Wednesday, 29 August 2018

Story Of Life : जीवनसंगिनी

जीवनसंगिनी


पिया के पिता की सोने-चाँदी की दुकान थी, पर पिया का मन हमेशा कॉपी-किताबों में ही उलझा रहता था। सब बोलते हम सुनारों के यहाँ ये मुनीम जी हो गयीं हैं, इसकी कॉपी-किताब तो कभी बंद ही नहीं होती है।
विवाह योग्य हो चली बेटी के लिए जब पिता सुयोग्य वर तलाशने लगे तो, उनके एक दोस्त बोले, मेरी मा, तो बिटिया का विवाह बंसल जी के बेटे से करवा दो।
अरे कौन बंसल जी?
वही अपने इंटर कॉलेज के principal जी, भला परिवार है, उनका बेटा रतन तो हद का सीधा है। एक private company में job करता  है।
फिर अपनी बिटिया को पढ़ने का बेहद शौक भी है। Teacher का घर है, पढ़ने लिखने का उसे खूब माहौल मिल जाएगा।
पिता जी को अपने मित्र की बात पसंद आ गयी। देखना दिखाना हुआ, दोनों तरफ से तुरंत हाँ हो गयी।
पिया तो अत्यंत प्रसन्न थी, उसे अपने  मन चाह ससुराल मिल रहा था। बड़े ही हर्षो उलास के साथ विवाह सम्पन्न हुआ।
पिया ने जैसा सुना था, पूरा परिवार उतना ही अच्छा था, पिया भी सबमे ऐसे घुलमिल गयी कि उनसे अलग नहीं लगती थी, सभी अत्यंत प्रसन्न थे।
पर कुछ ही दिनों में पिया को एक नयी समस्या का सामना करना पड़ा।
रतन के अत्यधिक सीधे होने के कारण, वो private job के द्वंद-फंद नहीं कर पता था, जिसके कारण उसे जल्दी ही अपनी job से हाथ धोना पड़ा। पिया ने सबसे बात की, और अपने भी job करने की इक्छा व्यक्त की, सुलझा हुआ परिवार था, और रतन की job भी चली गयी थी।
सबने पिया की बात मान ली, अब पिया भी स्कूल में पढ़ाने लगी थी।
job छूटते ही रतन नें दूसरी job join कर ली, पर उसमे भी कुछ साल ही कट पाये।
अब तो रतन के साथ आए दिन यही सिलसिला शुरू हो गया। वो job join करता, कुछ साल टिकता, फिर उसे job छोडनी पड़ती, या उसे निकाल दिया जाता। इधर पिया की लगन उसे आगे बढ़ाती जा रही थी,वो inter college की teacher से degree college की teacher बन गयी।
कभी भी पिया ने अपनी सफलताओं का अभिमान नहीं किया और ना ही रतन की असफलतों के लिए उसे नीचा दिखाया।
पर पूरा परिवार......
क्या पिया की बढ़ती हुई सफलता, और रतन की असफलता ने परिवार की सोच बदल दी.....  पढ़ते हैं जीवनसंगिनी भाग-२ में   

Tuesday, 28 August 2018

Article : Vote - एक सही चुनाव।

Vote - एक सही चुनाव।

आरक्षण article को लोगों द्वारा बहुत पसंद किया गया। पर उसपे मिली प्रतिक्रियाओं में एक मुद्दा सामने आया, कि अब आरक्षण देश और समाज की विसंगतियों को दूर करने का उपाय नहीं रह गया है। यह सिर्फ एक वोट-बैंक की राजनीति के हित में इस्तेमाल किए जाने वाला हथियार बन गया है। साथ ही एक और विचार सामने आया कि general caste में unity नहीं है।
बहुत सोचने पर ये ही समझ आया, कि हम लोग शुरुआत से ही गलत हैं।
जब vote appealing की बारी आती है, तब हम general caste वाले discussion तो बहुत करते हैं, ये योजना होनी चाहिए, वो योजना होनी चाहिए। सरकार ये ठीक से नहीं कर रही, इसे ऐसा करना चाहिए, या वैसा करना चाहिए।
पर एक सही candidate का चुनाव करने के लिए हम vote डालने नहीं जाएंगे। क्योंकि हमे केवल छींटाकशी ही करनी आती है, vote तो अधिकांशतः गरीब लोग या आरक्षित जाति के लोग ही देने जाते हैं।
ऐसा लगता है कि हम अगर किसी को vote करते दिख जाएंगे, तो हमारी तौहीन हो जाएगी।
तो फिर जनाब! रोना किस बात का है? जो बोओगे, काटोगे भी वही।
जिसका candidate चुना जाएगा, फिर आगे सुना भी तो उसका  ही जाएगा।
मेरा ये कहना, उन चंद लोगों से बिलकुल नहीं है, जो vote देने जाते हैं। पर आप ही बताइये, उन चंद लोगों के करने से कुछ होगा? सोचना तो सभी को ही पड़ेगा। समाज का सही प्रतिनिधि चुनने के लिए समाज का सही और पूरा प्रतिनिधित्व होना भी चाहिए।
जब अटल जी ब्रह्मलीन हुए, तो बहुतों ने उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी। पर, उस पर ये सवाल उठाने के लिए उस समय social media पर एक message भी काफी viral हुआ था, उनके जाने के बाद दुख मनाने वालों- तब साथ दिया होता, तो शायद देश आज कुछ और ही होता
बिलकुल, अच्छे नेताओं को खोने के बाद केवल दुख मनाने से कुछ नहीं होता है। जब वे देश की सेवा में सेवारत हैं, तब ही उनका साथ देकर, देश को उन्नतशील बनाएँ।
सभी देशभक्तों को सच्ची श्रद्धांजली यही होगी कि, हम सही नेता का चुनाव करें। उनको सही समय पर वोट करें, और देश के विकास में उनको सहयोग प्रदान करें।
अब सवाल ये उठता है कि उचित उम्मीदवार है कौन?
बहुत से राजनेता अपने अपने कार्यों को प्रदर्शित कर चुके हैं।
किसी को भी ये समझाने की आवश्यकता नहीं है, कि किसे चुना जाना चाहिए।
किया गया काम खुद चीख-चीख कर बता रहा है, कि किसे चुना जाना चाहिए।
जिसकी सरकार के time में घोटाले ना हुए हों, देश के पास धन-सम्पदा बढ़ी हो, भारत का देश-विदेश में नाम हुआ हो, जिसने पनों के विकास के बारे में ना सोच के सब के विकास के बारे में सोचा हो, उसे ही चुना जाना चाहिए।
तो अब भी आप क्या सोच रहे हैं? समझ ही गए होंगे, किसे चुनना है? किसका साथ देना है? और अगर आप अभी भी सोच ही रहे हैं, तब ये तो सिद्ध होता ही है, कि आप उनमें शामिल थे, जिन्हें अटल जी के जाने का कोई दुख नहीं था। आपको ना तो देश के विकास से मतलब है, ना ही अच्छे नेताओं के चले जाने से।
आपको मतलब है तो, सिर्फ अपनी दाल- रोटी से।

वो भी ना जाने कितने दिनों तक मिलेगी, अगर हम सही वोट नहीं डालेंगे।   

Monday, 27 August 2018

Recipe : Kele ki subzi

On demand from a consistent viewer ‘Ms. Manorma’ of this blog, I am bringing forward an ever green recipe for all seasons. This veggie is liked by one and all starting from children to the age-olds; and is healthy too.
Before coming to the recipe; I would appreciate the gesture of Ms.Manorma, who has come forward with a request which will benefit not only her but all the readers of this blog. I would request everyone to come up with their choices so that those could also be covered.
 Kele ki subzi 



Ingredients :

Raw banana:   ½ kg.
Onion:             2-3 medium
Garlic:            4-5 cloves
Turmeric:        ½ tsp.
Chilly:            as per taste
Salt:                as per taste
 Coriander powder:  1tsp
Garam masala powder: ½ tsp
Gram flour:        2 tbsp
Mustard Oil:      1 ½ tbsp  

Method:

  1. Take raw bananas and cut it in to a small pieces. (Take a caution that the bananas should be neither ripe nor very tight. It should be slightly soft but not sweet even a bit.)
  2. Roast the gram-flour.
  3. Take a wok, put all the oil & heat it up.
  4. Take out all the oil, leaving only ½ tbsp in the wok.
  5. Add onion garlic paste, & sauté it little bit. Keep the flame sim.
  6. Then add all the masala, sauté it a bit more.
  7. Then add raw banana pieces, mix it well.
  8. Sprinkle a little water, then cover it with lid.
  9. After a while (about 3-4 min.), open the lid, toss it criss-cross.
  10. Repeat the above two steps till the banana remains slightly uncooked.
  11. Now sprinkle about 1/3rd  roasted gram flour and a little amount of oil from the remaining. Sauté it more.
  12. Repeat the above step 2-3 times consuming all the roasted gram flour. This will result in tasty & properly cooked veggie, which would not be lumpy & sticky.