Tuesday, 5 March 2024

Poem: डालियों का प्रेम मिलन

आज कल बहुत जोर हवाएं चल रही हैं, इन हवाओं को देखकर कुछ अलग ही अनुभूति हुई, उसी को उकेर रहें हैं, पढ़िएगा शायद आपको भी यही अनुभूति हुई हो या पढ़ने के बाद, आप जब हवाओं को चलता देखें तो यह अनुभव हो! बड़ा ही मधुर अनुभव है, आइए आनन्द लेते हैं इसका... 


डालियों का प्रेम मिलन 




तेज़ हवाओं ने,

प्रकृति को दिया,

नेह निमंत्रण।

आओ झूम लो,

सब भूलकर।

तुम भी कर लो,

प्रेम आलिंगन।


दो डालियां जो हैं, 

एक ही वृक्ष की।

साथ-साथ बढ़ी,

साथ ही खड़ी।

फिर भी कभी,

एक दूसरे से,

मिल ना सकी।


उनको ही मिलाने को,

यह हवाएं हैं चली।

झूम कर इससे,

दोनों जो मिली।

प्रकृति में हर ओर,

दोनों के प्रेम मिलन की, 

बात है चली।


डालियों का एक-एक,

मुस्कुरा रहा है पात।

देखकर इस प्रसंग को,

हो रहा सुखद एहसास।

लग रहा है आज,

कुछ ओज है खास,

कुछ जोश है खास।


एक शोर है अजब सा,

पर मधुर है गजब का।

ना जाने है यह किसका?

हवाओं के तेज़ चलने का?

या पत्तों का खुशी से मचलने का ?

या है यह शाश्वत आलिंगन,

डालियों के प्रेम‌ मिलन का...


ब प्रकृति प्रसन्न होकर झूमती है, उस समय ईश्वर की कृपा सर्वाधिक बरसती है 🙏🏻🙏🏻🌳🌺💞🌷🌻🌹

Saturday, 2 March 2024

Story of Life : Reels

Reels


पढ़ने में होशियार रक्षिता, अनछुई खूबसूरती से परिपूर्ण थी।‌ दुबली-पतली छरहरी, सुंदर नैन-नक्श, सुराहीदार गर्दन, मदहोश कर देने वाली अदाएं थी। अनछुई खूबसूरती मायने, उसकी खूबसूरती ईश्वर की देन थी, किसी parlour में जाकर उसने उसे तराशने की कवायद नहीं की थी। 

चाहती तो engineering college में उसका admission हो जाता, लेकिन उसे civil services में जाना था तो उसने B.Sc. में admission लिया।

College में पहला दिन था। कुछ अलग ही माहौल था। कुछ उसके जैसे थे, सीधे-सादे लक्ष्य को प्राप्त करने की इच्छा वाले, कुछ बस इसलिए आए थे कि कुछ नहीं तो चलो, अभी के लिए graduation ही सही, कुछ मस्ती करने के लिए आए थे तो कुछ केवल रंगीनियां बनने आए थे।

अभी तक रक्षिता, school के माहौल में थी, dressed and disciplined, पर अब उसके बिल्कुल उलट, जिसका जो मन करे पहनो, जिसका जो मन करे करो। यहां तक कि classes के लिए भी कोई compulsion नहीं था।

रक्षिता के बगल में नैन्सी आकर बैठ गई, वो बहुत ही modern लड़की थी। उसके college, join करने का purpose सिर्फ और सिर्फ मस्ती, मज़ा और आवारागर्दी था। वो बहुत ही बिंदास और बेबाक थी। और social media पर limelight में रहना उसका शौक... इसलिए उसने college में आते ही reels बनानी शुरू कर दी।

उसके बिंदास और बेबाक स्वभाव के कारण बहुत से students, नैन्सी की तरफ attract होने लगे। जिसमें रक्षिता भी शामिल हो गई। 

अब नैन्सी ने अपने साथ-साथ और लोगों की भी reels बनानी शुरू कर दी। लेकिन जब उसने रक्षिता की reels बनानी शुरू की तो उसके मासूम चेहरे पर बहुत likes and comments मिलने लगे। 

नैन्सी के followers बढ़ने लगे। यह सब देखकर नैन्सी, एक बार रक्षिता के पीछे पड़ गई कि एक bold dress में उसकी एक reel बनाएगी।

रक्षिता बिल्कुल भी तैयार नहीं थी, पर नैन्सी उसे समझाती रही कि "बस एक reel, और हर जगह तुम्हारी खूबसूरती के चर्चे होंगे... सोचो, जिस fame को पाने के लिए हिरोइनों को बरसों लग जाते हैं, वही तुम्हें परसों में ही मिल जाएगी।"

Finally, रक्षिता तैयार हो गई। और नैन्सी ने reel बनाकर post कर दी।

नैन्सी का कहना, एकदम ठीक था। दो ही दिन में उस reel में लाखों likes and comments आने लगे। सभी रक्षिता की खूबसूरती के दीवाने हुए जा रहे थे। 

Beautiful!

My dream girl...

You are looking so gorgeous...

Wow! So hot....

और ऐसे अनेक comments आने लगे।

इन सब को पढ़कर, रक्षिता सातवें आसमान पर पहुंच गई, उसे लगने लगा जैसे परी शब्द उसके लिए ही बना है, वो किसी हिरोइन से कम नहीं है।

अगले दिन उसके address पर एक parcel आया... उसने खोल कर देखा, तो उसमें बहुत सारी newspaper cutting थी, जिसमें हजारों युवाओं के चंद दिनों की limelight, फिर भविष्य के बर्बाद‌ होने की खबरें थीं। 

साथ ही एक चिट्ठी थी, जिसमें लिखा था, रक्षिता तुम गुमनामी में खोने के लिए नहीं बनी हो, यह reels और social media तुम्हें जिस दिशा में ले जाएंगे, वो तुम्हारी दुनिया नहीं है। तुम एक होनहार student हो, जिसका भविष्य उज्ज्वल है। किसी के बहकावे में आकर गलत राह मत पकड़ो...

यह सब पढ़कर, जैसे रक्षिता नींद‌ से जाग उठी, उसे याद आया कि उसने तो civil services में जाने के लिए college join किया था, ना कि यह सब करने के लिए...

अगले दिन से ही उसने, नैन्सी से दूरी बना ली...

नैन्सी ने कुछ दिन तो रक्षिता को समझाया बुझाया, फिर ‌लड़ाई-झगड़ा भी किया, पर जब देखा कि उसकी दाल नहीं गलेगी, क्योंकि रक्षिता अब किसी भी तरह से उसके बहकावे में नहीं आ रही थी, तो उसने रक्षिता का साथ छोड़ दिया और दूसरे किसी मासूम को मूर्ख बनाने के लिए निकल पड़ी, या यूं कहें कि दूसरा शिकार ढूंढने निकल गई....

रक्षिता, समय पर संभल गई, और अपने मकसद की ओर आगे बढ़ गई, पर उसे कभी नहीं पता चला कि उसका वो कौन सा हितैषी था, जिसने उसे reels की virtual दुनिया से बाहर निकाला था... 

Thursday, 29 February 2024

Short story: पानी का मोल

 पानी का मोल


अमन बहुत बड़ा व्यापारी था, साथ ही उसे अपने पैसों का बहुत अधिक घमंड भी था। उसे लगता था कि दुनिया में कोई चीज ऐसी नहीं है, जिसका मोल नहीं लगाया जा सकता।

एक बार वह अपने दोस्तों के साथ राजस्थान घूमने के लिए निकला, उन्होंने कुछ पानी की बोतलें अपने साथ ले लीं। उसकी दोस्त अनिका बोली, कुछ बोतलों से क्या होगा? रेगिस्तान में जा रहे हैं, ज्यादा बोतलें रख लेते हैं, ना जाने कहां कितना मंहगा पानी मिले या ना मिले... 

अनिका यार, कब तक डरती रहोगी...? तुम करोड़पति अमन के साथ हो, जिसका साथ होना ही काफी है, कुछ भी पाने के लिए.. 

अनिका चुप हो गई, क्योंकि वो जानती थी कि अमन, अपनी बात को सिद्ध करा के ही मानता है। 

उस दिन गर्मी ज्यादा थी, तो वो कुछ बोतलें जल्दी ही खत्म हो गईं।

उन लोगों का काफिला, जैसलमेर की ओर बढ़ चला था कि वहां रेत में गाड़ी के पहिए धंस गये। सबने बहुत प्रयास किया, पर उन्हें निकालना कठिन हो रहा था और कठिनाइयों का मुख्य कारण था, उनका प्यास से बेहाल होना। 

Actually, wheel जहां फंसे थे, वहां दूर दूर तक सिवाय रेत के और कुछ नहीं था। 

अमन ने हर संभव प्रयास किया, कि पानी उन लोगों तक किसी भी कीमत पर पहुंच जाए, पर यह संभव ही नहीं हो रहा था, क्योंकि उस समय mobile पर network issue हो गया था।

उस समय जो सबसे ज्यादा निढाल हो रहा था, वो अमन ही था।

तभी अनिका को कुछ औरतें पानी की मटकी लिए आती दिखाई दी। वो उस तरफ दौड़ी चली गई, उसने उन लोगों से अपनी परेशानी बताई और पानी देने के लिए बहुत request की...

औरतें पानी पिलाने को मान गईं।

जब वो अमन के पास पानी लेकर पहुंचीं, तो अमन फिर घमंड से भर गया और बोला, कितने में दे रही हो पानी? 

पानी! कितने में?.... भाई सा, हम तो बस आपको पीने के लिए पानी देने आए थे, आपको परेशान देखकर, वरना पानी का कोई मोल ना होवे है...

परेशान और अमन... तुमने मुझे पहचाना नहीं है, लगता है, 20-20 रुपए में बिकता है पानी... मैं तो तुम्हें और बहुत ज्यादा देने को तैयार हूं।

भाई सा, आपके शहर में बिकता होगा पानी... म्हारे देस  में ना बिके... आपको मैं देती हूं पैसे, आप हमें लाकर दे दो पानी... 

दुकान बता दो तो ले आऊंगा और तुम लोगों को भी दे जाऊंगा।

दुकान और पानी की! यहां कहां है? आपकी तरह हमारे यहां नल खोलते ही पानी नहीं आता है, कोसों दूर जाना पड़ता है, तब मिलता है पीने को पानी... 

आपको भी हमारे जैसे जाना हो तो, पानी अनमोल है समझ आ जाएगा। और हमारी बात गांठ बांध लो, तुम्हारे जैसे तेवर वालों के कारण ही सब पानी को तरस रहे हैं। 

आपसे तो हमारे ऊंट ज्यादा समझदार होते हैं, उन्हें भी पता है कि पानी अनमोल है...

यह कहकर वो लोग, गुस्से में आगे बढ़ गईं। उनको आगे बढ़ता देख अमन को अपनी ग़लती का एहसास हुआ कि अगर यह चली गई तो उसके पैसे किसी काम नहीं आएंगे।

वो तुरंत दौड़ता हुआ गया और माफ़ी मांगने लगा, मुझे माफ़ कर देना, मैं बहुत अच्छे से समझ गया कि पानी अनमोल है, इसकी हमेशा कद्र करनी चाहिए, इसकी अगर कमी हो गई तो हम कितना ही मोल चुका दें, कभी पा नहीं सकेंगे। साथ ही बिना पानी के जीवन भी संभव नहीं है... 

पानी पीकर सबकी जान में जान आई, तो उन सबने मिलकर गाड़ी को रेत से बाहर निकाला और आगे बढ़ गये।

अमन जब राजस्थान से वापस लौटा तो उसका स्वभाव बदल चुका था। उसे अच्छे से समझ आ गया था कि चाहे कितनी ही दौलत हो, पर जो अनमोल है, उसे खरीदा नहीं जा सकता। जल ही कल है 💦