Monday, 14 September 2026

Poem : गणपति व हिन्दी

आज का दिन अतिविशेष है, हमारी जिंदगी को सजाने-संवारने वाली, माँ जगदम्बा और माँ भारती, दोनों के लाडले बेटे और लाडली बेटी का आगमन एक साथ ही है। गणेश चतुर्थी और हिंदी दिवस एक ही दिन है।

जब दोनों साथ आ रहे हैं, तो भव्य स्वागत भी साथ में होना चाहिए, तो आज की यह कविता दोनों के श्रीचरणों में समर्पित है। दोनों ही हम सब का कल्याण करें…

गणपति व हिन्दी


सत्य सनातन के तुम स्वामी,

गणपति तुम हो अंतर्यामी। 

तुम ही हो अंत, तुम्हीं हो आरंभ,

जीवन का हो तुम से शुभारंभ।।


भारत माँ की लाडली बेटी, 

सौंदर्य को खुद में है समेटी।

जगमग करती है उसकी बिंदी, 

माँ की सबसे बड़ी बेटी है हिंदी। 


एक है आदि-अंत,

एक है अविरल धारा।

दोनों के आशीष बिना,

संभव नहीं संसार हमारा।।


एक की माँ है जगदम्बा,

एक की माँ है भारती।

आ रहे दोनों ही साथ में,

आओ उतारें उनकी आरती।।


मोदक का हम भोग लगाकर,

गणेश जी की जय हिन्दी में गाएँ।

शीश झुकाकर, जयघोष लगाकर,

दोनों से नित-नित आशीष पाएँ।।


गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया!

जय हिन्द, जय हिन्दी!