Monday, 30 March 2020

Recipe : Matar ke parathe

यह Quarantine session की 6th recipe है। इस कठिन समय में हमे अपने परिवार को स्वाद और सेहत दोनों ही देने हैं। 

आज हम आपको मटर के पराठे बताने जा रहे हैं, अब आप कहेंगे, कि बंद में मटर मिलना कौन सा आसान है? तो आपको बता दें, आप इन पराठों को frozen मटर से भी बना सकते हैं। यह छोटे बच्चों से लेकर बड़े तक सबको पसंद आएंगे।  

Matar ke paratha




Ingredients:

  • Pea – 250 gm.
  • Onion – 1 medium
  • Garlic – 4 to 5 pod
  • Ginger – ½ inch
  • Salt – as per taste
  • Butter – 1tbsp  
  • Green chilli – as per taste
  • Coriander leaves – handful
  • Wheat flour – 400gm.
  • Ghee  (पराठा सेंकने के लिए)


Method:


For Filling-
  1. Cooker में मटर, ½ tsp. नमक व पानी डालकर, 1 whistle लगा कर मटर गला लीजिये।
  2. मटर को grinder से दरदरा पीस लें।
  3. एक wok लीजिये, उसमें butter डालकर गर्म कीजिये, उसमें chopped onion, garlic, ginger डालकर sauté कर लीजिये।
  4. अब उसमें दरदरी मटर डालकर भून लीजिये।
For Paratha
  1. आटे में नमक डालकर रोटी बनाने जैसा dough बना लीजिये।
  2. Dough के 12-15 गोले बना लीजिये।
  3. गोले को थोड़ा सा बेल लीजिये उस पर भरावन रखकर अच्छे से बंद कर लीजिये।
  4. हल्के हाथ से गोले को बेल लें, जिससे भरावन सब जगह एक सा आए।
  5. अब इसे गरम तवे पर डालकर घी लगाकर सेक लें।
इसे धनिया की चटनी या tomato sauce के साथ गरमा-गरम serve करें।


Note:
  • आपके पास अगर fresh peas नहीं है, तो आप इसे frozen peas से भी बना सकते हैं।
  • जब भी आप stuffed पराठा या कचौड़ी बनायें, उसका आटा मुलायम होना चाहिए, उससे ही भरावन सब तरफ सही से फैलता है।
  • आटे में नमक डाल कर ही dough बनायें, जिससे अगर कहीं भरावन नहीं गया हो, तो भी वो हिस्सा फीका ना लगे।
  • आटे में भी नमक रखते हैं, इसलिए भरावन में नमक उसी अनुपात में डालते हैं, जिससे नमक अधिक ना लगे।

Sunday, 29 March 2020

Recipe : Phare(फ़रे)

Quarantine segment की यह मेरी पाँचवी recipe है। यह छत्तीसगढ़ cuisine से ली है, इसमें भी आपको veggies की requirement नहीं है। 

ये बहुत ही tasty and healthy dish है, साथ ही less oily भी। तो diet conscious लोगों के लिए तो ये बहुत ही बढ़िया recipe है।

Phare (फ़रे)




Ingredients:


  • Wheat flour – 400 gm.
  • Black gram (उरद दाल) 150 gm.
  • Bengal gram (चने की दाल) 50 gm.
  • Ginger – ½ inch
  • Garlic – 5 to 6 pods
  • Black pepper – as per taste
  • Salt - as per taste
  • Oil – 1 tbsp 
  • Olive oil - 1 tsp.
  • Onion – 2 medium
  • Cumin seeds – ½ tsp.
  • Green chilli – as per taste
  • Tomato – 1 medium
  • Curry leaves – 4 to 6
  • Coriander leaves – for garnishing  

Method:


For phare filling-
उरद की दाल व चने की दाल को 4-6 hours के लिए भिगो दीजिये।  

Grinder के cup में दोनों भीगी हुई दाल, ginger, garlic, black pepper, salt डाल दीजिये, और उसे दरदरा पीस लें।

For phare-
  1. गेहूँ के आटे में नमक मिलाकर पूड़ी के आटे जैसा dough बना लें।
  2. अब dough से छोटे 8 to 10 गोले बना लें
  3. गोले से पूड़ी जैसा बेल लें, अब इसमें filling रखकर जैसे गुझिया बनाते हैं, वैसे ही पूड़ी के किनारे पर पानी लगाकर चिपका दें। और गुझिया जैसा बना लें
  4. अब सारे फ़रे बना लीजिये।
  5. फिर एक pan लीजिये, उसमें, pan की आधी दूरी तक पानी डाल दीजिये, ½ tsp. Salt और 1tsp. olive oil ओर refined oil  डाल boil होने रख दीजिये।
  6. जब पानी उबलने लगे, तो उसमें सारे फ़रे डालकर 2 उबाल तेज़ आँच पर कीजिये, फिर pan को ढक दीजिये।
  7. धीमी आँच पर 20 से 25 min. तक पकाएं। 
  8. जब फ़रे पक जायेंगे, तो ऊपर आ जाते हैं
  9. अब एक फ़रे में चाकू से check करें कि फ़रा पक गया, कि नहीं? यदि फ़रा पक गया होगा, तो चाकू साफ निकलेगा।
  10. फिर फ़रे को चलनी में डाल दें, जिससे सारा पानी निकल जाए।
  11. जब फ़रे ठंडे हो जायें, उन्हें काट लीजिये।
  12. अब एक wok में 1 tbsp oil डालकर गरम कीजिये, उसमें chopped onion डालकर sauté कीजिये।
  13. अब इसमें कटे हुए फ़रे डालकर भून लीजिये।
  14. Fine chopped हरी मिर्च और धनिया पत्ती से garnish करें।
  15. इसे धनिया की चटनी या tomato sauce से serve करें।

Note : 

अगर अभी आपके पास tomato, curry leaves, coriander leaves नहीं है, तो भी आप इसे try कीजिएगा। उसके बिना भी tasty लगेगा।     

Short Stories : मेरी बेटी



मेरी बेटी

जब पता चला, कोरोनावायरस बढ़ रहा है, तो समझ नहीं आया कि क्या करुं?

कामवाली को हटा दूं, सबकी सुरक्षा के लिए?

पर अगर उसे हटा दिया, तो इतने काम कैसे होंगे?

आजकल घर में माँ भी थी, उनके पैरों में fracture था, तो उनका सारा काम भी करना था।

मेरी तबियत भी कुछ नासाज़ थी।

पर सबसे बड़ी बात, शुरू से कामवाली बाई घर के काम करने के लिए लगी थी, तो उसे हटाने की हिम्मत नहीं हो रही थी।

मेरी बेटी, पास में बैठी थी, पूछने लगी, क्या सोच रहीं हैं?

मैंने कहा, समझ नहीं आ रहा है कि कामवाली बाई को अगर हटाती हूँ, तो इतना काम कैसे करुंगी, और अगर नहीं हटाती हूँ, तो सबके बीमार होने का डर है।

वो, बिना एक भी क्षण गवांए बोली, हटा दीजिए, सबका ठीक रहना बहुत जरूरी है।

मैं उसका मुंह देख रही थी, इसे एक बार भी मेरा ख्याल नहीं आया कि माँ, इतना काम कैसे करेंगी।

पर अगले दिन कामवाली बाई को काम करने को मना कर दिया।

मैं भारी मन से सोचने लगी, कहाँ से काम शुरू करुं?

तब तक तो देखा, बेटी झाड़ू लेकर सफाई करना शुरू कर चुकी थी।

तब तक मैंने नाश्ता बना दिया।

जब सब नाश्ता कर चुके, वो बर्तन ले गयी, और धोकर रख दिया।

मैं बस, उसे देखती रह गई, दिन भर पढ़ने और मस्ती करने वाली लड़की, कब इतनी सुघड़ हो गयी।

अब मुझे समझ आ रहा था, उसने कामवाली बाई को मना अपने दम पर करवाया था, ना कि काम मेरे कन्धों पर रख कर।

सच, हम समझ ही नहीं पाते हैं कि हम जो करते हैं, हमारे बच्चे उन्हें देखते हैं, और उनमें संस्कार निहित हो जाते हैं,  और आवश्यकता आने पर वो मुश्किलों से लड़ने में सक्षम होंगे, वो विजयी रहेंगे। 

अपनी बेटी पर जितना प्यार इस बात से आता था, कि वो मेधावी छात्रा  है, आज उस से ज्यादा गर्व इस बात पर है, कि वो हर परिस्थिति में ढलना जानती है, और उसमें विजयी होना भी।