Tuesday, 4 April 2023

Recipe: Mug Cake

HOSTEL, PG Special

हमने बहुत सी recipes डाली है, जिसे आप लोगों के द्वारा बहुत पसंद भी किया गया है। Corona के समय तो हर रोज ही recipes डाली थी। जिसमें हर variety की dishes थीं।

जिसको देखते हुए हमारे youngsters की demand है कि हम कुछ recipes ऐसी भी डाल दें, जो hostel या PG में भी बनायी जा सके। जिससे वो भी tasty खाना खा सकें।

Hostel या PG में कुछ भी ऐसी चीजें नहीं होती है कि cooking easy हो, but no फिक्र, जब आप जुड़ें हैं shades of Life से...

अभी हम कुछ dishes आपको ऐसी भी बताते रहेंगे।

अगर आप की भी यही requirements है तो जुड़े रहिएगा, shades of Life से

आज की dish है Mug Cake...

आप कहेंगे कि एक Hostel और PG में कहां से हम microwave oven लाएं है mug cake बनाने के लिए?

अरे, अरे! Microwave oven लाने की कोई आवश्यकता नहीं है।

आप प्रश्न करेंगे फिर संभव ही कैसे होगा mug cake बनाना?

बनेगा जी, बिल्कुल बनेगा, और बिना microwave oven के भी, बस आप पूरी recipe ठीक से पढ़िएगा और tips and tricks ठीक से follow कीजिएगा...

Mug cake



Ingredients :

  • Dark fantasy vanilla crème sandwich biscuits - 2 packets (100 grams x 2)
  • Milk - 1 cup 
  • Eno - 1 sachet


Method :

  1. आप normal size के 4 cups ले लीजिए। (Tea cups)
  2. सबमें एक बराबर quantity (4-5 in each cup) के बिस्कुट तोड़ कर डाल दीजिए।
  3. अब सबमें ¼ cup lukewarm milk डाल दीजिए। 1-2 minute में ही biscuit dissolve हो जाएगा, अब इसे spoon की सहायता से अच्छे से mix कर दीजिए। जिससे smooth solution बन जाए..
  4. अब eno sachet से ¼ powder हर cup में डालकर mix कर लीजिए। 
  5. अब इसे preheated equipment में डालकर cake prepare कर लीजिए।
  6. अब इसमें melted chocolate, crushed chocolate, cream और crushed gems से top-up कर लीजिए। अपने taste के according topping कर लीजिए।

Now your exceedingly mouthwatering Mug Cake is ready to serve... 

Perfect mug cake के लिए, इन tips and tricks‌ को ज़रूर से follow कीजिएगा..


Tips & Tricks :

  • आप कहेंगे कि equipment से क्या मतलब है? आखिर किस में हमने cake बना लिया? तो आपका equipment वो होगा जो आपके पास है। तो अब आते हैं कि आप के पास है क्या?
  • अगर आप के पास microwave oven है तो आप चारों cup एक साथ 2 minutes  के लिए microwave mode में रख दें, Cake ready हो जाएगा। 
  • आप convection mode में भी रख सकते हैं, पर उसमें time लगेगा।
  • अगर आप के पास induction plate है, तो sauce pan में पानी भर कर उसे boil होने रख दीजिए।
  • जब पानी उबल जाए तो सारे cup इसमें रख कर 5  minutes के लिए medium to slow flame पर ढककर रख दीजिए। Cake ready हो जाएगा...
  • पानी का amount ऐसा होना चाहिए कि सिर्फ आधा कप ही पानी में डूबे, जिससे पानी अंदर ना आए।
  • अगर आप के पास electrical kettle है तो पहले उसमें पानी boil कर लीजिए। फिर biscuits का घोल steel के glass में डाल दें। 
  • अब 2 to 4 min के लिए glass को केतली में रखकर glass cake बना ले। 
  • इसमें भी पानी का amount ऐसा होना चाहिए कि सिर्फ आधा गिलास ही पानी में डूबे, जिससे पानी अंदर ना आए।
  • अगर आप steel utensils use करेंगे तो, cake जल्दी बनता है। ऐसा इसलिए क्योंकि steel, heat का good conductor है।
  • दूसरा अगर आप एक बड़ा सा mug में cake बना रहे हैं तो आप को time ज़्यादा लगेगा। क्योंकि ceramic heat का good conductor नहीं है दूसरा बड़ा mug होने से उसके side wall भी ज्यादा thick होगी। तो cooking process में time लगेगा..
  • हमने dark fantasy cream biscuit लिया है, आप चाहें तो Bourbon, Oreo या और कोई भी अपनी पसंद के cream flavour biscuits, जैसे orange, mango, strawberry etc. ले सकते हैं। 
  • आप चाहें तो बिना cream वाले biscuits भी ले सकते हैं, पर फिर उसमें एक चम्मच fresh cream or 2 चम्मच दूध वाली मलाई डालनी होगी। इससे cake moist बनता है। साथ ही 1tsp sugar भी add करनी होगी..
  • अगर आप को coffee flavour पसंद है तो आप biscuits के solution में थोड़ा सा coffee powder भी add कर सकते हैं। 
  • आप eno की जगह baking powder भी डाल सकते हैं, वो हर mug में ½ tsp डलेगा। 
  • Biscuit solution ¾ cup से ज़्यादा मत रखियेगा, वरना cake overflow हो जाएगा।
  • Cake के ऊपर, अपनी पसंद की topping भी ज़रूर डालिएगा, वो cake के taste में चार चांद लगा देती है।
  • Dark fantasy cream biscuits का mug cake सबसे tasty बनता है।
  • हमने mug and glass दोनों में ही ½ portion solution ही लिया है, क्योंकि हमें Clear pics चाहिए थी।
  • आप ¾ portion solution लीजिएगा तो cake, full mug तक बनेगा.. 


बहुत ही tasty, easily and instantly बनने वाली dish है। बच्चे भी इसे बहुत आसानी से बना लेते हैं।

एक बार try ज़रूर करें। बाकी यह ‌हमारा दावा है कि अगर आप ने एक बार बना लिया, तो बार-बार बनाएंगे 😊


Friday, 31 March 2023

Article : एक सुबह नवरात्र वाली

 एक सुबह नवरात्र वाली 



इस बार नवरात्र के अष्टमी वाले दिन सुबह सुबह ही कुछ सामान लेने के लिए घर से निकले थे।

ऐसा बहुत दिनों बाद हुआ था कि हम सुबह सुबह निकलें वो भी अकेले...

क्योंकि शादी के बाद से ही हम दोनों साथ ही जाते थे बाज़ार, या कभी यह अकेले जाते थे।

पर इस बार सप्तमी की रात यह देर से लौटे थे और अष्टमी - नवमी में कोई छुट्टी नहीं थी, कि दोपहर में नींद पूरी कर लें तो अष्टमी के दिन, इनका जल्दी उठने का कोई विचार नहीं था।

और बिटिया?

आज कल के बच्चे, उनके तो कहने ही क्या, वो तो रात को ही दिन बना कर रखते हैं, घंटों देर रात तक पढ़ते हैं तो उनसे सुबह बहुत जल्दी उठने की उम्मीद करना ही ग़लत है।

तो सोचा, सुबह हम ही चले जाते हैं।

Maid 7: 30 तक आ जाती है तो हमारा target उसके आने से पहले लौट आना था। 

साथ ही क्योंकि किसी की छुट्टी नहीं थी, तो सुबह के काम की भागदौड़ भी पूरी थी और माता रानी की पूजा भी...

तो बस सुबह 5 बजे उठ कर नहा धोकर, माता रानी की पूजा अर्चना कर के, बेटी का tiffin ready किया, खाने की सारी तैयारियां कर दी।

और 6:45 पर चल दिए बाज़ार.. 

बहुत दिनों बाद, सुबह निकल थे। जैसा कि आप सब जानते हैं, इस बार दिल्ली और उत्तर प्रदेश से गुलाबी ठंड का मौसम जा ही नहीं रहा है तो बस उस दिन भी मौसम गुलाबी ही था। बीच-बीच में ठंडी हवाओं के झोंके भी चल रहे तो उनसे सिरहन सी दौड़ जाती थी। 

सुबह का समय था तो ट्रेफिक भी नहीं के बराबर था, अतः बहुत शांति थी। इस वजह से हर हलचल दिखाई भी दे रही थी और सुनाई भी दे रही थी।

सुबह का समय था तो बहुत सी दुकानें अभी भी बंद थी, लेकिन चंद दुकानें और ठेलों पर साफ सफाई आरंभ हो चुकी थी।

कहीं झाड़ू लग रही थी तो कहीं dusting हो रही थी। वहीं कुछ दुकानों की साज सज्जा प्रारंभ हो चुकी थी। सजती हुई बड़ी बड़ी दुकानें मानो इठलाकर अपनी सफलता की कहानियां कह रही थीं। 

कुछ ठेले वाले अपने ठेले पर फलों या सब्जियों को सजा रहे थे।

हांलांकि, जो ज्यादा सफाई दार दुकानदार थे, वो दुकान के साथ साथ दुकान के सामने की सड़क पर भी झाड़ू लगा रहे थे, कुछ-एक पानी का छिड़काव भी कर रहे थे।

मंदिरों में भी साफ-सफाई हो चुकी थी। वहां पर भजन चल रहा था। कुछ लोग, जिनकी शुरुआत ही देव दर्शन से होती है, वो पूजा अर्चना के लिए मंदिर में मौजूद थे। कुछ अष्टमी होने के कारण मंदिर में आए थे। इसलिए मंदिर के घंटे-घड़ियाल भी बीच-बीच में बज रहे थे।

कुल मिलाकर, शांति और ताजगी से भरपूर माहोल था। हम ने दुकान पहुंच कर सामान खरीदे और लौट चले घर की ओर...

7 बजे के ऊपर का समय हो चुका था।

लौटते समय बहुत से घरों से हवन होने की खुशबू आ रही थी, कहीं कहीं से शंखनाद भी सुनाई दे रहा था..

लौटते समय थोड़ी थोड़ी दूरी पर कन्याओं की टोली दिखाई दे रही थी, सभी अपनी बातों में खोई हुई...

इसमें कुछ कन्याएं बहुत छोटी थी, शायद 3-4 साल की होंगी। उनकी टोली में 3 साल से 12 साल तक की कन्याएं थीं। सभी भारतीय परिधान में, कोई सलवार सूट में तो कोई लहंगा-चोली में... सभी सजी-धजी थीं।

सभी बहुत ही खूबसूरत लग रही थीं, उनके चेहरे की खुशी से ऐसी दिव्यता आ रही थी, मानो साक्षात माता रानी के नौ रुपों के दर्शन हो रहे हों...

उन्हेंं देखकर पहले तो मन में यही आया कि कन्याओं को खाने जाने के लिए इतना तैयार होकर आने की क्या आवश्यकता?

पर अगले ही पल विचार आया कि यह सब गरीब घरों की बच्चियां हैं। जहां दोनों समय खाना नसीब हो, यह भी आवश्यक नहीं है। फिर यह तो कन्या हैं, इन्हें तो खाना सबसे आखिर में और बचा खुचा ही मिलता होगा...

और आज तो इन्हें ना केवल खाना मिलेगा, बल्कि बहुत ही अच्छा और स्वादिष्ट खाना मिलेगा। फिर खाने के साथ ही, रुपए, पैसे, तोहफा आदि भी मिलेगा। लेकिन उसके साथ जो सबसे बड़ी चीज़ है, वो है importance, भरपूर सम्मान!.. जो इन्हें साल में दो बार 10-12 साल की होने तक मिलता है...

सच है ना, जिस कन्या के जन्म से ही पूरा घर शोकाकुल हो जाता है। नवरात्र में उसको ही देवी रुप में पूजा जाता है। नवरात्र में उन्हीं कन्या का बुलावा, छोटे छोटे घरों से लेकर बड़े बड़े महलों तक के लिए आता है...

ऐसे में उनके लिए साल में यह दो बार के दिन, किसी महोत्सव से कम नहीं हैं और महोत्सव में तो सजना-धजना बनता ही है।

घर पहुंच कर, एक अनोखी अनुभूति का एहसास था, सुबह की ताजगी और लौटते समय में कन्याओं के अधरों की मीठी मुस्कान ने दिल को भीतर तक सुख से भर दिया था।

हम 7:20 पर घर आ चुके थे। घर में पति, बेटी-बेटा सब सो रहे थे। Maid भी अभी तक नहीं आई थी। हम अपने बाकी कामों को ख़त्म करने में जुट गए।

थोड़ी देर में सब उठ गए, maid भी आ गई थी और दिन चल पड़ा अपनी रफ़्तार से...

पर क्या सभी घरों में और समाज में हर रोज लड़की को देवी रुप में मान सम्मान मिल सकता है? 

अगर आप सच में देवी भक्त हैं तो जरूर मिल सकता है😊 तो सोचिएगा जरुर ...

अम्बे मैया की जय 🚩

Thursday, 30 March 2023

India's Heritage : क्यों थे राम मर्यादा पुरुषोत्तम!..

 क्यों थे राम मर्यादा पुरुषोत्तम!


आज राम नवमी के पावन पर्व पर विरासत के अंतर्गत, आपको प्रभू श्रीराम के जीवन से जुड़ी हुई एक कहानी साझा कर रहे हैं, जिससे आप को ज्ञात होगा कि भगवान श्री राम, क्यों थे मर्यादा पुरुषोत्तम!...

बात त्रेतायुग की है। भगवान श्री राम के जीवन से संबंधित, जैसा कि आप सबको विदित ही होगा कि प्रभू श्रीराम ने 14 वर्ष का वनवास काटा था।

पर क्या वनवास, माता कैकई ने प्रभू श्रीराम को दिया था? 

नहीं दिया था...

क्या राजा दशरथ ने दिया था?

नहीं दिया था... 

क्या हुआ? 

आप सोच रहे हैं कि हमें पता भी है कि क्या हुआ था? या हम कुछ भी लिख रहे हैं!..

जी हमें भी बिल्कुल वही पता है, जो आपको पता है कि माता कैकई ने अपनी दासी मंथरा के उकसाने से राजा दशरथ से दो वरदान मांगे थे, जिसमें एक, राम को वनवास और दूसरा अपने पुत्र भरत को राजगद्दी...

जिसके फलस्वरूप प्रभू श्रीराम वनवास के लिए चले गए थे... आप इसी बात को कह रहे थे.. है ना? 

चलिए यह तो हुई वो बात, जिसे सब जानते हैं।

अब उस बात की तरफ चलते हैं, जिसे जानते तो सब हैं, पर उस तरह से मानते नहीं हैं।

हम क्या कहना चाह रहे हैं, बताते हैं आपको...

आप को क्या लगता है, माता कैकई को भगवान श्री राम कितना मान देते थे?

उनके द्वारा कही गई, बात को वो बिना किसी प्रश्न को पूछे, पूरा करते थे?

अवश्य पूरा करते थे... क्योंकि वो तो मातृ-पितृ भक्त थे..

माता कैकई को वह अपनी माँ कौशल्या से कम मान या प्यार देते थे?

नहीं बिल्कुल नहीं, प्रभू श्रीराम ने अपनी सभी माताओं को बराबर से मान व स्नेह दिया...

क्या माता कैकई, राम से अधिक अपने पुत्र भरत को स्नेह करती थी?

ऐसा कदापि नहीं था, क्योंकि माता कैकई को अपने पुत्र भरत से अधिक प्रिय राम थे।

अब बात करते हैं कि जब माता कैकई और भगवान राम का आपसी संबंध इतना सुदृढ़ था, तो क्या जरूरत थी, माता कैकई को अपने दो वरदान, राजा दशरथ से मांगने की?

वो तो प्रभू श्रीराम से सीधे ही कह भर देती कि, राम मुझे भरत के लिए राजगद्दी चाहिए, तो प्रभू श्रीराम तो जीवन पर्यन्त के लिए राज्य छोड़कर वनवास को चले जाते...

पर माता कैकई तो यह चाहती ही नहीं थीं, इसलिए ही तो उसने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे थे...

नहीं चाहतीं थीं तो वरदान मांगे ही क्यों थे?

माता कैकई, भगवान राम को असीम स्नेह करती थीं, वो राम को तपोवन में भेज दें, ऐसा करना तो दूर, वो ऐसा सोच भी नहीं सकतीं थीं।

पर मंथरा के यह कहने से की, अपने पुत्र भरत के लिए भी सोचो... 

वो दुविधा में थीं, पुत्र के भविष्य के विषय में ना सोचें तो लोग कहेंगे कि कैसी माँ है? जिसे अपने पुत्र से स्नेह नहीं, उसके भविष्य की चिंता नहीं... पर उसके लिए अपने सुकोमल पुत्र राम को, जिसका अभी अभी विवाह भी हुआ है, उसे अपने से दूर वन में दुर्गम की ओर प्रस्थान करने के लिए कैसे कह दें..

माता कैकई बहुत दुविधा में पड़ गईं, तभी उन्हें अपने दो वरदानों की याद आई...

उन्होंने सोचा, राजा दशरथ से दो वरदान मांग ले, इससे एक तो यह होगा कि कोई नहीं कहेगा कि अपने पुत्र की चिंता नहीं.. दूसरा उन्हें यह विदित था कि राजा दशरथ, राम से अत्याधिक स्नेह करते हैं तो वो राम को वनवास जाने को कहेंगे नहीं... इस तरह राम को भी वनवास नहीं जाना होगा.. इस तरह से बिना अधिक प्रयास के सारे रिश्ते प्रेम के अटूट बंधन में बंधे रहेंगे...

इसी उधेड़बुन के साथ माता कैकई, कोप भवन में चलीं गईं। जब राजा दशरथ को यह पता चला, तो वो अपनी प्रिय रानी के पास पहुंच गए।

फिर वही हुआ जो आप सबको पता है...

राजा दशरथ कैकई को समझाते रहे कि राम के वनवास के अलावा कोई और वर मांग लें, पर वो नहीं मानीं..

जब बात श्री राम जी को पता चली, तो वो वहां पहुंच गए, जहां पिता दशरथ व माता कैकई थे।

उनके वहां पहुंच जाने के बाद भी ना पिता ने उनसे वनवास जाने को कहा, ना माता ने... क्योंकि दोनों में से कोई नहीं चाहता था कि राम वनवास जाएं...

जब कोई बच्चा अपने मां-पिता के द्वारा दी गई आज्ञा का मान ना रखे तो वह दुष्ट है, निर्लज्ज है...

जब कोई बच्चा अपने मां-पिता के द्वारा दी गई आज्ञा को शिरोधार्य करें, तो वह आदर्श.. 

पर जब आज्ञा दी ही नहीं गई हो, बस एक प्रस्ताव भर हो, उसे आज्ञा समझ कर शिरोधार्य कर लिया जाए, तो वो हैं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम..

दोनों में से किसी के भी आज्ञा दिए बिना, श्रीराम ने उनकी आज्ञा को यह कहकर स्वीकार कर लिया कि प्राण जाए पर वचन ना जाए...

उन्होंने इस आज्ञा को शिरोधार्य करते समय यह नहीं सोचा कि, महलों में रहने वाले, तपोवन में कैसे जीवन यापन करेंगे? जिसके एक इशारे से पूरे राज्य का प्रत्येक नागरिक उनकी सेवा में तत्पर हो जाता था, वो अपने हर काम कैसे करेंगे?

कैसे छप्पन भोग को त्याग कर, कंदमूल फल खाएंगे? सुकोमल शैय्या पर सोने वाले, कुशा के बिछौने में कैसे सोएंगे?

उनके लिए माता पिता से बढ़कर, कुछ था ही नहीं..

जबकि बात कुछ दिन, कुछ महीने और कुछ साल की नहीं, बल्कि 14 साल के लिए वनवास था... 

पर उन्होंने ना केवल पूरे 14 वर्ष का वनवास किया, बल्कि सहर्ष पूरा समय व्यतीत किया वो भी माता-पिता को वनवास भेजे जाने पर कोई अपशब्द कहे बिना....

प्रभू श्रीराम के तो हर दृष्टांत से यह विदित होता है कि वो मर्यादा पुरुषोत्तम थे। 

पर आज के इस विरासत अंक से यदि हम लोग भी अपने माता-पिता को वो मान दे सकें, जिसके वह अधिकारी हैं तो भले ही मर्यादा पुरुषोत्तम ना बन सकें, पर आदर्श पुत्र और पुत्री तो अवश्य बन सकते हैं...

जय श्री राम 🙏🏻🚩 

आप सभी को चैत्र नवरात्र व रामनवमी पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻💐