Friday, 1 June 2018

Kids Story : पेटू - पेटू

समस्या : बच्चा बहुत धीमे धीमे खाता है।

         कहानी : पेटू - पेटू

समर,अपने Mummy Papa का इकलौता बेटा था, बहुत ही लाड़-प्यार से पाला हुआ प्यारा बच्चा था। अपने Mummy Papa की सारी बात मानने वाला, साथ ही पढ़ने में बहुत ही होशियार था।  
लेकिन  इस प्यारे बच्चे में एक खराब आदत भी थी, वो खाना बहुत धीमे-धीमे खाता था, उसकी इस आदत से उसके Mummy Papa बहुत परेशान रहते थे। उसकी Mummy  को लगता था, ये इतनी धीमे खाना खाता है, उससे खाना tasteless  हो जाता है, साथ ही उसकी nutritious value  भी कम हो जाती है। पर उन्हें समझ नहीं आता था की वो क्या करें? कोई कहता कि, इसको T.V. दिखाते हुए खाना खिलाओ, कोई कहता एकदम एकांत में खिलाओ। उसकी माँ ने सब कर के देख लिया था, कोई भी formula बस कुछ दिन ही कारगर सिद्ध होता, फिर समर धीरे-धीरे खाना खाने लगता।
एक दिन समर अपने Mummy Papa  के साथ एक party में गया, वहाँ table system था।  table system concept, उसने पहली बार देखा था, वहाँ उसके school  के friends  भी थे।
Table system में बहुत से लोग एक साथ बैठे थे, और काफी लोग अपनी chance के आने का इंतज़ार कर रहे थे।
समर अपने एक friend के साथ बैठ गया, सारी dishes उसकी पसंद कि थींChips, Donut, White sauce pasta, Cake, Chowmein, Burger, etc. समर तो बस खुश ही हो गया, सब favourite चीज़ें, वो भी जितनी चाहो, मिल सकती थीं
समर ने सब चीज़ें खूब सारी रखवा ली। और धीरे-धीरे खाने लगा, कुछ देर बाद सबका खाना finish  हो गया था, पर समर अभी तक केवल cake  और chips ही खत्म कर पाया था। तभी table से plates हटायी जाने लगी। समर डर गया, उसकी plate में तो अब भी बहुत कुछ बचा था, पर ये क्या uncle ने तो उसकी plate भी उठा ली।  वो बोलता रह गया, कि अभी finish नहीं हुआ है, पर कोई फायदा नहीं हुआ, समर भूखा ही रह गया।
उसने अपनी Mummy  को भी बोला, वो बोलीं बेटा ऐसा ही होता है, बाकी अपनी turn  का wait  कर रहे हैं ना। 
अगले दिन जब वो स्कूल गया, तो वहाँ उसके friend  उसे पेटू-पेटू कह कर चिढ़ा रहे थे।
जब वो घर आया,  तो वो बहुत रो रहा था, उसकी Mumma ने पूछा, क्या हुआ समर?
वो बोला एक तो मैं कल भूखा रह गया, और मेरे दोस्त मुझे पेटू-पेटू कह कर चिढ़ा रहे थे।
तब उसकी Mummy ने समझाया, तुमने बहुत सारा खाना ले लिया था, जबकि खाना उतना ही लेना चाहिए, जितना खा पाओ, फिर तुम सबसे देर तक खाते भी रहे, और uncle को खाना ना ले जाने को बोल रहे थे,  इसी कारण सब तुम्हें चिढ़ा रहे थे।
पर वो तो इसलिए ना, क्योंकि मेरा खाना finish  नहीं हुआ था।
और तुम्हें पता है, खाना क्यों finish  नहीं हुआ था, क्योकि तुम धीरे-धीरे खाते हो, तो औरों से कम खाने के बावजूद सब तुम्हें पेटू कहते हैं।
आज समर समझ गया था, खाना धीरे धीरे खाने से भूखे भी रह जाते हैं, और सब पेटू-पेटू भी कहते हैं।
उसके बाद से समर ने धीरे-धीरे खाना खाना बंद कर दिया, और अपनी  माँ का और ज्यादा लाडला हो गया।


Thursday, 31 May 2018

Kiddo Delight : Schezwan Paneer Burger




Schezwan Paneer Burger

Kids, nowadays, are happy while having burger, pizza, etc. but are reluctant of nutritious, healthy food.
Are you worried about their health as well as fulfill their demands? So here’s the second recipe of Kiddo Delight section, Schezwan Paneer Burger. It’s more healthy than Aloo Tikki Burger as, instead of Potatoes, it contains Paneer. My this innovative recipe can be made easily.

Ingredients:

  • Burger  bun              4
  • Paneer                      200gm
  • Cheese slice            4
  • Onion                         1 medium
  • Tomato                      1 medium
  • Capsicum                  1 medium
  • Butter                         75gm
  • Mayonnaise              75gm
  • Schezwan  chutney  50gm

Method:

  1. Prepare a paste of butter & Ching’s schezwan chutney.
  2. Now, cut paneer into thick slices, as shown in fig.:2. Apply the paste on the paneer slices & keep them aside to get marinated, for about 15-30 minutes.
  3. Later, take a pan &  fry the slices (टिक्की की तरह सेंक लीजिये).
  4. Then, cut the buns into two halves, horizontally.
  5. Apply mayonnaise on the inner side of one & butter on the other half. Take the lower half of the bun, place a fried paneer slice, then slices of tomato, onion & capsicum on it, and then a cheese slice. Close it with the upper half of the bun.
  6. Now, keep it in the oven for 1 min, at 900°C and the Schezwan Paneer Burger is ready to consume.

N.B.:

  • If you want to make it spice less, the paneer slices can be marinated only with butter.
  • The Schezwan Paneer Burger can be served in other three variants, i.e.:

  1. Maggi Masala Paneer Burger (marinate it with butter & Maggi Masala)
  2. Mint Masti Panner Burger (marinate it with butter &  mint chutney)
  3. Achaari Tadka Paneer Burger (marinate it with butter & achaar’s masala)

Wednesday, 30 May 2018

Article : व्यक्तित्व एक प्रेरणा


व्यक्तित्व एक प्रेरणा



आज मैं आप सब के साथ अपने दादा जी डॉक्टर बृजबासी लाल जी के संदर्भ में कुछ विचार व्यक्त करने जा रही हूँ।

आप सब सोच रहे होंगे? ये क्या, ये तो अपने घर के सदस्य के विषय में बताने लगीं? अपने दादा-दादी तो सभी को प्रिय होते हैं, ऐसा क्या है? जो ऐसे बताया जा रहा है?

जी हाँ, आप सबका सोना सही है। पर मेरे दादा जी किसी परिचय के मोहता हीं हैं, वह बुंदेलखंड विश्व-विद्यालय के द्वितीय कुलपति के पद पर आसीन थे।

पर यहाँ मैंने उनके पद के विषय में बताने के लिए आप सबका ध्यान केन्द्रित नहीं किया है, अपितु यहाँ मैं आप सब को बताना चाह रही हूँ, कि यदि कोई व्यक्ति ठान ले, तो उसको उसकी मंजिलों की ऊंचाइयों को छूने से कोई नहीं रोक सकता।

मेरे दादा जी अपने माता पिता के अकेले संतान थे, उनकी माँ का देहांत अल्पायु में ही हो गया था, अपनी स्कूली शिक्षा समाप्त करने के पश्चात उन्होंने अपने पिता की सेवा करने के लिए तार बाबू की रेलवे की एक छोटी सी नौकरी प्रारम्भ कर दी थी

उस समय जल्दी विवाह हो जाता था, तो उनका भी विवाह जल्दी ही संपन्न हो गया, विवाह के पश्चात परिवार की जिम्मेदारियाँ भी बढ़ने लगीं, पर वह अत्यधिक महत्वाकांक्षी थे। 

घर-परिवार की सौ जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अपने कदम वहीं नहीं रोके, बल्कि उनके कदम तो किसी और ही मंजिलों की तलाश में आगे बढ़ने लगे।

उन्होंने तार बाबू की नौकरी छोड़ दी, और विद्या की देवी के चरणों में पुष्प अर्पण करने का मन बना लिया, और पुनः अध्यन प्रारम्भ कर दिया। 

तत्पश्चात वह एक सरकारी विद्यालय में शिक्षक के पद र आसीन हो गए, उसके बाद उन्होंने  D.I.O.S. का पद प्राप्त किया, किन्तु यहाँ भी उनकी महत्वकांक्षा की पूर्ति नहीं हुई।

उन्होंने अपना अध्ययजारी रखा, और हमीदिया महाविद्यालय भोपाल में प्राध्यापक बन गए, उसके बाद दयानन्द वैदिक महाविद्यालय, उरई के प्राचार्य बने, पर उनकी  मंजिलों की ऊंचाई छूने की ख्वाइश यहाँ भी नहीं थमी, अपितु उन्होंने विद्या के सर्वोच्च पद कुलपति की उपाधि प्राप्त कर के ही अपनी कामनाओं की पूर्ति की। 

उन्हें नेपाल में भी सम्मानित किया गया था। जी हाँ, ऐसे ही व्यक्तितव के स्वामी थे मेरे दादा जी, जो लोगों की प्रेरणा-स्त्रोत बने।

उन्होंने दिखा दिया, यदि मनुष्य ठान ले, कि उन्हें अपनी मंजिलों की ऊचाइयों को छूना है, तो कोई भी जिम्मेदारियाँ, बाधाएं, आपको रोक नहीं सकतीं, पर आपकी कोशिशों में सच्चाई होनी चाहिए। 

साथ ही उनका कहना था, आपको लोगों के कहने का बुरा भी लगना चाहिए, क्योंकि उससे आपके अंदर एक आग जलने लगती है, और वो आग ही आपको आपकी ऊंचाइयों की ओर ले जाती है।

तो अगर आप भी कुछ कर दिखाना चाह रहे हैं, तो अपनी महत्वकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए व्यर्थ के बहाने न खोजें बल्कि एक सच्ची कोशिश करें, कामयाबी आपके कदम चूमेगी।
आज मेरे इस लेख को लिखने का तात्पर्य, महत्वाकांक्षी व्यक्तियों को जाग्रत करना है, क्योंकि ऐसे व्यक्ति ही देश-उद्धारक होते हैं।