Monday, 14 October 2019

Kids Story : Advay the hero : Last Day

 Kids Story : Advay the hero : Last Day


Advay के school में picnic के लिए पैसे collect हो रहे थे
Ma’am ने तीन दिन का समय दिया था, पैसे जमा करने के लिए।


Advay ने घर में आकर अपने माँ-पापा को सब बता दिया, तो वो बोले, अगर तुम्हारा जाने का मन है, तो हम पैसे दे देंगे। 
Advay बोला, मैं अपने friends से पूछूंगा, अगर सब जा रहे होंगे, तभी जाऊंगा, वरना नहीं जाऊंगा।

माँ-पापा ने कहा, तुम पता कर लो, फिर पैसे ले जाना। 

बच्चे छोटे थे, तो सब के ही माँ-पापा जल्दी ready नहीं हो रहे थे।advay ने अपने friends से पूछा, वो लोग जाएंगे? तो सब ने कहा कि हमारे माँ-पापा ने  मना कर दिया।


Advay ने भी मन बना लिया कि वो भी नहीं जाएगा। एक दिन निकल गया।

दूसरे दिन कुछ दोस्त पैसे ले आए, बोले हमारे माँ-पापा मान गए हैं। जब कुछ के माँ-पापा मान गए, तो बाकी का भी जाने का मन करने लगा। 
एक ने advay से पूछा, तुम्हारे माँ-पापा तो किसी बात के लिए मना नहीं करते हैं, तो उन्होंने पैसे क्यों नहीं दिये?

Advay बोला, वो तो ready थे, पर क्योंकि तुम लोगों में से कोई नहीं जा रहा था, तो मैं नहीं लाया।

सारे दोस्तों ने decide कियाकल last day है, सब जरूर से पैसे ले आएंगे। 

Advay तुम भी जरूर से लाना, तुम्हारे बिना मज़ा नहीं आएगा। सारे दोस्तों ने advay से स्कूल से लौटेते समय बोला।

हाँ, हाँ जरूर से ले आऊँगा।


Mumma आज last day है, आप मुझे पैसे दे दीजिये, सब जा रहे हैं। और मुझसे बोल रहे थे, कि मेरे बिना मज़ा नहीं आएगा।

ठीक से रखना, कहकर माँ ने पैसे दे दिये। advay उस समय तैयार हो रहा था, उसने पैसे table पर रख दिये। तैयार होकर दूध पीकर वो चला गया।

आज वो बहुत खुश था, सारे दोस्तों का picnic जाने का program जो पक्का हो गया था।

Ma’am ने class में आते ही बोल दिया, जितने भी बच्चे पैसे लाये हैं, जमा कर दें। आज last day है, जिसने आज नहीं दिये, वो फिर नहीं जाएगा।

Advay ने पैसे देने के लिए अपने bag की pocket खोली, वहाँ पैसे नहीं थे। तभी उसे याद आया, उसने पैसे तो table पर ही छोड़ दिये थे। यह याद आते ही वो बहुत मायूस हो गया। आज last day था, सारे friends पैसे दे चुके थे, बस वही रह गया था।

वो दुखी होकर, अपनी सीट पर बैठ गया। तभी उसे कुछ ...

Sunday, 13 October 2019

Poem : शरद का चाँद


शरद का चाँद 


पूर्ण कला से सजा चाँद है,
इसकी आभा अजब निराली।
धवल चाँदनी छिटकी चहुं ओर,
है कांति मनभावन वाली॥

उज्जवल सी धरती है दिखती,
आज रात्रि नहीं काली।
पूर्ण यौवन में आज चाँद ने,
है दिनकर सी रोशनी पा ली॥

धरती-चाँद के अनुपम मिलन ने,
दूरी अपनी घटा ली।
तभी चाँद की श्वेतिमा में,
है आज ममता की लाली॥  

अमृत-वर्षा की रात आज है,
सब ने खीर बना ली।  
दुग्ध-अक्षत के अद्वितीय मेल में,
है चाँदनी घुलने वाली॥

श्वेत चाँद है- श्वेत चाँदनी,
आई है रात भागों वाली।
शरद चाँद के दर्शन मात्र से,
मन की कलुषता हरने वाली॥


शरद पूर्णिमा की शीतलता और पवित्रता आपके जीवन को सुख से परिपूर्ण कर दे।

Saturday, 12 October 2019

Story Of Life : हमने घर बदल लिए (भाग -3 )

हमने घर बदल लिए (भाग -1 ) और 

हमने घर बदल लिए (भाग -2 ) के आगे


Story Of Life : हमने घर बदल लिए (भाग-3 )

अच्छा ठीक है, तेरे जीजू को बोल कर आती हूँ।

रैना दी कीर्ति के पास आ गईं, बोली बताओ, क्या पूछना है तुम्हें?
दी, आप लोग जब रिया की engagement में आए थे, तो सब आपसे ज्यादा जीजू को आवाज़ लगा रहे थे। जीजू सारे काम, बखूबी कर भी रहे थे।

पर आपके घर में तो कुछ और ही माहौल है। यहाँ तो सारे काम आप ही करती हैं। आपको ही सब अपनी सारी बात बताते हैं, सब आपको ही बुलाते हैं। जीजू से तो बात भी नहीं की, उन लोगों ने। जीजू सबके बारे में उतना update भी नहीं रहते हैं।

मैंने और भी एक बात notice की, कि जीजू को उनके ससुराल वाले, और आपको आपके ससुराल वाले बहुत मानते हैं। और हाँ आप लोगों में झगड़ा भी नहीं होता है।

रैना दी हँस दीं, बोलीं हमने घर बदल लिए हैं।

क्या मतलब? मैं कुछ समझी नहींकीर्ति असमंजस में पड़ती हुई बोली

अरे रे..., कीर्ति, अपनों के साथ तो बचपन से रहे हैं, उनका प्यार और विश्वास तो बहुत पा लिया। अब अगर जीवनसाथी के घर वालों का साथ मिला है, तो उन्हें भी तो अपनाना होगा। शादी के बाद से ही हम दोनों ही एक दूसरे के घर के लोगों की ज्यादा चिंता करते हैं। उसके ही कारण है, हम अपने घर और ससुराल वालों दोनों का प्यार पाते हैं। और यही कारण झगड़ा नहीं होने का भी है।

कीर्ति रैना दी के घर से लौट आई, पर उसके मन में यह बात भीतर तक समा गयी, कि हम केवल अपने partner से कल्पना करते हैं, कि वो हमारे परिवार को अपना ले, पर खुद कभी उसके परिवार को नहीं अपनाना चाहते। सच अगर, घर बदल लें, तो दोनों जगह का प्यार भी मिलेगा और घर में कलह भी नहीं होगा।

अब कीर्ति को केवल अच्छे जीवनसाथी की तलाश नहीं थी, बल्कि वो भी अच्छा जीवनसाथी बनना चाहती थी, घर बदलना चाहती थी।