Monday, 9 January 2023

Story of Life: house number 1303

 House number 1303 




रतन, महोबा के नज़दीक के एक गांव में रहता था। बहुत ही सीधा साधा और मासूम सा लड़का था। 

जब उसने बारहवीं कक्षा पास कर ली, तो आगे की पढ़ाई और नौकरी के लिए उसने सोचा कि दिल्ली चला जाए।

माँ- बाबूजी भी तैयार थे, क्योंकि सबको ही यह लगता था कि जीवन तो बड़े शहरों में ही है। गांवों में तो केवल संघर्ष ही है।

और उनकी इस सोच को पुख्ता, उनके दूर के रिश्तेदार नीरज ने बनाया था।

दरअसल वो जब से दिल्ली गया था, बाकी लोगों को यहाँ के सब्जबाग दिखाता रहता था। 

कुछ भी काम टिककर तो वो कर नहीं सकता था, साथ ही कामचोर और आलसी भी था। इसलिए शहर में छोटा-मोटा काम ही कर रहा था, फिर भी, शान बघारने के लिए, हमेशा कहा करता कि बहुत ठाठ बाट का जीवन जी रहा है।

सब सोचते कि जब नीरज जैसे लड़के के इतने ठाठ-बाट हैं तो रतन तो हर बात में नीरज से होशियार है, तब फिर इसके तो कितने ही ठाठ-बाट रहेंगे।

रतन ने दिल्ली आने की तैयारी आरंभ कर दी। बाबूजी बोले, हम भी चलते हैं तुम्हें शहर छोड़ने...

पर रतन ने मना कर दिया, बोला नीरज भैया तो हैं ना वहाँ, अचानक पहुंचकर उन्हें surprise दूंगा और उन्हीं के साथ कालेज, नौकरी और घर सब देख लूंगा।

एक बार घर हो जाए, फिर आप को बुला लूंगा।

बाबूजी मान गए, उन्हें लगा कि वैसे भी किराया भाड़ा हर चीज़ का बहुत ज्यादा है। फिर शहर में अप में कोई ठौर ठिकाना भी नहीं है। पता नहीं नीरज के पास भी कितना जगह है रहने की।

अभी रतन का जाना जरूरी है। ठीक ही कह रहा है रतन, जब वो अपना घर द्वार देख लेगा, तबहिं चले जाएंगे। 

बस फिर क्या था, रतन पहुंच गया दिल्ली और फिर नीरज के घर की ओर चल दिया...

आगे पढ़ें House number 1303 (भाग-2) में...

Thursday, 5 January 2023

Tips : Protection from cold wave

आज कल भीषण ठंड पड़ रही है, जिसके कारण जिंदगी थमी-थमी, रुकी-रुकी सी है।

इतनी ठंड के कारण ही बहुत से लोग बीमार हो रहे हैं; Heart diseases, High risk के case बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। Specially हमारे elders इससे ज्यादा परेशान रह रहे हैं।

पर इस भयंकर ठंड का कारण भी तो हम ही हैं। हमारे एशो-आराम, आधुनिकता और अथाह पाने की कामना ही वज़ह हैं इसकी...

AC, car, buildings, geyzer, heater इनकी बढ़ती संख्या, और इनके साथ ही बद से बद्तर होता जा रहा है मौसम। 

बढ़ती ठंड के साथ आई शीत लहर, बच्चों से बुजुर्गों तक सबको परेशान कर रही है। 

शीत लहर क्या?

पहले आप को बताते हैं कि शीत लहर (cold wave) क्या होती है।

जब temprature, 5 to 6 °c या उससे भी नीचे पहुंच जाता है, और हवा चले तो उसे शीत लहर कहते हैं। 

अब आप को कुछ tips, बताते हैं कि इस cold wave से कैसे बचें

Protection from cold wave 



इतनी ठंड में अगर कुछ चीजों का विशेष ध्यान रखें तो हम अपने परिवार और खुद को बीमार पड़ने और अनहोनी घटने से बचा सकते हैं।

Wearing warm clothes : 

इसके लिए आप को अच्छे गरम कपड़े पहनने चाहिए। पतले पतले बहुत से कपड़े पहनने से अच्छा होगा कि आप मोटे और अच्छे गरम कपड़े पहने। सिर के लिए भी, cap, muffler, etc और पैरों में भी socks पहने। जितनी जरूरत शरीर को है गर्म कपड़ों की, उससे ज्यादा जरूरत है, सिर और पैर पर गर्माहट की। इसलिए इस ठंडक से बचाव के लिए, सिर से पैर तक सब का ध्यान रखें।

Eating nutritious food :

खान-पान का विशेष ध्यान रखना है। Healthy and nutritious food खाएं।

I. For vegetarians -

अगर आप pure vegetarian हैं तो आप  रोटी के लिए बाजरे की रोटी खाएं, चीनी की जगह गुड़, खजूर आदि खाएं। शहद भी काफी कारगर साबित होता है।

II. For eggitarians -

अगर आप eggitarian हैं तो ठंड में अपनी diet में atleast 1 egg daily basis में रखें।

III. For non-vegetarians -

अगर आप non-vegetarian हैं तो हफ्ते में एक से दो बार mutton, chicken अपनी diet में रख सकते हैं।

IV. For all -

Dry fruits जैसे, बादाम, काजू, मूंगफली आदि खाएं। गाय का घी भी बहुत फायदेमंद रहता है।

दूध में हल्दी पाउडर डालकर गर्म करें, फिर पिएं, यह ठंड बचाने के साथ ही दर्द, चोट आदि में भी बहुत फायदेमंद रहेगा।

कहने का तात्पर्य है कि, protein, fat and carbohydrates rich foods आपको ठंड से बचने में अधिक सक्षम रहते हैं। 

Applying moisturizers :

ठंड में body lotion या body oil, use करना चाहिए। जिससे आप की skin soft and healthy रहे। ऐसा नहीं करने से skin में dryness आ जाती है, जो बहुत सी skin diseases का कारण बन सकती है।

Drinking warm water :

ठंड में हल्का गुनगुना पानी पीजिए। खासकर जो बुजुर्ग हैं, वो विशेषतः गुनगुना पानी ही पीएं। ठंड में पानी गुनगुना होने से आप appropriate amount में पानी पीएंगे। अन्यथा ठंडा पानी होने से आपके पानी की quantity कम हो जाती है। Body में dehydration से बहुत सी परेशानी बढ़ जाती है। 

Not too hot, not too cold :

बहुत ज्यादा गर्म पानी से नहीं नहायें, पानी सिर्फ उतना ही गर्म रखें, जिससे आप comfortably नहा सकें, और आप को नहाने में ठंड ना लगे। बहुत ज्यादा गर्म पानी भी skin को damage करता है, साथ ही inner organs भी affect होते हैं। 

Stay home, stay warm :

अगर धूप ना निकली हो तो, अनावश्यक रूप से outdoor में ज्यादा ना रहें, Indoor में ही रहें। वैसे तो अंगीठी, bone-fire etc, pollution फैलाते हैं तो उनका use ना ही करें। और अगर करना ही है तो outdoor में करें। जो लोग heater, use करते हैं, उनके लिए भी बता दें कि वो भी बहुत Healthy option नहीं होता है, उसमें भी oxygen burn होती है और उस जगह का oxygen level down हो जाता है। एक बात और है, अगर आप ने room गर्म कर रखा है और काम के सिलसिले में अंदर-बाहर कर रहे हैं तो वो और ज्यादा नुकसान करता है। Specially ऐसे में बच्चों का ध्यान रखना ज्यादा कठिन होता है, क्योंकि वो जल्दी एक जगह नहीं टिकते हैं।


Stay home, stay safe, stay warm

Wednesday, 4 January 2023

Short story : मृत्यु अनबुझ पहेली

 मृत्यु अनबुझ पहेली 


हरिराम के पिता जी ब्रह्मलीन हो गए, वो ईश्वर के बहुत बड़ा भक्त थे। 

हरिराम पिता जी का बहुत आज्ञाकारी पुत्र था, और वो उनसे बहुत प्रेम करता था। अपने पिता जी की तरह, वह भी ईश्वर भक्त था।

पिता जी के आकस्मिक चले जाने से हरिराम बहुत विचलित हो उठा।

वो ईश्वर की कठीन तपस्या में लीन हो गया। उसकी दिन-रात कठिन तप से उससे ईश्वर प्रसन्न हो गए।

ईश्वर ने हरिराम से पूछा, तुमने किस कारण से मेरा तप किया, वो कहो। 

मैं तुम्हारी इच्छा पूर्ण करने आया हूं।

हरिराम बोला, मुझे कुछ भी भौतिक पाने की कामना नहीं है।

तब किस की कामना है? 

मेरी कामना तो मृत्यु की अनबुझ पहेली को समझने की है?

यह जीवन क्या है,? 

क्यों है? 

इन प्रश्नों के बहुत से उत्तर हैं... 

पर मृत्यु क्या है?

इस प्रश्न का उत्तर जानने की कामना लिए मैं आपके द्वार पर आया हूं।

शरीर का पंचतत्व में विलीन हो जाना, क्या  यह मृत्यु है?

नहीं, बिल्कुल भी नहीं, पुत्र...

चलो, जिस कामना से तुमने तप किया है वही बताता हूं।

क्योंकि अगर यही मृत्यु होती, तो मानव जन्म, अन्य जीवों के जन्म से श्रेष्ठ कैसे है?

शरीर का आत्मा से विलग हो जाना, मोक्ष का या एक और जन्म का पर्याय हो सकता है

पर कदापि मृत्यु नहीं... 

मृत्यु, तो उसकी होती है, जिसने जीवन भर कोई भी ऐसा कार्य ना किया हो, जिससे वो रहे या ना रहे, कोई उसे याद ना करता हो, उसकी बात ना करना चाहता हो।

क्योंकि ऐसा प्राणी तो जीवित होने के बाद भी मृत प्राय है।

जिसने अपना पूरा जीवन, निज स्वार्थ में व्यतीत ना कर के, परिवार, समाज और देश को समर्पित कर दिया हो, उसकी कभी मृत्यु नहीं होती है। 

क्योंकि वो हरदम, हर पल, लोगों की बातों में, यादों में, सपनों में, किस्सों में, कहानियों में, प्ररेणा में, उम्मीदों में बना रहता है, अमर रहता है।

जीवन तो क्षणिक है और मृत्यु एक सत्य है, अवश्यसंभावी है। जिसे आना ही है।  

तब प्रभु, किस जीवन को सफल जीवन कह सकते हैं?

वह जीवन, जो  निज स्वार्थ में ना लिप्त हो... 

फिर वो परिवार के लिए, समाज के लिए या देश के लिए हो, पर मानव जीवन को अपने विचार और संस्कार से, सार्थक करते रहना चाहिए।

तुम्हें पता है, मेरी प्राप्ति के लिए भी, कठिन तप की आवश्यकता नहीं है।

तब किस की आवश्यकता है प्रभु?

सिर्फ और सिर्फ अपने जीवन को सार्थक करने की, उसके लिए नित ऐसे सत्कर्म करने की, जिससे, सब की भलाई होती चले। और साथ ही हर किसी को तुम्हारी कामना रहे।

अगर तुम्हें सब याद करें, चाहे तुम रहो या ना रहो, बस वही जीवन है, बाकी जो है बस वही मृत्यु है और यही तुम्हारी अनबुझ पहेली का उत्तर है।

यह कहकर प्रभु अंतर्ध्यान हो गए।

क्षण भर बाद बहुत सारे लोग, उसके दुःख में शामिल हो गए। वे सभी उसके पिता जी के सद्कर्मों का उल्लेख कर रहे थे। वो उनके द्वारा किए गए, सद्कर्मों के लिए कृतार्थ हो रहे थे। साथ ही उनकी सद्गति की कामना कर रहे थे और ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे कि उनके जैसे सद् पुरुष वह भी बने।

हरिराम को अब अच्छे से समझ आ गया था कि जीवन और मृत्यु क्या है। 

उसके पिता जी ने सिर्फ शरीर त्याग दिया है, पर उनकी मृत्यु नहीं हुई है, क्योंकि वो विचार और संस्कार बनकर उसमें जीवित हैं।

और ना केवल उसमें बल्कि उन सब में, जिस जिस का, जीवन उन्होंने संवारा था।