Wednesday, 3 April 2019

Kids Story : Advay the hero : नयी दोस्त


बच्चों में series के लिए बढ़ते craze को देखते हुए, आज से छोटे बच्चों के लिए कहानी की series शुरू कर रहे हैं। जिसमे कुछ पात्रों के नाम same रहेंगे, और कहानी का lead character Advay होगा। पर कहानी हर बार नयी और अपने आप में पूरी होगी। series है Advay the hero. आज की कहानी है “नयी दोस्त”
   
Advay the Hero : नयी दोस्त


Advay class 2nd  में आया था। Advay अपनी class का सबसे intelligent smart and caring बच्चा था। सिवाय दोस्तों के सब नया था। इस साल से teacher भी हर subject की अलग थीं। इस class में आने से वो अपने आप को बड़ा समझने लगा था। हर काम वो अपने आप से करना चाहता था।

कुछ दिन बाद, उनकी class में नीति का new admission हुआ।उसके लिए तो सब कुछ नया था। हर subject की teacher change होते रहने से वो उनसे भी bonding नहीं बना पा रही थी। Class teacher ने बच्चों से बोला था, इससे आप लोग friendship कर लीजिएगा। पर सारे बच्चे अपने group में ही मस्त थे, किसी ने भी नीति से दोस्ती नहीं की।   

नीति उदास व गुमसुम रहने लगी। उसको ऐसा देखकर advay ने अपने दोस्तों से उससे दोस्ती करने को कहा, पर कोई तैयार नहीं था। Advay ने कहा, मुझे अच्छा नहीं लगता, कि कोई दुखी रहे, वो हमारे school में new admission है, तो उसे भी तो friends चाहिए ना? वो नीति से दोस्ती करने चला गया।


उसने नीति से बोला, मैं तुमसे दोस्ती करूंगा, तुम करोगी? नीति मुस्कुरा दी। अब से रोज advay नीति साथ साथ बैठने लगे। Advay ने नीति को सारा पहले का काम बता दिया। बहुत जल्दी दोनों में अच्छी दोस्ती हो गयी। नीति को अब स्कूल आना अच्छा लगने लगा, अब वो गुमसुम नहीं रहती थी।

नीति बहुत सुन्दर drawing बनाती थी, पिछले school में उसे बहुत easy method से drawing सिखाई गयी थी। Advay colouring तो बहुत अच्छी करता था, पर उसकी drawing बस ठीक थी। नीति ने advay को drawing की सारी easy techniques सिखा दी। 

जब स्कूल में drawing competition हुआ तो advay और नीति दोनों first आए। जब advay के बाकी दोस्तों ने advay की drawing देखी, तो पूछने लगे, तुम्हारी drawing कब से इतनी अच्छी हो गयी? 

Advay बोला, जब से नयी दोस्त नीति मिली है। इसे drawing की बहुत easy techniques आती हैं। अगर तुम लोग इससे दोस्ती कर लोगे, तो तुम लोगों की drawing भी अच्छी हो जाएगी। अब advay के सारे दोस्त दीपिका, वरुण, अक्षय, यश सबने नीति से दोस्ती कर ली ।

नीति आज बहुत खुश थी, advay के कारण वो अब अकेली नहीं थी। सबकी नयी दोस्त बन गयी थी।

Monday, 1 April 2019

Article : April Cool Day


April Cool Day


Courtesy: joy.org.au

जी हाँ आप ने सही पढ़ा, हमने April cool day ही लिखा है। बहुत सालों से हम 1 April को April fool day की तरह से मानते आए हैं। पर कभी आप ने सोचा है, इससे हासिल क्या होता है? कुछ भी नहीं!  सिवाय इसके कि हम किसी को कुछ क्षण के लिए सबकी नज़र में या उसकी खुद की नज़र में मूर्ख, छोटा या नीचा साबित करने में कामयाब हो जाते हैं।

पर पता है, किसी को नीचा दिखाना कोई महानता का काम नहीं है। तभी आपको इसके लिए कोई कभी याद नहीं करेगा। पर इसके बदले में आप किसी की ऐसी मदद कर दें, कि उसकी ज़िन्दगी में सुकून आ जाए, तो वो आपको अवश्य याद रखेगा।

इसलिए इस बार से हम 1 April को cool day की तरह से मानना शुरू करेंगे। तो सोच क्या रहे हैं? पूरा दिन बचा है, अभी से ही planning करते हैं, कि हम कैसे दूसरों के काम आते हैं।

उस दिन हम ऐसा कुछ plan कर सकते हैं, कि अपने बच्चों के लिए तो हम बहुत कुछ करते हैं। अब की बार माँ, पापा के भी लिए कुछ करें।

अपने employees को डाँटा तो अपने बहुत बार होगा, उस दिन जिस बात में वो अच्छे हैं, उसकी प्रसंशा कर दें।

अगर आपकी maid बहुत दिनों से advance माँग रही है, तो उसे उस दिन दे दीजिये।

कोई भूखा मिल जाए तो, उसे कुछ खिला दीजिये, किसी की प्यास बुझा दीजिये। कोई रूठा है, तो मना लीजिये।
Courtesy: Pexels

बच्चों को ice-cream खिला कर cool day की शुरुआत करें, उनको कब से गर्मी की प्रतीक्षा थी, कि गर्मी आये, और उनके cool cool day शुरू हो जाएँ

यकीन जानिए, किसी को मूर्ख बना के जो खुशी मिली होगी, उसे ज्यादा सुख, किसी को मुस्कुराहट देने में है।

और अगर आपको ये सब नहीं करने की इच्छा है तो, सबसे पहली शुरुआत हम 1, 1 पौधा अपने आसपास लगा कर करते हैं, इससे हम दो काम एक साथ करेंगे, एक तो भूमि ऋण या प्रकृति ऋण चुकाएंगे, साथ ही आगे आने वाले पीढ़ी को शुद्ध वातावरण भी देंगे।

Fool day मनाया बहुत
Cool day मनाएंगे अब
मूर्ख बना चुके बहुत
चेहरे पर खुशियाँ लाएँगे कब  

Friday, 29 March 2019

Story of Life: लालसा (भाग-२)


अब तक आपने पढ़ा, सुमित को उसके बचपन के दोस्त, रजत का फ़ोन आता है, कि सभी दोस्त एकत्रित हो रहे हैं, वो भी आ जायेपर सुमित दुविधा में है, क्योंकि उसे रचना को हीरे का हार दिलवाने जाना है जब रचना को reunion की बात पता चलती है, तो वो बिना क्रोधित हुए सुमित को जाने को कह देती है....... 
अब आगे.....   

लालसा (भाग-२)

रचना बोली आप अपने दोस्तों से मिल आइये, ऐसे मौके बार-बार नहीं मिलते हैं।

पर तुम्हारा set…, उसका क्या होगा, क्या पहनोगी फिर?
उसका कुछ सोचते हैं, मैं jeweller से बात करूंगी, कुछ सोचती सी बोली "रचना, 

मैं फिर time नहीं निकाल पाऊँगा", मैंने उसे याद दिलाते हुए बोला, जिससे वो आखिरी क्षण मैं मुझसे कोई उम्मीद ना लगाए। पर अभी भी रचना ने उन्हीं सधे शब्दों में कहा, कि ठीक है, आप मिल आइये।

मैं बहुत खुश था, अपने दोस्तों से मिलने की बात सोच-सोच कर, साथ ही इस बात से भी की रचना ने अपनी खुशी को पीछे रखकर मेरी खुशी को प्राथमिकता दी।

सारे ही दोस्तों ने खूब मज़े किए, वक़्त तो जैसे हमे अपने बचपन में ही ले गया था। चार घंटे हम उसी दौर में रहे। फिर सभी अपने अपने घर जाने को ready हो गए।

जब मैं लौट रहा था, तो रजत भी साथ हो लिया। उसे, मैंने अपने और रचना से हुई बात के बारे में बताया।

सुनकर रजत बोला, मतलब आज भाभी के कारण हमारी team जुड़ पायी। तभी हम उसी jeweller के showroom के सामने से गुजर रहे थे।   

मैंने रजत से कहा, भाई तू यहाँ से cab कर ले। मुझे रचना के लिए set लेना है अभी तो showroom खुला है, पर घर जा कर रचना को लाऊँगा, तब तक में बंद हो जाएगा। क्या करूँ, कुछ सूझ नहीं रहा है।

अरे यार, क्या छोटा करने वाली बात बोल दी, रजत गुस्से में भर कर बोला। अरे मैं भी तेरी मदद करना चाहता हूँ। तू जा jeweller के showroom पर set पसंद कर, मैं तब तक भाभी को लेकर आता हूँ। आज हमारी लालसा पूरी करने में उन्होंने अपनी इतनी बड़ी लालसा का त्याग कर दिया था।

मुझे तो मन मांगी मुराद मिल गयी थी। मैंने रजत को कहा, क्या खूब idea दिया है, मेरे दोस्त! जा, जल्दी से रचना को ले आ। तब तक मैं कुछ set पसंद करके रखता हूँ।

थोड़ी ही देर में रजत और रचना आ गए। रचना जब showroom पहुंची, तो बहुत surprise थी। आते ही बोली, आपने मुझे यहाँ के लिए बुलाया था?...... क्यों रजत ने तुम्हें बताया नहीं था? मैंने रजत की तरफ देखते हुए पूछा।

नहीं! मुझे तो रजत भैया, बस इतना ही बोले, चलिये भाभी, आज धन्यवाद देने की रात है। मैं सारे रास्ते पूछती रही, कि इसका क्या मतलब है। पर ये कुछ बताएं तब ना, रचना कुछ झुंझलाती सी बोली।

अरे भाई, तुम दोनों के प्यार के बीच में क्यूँ हड्डी बनूँ, रजत शरारत भरी आवाज़ में बोला।

रचना के सामने मैंने दो set रख दिये, उन्हें देखकर रचना खुश होते हुए बोली, ओह! ये बात थी?
Courtesy: Shutterstock

हाँ, पसंद कर लो, मैंने रचना को बैठाते हुए बोला। मुझे तो दोनों ही बहुत पसंद आ रहे हैं, अब क्या करूँ? रचना असमंजस में पड़ कर बोली।

तो तुम दोनों ही ले लो। आज मैं बहुत खुश हूँ, जिसके पास इतना अच्छा हमसफर हो, जिसे अपनी लालसा से बढ़कर मेरी लालसा की चिंता हो, उसके लिए 1 set कम होगा।

फिर मैं रजत की तरफ मुड़ गया, धन्यवाद! मेरे दोस्त, आज ये तुम्हारे कारण ही संभव हो पाया।

अरे यार, मुझे शर्मिंदा मत कर, आज भाभी ने सिर्फ तेरी ही नहीं, हम सबकी लालसा पूरी की है, तो इतना फर्ज़ तो मेरा भी बनता है ना।

सब हँसने लगे, सच आज का दिन बहुत अच्छा था।