Friday, 29 November 2019

Story Of Life: वो बन गया आतंकवादी (भाग-3 )

 वो बन गया आतंकवादी (भाग-1) और.... 

वो बन गया आतंकवादी (भाग-2 ) के आगे..... 

वो बन गया आतंकवादी (भाग-3 )


पर जब वे लाश उठा रहे थे, तो बेहद हैरान थे, क्योंकि उनमें से एक भी पुलिस वाला वो नहीं था, जिन्होंने उन्हें पकड़ा था।

अंकित ने सभी दोस्तों से बात की, कि कहीं कुछ तो गड़बड़ है। हमे संगठन में वापस चलना चाहिए। वे सभी चुपचाप संगठन पहुँच गए।

वहाँ पहुँच कर वे चुपचाप छिप गए। आज संगठन में 20 नए लोग आए थे। वे सरगना से बोल रहे थे, बॉस आपने बहुत ही अच्छा आइडिया लगाया था। 

हमने नए लड़कों कि जानकारी सरकार तक पहुँचा दी है, वे भी आतंकवादी करार कर दिये गए हैं।

अंकित ने गौर से देखा, तो ये वही 20 लोग थे, जिन्होंने उन्हें पकड़ा था। अब अंकित को समझते देर नहीं लगी, कि उस दिन बम विस्फोट भी संगठन वालों ने ही किया था, और पुलिस के भेष में भी वही लोग थे। और उन्हें जहाँ बंद किया था, वो जेल भी इन्हीं की थी।  

उसे ये जानकार बहुत दुख हुआ, कि उसकी वजह से उसके दोस्त भी आतंकवादी बन गए, और साथ ही पुलिस वाले भी मारे गए।

वो कहाँ देशभक्त बनने वाला था और कहाँ आतंकवादी बन गया।

वो दुखी हो कर वहीं बैठ गया। तभी उसके दोस्त आ गए,  और सभी बोलने लगे, अब दुखी होने से कुछ नहीं होगा, सोचना है, तो कुछ बड़ा ही सोचना होगा।

अपने दोस्तों की जोश भरी बातें सुन कर अंकित बोला, आज मुझे बहुत अच्छा idea आया। उसका idea सुन कर सारे दोस्त खुश हो गए।

उसके बाद वो लोग संगठन वालों के पास गए, और ऐसे मासूम बने रहे, जैसे उन्होंने कुछ ना सुना हो।

अंकित, सरगना से बोला ..... 

आगे पढ़ें, वो बन गया आतंकवादी (भाग-4  ) में। ...... 

Thursday, 28 November 2019

Story Of Life: वो बन गया आतंकवादी (भाग-2 )

  वो बन गया आतंकवादी  (भाग-1) के आगे.....  


वो बन गया आतंकवादी (भाग-2 ) 

अंकित पूछने लगा, तुम कौन हो भाई? वो बोला मैं भी तुम्हारी ही तरह दुखी इंसान हूँ, मुझे भी पुलिस वालों ने बहुत दुखी किया है। ये कह कर उसने अपना मुँह लटका लिया।

कुछ देर शांत रहने के बाद, वो फिर बोला, मुझे लगता है, हम सभी नौजवान को इन पुलिस वालों से इसका बदला लेना चाहिए।

मैं अपने साथियों को लेकर आता हूँ, तुम अपने दोस्तों को भी शामिल कर लो।

अंकित पुलिस वालों के कारण बहुत दुखी और क्रोधित था, अतः उसे सरगना के भाई की बात भा गयी।

अगले दिन अंकित अपने उन सारे दोस्तों को ले कर सरगना के भाई की बताई जगह पहुँच गया।

उस दिन सरगना के संगठन में 10 लोग बढ़ गए। 

जल्दी ही उस संगठन के लोगों ने अंकित के सारे दोस्तों का अच्छे से brain wash कर दिया। अब सारे ही पुलिस वालों से बदला लेने के लिए उनकी चौकी पर बम गिराने के लिए तैयार हो गए।

अंकित और उसके सारे दोस्तों ने पुलिस चौकी पर बम फेंक दिया।इस बम विस्फोट में कई पुलिस वाले मारे गए।

अपने इस कुकृत्य को कर के अंकित और उसके सारे दोस्त बहुत ही खुश थे। जब पुलिस वालों की लाशें उठाई जा रही थी, तब सारे दोस्त वहाँ पहुँच गए, कि उन्हें कंधा देंगे, तो और अधिक सुख मिलेगा।
               
पर जब वे लाश उठा रहे थे, तो बेहद हैरान थे, क्योंकि उनमें से एक भी पुलिस वाला वो नहीं था, जिन्होंने उन्हें पकड़ा था।

अंकित ने सभी दोस्तों से बात की, कि कहीं कुछ तो गड़बड़ है। हमे संगठन में वापस चलना चाहिए। वे सभी संगठन पहुँच गए।

वहाँ पहुँच कर वे चुपचाप छिप गए...... 


Wednesday, 27 November 2019

Story Of Life: वो बन गया आतंकवादी

वो बन गया आतंकवादी


अंकित बहुत ही भोला-भाला, निडर, शक्तिशाली, देशभक्त युवक था। वो बहुत छोटा था, तब से उसने देश के लिए मर-मिटने का फैसला कर लिया था।

उसी के गाँव में एक आतंकवादी संगठन भी था, जो गाँव के भोले-भाले निडर, शक्तिशाली युवकों को बरगला कर अपने संगठन में शामिल कर लिया करता था।

पर पिछले कुछ सालों से संगठन में कोई भी नया युवक शामिल नहीं हो रहा था, और साथ ही पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने से आतंकवादियों का संगठन भी कमज़ोर होता जा रहा था। जिससे उसके सरगना को बहुत चिंता होने लगी थी।

एक दिन सरगना ने अपने भाई को बुलाया, और कहा, मेरे पास अपने संगठन को बढ़ने के लिए एक idea आया है। और उसने अपनी सारी योजना उसे बता दी।

अगले दिन ही गाँव, में कई जगह विस्फोट हो गए। और जब पुलिस वहाँ पहुंची, तो, उसने भी सीधे-साधे गाँव के लोगों को ही परेशान करना शुरू कर दिया, कुछ को तो पुलिस पकड़ के भी ले गयी। उन्हीं में अंकित और उसके कुछ दोस्त भी शामिल थे। 

अंकित के जेल जाने से उसके बूढ़े पिता इस दुख में कि, वो जेल चला गया, इतने दुखी हो गए, कि वो बेहद बीमार हो गए। जब ये बात अंकित को पता चली, तो उसने पुलिस वालों से बहुत request की, कि उसे छोड़ दें। 

उसका विस्फोट में कोई हाथ नहीं है, पर पुलिस वालों ने उसे नहीं छोड़ा। दुखी हो होकर आखिरकार अंकित के पिता ने दम तोड़ दिया।

उसके बाद पुलिस ने अंकित को छोड़ दिया। अपने पिता को कंधा देते वक़्त अंकित के मन में अब सिर्फ एक ही बात घूम रही थी, कि मेरे पिता इन पुलिस वालों के कारण इस दुनिया से चले गए।

वो अपने घर में दुखी बैठा था, तभी सरगना का भाई उसके पास आया, और पूछने लगा, क्या अंकित भाई, अब सारी ज़िंदगी दुख में ही बिता दोगे?

अंकित पूछने लगा, तुम कौन हो भाई? वो बोला...