Friday, 15 February 2019

Article : सच्ची श्रद्धांजलि


सच्ची श्रद्धांजलि


अभी कश्मीर में भारत के कितने वीर शहीद हो गए हैं, पहले भी हुए थे, और आगे भी कितने ही और हो जाएंगे, उसकी कोई गिनती नहीं है।
और हम देशवासी, हम……. हम क्या करेंगे? कुछ दिन दुःख मना लेंगे, अपना DP change कर लेंगे। Candles जला लेंगे। या आक्रोश में रहेंगे, कि हम इसका revenge लेंगे।
 बस हो गया, फिर...... फिर क्या? फिर वही, आरक्षण का रोना, महंगाई का रोना, जातिवाद, आतंकवाद, और दुनिया की राजनीति।
बस यही; यही तो करने वाले हैं ना?
जो जवान देश की रक्षा को अपना लक्ष्य बनाकर army join करते हैं, वो तो घर से ही कफ़न बांध कर जाते हैं। उनके घर वालों को भी ये ज्ञात रहता है, कि कभी भी उनके शहीद होने का समाचार मिल सकता है।
कितने ही अपने बूढ़े माँ-बाप को छोड़ जाते हैं, कोई अपनी नव-विवाहिता या नवजात शिशु को पीछे छोड़ जाते हैं।
पर ना तो वो इस बात से डरते हैं, ना इस बात की उन्हें कोई चिंता होती है। उनके सिर पर तो बस यही जुनून सवार होता है कि,  "मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए"।
तो क्या केवल कुछ दिन का शोक ही उन्हें श्रद्धांजलि होगी? नहीं, बिलकुल भी नहीं।
अगर उनको श्रद्धांजलि देनी ही है, तो उसके लिए हमें उनकी ही तरह अपने से ऊपर उठ कर देश के लिए सोचना होगा।
हमे आरक्षण, महंगाई, जातिवाद, आतंकवाद, और दुनिया की राजनीति, सब छोड़ना होगा। देश को स्वच्छ और स्वस्थ रखना होगा।   देश का किस तरह से सर्वांगीण विकास हो, इस ओर विचार और कार्य करना होगा। हमें भारत को सम्पूर्ण जगत में सर्वप्रथम बनाना होगा।
और यही होगी, उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि
उन्हें भी, और उन सबको भी जो भारत के लिए शहीद हुए थे, या जिन्होंने भारत को आज़ाद कराया था।

क्योंकि वो तो बस यही कहते हैं -

मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए..........

कर चले हम फिदा जान ओ तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों........

Thursday, 14 February 2019

Poem : Valentine's day


Valentine's day



Valentine's day है ऐसा त्योहार
फिजाँ में जैसे घुल गया हो प्यार  

रंग सब तरफ गुलाबी सा छाया है
प्रेम प्रीत से सजा त्योहार आया है

कहीं card, कहीं फूल, कहीं gifts
हर तरफ बस इनकी ही बहार है

हर साजन, अपनी सजनी को  
खूबसूरत तोहफा देने को तैयार है

वक़्त भी जैसे इस दिन थम जाता है
प्यार का गवाह वो भी बन जाता है

बस इस दिन ही नहीं, सब दिन
आप सब की ज़िंदगी में हो प्यार

आप सब ही को मुबारक हो
Valentine's day का त्योहार

Wednesday, 13 February 2019

Story Of Life : कौन करे (भाग -२)


पंकज, प्रिया का appointment letter लेकर आता है, जिसका प्रिया को बहुत दिन से इंतज़ार था, पर letter देखकर उसे घर की सारी जिम्मेदारी याद आने लगती है. तब पंकज जिम्मेदारियों में साथ निभाने की बात करता है...... 
अब आगे.....

  
कौन करे (भाग -२) 


आज से प्रिया को office जाना शुरू करना था, पंकज भी प्रिया के साथ ही उठ गया। दोनों ने ही मिलकर सारे काम किए। और अपने अपने office चले गए। आज पहली बार पंकज थोड़ा late हुआ था।
लौटेते समय पंकज, संयम को लेकर, प्रिया को लेने पहुँचा। क्योंकि प्रिया का ऑफिस पंकज से पहले लगना था, और उससे देर में छूटना था। पंकज को संयम के साथ आया देखकर वो बहुत खुश हुई। प्रिया बहुत fresh लग रही थी। पंकज के पास आ कर वो चहकते हुए बोली, मेरा आज बहुत ही अच्छा welcome हुआ। मुझे आज office join करके मज़ा ही आ गया। I love you पंकज, अगर तुम साथ देने का वादा नहीं करते तो, शायद मैं join करने का सोच नहीं पाती।

सब कुछ अच्छे से चल रहा था, एक दिन पंकज की माँ, उनके साथ रहने को आ गईं। उनके आने से आए दिन पंकज को उनकी दवाई आदि, लाने या doctor को दिखाने के कारण office जाने में late होने लगा था या उसे छुट्टी लेनी पड़ रही थी।
साथ ही पंकज रोज ही प्रिया के साथ घर के काम में हाथ भी बांटता। यह सब पंकज की माँ को अच्छा नही लग रहा था। एक दिन तो वो बोल ही दीं, अच्छा महारानी को नौकरी कराई है तूने। आए दिन तू कभी खाना बनाता है, कभी बर्तन धोता, कभी घर की साफ-सफाई, कभी संयम को संभालना और छुट्टी भी लेगा, तो वो भी तू ही। ये क्या तरीका है?
माँ, मैं ऐसा क्यों नहीं कर सकता, बताओ तो? शादी करके पत्नी अर्द्धांग्नि कहलाती है, नौकरानी नहीं। जिस तरह से वो मेरे लिए हर काम में खड़ी रहती है, मुझे भी वैसा ही करना होगा ना? जब वो मुझे घर को चलाने में धनार्जन करके support कर सकती है , तो क्या मैं उसका घर के कामों में हाथ नहीं बंटा सकता?
रही बात छुट्टियों की, तो उसकी नौकरी अभी नयी है, इसलिए वो ज्यादा छुट्टी नहीं ले सकती। शाम को जब प्रिया घर आई, तो आज वो माँ जी के लिए नया स्वेटर और body massager ले कर आई थी। और आते ही बोली, मैंने आपका योगा teacher से appointment ले लिया है, कल से मेरे साथ ही चलिएगा, आपके घुटने जल्दी ही फिर से पहले जैसे हो जाएंगे।
पर प्रिया, तुमने वहाँ का appointment क्यों लिया, वहाँ तो बहुत fees लगती है। पंकज ने चौंक कर पूछा?
अरे अब माँ जी की बहू कमा रही है, तो क्या अपनी माँ जी के लिए इतना भी नहीं कर सकती? अब तो खर्चे की सोचने की जरूरत नहीं है, सब top का ही होगा। ये सुन के सब हँसने लगे  
प्रिया की ऐसी बात सुन कर माँ जी, समझ गईं, अब ज़माना बदल रहा है, जब कमाने के लिए सब बाहर निकल रहे हैं, तो घर का काम भी सभी को ही करना पड़ेगा। ये सोचने से काम नहीं चलेगा, कि ये काम कौन करे? या वो काम कौन करे?
उसके बाद से ना तो पंकज की माँ को पंकज के काम करने से ऐतराज हुआ, ना ही कभी प्रिया से कोई शिकायत हुई।