से लग सके।

इसके बाद ही नीचे बताए गए तरीक़े से शरीर पर perfume लगाएं। नहाने के बाद perfume लगाना अच्छा माना जाता है। नहाने से pores यानी रोम छिद्र खुल जाते हैं, जिससे त्वचा अच्छी तरह perfume को absorb कर लेती है।

Correct way to apply perfume  – 

Spray करने से सबसे पहले perfume की बोतल को शरीर से 3 से 6 इंच दूर रखें। Spray का मुंह यानी nozzle, perfume लगाने वाली जगह की ओर ही होना चाहिए। इस बात का ध्यान दें कि अगर perfume से त्वचा ज़्यादा गीली हो रही है, मतलब बोतल त्वचा से ज़्यादा क़रीब है। 

कमरे में fan की speed ज़्यादा है, तो कम करें या बंद ही कर दें। इससे क्या होता है कि हवा की वजह से perfume आपके मुंह पर या सही जगह से अलग लग जाएगी।

Perfume को Pulse Point पर लगाने के लिए कहा जाता है। Pulse point यानी वो जगह जहां Blood Vessel, skin के एकदम नज़दीक होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि शरीर की इन जगहों पर अतिरिक्त गर्माहट (Heat) रहती है, जिससे perfume अच्छी तरह महकती है।

Where to Spray Perfume 

आप दोनों कान के पीछे, लेकिन थोड़ा नीचे एक-एक spray करें। ऐसा इसलिए जब आप किसी से गले मिलें, तो महक सामने वाले तक सीधे जाए।

एक spray पीछे गर्दन पर बालों के नीचे करें। Line में खडे़ं हों या lift में, पीछे खड़े इंसान को भी आपकी perfume की महक आएगी।

इसके बाद collar bone  पर एक-एक spray करें. ध्यान रहे दोनों side. ये इसलिये, ताकि जब आप किसी से हाथ मिलाएं, तो सामने से सीधे ख़ुशबू व्यक्ति तक पहुंचें।

इसके बाद दोनों कलाई पर लगाएं। आप चाहें, तो हाथों के दोनों जोड़ पर भी एक-एक spray लगा सकते हैं।

इस बात का ध्यान रखें कि शरीर पर perfume लगाने के कुछ देर बाद ही कपड़े पहनें। आप चाहें तो कपड़े पहनने के बाद दो spray कपड़ों पर भी कर सकते हैं।

अगर आपके लंबे बाल हैं, तो एक-एक spray बालों पर नीचे कर सकते हैं।

वहीं, अगर आप public places में जा रहे हैं, तो दो spray और जोड़ सकते हैं, दोनों shoulder पर। अगर आप बालों पर लगा रहे हैं जैसा ऊपर बताया गया है, तो कंधों पर न लगाएं। ये उनके लिए हैं जिनके लंबे बाल नहीं हैं।

अब आप भी ऐसे ही perfume apply करें और इसका क्या effect होगा, यह आपको gathering में जाने से अपने आप पता चल जाएगा। 

Be confident be happy....

Tuesday, 1 November 2022

Story of Life: नहीं टूटेगी रीत (भाग - 3)

 नहीं टूटेगी रीत (भाग - 1) और

नहीं टूटेगी रीत (भाग - 2) के आगे... 

नहीं टूटेगी रीत ( भाग - 3 )

उसने एक पल एंजेला को देखा, फिर जाने क्या सोच कर बोला, मैं आज थोड़ी देर के लिए अकेले घर से जा रहा हूँ, मेरा इंतजार मत करना, तुम खाना खा लेना। 

देवेश शाम को लौट तो आया, पर वो पहले सा देवेश नहीं था। गुमसुम, उदास बुझा बुझा सा...

अगले दिन से दीपावली की रौनक शुरू हो गई। पूरा घर दुल्हन सा सजा था। हर तरफ चहल-पहल पर देवेश के मन में ग्लानि का सन्नाटा पसरा हुआ था। 

तभी door bell बजी तो एंजेला ने देवेश को दरवाजा खोलने को कहा..

देवेश ने दरवाजा खोला तो मम्मी जी और पापा जी सामने खड़े थे। उन्हें देखकर देवेश अपने को रोक नहीं पाया और उनसे लिपट कर बच्चों सा रोने लगा और बहुत सारी माफी मांगने लगा।

अरे देवेश, उन्हें अंदर भी आने दो। एंजेला ने दोनों के पांव छूते हुए कहा। 

कितना माफ़ी माँगोगे बेटा? अब तो हम तुम्हारे पास हैं, बालों पर हाथ फेरते हुए माँ बोलने लगीं। 

एंजेला ने चहकते हुए कहा, मैंने तो सोचा था कि माँ पापा को देखकर तुम खुश हो जाओगे, पर तुम हो कि दुखी ही होते जा रहे हो...

हाँ बेटा, हमने तो आने की नहीं सोची थी, पर बहुरिया के प्यार के आगे हमने आना पड़ा। पिताजी ने बड़े प्यार से एंजेला को देखते हुए कहा...

थोड़ी देर बाद देवेश के आंसू तो थम गये, पर दुःखी वो अब भी था।

शाम को पूजा पाठ के बाद, खूब सारे पटाखे फोड़े गये पर देवेश ने एक नहीं चलाए, बस माँ की गोद में सिर रखकर लेटा रहा। 

पूरे त्यौहार भर एंजेला ने अपने सास-ससुर दोनों का बहुत ध्यान रखा, दोनों उससे बहुत खुश थे।

धीमे-धीमे दीपावली का पूरा त्यौहार निकल गया। पर देवेश अनमना रहा। किसी को नहीं समझ आ रहा था कि जब सब यहाँ हैं और खुश भी हैं तो आखिर देवेश ऐसे क्यों रह रहा है?

अगले दिन जब देवेश उठा, तो उसे एंजेला वहां नहीं थी। एंजेला कहाँ गई? वो तो देर से उठती है.. सोचते हुए वो एंजेला को ढूंढने लगा।

तभी उसे kitchen से माँ की आवाज़ सुनाई दी। जब देवेश उधर गया तो उसने देखा कि माँ के साथ कोई लड़की साड़ी पहने हुए खड़ी थी, उसने सिर पर पल्लू रखा हुआ था।

माँ, एंजेला कहाँ है?

क्यों ढूंढ रहा है उसे? जब से हम आए हैं, तब से तो हमारी बहुरिया से ठीक से बात तक नहीं कर रहा है, बेकार में मुंह लटका कर फिर रहा है। 

नहीं मम्मी जी, वो कमरे में नहीं दिखी ना... कहते हुए देवेश ने जाते हुए कहा

अच्छा रूक तो जरा, बिटिया चाय दे दे इसे।

देवेश को चाय देने के लिए, जैसे ही वो लड़की मुड़ी, देवेश उसे देखकर स्तब्ध रह गया।

लाल साड़ी, सोलह श्रृंगार, नाक से मांग तक सिन्दूर, आज एंजेला बेहद खूबसूरत लग रही थी। जींस, स्कर्ट पहनने वाली एंजेला साड़ी पहन कर सोलह श्रृंगार भी कर सकती है, ऐसा कभी देवेश सोच भी नहीं सकता था।

फिर क्षणभर बाद, देवेश बुदबुदाता है छठ...

हाँ छठ... देवेश तुमने मेरे लिए अपने प्यारे गांव को छोड़ दिया,  तो अब मेरे रहते अपने घर की सदियों की रीत कैसे टूट जाती...

पर इतना कठिन व्रत...

हम भी मना किए थे बहुरिया को, पर...

तभी, एंजेला ने नाटकीय अंदाज में कहा, आप सब काहे ना परेशान हो रहे हैं। ऐ गो बात बोलें माई... जब आप हमारे साथ हैं ना, तो हमको कोनों दिक्कत नहीं है...

हाय रे! बिहारिन मार डाला तुमने तो, कहकर देवेश ने ज़ोरदार ठहाका लगाया। 

और उसके बाद सब खिलखिलाकर हंस पड़े। पूरे घर का माहौल खुशनुमा हो गया।

एंजेला ने पूरे जतन से छठी मैया का कठिन व्रत रखा, माँ ने बराबर से एंजेला की मदद की।

पारण वाले दिन, देवेश ने बहुत बड़ा आयोजन रखा। वो आज बहुत खुश था। 

सबके साथ रहकर मां भी पूरी ठीक हो गई, एक हफ्ते बाद, वो दोनों जाने को तैयार हो गए।

मम्मी जी, पापा जी आप कहाँ जा रहे हैं? 

अपने गांव, बेटा...

क्यों, यहीं रह जाएं ना..., आप को यहां अच्छा नहीं लगा? मैंने मन से सेवा नहीं की? एंजेला ने दुःखी मन से पूछा।

बहुरिया, हम बहुत खुश हैं तुमसे, बहुत अच्छी हो तुम! पर अब हमें गांव जाने दो, हम आते जाते रहेंगे।

तुम्हारी मम्मी जी भी पूरी ठीक हो गई हैं और ठीक भी रहेंगी क्योंकि उन्हें अब यह दुःख नहीं सालेगा कि क्या होगा घर की रीत का, क्योंकि तुम्हारे रहते घर की रीत नहीं टूटेगी...

मम्मी जी और पापा जी के जाने से एंजेला दुखी थी, पर देवेश जो इतने दिन से गुमसुम और ग्लानि से भरा हुआ था।

वो बहुत प्यार और प्रसन्नता से एंजेला को देख रहा था कि उसकी एंजेला के रहते नहीं टूटेगी रीत...

उसने जिसे प्यार किया था, वो सही निर्णय था...

Monday, 31 October 2022

Article : रौनक त्यौहारों की

 रौनक त्यौहारों की 

अभी चंद दिनों पहले ही दुर्गा पूजा थी। इस बार माता रानी के पंडाल का आयोजन, हमारे apartment के पीछे के park में ही हुआ था। 

हमारा घर first floor पर ही है, अतः एक एक गतिविधि घर बैठे ही पता चल रही थी।

नवरात्र के शुरुआत में पंडाल को सजाए जाने का कार्य होता रहा, और षष्ठी से माता रानी की पूजा आराधना आरम्भ हो गई।

सुबह से लेकर रात तक, पूजा, पुष्पांजलि, बहुत सारे बंगाली गाने बजते, बहुत सारे competition होते रहते थे। 

जिससे एक अलग ही उत्साह और उमंग थी। पर दशहरा पर्व के साथ ही सब ख़त्म हो गया।

उसके बाद उस पार्क में ऐसा सन्नाटा पसरा, जिसे देखकर, लगता ही नहीं था कि यहाँ वैसा कुछ भी था। माता रानी की विशाल प्रतिमा, मंडप की भव्यता, लोगों की चहल-पहल, भजन व गीतों की मधुरता, साथ ही इतने सारे competitions की रौनक... 

वो सब क्या सिर्फ मन का भ्रम मात्र था?...

उसके बाद दीपावली थी, घर में उसकी खरीददारी और पूजा आदि के कार्य शुरू हो गये।

फिर दीपावली में पूजा अर्चना, पकवान, बच्चों के पटाखे और धूम धड़ाके...

इस साल ग्रहण होने से दीपावली का त्यौहार एक दिन और बढ़ गया था, साथ ही उसका उत्साह और उमंग भी।

पर फिर वही routine life.

कल दोपहर में खाना खाने के बाद कमरे में बैठे थे कि बहुत तेज बिहारी गीत सुनाई देने लगे। थोड़ा ध्यान दिया तो लगा, यह तो छठ मैया के भजन हैं।

समझ नहीं आया कि कहाँ से आवाज़ आ रही है। जब बालकनी में जाकर देखा तो पता चला कि हमारे घर के पीछे वाले पार्क में ही छठ पूजा का आयोजन किया गया था। उसे देखकर मन प्रफुल्लित हो गया। 

छठ पर्व का आयोजन पहली बार हुआ था और हमने कभी पूजा होते हुए भी नहीं देखी थी।

तो सोचा, जब आयोजन इतनी पास है। छठी मैया अपना आशीर्वाद देने के लिए आ गई हैं तो पूजा को जाकर देखना चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।

उस समय, छठी मैया के सूर्य अस्त के अर्ध्य देने का समय हो रहा था। वहाँ का माहौल बहुत पवित्र होगा, ऐसा सोचकर हमने तुरंत एक बार फिर से स्नान किया और पतिदेव के साथ वहाँ पहुंच गए।

चलिए आप भी हमारे साथ उस मनोरम दृश्य को देखने चलिए।

वहाँ पहुंचे तो देखा, पूरा पार्क साफ सुथरा था, जगह जगह केले के पेड़ रोपे गए थे। वहाँ Mike and speakers का arrangements भी था। जिस पर छठी मैया के भजन चल रहे थे।

गड्ढा खोदकर एक artificial pond create किया गया था। 

बच्चे, बड़े बूढ़े, सबकी खूब भीड़ थी।

जगह जगह गन्ने के मंडप बने थे। ईंटों से पूजा करने के स्थान बने हुए थे। वो ऐसे थे, जैसे हम लोगों के यहाँ हवन करने के लिए बनाए जाते हैं। जो कि गेरू रंग से रंगे हुए थे। उसे मोमबत्ती और दीयों से सजाया हुआ था।

लोगों का पूरा परिवार वहाँ मौजूद था, जो स्त्रियां व्रत रखें थीं, उन्होंने सिन्दूर नाक से लेकर मांग तक भर रखा था। जो उनकी खूबसूरती और तेज़ पर चार चांद लगा रहा था।वो लोग डलिया भरकर फल लेकर आए थे।

सूर्य अस्त का समय था, तो जल में उतरकर व्रत रखें हुए लोग सूर्यदेव को अर्घ्य दें रहे थे। कुछ पुरुष भी व्रत रखें थे, वो भी अर्ध्य दे रहे थे। छठ पूजा ऐसा त्यौहार है, जिसमें स्त्री और पुरुष बराबर से व्रत रखते हैं।

जब बड़े लोग, पूजा इत्यादि कर रहे थे, उस समय बच्चे, खेलकूद और आतिशबाज़ी कर रहे थे। 

जब अर्घ्य देने का कार्य पूर्ण हुआ तो, सभी लोग फल, पूजा के सामान इत्यादि लेकर लौटने लगे थे। फलों से भरी हुई डलिया, पुरुष ने ही उठा रखी थी। 

स्त्रियां, छठी मैया के भजन गाते हुए जा रही थी, सभी भक्ति भाव से परिपूर्ण थी। किसी ने भी चप्पल नहीं पहन रखी थी, पर किसी को भी यह डर नहीं था कि कांटा ना चुभ जाए, कहीं कोई कीड़ा ना काट लें। वो सब तो मातारानी के भक्ति भाव में लीन थी। 

हम इस पूजा को नहीं करते हैं, पर ऐसा अद्भुत दृश्य देखकर मन हर्षित हो गया। छठी मैया का आशीर्वाद लेकर हम भी घर लौट आए।

आज सुबह 4:30 बजे से ही पुनः छठी मैया के भजन और पटाखों की आवाज़ सुनाई देने लगी। उठे तो देखा, अभी सूर्य देव प्रकट भी नहीं हुए थे, पर पार्क में फिर से सभी की भीड़ और हलचल थी।

ईंटों के मंडप पर टिमटिमाते हुए दीप और मोमबत्ती जल रहे थे। जिन्हें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानों आसमान से उतरकर सारे तारे जमीं पर आ गए हों...

तभी सूर्य देव प्रकट हो गए। उनके प्रकट होते ही लोग ने धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करना आरंभ कर दिया। पूरा पार्क पूजा स्थल बन गया था। Apartment के हर घर में धूप-दीप नैवेद्य आदि का पवित्र और शुद्ध धुआं जा रहा था, जो हर घर में positive energy भर रहा था। 

लोग का उत्साह और उमंग देखते ही बन रहा था, टिमटिमाते दीप, हल्का नीला आसमान, नारंगी सूरज, अर्ध्य देते लोग, पटाखे छुड़ाते बच्चे, गन्ने का मंडप, मैया के भजन, धूप-दीप नैवेद्य की खूशबू, सब मिलकर बहुत मनोरम दृश्य था। ऐसा लग रहा था कि यह सब चलता रहे और हम इनका हिस्सा बने रहें। अर्ध्य देने के कुछ देर बाद भजन गाते हुए सब वापस चले गए और हम भी अपने घर आ गए।

10 बजे के बाद, पार्क वापस पहले सा सुनसान हो चुका था। वहाँ मौजूद तालाब, केले के पेड़, गन्ने का मंडप, ईंटों से बने पूजा स्थान और लोगों का रेला कुछ भी तो नहीं था वहाँ... ऐसा लग रहा था मानो सारी कोरी कल्पना हो या स्वर्गिक स्वप्न...

उसे देखकर एहसास हुआ कि यह होती है त्यौहारों की रौनक... सच ज़िंदगी ही तो है, यह त्यौहार और उनकी रौनक... 

यही रौनक, हमारे भारत की खूबसूरती और पहचान है, जहाँ इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि त्यौहार किसका है, रौनक सब में होती है, उत्साह और उमंग सब में होता है।कभी मौका मिले तो, एक बार जाकर जरुर देखिएगा, यह रौनक ही जिन्दगी है। या यूं कहें कि रौनक से ही जिंदगी है, जो आपको आप से मिलाती है।

हमें गर्व है कि हम ऐसे देश के नागरिक हैं जो त्यौहारों का देश है। अद्भुत प्रेम सौहार्द और भाईचारे का देश है


जय हिन्द जय भारत 🇮🇳