Saturday, 24 July 2021

Article : गुरुवर को कोटि-कोटि प्रणाम

 गुरुवर को कोटि-कोटि प्रणाम




आज का दिन है, उनको धन्यवाद देने का, जिन्होंने ना जाने कितने लोगों के अंदर रचनाकार को जन्म दिया है। 

उनकी रचनाएं हमें रचनात्मक कार्यों के प्रति प्रेरणा प्रदान करती है।‌‌ उनकी एक-एक रचना अपने आप में एक पाठशाला है।

मैं जब कक्षा 6 में थीं, उन दिनों मुझे डाॅ. सत्य कुमार जी की कहानियाँ पढ़ने का अवसर मिला।

उनकी एक-एक कहानी जीवन से जुड़ी हुई थी।

उन्होंने कहानियाँ, इतने सरल शब्दों में लिखीं थीं, कि वो कब मन-मस्तिष्क में समा गई, यह ज्ञात ही नहीं हुआ।

उनकी कहानियों को समझने के लिए कभी किसी शब्दकोश को खोलना नहीं पड़ा, ना ही कभी किसी ज्ञानी से उसका सार समझने की कोशिश करनी पड़ी।

उनके इस अंदाज ने मुझे बहुत प्रेरित किया, कि जब भी कोई रचना बनाएं, वो इतनी सरल और सहज होनी चाहिए कि वो लोगों के मन-मस्तिष्क में समा जाए।

कठिन या क्लिष्ट भाषा से आप तो ज्ञानी सिद्ध हो जाएंगे, पर यह आवश्यक नहीं है कि आप अपनी रचना को दूसरों के दिलों में स्थान दे पाएं। क्योंकि जो सरल है, वो ही सत्य है, सनातन है, ईश्वर है।

अतः जब भी कोई रचना लिखें, वो स्वांतः सुखाय के लिए नहीं वरन् सबको सुख देने के लिए लिखना चाहिए। 

साथ ही उनकी कहानियों से हमें सत्य, प्रेम और संघर्ष से जीवन रुपी भवसागर को पार करने की प्रेरणा भी मिलती है।

हमने उन्हें अपना गुरु मानकर उनकी इस शैली को अपनी रचनाओं में उतारने की चेष्टा की है। हे गुरुवर आपका ह्रदय से अनेकानेक आभार, आप को कोटि-कोटि प्रणाम 🙏 

हे गुरुवर, आप की सभी रचनाएं व पुस्तकें मेरे लिए अनमोल हैं, उन्होंने मुझे एक रचनाकार का अस्तित्व प्रदान किया।

अपितु डाॅ. सत्य कुमार जी से सभी पूर्णतः परिचित हैं, तथापि संक्षेप में उनके लेखकीय परिचय को उनकी प्रकाशित पुस्तक द्वारा अंकित किया है। 


मेरा अहो भाग्य,जो गुरुवर मैंने
सानिध्य आप का पाया है
आपकी रचनाओं ने मुझमें 
रचनाकार को जगाया है
जो अलख जगी है मुझमें
उसमें आशीष आप का मिल जाए
कृपा रहे सदा आप की
यह सौभाग्य मुझे मिल जाए
है कोटि-कोटि प्रणाम आपको
आपके समक्ष यह शीश नवाया है 🙏🏻🙏🏻

Friday, 23 July 2021

Story of Life : विद्या

विद्या 


रघु जी बहुत अच्छे ज्योतिषी थे, वो जब भी किसी को कुछ बताते, सब सही निकलता।

इससे, सब जगह उनका बहुत नाम था, अपने ज्योतिष विद्या से उन्होंने बहुत धन कमाया और सब जगह उनका बहुत प्रभाव भी था। 

उनके दो पुत्र थे। रघु जी जब बूढ़े हो गये, तो उन्होंने सोचा कि अपने बेटों को यह विद्या सिखा दें।

उन्होंने बहुत कोशिश की, कि उनके बेटे उनकी विद्या सीख लें।

लेकिन इतने धन-धान्य में पले, उनके दोनों बेटे अपने में ही मस्त रहते थे। वो कभी विद्या अर्जित करने में मन ही नहीं लगाते थे। 

नतीजतन रघु जी की विद्या, रघु जी तक ही सीमित रह गई। उन्हें चिंता सताने लगी कि उनके बाद उनकी विद्या का क्या होगा? 

रघु जी ने सब धन अपने दोनों बेटों में बांटा और एक रात चुपचाप घर छोड़ दिया।

एक दिन घूमते-घूमते रघु जी एक झोंपड़ी के आगे पहुंचे ही थे कि भूख-प्यास से बेहाल वो वहाँ गिर कर बेहोश हो गये। 

झोपड़ी में 12 साल का गरीब लड़का वरुण रहता था। उसके माता-पिता कुछ दिन पहले चल बसे थे। वो मेहनत-मजदूरी कर के अपना जीवन चला रहा था।

वरुण, रघु जी को झोंपड़ी में भीतर ले आया और रघु जी पर पानी के छींटें मारकर, उन्हें ठीक करने में जुट गया।

रघु जी के ठीक होने पर उसने रघु जी को गुड़-चना खाने को दिया।

गुड़-चना खाने से रघु जी की जान में जान आई। तब उन्होंने वरुण से पूछा कि तुम कौन हो और वो यहाँ कैसे आये? 

वरुण ने सब बता दिया। वरुण की आपबीती सुन रघु जी को बहुत दुःख हुआ।

वरुण बोला, मेरे माता-पिता के जाने से मैं बहुत अकेला हो गया था, क्या आप सदैव मेरे साथ रहेंगे?

रघु जी, कुछ देर सोचने के बाद बोले, एक शर्त पर, अगर मैं तुम्हें जो बताऊं, वो सब सीखो तो..

वरुण बोला, आप जो सिखाएंगे, मैं मन लगाकर सीखूंगा।

रघु जी बहुत खुश हो गये कि उन्हें अपनी विद्या बांटने के लिए कोई मिल गया था।

अब तो घर के सारे काम जल्दी-जल्दी खत्म कर के वरुण विद्या सीखने में जुट जाता।

वरुण बहुत होशियार, मेहनती और लगन का पक्का था। वो बहुत जल्दी ही सब सीखने लगा।

रघु जी ने कहा, अब तुम लोगों को भविष्य बताना शुरू कर दो।

वरुण ने वैसा ही करना शुरू कर दिया, अब वरुण का सब जगह नाम होने लगा।

एक दिन, वरुण लौट कर आया, तो रघु जी बिस्तर पर लेटे थे, उन्होंने कहा, वरुण अब मैं जाऊंगा।

सुनकर वरुण, रघु जी के पैरों में गिर गया, बोला, आप मुझे फिर अनाथ ना करें...

रघु जी बोले, मेरा समय खत्म हो गया है, मैं एक अच्छे शिष्य की तलाश में था, जो तुम को विद्या देकर पूरी हो गई।

पर मुझे जाने से पहले तुम से आज एक और वादा चाहिए..

वरुण बोला, मैं धन्य हो गया कि मुझे आप जैसा गुरु मिला।

जो कहें, सब आप का है, मेरा जीवन भी।

रघु जी बोले, बस इतना कि तुम मेरी विद्या को कभी खत्म मत होने देना। जब तुम्हारा समय पूरा हो जाए तो, इस विद्या को किसी अच्छे योग्य शिष्य को ढूंढ कर उसे दे देना।

यही मेरी गुरु दक्षिणा होगी कि मेरी विद्या जीवित रहे।

वरुण ने पैरों को ही थामे हुए कहा, मैं आपकी विद्या सदैव जीवित रखूंगा। और एक योग्य शिष्य को ढूंढ कर इसे देकर आप में ही मिल जाऊंगा। 

रघु जी बोले, जैसे एक शिष्य को अच्छा गुरु चाहिए होता है वैसे ही हर अच्छे गुरु को योग्य शिष्य की आवश्यकता होती है, जिससे उसकी विद्या जीवित रहे। क्योंकि हर किसी से बड़ी विद्या होती है।

यह कहकर रघु जी ने, तृप्त सांस छोड़ते हुए संसार से विदा ले ली...

Thursday, 22 July 2021

Tip : How to manage Electricity Bill

आज के इस दौर में बिजली का बिल लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता हुआ दिखाई दे रहा है, आज के समय में बिजली का बिल आने पर हम सभी लोग ये सोचते हैं कि इसे कैसे कम किया जाए. आज हम आपको बिजली के बिल को कम करने के लिए कुछ तरीके बता रहे हैं जिनसे आप अपने घर के बिजली बिल को काफी कम कर सकते हैं.

How to manage Electricity Bill


  1. घर के किसी device को चार्ज करने के बाद आपको उनके plug को unplug कर देना चाहिए.
  2. अधिकतर देखने में आता है कि हम लोग laptop और mobile phone के charger को निकालना भूल जाते हैं.
  3. घर में पर्याप्त light होने की स्थिति में light का उपयोग नहीं करना चाहिए.
  4. Computer चालू रखने पर उसके काम नहीं करने पर LED को बंद रखें.
  5. रात के समय में अनावश्यक lights को ना जलाएं.
  6. Geyser का उपयोग करने के लिए उसमें सही तरह से temperature को चेक करें, उसे अनावश्यक रुप से ना चलाएं.
  7. Energy saving mode का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें, इससे बिजली को बचाया जा सकता है.
  8. OTG की जगह microwave oven का उपयोग करे, इससे आपकी ज्यादा बिजली बचेगी.
  9. Modern equipment use कीजिए, जैसे tube lights की जगह LED lights, etc.
  10. Electrical appliances  में Star rating वाले products use कीजिए। Means आप अपनी  pocket के according ज्यादा से ज्यादा star वाले fridge, AC, etc लीजिए।

इन सभी तरीकों का उपयोग कर आप अपने घर की बिजली और बिजली के बिल दोनों को ही save कर सकते हैं.