Thursday, 6 October 2022

Article: Seat belt rules modified!

Seatbelt के बदले नियम! 

आज हम अपना यह article, एक information के साथ लाए हैं, जो कि बहुत लोगों को पता भी होगी, पर शायद सबको नहीं पता हो, लेकिन पूरी बातें, बहुत कम लोग ही जानते होंगे, यह तय है। 

चलिए छोड़ते हैं कि किस को क्या पता है और किस को क्या नहीं; हम आपको सब कुछ सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं।

अब आप को पीछे की seats पर भी सीट बेल्ट लगानी होगी; नहीं लगाने से चालान कटेगा।

ऐसा बिल्कुल मत समझिएगा कि यह information कोरी बकवास है। यह बिल्कुल सही news है।

इसे दिल्ली में implement भी कर दिया गया है और आप के state में भी यह जल्द शुरू हो जाएगा।

अगर safety के point of view से देखेंगे तो यही समझ में आएगा कि यह बहुत अच्छा decision है।

आपको यह तो अच्छे से पता होगा ही कि seatbelt क्यों लगाते हैं?

बिल्कुल सही, accidents को रोकने के लिए या उनकी severity को कम करने के लिए...

तो, accident के time जितनी safety की requirement आगे बैठे लोगों को है, उतनी ही पीछे बैठने वाले लोगों को भी requirement है। पर अगर गहराई से सोचेंगे तो आपको भी एहसास होगा कि पीछे बैठने वालों को seatbelt की requirements अधिक है।

ऐसा इसलिए क्योंकि, mostly आगे बैठने वालों को accident होने की संभावना पहले समझ आ सकती है, जिससे वो alert हो सकते हैं और accident टलने की संभावना बढ़ जाती है।

जबकि पीछे बैठने वालों की alertness, आगे वालों के competitively कम रहती है, जिसके कारण accident की severity बढ़ जाती है। 

पीछे की seats पर भी seatbelt लगानी mandatory है, यह मुद्दा भी एक high-profile case के कारण ही हुआ है। जिसमें आगे बैठे दोनों लोग सुरक्षित रहे और पीछे बैठे दोनों लोगों की death हो गई। तो इस बात को seriously लीजिए।

वैसे भी, पीछे वाली सीट पर, mostly, ladies, kids and elders बैठते हैं तो उनकी safety का ध्यान और ज़्यादा रखने की जरूरत होती है।

चलिए यह बात तो हुई, seatbelt लगाने की necessity की...

पर अब यह safety rule बन गया है कि पीछे बैठने वालों को भी seatbelt लगानी होगी। अगर आगे बैठने वाले seatbelt लगाएं और पीछे बैठने वाले नहीं लगाए हैं तब भी चालान कटेगा, so be aware!

अधिकतर 4 wheelers में पीछे की seats के लिए belts तो होती है मगर न बांधने पर reminder alert नहीं बजता है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि backseat पर belt reminder को भी अनिवार्य बनाया जाएगा। अगर गाड़ी चल रही है तो सभी seats पर belt लगाना अनिवार्य है। Motor Vehicle Act की धारा 194B के अनुसार, seatbelt न लगाने पर 1,000 रुपये का चालान कटता है।

अब ऐसे में बहुत से लोगों का सवाल होगा कि:

अगर हमारे 4 wheeler में पीछे seatbelt ना हो तो?

अगर पीछे बच्चे बैठे हों तो?

अगर पीछे तीन लोग बैठे हों तो, तीसरा कैसे seatbelt लगाएगा? 

तो सुनिए इनके जवाब।

अगर आप के 4 wheeler में seatbelt नहीं है तो आप दोषी नहीं माने जाएंगे, ना ही आपका चालान कटेगा। पर अगर seatbelt का provision है और आपने तब भी सीट बेल्ट नहीं लगाया है, तो जिसका 4 wheeler है, उसका चालान कटना तय है।

बच्चे आगे बैठें या पीछे, seatbelt लगानी होगी; नहीं लगाने से चालान कटेगा।

पीछे की seats में, generally, दो लोगों के लिए seatbelt का arrangement होता है, इसलिए दोनों को ही seatbelt लगानी होगी। ऐसे में तीन लोगों के बैठने पर seatbelt नहीं लगी होने का ₹1000 के साथ ही overloading होने का भी 1000 रुपए का चालान कट सकता है। 

पर अगर तीन seatbelt का provision है तो, तीनों लोग seatbelt लगाकर बैठ सकते हैं, तब चालान नहीं कटेगा।

जैसा कि नियमों द्वारा ज्ञात हुआ, हमने वे सभी बातें आपको बता दी हैं। अगर आप के कोई और सवाल हों या आप हम सबके साथ कोई अन्य information share करना चाहें, तो comment box में अवश्य बताएँ।

Be aware and be safe 😊

Wednesday, 5 October 2022

India's Heritage: रावण के पुतले का ही दहन क्यों?

आज दशहरा पर्व है। विजयदशमी – असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक।

त्रेतायुग से आज तक हम सभी दशहरा पर्व पर रावण दहन करते आए हैं। 

पर कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों है कि हम सदियों से रावण के पुतले का दहन करते आएं हैं? ऐसा भी क्या है? क्या वो बड़ा राक्षस था, इसलिए? या उसने बहुत अत्याचार किए थे, इसलिए? या प्रभू श्रीराम ने रावण का वध किया, इसलिए?

तो बड़ा राक्षस तो कंस भी था, उसके द्वारा किए गए अत्याचार के आगे तो रावण का अत्याचार कमतर ही कहा जाएगा, क्योंकि उसने तो नवजात शिशुओं व छोटे छोटे बच्चों का भी वध कर दिया था। और जहांँ तक रही उसके वध की बात, तो उसका वध भी भगवान श्रीकृष्ण ने किया था।

अन्य बड़े राक्षसों का वध भी, ईश्वर के द्वारा हुआ है, जैसे विष्णु, महेश, ब्रह्मा व बहुत से मातारानी के शक्ति स्वरूप द्वारा।

फिर उनके पुतले क्यों नहीं?

आइए, इस India's Heritage, segment के अंतर्गत इस तथ्य को थोड़ा समझने का प्रयास करते हैं।

रावण के पुतले का ही दहन क्यों?




रावण दहन का कारण:

प्रतिवर्ष दशहरे पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है। इसके पीछे की मुख्य वजह क्या है? मान्यता है कि असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में यह परंपरा शुरू हुई। दशहरे के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। 

दशहरे के दिन रावण का पुतला दहन करने की परंपरा है। हालांकि कई जगह रावण की पूजा भी होती है और दहन नहीं होता है। दशहरे के दिन भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी। दशहरे के दिन ही नवरात्रि की समाप्ति होती है, इसी दिन देवी मां की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।


‘अत्यंत शक्तिशाली था रावण ’

ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडेय जी के अनुसार,  रावण पर विजय हासिल करना इतना आसान नहीं था। रावण तपस्वी, मूर्धन्य, समस्त अस्त्र-शस्त्र का पारंगत, बलशाली, सोने की लंका का सम्राट था। उसके राज्य में प्रजा खुशहाल थी, सभी संतुष्ट व संपन्न थे।

इन सबसे बढ़कर, रावण एक प्रकांड विद्वान तथा राजधर्म का ज्ञाता भी था। 

यही वजह थी कि प्रभू श्रीराम ने अपने अनुज, लक्ष्मण को मृत्यु-शैय्या पर पड़े रावण के पास राजधर्म का रहस्य जानने भेजा था। 

ज्योतिषाचार्य के अनुसार रावण की सत्ता भी कोई मामूली सत्ता नहीं थी।  रावण के 10 सिर थे। धर्म कहता है कि 10 दिशाएं होती हैं। अतः जो रावण 10 दिशाओं पर नियंत्रण कर सकता था, उस पर विजय प्राप्त करना बड़ी बात थी। 

इसलिए इसे विजयादशमी कहते हैं और इसे विजय पर्व के रूप में मनाते हैं। अहंकार और क्रोध ने रावण का तो सर्वनाश किया ही था, साथ ही इस आग ने पूरे राक्षस कुल की तिलांजलि दिलवा दी थी, अर्थात पूरे राक्षस कुल ने प्राण देकर रावण के बुरे कर्मों की कीमत चुकाई थी। इसीलिए राम ने जब रावण का वध किया, तो इससे बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर देखा गया।

राम और रावण की कुंडली देखें  तो, ज्योतिषाचार्य जी बताते हैं कि रावण पर विजय हासिल करना आसान काम नहीं था। भगवान श्रीराम और रावण दोनों की ही कुंडलियाँ बहुत शक्तिशाली थीं। 

दोनों की लग्न में विद्यमान बृहस्पति दोनों को अत्यंत पराक्रमी और शक्तिशाली बनाता था। भगवान राम के लग्न का मालिक चंद्रमा और रावण के लग्न का मालिक सूर्य था। चंद्रमा सौम्य स्वभाव देता है, जबकि सूर्य उग्र स्वभाव के लिए जाना जाता है। यहाँ अंतर यह भी था कि भगवान राम का बृहस्पति 'उच्च' का है, जो उन्हें विशिष्ट बनाता है। हालांकि रावण के बृहस्पति ने भी उसे अच्छे परिणाम दिए।

ज्योतिषाचार्य जी ने बताया कि रावण की कुंडली की एक और बड़ी मुश्किल ये थी, कि पंचम भाव में धनु राशि में राहु बैठा हुआ था, जिसने मति भ्रष्ट कर दी और इसी वजह से रावण को राक्षस की श्रेणी में रख दिया गया। कुछ यही वजह थीं कि भगवान राम का बृहस्पति भारी रहा और रावण की हार हुई। 

दोनों की कुंडली बेहद मजबूत और शक्तिशाली थीं‌। दोनों ही पराक्रमी और बुद्धिमान थे, लेकिन इसके बाद भी अच्छाई ने बुराई को हराकर जीत कायम की।

इस दिन संसार को एक नया संदेश मिला कि बुराई या झूठ कितना भी शक्तिशाली ही क्यों न हो, अंत में जीत अच्छाई और सत्य की ही होती है। इसी वजह से बुराई रूपी रावण के पुतले के दहन की परंपरा निभाई जाती है।


दशहरे के दिन करें मां दुर्गा और राम का पूजन:

मान्यता है कि भगवान राम की पूजा से विजय प्राप्त होती है। भगवान राम को यह वरदान दो जगह से प्राप्त होता है। एक सूर्य से — जब महर्षि अगस्त्य उन्हें आदित्य ह्रदय स्त्रोत के बारे में बताते हैं और दूसरा भगवान श्रीराम ने स्वंय महानवमी वाले दिन शक्ति रूप की पूजा की थी और दशहरे के दिन विजय प्राप्त की थी। दशहरे के दिन अस्त्र-शस्त्रों की भी पूजा की जाती है और विजय का पर्व भी मनाया जाता है।

दशहरे के दिन महिषासुर-मर्दिनी माँ दुर्गा के उस स्वरूप की पूजा होती है, जिसमें माँ दुर्गा का शक्ति का सबसे प्रचंड स्वरूप है, जिसमें माँ दुर्गा पापों का नाश करती हैं। वहीं भगवान राम की पूजा होती है, क्योंकि दशहरा भगवान श्रीराम की विजय का पर्व है। 

इस दिन, माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम की पूजा करने से संपूर्ण बाधाओं का नाश होता है।

चतुर्मास में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करते हैं। पर कहा जाता है कि दशहरे का मुहूर्त, अबूझ मुहूर्त होता है, इसलिए दशहरे के दिन किसी भी कार्य की शुरुआत करना शुभ है। इस दिन हवन पूजन करके अपने नवग्रहों को शांत करने के लिए आप उपाय भी कर सकते हैं।

रावण के दहन के समय क्या करना चाहिए?

दशहरे के दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है। माना जाता है कि जो इस आयोजन में शामिल होता है, उसके जीवन में बहुत सारी उपलब्धियाँ हासिल होती हैं। जब रावण दहन शुरू होने वाला हो, तो माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम का स्मरण करें।

जब रावण का पुतला जल रहा होता है, तो भगवान श्रीराम का स्मरण करें और फिर पुतला जलता हुआ देखें। जब पुतला दहन हो जाए, तब माँ दुर्गा और भगवान राम की आरती करें। इसके बाद अपनी इच्छा अनुसार, परिवार के साथ मिलकर प्रार्थना करें। इससे जीवन में विजय मिलेगी और जीवन में आने वाली हर प्रकार की बाधाएँ दूर हो जाएंगी। 

अब आप को समझ आ गया होगा कि क्यों रावण का ही दहन किया जाता है।

पर उसके दहन के समय, हमे अपने अंदर मौजूद, अहंकार व क्रोध का दहन भी करना चाहिए। उसके साथ ही, अपने अंदर मौजूद, छल, कपट, राग-द्वेष, लालच, झूठ, बेइमानी, जैसे अन्य दोषों का भी दहन करना चाहिए।

और सबसे बड़ी बात, रावण के महान रुप का सम्मान भी करना चाहिए और उन गुणों को अपने अंदर समाहित भी करना चाहिए।

विजयदशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ, शुभो विजया, Happy Dussehra💐

Tuesday, 4 October 2022

Article: Preparations for operation

 Hello friends,

आप सभी को नवमी तिथि की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐 माँ, हम सब पर सदैव अपनी कृपा दृष्टि बनाएं रखें 🙏🏻 

मुझे कुछ महीनों पहले ज्ञात हुआ कि, मेरे gall bladder में stone है।

Doctors से और बहुत से अपने लोगों से ज्ञात हुआ कि gall bladder में stone होने से, उसका removal ही एकमात्र solution है।

Gall bladder removal नहीं होने से अगर उसके stone बाहर निकलकर किसी अन्य organ में चिपक जाते हैं तो वह उस organ को cancerous कर सकते हैं।

नवरात्र में, घर में सभी की 2 दिन की availablity होने के कारण, operation plan कर लिया।

Operation, morning में 8 o'clock पर होना था, इसलिए रात 12 बजे के बाद से ही खाना-पानी सब का restriction था। 

But, एक अन्य emergency case होने के कारण operation 4:30 पर हुआ।

मतलब जहां निर्जल 8 hours रहना था, वहाँ 16 hours रहना पड़ा।

इतनी देर लगने के कारण, बहुत ज्यादा acidity and headache होने लगा।

फिर हमें anesthesia का effect भी बहुत कम देर  रहता है।

अगर ऐसा कभी आप लोगों के साथ हो, तो इन सब कारणों से हमें जो भी दिक्कत हुई, वो आप लोगों को ना हो, उसके लिए, कुछ जरुरी तैयारियाँ हैं, जो आपके साथ हम share कर रहे हैं। 

साथ ही हमने कुछ steps ऐसे भी लिए थे, जिनसे बहुत आराम भी रहा, वो सब आपको बताते हैं।

Operation के लिए करें यह तैयारियाँ




  • जैसे हमारा operation delay हुआ था, ऐसे किसी के भी साथ हो सकता है, इसलिए साथ में Vicks या head balm जरुर से रखिए, जिससे अगर headache हो, तो आपको इससे relief मिल सके।
  • जब भी, drip चढ़वानी हो तो उसके लिए cannula wrist के बजाय arm पर लगवाएं, क्योंकि wrist movable होती है तो उसके हिलने डुलने से pain ज्यादा होता है और ज्यादा दिनों तक बना भी रहता है। 
  • Cannula remove हो जाने के बाद, जिस जगह, cannula लगा था, वहाँ Thrombophob Gel, 4 to 6 time apply करते रहें, इससे उस जगह की swelling and pain जल्दी remove होगा। याद रखिए कि, gel ही लगाना है, भूल से भी thrombophob cream मत लगाइएगा, उससे redness and itching हो जाती है, जो आप की problem को और बढ़ा देगी।
  • Thrombophob gel कैसा दिखता है, उसके लिए ही उसकी pic डाली है 👇🏻


  • अपने साथ थोड़ी सी, fruit-flavoured toffees रखें, जो कि आपको operation के बाद बहुत relief देंगी। एक तो यह आपकी acidity problem को solve करेंगी। दूसरा anesthesia की tube गले में डलने से बाद में पानी गटकने और खाना खाने में गले में बहुत दर्द होता है, पर अगर आप 2 से 3 toffees चूस लेंगी तो आप को यह problem नहीं होगी।
  • अब आप बोलेंगे कि भला fruit-flavoured toffees खाने से कोई दर्द दूर भी होता है?
  • तो हम कहेंगे कि होता है, क्योंकि हमारे शरीर में भगवान जी ने बहुत-सी auto-healing remedies भी दी हैं और उन्हीं में से एक है लार या saliva।
  • Toffees चूसने से saliva formation होता है। यही saliva गले को heal करने का काम करती है।  
  • General anesthesia लेने से opretion के बाद बहुत ज्यादा backache होता है, जो कि किसी भी pain killer से ठीक नहीं होता है। उसके लिए, कोई pain reliever spray और ointment लेकर जाएं, इसी से थोड़ा आराम मिलेगा और आप सो सकेंगे।
  • जिस भी जगह का operation होना है, वहाँ के body-hairs remove कर के जाइए, वरना bandage जब remove करेंगे तो आप को बहुत लगेगी और बल तोड़ भी हो सकता है।
  • जब भी operation के लिए जाएं तो, सारी jewellery, जैसे earring, ring, toe-ring, piercing-rings, आदि, घर पर ही उतार कर जाएं, क्योंकि operation के लिए उतारनी ही होंगी। अगर आप hospital में उतारेंगे, और यदि वे tight होंगे तो वहाँ उतारना मुश्किल होगा। फिर वहाँ रखना भी मुश्किल होगा, क्योंकि अगर misplace हो गए तो बिना किसी मतलब का loss हो जाएगा।
  • घर से अपने use होने वाले personal hygiene related सभी सामान, जैसे, brush, paste, comb, etc लेकर जाएं।
  • अपने साथ जा रहे attendant के लिए थोड़ा खाने का सामान भी रख लें, क्योंकि patient की proper care के लिए attendant की health और strength proper रहना आवश्यक है।