Monday, 10 June 2019

Kids Story : Advay the hero : नई कार


Advay the hero : नई कार

पापा को कार लिए हुए 15 साल हो रहे थे, और दिल्ली में ये नियम लागू हो गया था, कि 15 साल बाद कार change करनी होती है।

तो पापा सबसे बोल रहे थे, कि जो कार पसंद हो बता दो तो, वो ही नई कार ले ली जाए। सब लोग laptop में रोज नई कार देखने लगे।

सबके साथ advay भी देखने बैठ जाता था। एक दिन advay खेल के लौटा, तो उसने देखा mumma papa आपस में, नई कार खरीदने के लिए रुपए के arrangement की बात कर रहे थे। तो advay उनके पास चला गया। उसने पापा से कहा, पापा मैंने बहुत सारी कार देखी हैं। कार तो बहुत महंगी होती हैं।

पापा बोले, तुम्हें कैसे पता, कार महंगी होती हैं?

मैंने जब देखी थी ना, तभी उसके price भी देख लिए थे। शुरू से ही advay काफी intelligent और sincere बच्चा था।

Very good, बेटा, पापा ये सुनकर खुश हुए।

हाँ बेटा, कार महंगी तो होती ही है, पापा ने कहा।

Advay बोला- पापा, फिर आप इतने सारे रुपए कहाँ से लाएँगे?

सोचते हैं, मैंने saving करके रखी है, उसी से लेंगे, पापा ने कहा।

Saving क्या होती है, पापा?

जैसे तुम गुल्लक में पैसे रखते हो, वैसे ही मैंने bank में रुपए जमा किए हैं।

अच्छा पापा, रुकिए मैं अभी आता हूँ, कह कर advay दौड़ के चला गया। थोड़ी देर बाद वो अपनी गुल्लक ले आया, और बोला पापा मेरे पास बहुत सारे रुपए इकठ्ठा हो गए हैं।

पूरे 20 thousand हैं, आप ये सारे ले लीजिये, और उनसे नई कार ले आइएगा। तब आपके पैसे कम लगेंगे।

पापा ने mumma से पूछा, इसके पास इतने सारे रुपए कैसे आ गए? 

तब माँ बोलीं, इस साल कुछ ज्यादा ही लोग आए थे, और आपका बेटा सबका लाडला है ना। तो सबने जो जाते समय जो रुपए दिये थे, उन्हीं को ये इकठ्ठा करता रहता है।

पापा को advay की मासूमियत पर बहुत प्यार आ रहा था, और उसकी समझदारी पर बहुत फक्र भी हो रहा था।




Friday, 7 June 2019

Story Of Life : फ़र्ज़ ( भाग - 3)

अब तक आपने पढ़े फ़र्ज़ (भाग - 1) और फ़र्ज़ (भाग - 2)।
अब आगे:

फ़र्ज़ ( भाग - 3) 

आप कुछ मत सोचिए डॉक्टर जी, आप बस जल्दी से इलाज शुरू कीजिये, शायद यही नियति है। कहीं देर ना हो जाए.....

ईला तुरंत operation में जुट गयी, उसने रेखा को बचा लिया। 

फिर वो bone marrow transplant की preparation करने लगी। एक हफ्ते बाद bone marrow transplant का भी operation था। operation वाले दिन ईला से अखिल मिलने आया, और बोला, हमे पूरा विश्वास है कि, आप दोनों का बचा लेंगी, बस आप हिम्मत मत हारना। आज आपको अपने दोनों फ़र्ज़ में जीतना है।

ऐसी बात सुनकर ईला नए जोश से दोनों को बचाने के लिए operation theater में चली गयी। ईला की मेहनत रंग लायी, operation successful रहा। दोनों ही सुरक्षित थे।

ईला ने आकर अखिल को बताया, operation successful रहा, दोनों ही सुरक्षित हैं, ये केवल आपके कारण संभव हो सका। 

अखिल बोला, आप बहुत अच्छी डॉक्टर हैं, इसलिए ही दोनों बच्चे सुरक्षित हैं।

ईला बोली, अगर आप बुरा ना मानें, तो क्या मैं रेखा को गोद ले लूँ। आज वो ना होती तो, मेरा बेटा मुझसे हमेशा के लिए दूर हो जाता। आपका बोझ भी कम हो जाएगा, मैं आपको बहुत सारे रुपए भी दूँगी।

नहीं, मुझे कुछ भी रुपए नहीं चाहिए। मुझे अपनी रेखा बहुत प्रिय है, मैं आपको उसे नहीं दे पाऊँगा।

पर तब तो आप, अपनी बीवी और मुझसे कह रहे थे, कि .....

ईला की बात बीच में काटते हुए अखिल बोला, बेटियाँ बाप पर कभी बोझ नहीं होती हैं। वो तो रेखा की हालत बहुत खराब थी, उसके ना बचने से रेखा की माँ को बहुत दुख ना हो, इसलिए उससे ऐसा बोला था।

और आप से इसलिए कहा था, कि आपके मन में बोझ नहीं होगा, तो आप ज्यादा अच्छे से operation कर पाएँगी, आपका हाथ नही काँपेगा।

अखिल की बातें ईला के दिल को छू गईं, वो उनके सामने नतमस्तक हो गयी, उसने अखिल को बहुत सारा धन्यवाद दिया, और साथ ही अखिल के बहुत मना करने के बावजूद उन्हें ये कह कर बहुत सारे रुपए दे दिये, कि आपकी वजह से ही मैं अपने माँ और डॉक्टर दोनों के फ़र्ज़ निभा सकी हूँ। आप मुझे रेखा को गोद मत दीजिये, पर उसका खर्चा उठाने में सहयोगी तो बना रहने दीजिये।  

आज ईला बहुत खुश थी, उसने अपने दोनों फ़र्ज़ बहुत अच्छे से निभाये थे।

Thursday, 6 June 2019

Story Of Life : फ़र्ज़ (भाग-2)

फ़र्ज़ (भाग-1) के आगे:
फ़र्ज़ (भाग-2) 

डॉ. ईला ने रेखा की माँ को बुलाया, और कहा मैं तुम्हारी बेटी का इलाज नहीं कर पाऊँगी।

रेखा की माँ बोली, ऐसा ना बोलिए डॉक्टर जी। मैंने आपका बहुत नाम सुना है, मेरी मजबूरी समझिए, एक आप ही हैं, जो मेरी रेखा को बचा सकती हैं।

ईला बोली, मेरी भी मजबूरी है। मेरे एकलौते बेटे को भी, सिर्फ तुम्हारी बेटी ही बचा सकती है। पर मेरे बेटे को बचाने में, शायद तुम्हारी बेटी की जान चली जाए।

आप कैसी बात कर रहीं हैं, आप एक डॉक्टर हैं, रेखा की माँ दुखी होती हुई बोली। 

हाँ, पर मैं एक माँ भी हूँ...... और अपने जिगर के टुकड़े को डॉ. होते हुए भी, नहीं बचा पा रहीं हूँ। आज पहली बार report देख कर मेरा हाथ काँपा है, मुझसे नहीं होगा अब treatment। 

ये कहते हुए ईला की आँखें आँसूओं से भर गयी। सुन कर रेखा की माँ रोने लगी। ईला, रेखा और उसकी माँ को वहीं रोता छोड़ कर अपने cabin में चली गयी।

तभी रेखा का पिता अखिल भी आ गया, उसे जब सब बात पता चली तो, वो डॉ. ईला के cabin में चला गया। उसने ईला से कहा, डॉक्टर जी मैंने आपका बहुत नाम सुना है, आप ने कितनों का भला कर दिया। 

शायद, भगवान ने आपसे खुश होकर मेरी बेटी को यहाँ लाया है। आप मेरी बेटी की सहायता से अपने बेटे का जो भी इलाज करना चाहती हैं, कर लीजिये।

पर उसमें रेखा की जान..... कहते कहते ईला का गला रुँध गया।

मुझे बताया रेखा की माँ ने; मुझे और रेखा की माँ को ईश्वर और आप पर पूर्ण विश्वास है। आप बहुत अच्छी डॉक्टर हैं, आप दोनों को बचा लेंगी। और अगर रेखा नहीं बची, तो हम इसे अपनी किस्मत समझ लेंगे। वैसे भी बिन इलाज के वो कहाँ बचने वाली है। आपका बेटा बच जाएगा, तो भी हम समझ लेंगे, की रेखा का जीवन सार्थक हो गया। आप उसके बदले हमे कुछ पैसे दे दीजिएगा, तो मैं भी अपनी और बच्चियों को पाल लूँगा।

ईला, अखिल की बात बुत बनी सुन रही थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, उसका बेटा तो बच जाएगा, पर क्या उसके लिए एक मासूम की जान को खतरे में डालना उचित है?..... फ़र्ज़ (भाग -3) 
आप क्या कहते हैं, क्या करना चाहिए, डॉ. ईला को?