Wednesday, 9 September 2026

Story of Life : मजबूरी का सौदा (भाग-1)

मजबूरी का सौदा (भाग-1)


रमाकांत साहूकार ब्याज पर पैसा उधार दिया करता था। उसकी चौखट पर न जाने कितने गरीबों की line लगी रहती थी।

ऐसा नहीं है कि रमाकांत ने नया धंधा शुरू किया था, साहूकारी का काम उसका पुश्तैनी था। पर उसके बाप-दादा ब्याज दर कम रखते थे।

लेकिन रमाकांत का मानना था कि जब यही एक धंधा करना है, तो मुनाफे के साथ करेंगे। 

अधिक दर होने के कारण ब्याज के लिए पैसे न चुकाने के कारण उनकी बैल, जमीन, घर, धीरे-धीरे सब गिरवी रख जाते थे। पर कर्जा फिर भी ख़त्म नहीं हो पाता था। 

गरीब करते भी क्या? पूरे गांव में उसके जितना अधिक पैसा कोई नहीं देता था। एक वही था, जो ज़रूरत पड़ने पर सबसे अधिक पैसा दे देता था।

साथ ही वो कोई बेईमानी भी नहीं करता था, क्योंकि वो पैसे देते समय ही ब्याज दर बता देता था, इस हिदायत के साथ कि पैसा न चुकाने पर पशु, जमीन और घर गिरवी रख लेगा।

ऐसा होते-होते गांव के लगभग आधे घरों के लोगों के पशु, जमीन और घर गिरवी हो गये थे। अब वे अपना खेत जोतते थे, पर उसका ¼ पैसा अपने पास रख पाते थे, बाकी सब रमाकांत के घर पहुंच जाता।

इस तरह से बिना मेहनत और कामकाज के रमाकांत बहुत धनाढ्य व्यक्ति हो गया।

एक दिन…

आगे पढ़ें, मजबूरी का सौदा (अंतिम भाग) में…