Thursday, 18 May 2023

Story of Life : रिश्तों की हद (भाग -2)

रिश्तों की हद (भाग -1) के आगे...

रिश्तों की हद (भाग -2)




कौन इतना झंझट पाले?..

जरुरत में तो हम भी एक दूसरे के काम आते हैं, वो क्या यह झंझट है श्यामली, रितिका ने प्रश्न किया? 

नहीं रितिका मेरे कहने का मतलब तुम समझी नहीं...

क्या मतलब है तुम्हारा श्यामली? 

जब तक शादी नहीं होती है, तब तक ही घर और परिवार होता है। एक बार शादी हो जाए, उसके बाद तो...

उसके बाद क्या?

ससुराल वालों के लिए तो कितना ही कर लो, वो कभी अपने नहीं होते...

तुम्हारे जैसा ही अगर तरूण भी सोचे, तब तो तुम्हारा भी परिवार छूट जाएगा।

हाँ... तभी तो हम लोगों ने अब सब से मतलब रखना ही छोड़ दिया है, श्यामली ने बड़ी ही लापरवाही से कहा..

अपने मां-पापा, भाई-बहनों को भूला पाना, इतना आसान है क्या? 

वो तो हम लड़कियों को पीछे छोड़ कर आना ही होता है, कौन सा ससुराल वाले, यह पसंद करते हैं कि हम मायके से जुड़े रहें।

और जब उनसे नहीं जुड़कर रहना, तो इनसे जुड़कर क्या करना।

इनसे जुड़ो, फिर दुनिया भर के इनके नियम कानून मानों, इनके कहे जैसे, उठो-बैठो, यह सब,बस झंझट ही पालना है...

तो क्या तुम्हारे ससुराल वाले, बहुत ख़राब है?

ख़राब... वो तो मैंने कभी जानने की कोशिश ही नहीं की...

क्या?

जानकर करना ही क्या है? जब हमें उनसे कुछ मतलब ही नहीं है...

जब जरुरत पड़ेगी, तब साथ कौन देगा?

साथ देने के लिए ही तो हो, तुम सारे दोस्त.. हमारे अपने, हम जैसी सोच वाले, दुनिया के दकियानूसी नियम कानून से परे...

कितनी खूबसूरत है यह दुनिया!

नहीं श्यामली, तुम ग़लत सोच रही हो..

क्या ग़लत? बताओ तो, क्या तुम सारे दोस्त, हमारे अपने नहीं हो? क्या तुम हमारी जरूरत में काम नहीं आओगे?

आगे पढ़े रिश्तों की हद (भाग -3) में...

Wednesday, 17 May 2023

Story of Life: रिश्तों की हद

रिश्तों की हद 


श्यामली और तरुण की नई-नई शादी हुई थी। दोनों को ही एक दूसरे का साथ बेहद पसंद था।

शादी के बाद दोनों एक-दूसरे में ऐसे खोए कि दोनों को ही घर-परिवार से कोई मतलब नहीं रहता। ना किसी से मिलना, ना किसी से फोन पर बात करना। दिन भर मौज-मस्ती, बस यही ध्येय बना लिया था उन दोनों ने।

और इस बात में इजाफा तब से और ज्यादा हो गया, जबसे अपने जैसे ही दोस्त बना लिए। पहले तीज़-त्यौहार, Birthday-Anniversary में तो घर-परिवार में बात कर भी लेते थे। पर अब तो मिलना तो दूर, महीनों हो जाते थे, किसी से फोन पर बात करें हुए भी। 

पर इस बात का, श्यामली और तरुण को लेश मात्र भी दुःख नहीं था।

जिंदगी सुकून से कट भी रही थी। 

एक दिन तरुण का road accident हो गया, श्यामली और दोस्त लोग उसे लेकर अस्पताल पहुंच गए। 

Knee fracture हो गया था। Doctor ने तुरंत operation बोल दिया था। सुनकर श्यामली के हाथ-पांव फूल गए।

श्यामली की दोस्त रितिका बोली, श्यामली, तुम घर में सबको बता दो, कोई घर से आ जाएगा... 

और हाँ घबराना नहीं, उनके आने तक हम सभी दोस्त तुम्हारे साथ हैं, तुम्हें कभी अकेला नहीं लगने देंगे। 

श्यामली बोली, रितिका जब तुम लोग हो तो, किसी और की क्या जरूरत?

तुम लोगों से अच्छा हमारे लिए क्या कोई और होगा? 

फिर हमारी सोच भी मिलती है। हम कितने sort and cool हैं... कौन उन लोगों को बुला कर झंझट ले। फिर आज वो आएंगे तो कल उनको जब जरुरत हो, तो उनके में हमें जाना होगा... 

कौन इतना झंझट पाले?..

जरुरत में तो हम भी एक दूसरे के काम आते हैं, वो क्या यह झंझट है श्यामली, रितिका ने प्रश्न किया? 

नहीं रितिका मेरे कहने का मतलब तुम समझी नहीं...

क्या मतलब है तुम्हारा श्यामली?

आगे पढ़ें, रिश्तों की हद (भाग -2) में..

Tuesday, 16 May 2023

Short story: सुकून

सुकून



रवि का मन, आज कुछ खिन्न सा था, राधा ने मिलने का वादा किया था, पर ना जाने क्यों नहीं आई थी, फिर फोन भी तो नहीं उठा रही थी कि ना आने की वजह पता चलती...

सड़क पर अपनी ही धुन में सुस्त सा चला जा रहा था, कि सामने से एक कार बड़ी तेजी से उसके पास आकर रुकी।

उसमें से बहुत शोर मचाते हुए, तीन लड़के और एक लड़की बाहर निकली। 

ऐ राधा...

राधा!.. नाम सुनते ही जैसे रवि अपनी तंद्रा से जागा.. 

पर यह उसकी राधा नहीं थी..

Actually, उनमें से एक लड़के का Birthday था, इसलिए ही बाकी दोस्तों जोश में जश्न मनाते हुए खुश हो रहे थे। 

सड़क किनारे कुछ गरीब बच्चे सो रहे थे, उस शोर से वो उठ गए।

वहीं सड़क पर ही मस्ती में उन लोगों ने cake, cut किया और लगे सब Birthday boy के मुंह में केक मलने, फिर उसके कपड़े में केक मल रहे थे। 

केक मलना, ख़त्म हुआ तो सब एक दूसरे पर केक फेंकने लगे, इस तरह से पूरे एक किलो केक को उन लोगों ने बर्बाद कर दिया। 

फिर जिस तरह से वो शोर-शराबा करते हुए आए थे, वैसे ही चले भी गए। 

सड़क पर ना जाने कितना केक बिखरा पड़ा था और पसरी हुई थी बच्चों के चेहरे पर मायूसी, साथ ही केक को देखकर उनके मुंह में आया पानी, जिसे वो गरीबी और बेबसी का कड़वा घूंट समझकर पी गए थे। 

रवि वहीं खड़ा सब देख रहा था, यह दुखदाई दृश्य देखकर उसके अंदर कुछ टूट गया और कुछ टूटन...

कुछ देर बाद, वो उन बच्चों के पास खड़ा था, अपने हाथ में कुछ लिया हुआ। उसको अपने नजदीक खड़ा देखकर बच्चे फिर से जाग गये।

उसने बोला, आज मेरा Birthday है, क्या तुम लोग मेरी केक पार्टी में शामिल होंगे?

बच्चे एक दूसरे का मुंह देख रहे थे, उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि वो केक पार्टी में शामिल हो सकते हैं। साथ ही अभी थोड़ी देर पहले हुई केक बर्बादी पार्टी का वो हिस्सा भी नहीं बनना चाह रहे थे।

बच्चों की भूख, मायूसी, डर और दुःख को रवि ने भांप लिया, उनका दिल रखते हुए उसने बात बनाई और बच्चों से कहा, अरे यह वो वाला केक नहीं है, जो तुम लोगों ने अभी देखा था, वो तो ख़राब था, इसलिए ही तो वो लोग फेंक गए।

इसके साथ ही वो बच्चों के पास बैठ गया, उसने केक का डिब्बा खोल दिया। 

केक और उसकी खुशबू से बच्चे और ललचाने लगे, पर कदम आगे बढ़ाने के असमंजस में वो अभी भी वहीं खड़े थे। 

रवि ने हंसते हुए, बड़े प्यार से कहा, बच्चों मेरे पेट में चूहे धमा-चौकड़ी कर रहे हैं, तुम लोग जल्दी से मेरे पास नहीं आए तो मैं सारा केक खा जाऊंगा। 

रवि का इतना कहना था कि बच्चों ने उसे घेर लिया। रवि ने केक काटा और सारे बच्चों में केक बांट दिया।

वो बच्चे, ऐसे केक खा रहे थे, मानो उन्हें ऐसा कुछ मिल गया हो, जिसकी उन्होंने सपने में भी कल्पना नहीं की थी।

उनके चेहरे की खुशी, देखते ही बनती थी। उनकी उस खुशी को देखकर रवि को आत्मिक शांति मिली। 

उसके इस झूठ-मूठ की Birthday ने उसे असीम सुख प्रदान किया। उसके मन की खिन्नता जाती रही, और जो टूटन थी...वो जैसे कहीं जुड़ सी गई थी...

उसने अपने आप से वादा किया कि अब से अपनी सारी Birthday, ऐसे ही लोगों के साथ celebrate किया करेगा, जिन्हें ऐसी अच्छी चीजें खाने को नहीं मिलती।

साथ ही जब भी दुःखी होगा, इन बच्चों की हसरतें पूरी करने आ जाएगा, जो उसे बहुत सुकून देगी।

वो, बच्चों से फिर मिलने का वादा करके, वहां से चला गया। बच्चे बहुत प्यार और कृतज्ञता से रवि को जाते हुए ऐसे देख रहे थे, जैसे कोई फरिश्ता उनसे मिलकर जा रहा हो।

बच्चों को तृप्ति और रवि को सुकून मिल था, जो दोनों के लिए अनमोल था...

बहुमूल्य अन्न बर्बाद करने से नहीं, भूखे लोगों को खिलाने से सुकून मिलता है...