Friday, 20 March 2020

Poem : डर के साये में

डर के साये में


डर के साये में सब,
कुछ यूँ, जी रहे हैं;
जिसमें अगले पल का भी
कुछ इल्म ही नहीं है
कभी प्रदूषण डरा रहा है, 
कभी दंगों से खौफ़ज़दा हैं;
कुछ जान बच गयी थी,
तो कोरोना आ धमका है
सब काम बंद है,
बाज़ार भी तो ठप्प है;
बच्चे खेलने को तरस रहे हैं,
साहब ऑफिस ना जाने से,
घर में ही बरस रहे हैं
मेमसाहब को भी,
बस एक बात का डर है;
कहीं कामवाली बैठ ना जाए,
तो हो जाएगी कहर है
इन सब बंद के आलम में,
क्या कोई बता सकता है:
कब तक रहेगी,
सब के घर रसद* है?
इतना इस समय हर एक करना,
अन्न को बिल्कुल नष्ट मत करना;
जिस-जिस देश में अन्न बचेगा,
जहां में बाकी बस उसका ही अस्तित्व रहेगा


*रसद = राशन 

Thursday, 19 March 2020

Stories of Life : अनोखा तोहफ़ा (भाग-2)


अनोखा तोहफ़ा (भाग-1) के आगे...

अनोखा तोहफ़ा (भाग-2)



अब शादी को सिर्फ चार दिन बचे थे, तो अभिषेक बोला, अब तो हम दोनों के घरों में मेहमान आने लगेंगे और rituals भी शुरू हो जाएंगे,तो मैंने तुम्हें तुम्हारा तोहफ़ा courier से भेज दिया।

यह जानकर अनीता बहुत खुश हो गयी, उसकी बहुत-सी सहेलियों की शादी उन्हीं दिनों हो रही थी, सब अपने मिले हुए तोहफ़े का अक्सर ज़िक्र किया करती थीं। 

अनीता ने सोचा, मैं भी सबको बताऊँगी कि मेरा होने वाला पति भी किसी से कम नहीं है, और सबको अपना तोहफ़ा दिखाएगी।


उसके इंतज़ार के पल ख़त्म हुए, सामने courier वाला एक बड़ा-सा gift लेकर खड़ा था। 

अनीता ने उससे gift लिया, और सीधे अपने कमरे में चली गयी। 

जल्दी-जल्दी उसने packet खोला, पर यह क्या, उसके सारे सपने चकनाचूर हो गए, उसमें तो उन दोनों के किए हुए एक-एक sms लिखे हुए थे। अनीता बहुत दुखी हो गयी। जब माँ और बहन को पता चला, तो वो बोलीं अच्छा तो है।

तभी अभिषेक का फोन आया, कैसा लगा तोहफ़ा?

अनीता ने अभिषेक को खुश करने के लिए बोल दिया, बहुत अच्छा था।

पर वो तोहफ़ा उसके लिए सपनों को तोड़ने वाला तोहफ़ा था।

शादी हो गयी, सारे सामानों के साथ वो अभिषेक के लिखे हुए सारे letters और उसका दिया अनोखा तोहफ़ा भी साथ ले आई। Letters और अनोखा तोहफ़ा उसने अलमारी में रख दिया।

दिन गुजरते गए, अभिषेक और अनीता दोनों ही ज़िंदगी में व्यस्त हो गए।

आज कुछ समान ढूँढने के लिए अनीता ने अलमारी खोली, तो उसके हाथ अभिषेक का वही अनोखा तोहफ़ा लग गया, सारे काम ख़त्म करके आज उसने उन्हें पढ़ना शुरू कर दिया, यह समय उसे अपनी ज़िंदगी के सबसे हसीन पल में ले गया। 

जब वो सारा पढ़कर उठी, तो उसकी नज़र घड़ी की तरफ गयी, अरे बाप रे! 4 घंटे से मैं पढ़ रही थी।

फिर वो सोचने लगी, आज शादी के सत्रह साल हो गए हैं, ना वो mobile साथ है, ना अब sms वाली दुनिया है, पर यह तोहफ़ा उसे उन हसीन पल में ले गया था। 

अगर अभिषेक ने मुझे फूल दिये होते तो वो चंद घंटों में सूख जाते, chocolates और dress भी कुछ दिन चलती, set 2-4 बार पहनने के बाद locker की ही शोभा बढ़ा रहा होता।

पर अभिषेक ने मुझे ऐसा अनोखा तोहफ़ा दिया था, जिसने मेरे हसीन पलों को हमेशा के लिए मेरा बना दिया था, वो समय के साथ नष्ट नहीं होने थे, वो शाश्वत हो गए थे, मेरे लिए।

आज उसे समझ आया था, कि तोहफ़ा सचमुच अनोखा था, और उसके पीछे की अभिषेक की मेहनत और उससे किया हुआ बेइंतहा प्यार भी दिख रहा था।

आज उसे अभिषेक का बहुत इंतज़ार था, उसके दिये हुए अनोखे तोहफ़े के साथ वो पल दुबारा जीने के लिए

Wednesday, 18 March 2020

Stories of Life : अनोखा तोहफ़ा


अनोखा तोहफ़ा


अभिषेक और अनीता की शादी तय हो गयी थी, courtship period चल रहा था। किसी की भी ज़िंदगी के सबसे हसीन पल होते हैं courtship period, सपनों की दुनिया से भी ज्यादा खूबसूरत। उनके भी थे, नया-नया mobile चला था, तब whatsapp नहीं हुआ करता था। call and sms का ज़माना था।

दोनों ही बहुत कलाकार आशिक थे, तो उनके sms में, प्यार की मीठी नोकझोंक, शायरी, फिल्मी songs, या कभी ऐसे sms भी होते थे, कि पढ़कर लगे कि साथ ही रह रहे हैं, ऐसे dialogue भी होते थे। पर उनके sms में ऐसी कोई बात नहीं होती थी, कि कोई दूसरा पढ़े तो शर्म से तार-तार हो जाए।

अनीता तो अपने sms कभी भी अपनी बहन और माँ को पढ़वा देती थी। कहीं कुछ ढका-छुपा नहीं था। वैसे अभिषेक इस बात से अंजान था, कि उनके बीच की प्यार की बातों का आनन्द पूरा घर ले रहा था।

4 महीने का हसीन पल कब ख़त्म होने को आ गया पता ही नहीं चला, आखिरी के दिनों में अभिषेक अनीता से बोला, हमारा courtship period ख़त्म होने को आ गया है, तो मैंने सोचा है, तुम्हें बहुत ही अनोखा तोहफ़ा दूँगा, जो तुम्हें बहुत ही अच्छा लगेगा।

अब तो अनीता तोहफ़े में ना जाने क्या-क्या हसीन ख़्वाब सजाने लगी, खूब बड़ा rose bouquet, ख़ूब सारी chocolates, कोई सुंदर-सी dress, या शायद सोने या diamond का set
अनीता रोज़ ही पूछने लगी, कब भेजोगे, और अभिषेक हमेशा कहता थोड़ा सब्र कर लो।

अब शादी को सिर्फ चार दिन बचे थे, तो अभिषेक बोला, अब तो 
हम दोनों के घरों में मेहमान आने लगेंगे और rituals भी शुरू हो जाएंगे, तो मैंने तुम्हें तुम्हारा तोहफ़ा...

आगे पढ़ें, अनोखा तोहफ़ा (भाग- 2) में...