Monday, 24 July 2023

India's Heritage : महर्षि दधीचि- अस्थियों के दानी

हमारा भारत, हमारा सनातन, हमारा हिन्दुत्व, भरा पड़ा है कौतूहल से, अविश्वसनीय सत्य से... ऐसी कई कहानियों से, जिनमें से कुछ हमने सुनी हैं, तो कुछ कभी सुनी ही नहीं होगी।

आज अपने विरासत के इस अंक में आपको एक ऐसी ही कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो जितनी अविश्वसनीय है, उतनी ही रोचक भी,  कुछ ने सुनी होगी पर कुछ लोगों ने नहीं भी सुनी होगी... 

महर्षि दधीचि-  अस्थियों के दानी 



कहानी है महर्षि दधीचि की, महर्षि दधीचि  बहुत ही उच्च कोटि के ऋषि थे। जो सदैव जप-तप व साधना में लीन रहते थे।

एक बार देव व असुर में भयंकर युद्ध छिड़ गया। वृत्रासुर ने स्वर्ग पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। किसी भी तरह से युद्ध जीतने के कोई आसार नहीं दिख रहे थे। 

सभी देवता अपनी व्यथा लेकर ब्रह्मा, विष्णु व महेश के पास गए, लेकिन कोई भी उनकी समस्या का निदान न कर सका। 

बाद में ब्रह्मा जी ने देवताओं को एक उपाय बताया कि पृथ्वी लोक में 'दधीचि' नाम के एक महर्षि रहते हैं। यदि वे अपनी अस्थियों का दान कर दें और उन अस्थियों से एक वज्र बनाया जाए तो उसकी सहायता से युद्ध जीता जा सकता है। 

कैसी विचित्र बात है कि, हम मनुष्य अपनी हर मुश्किलों के हल के लिए देवताओं के शरण में जाते हैं और उन्हीं देवताओं को अपनी मुश्किलों के हल के लिए एक मनुष्य की शरण में आना था। 

पर सोचने वाली बात यह है कि अगर ऐसा था तो वो मनुष्य, साधारण मनुष्य तो हो ही नहीं सकता, वो कोई विशेष विभूति ही होंगे.... 


कभी-कभी भगवान को भी,

भक्तों से काम पड़े।

जीतना था युद्ध तो,

देवता दधीचि के द्वार खड़े।


तो ऐसे विशेष विभूति, महर्षि दधीचि के पास देवता पहुंचे और उन्होंने बहुत सकुचाते हुए, महर्षि को अपनी व्यथा बताई और कहा कि युद्ध जीतने के लिए उन्हें उनकी अस्थियों का दान चाहिए... 

आप समझ रहे हैं, उनसे एक ऐसे दान की कामना की गई थी, जिसे देने के लिए महर्षि दधीचि जी को अपने शरीर का त्याग करना पड़ता...

और यह दान मांगने वो इंद्र देव आए थे, जो यह सोचते थे कि महर्षि दधीचि, इसलिए जप-तप करते हैं, क्योंकि उन्हें स्वर्ग की कामना है।

 यहां तक कि उनके वध के लिए एक बार इंद्र देव ने अपनी सेना भी भेजी थी, वो अलग बात है कि इंद्र देव की सेना महर्षि दधीचि के तप व परोपकार की दीवार तक भी नहीं भेद पाई थी, तो उनके निकट क्या ही पहुंच पाती, और वध वो तो बहुत दूर की बात है...

महर्षि दधीचि, वेद शास्त्रों आदि के पूर्ण ज्ञाता थे। वो जितने बड़े तपस्वी थे, उतने ही दयावान और सरल व्यक्ति भी थे।

वो इतने महान थे कि, उन्होंने इंद्र देव की करनी पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया। वो देवताओं का दुःख दूर करने के लिए शरीर भी त्यागने को तत्पर हो गये..

जहां सभी, धन-दौलत तक दान करने से पहले भी कई बार सोचते हैं। अपने घर परिवार के लिए पहले सोचते हैं, बाद में अन्य किसी के बारे में, वहीं महर्षि दधीचि जी ने किसी के बारे में कुछ नहीं सोचा। यहां तक कि उनकी पत्नी गर्भवती थीं, पर महर्षि दधीचि ने अपनी पत्नी की भी चिंता नहीं की व तप में लीन होकर शरीर त्याग दिया और अपनी अस्थियां देवताओं को दान कर दी।

कुछ किंवदंतियों के अनुसार, यह एक कठिन प्रश्न था कि, महर्षि दधीचि जी के शरीर से देह हटाकर अस्थियां निकालने का कार्य कौन करेगा। 

क्योंकि जितना कठिन था महर्षि दधीचि जी से अस्थियों का दान मांगना, उससे भी ज्यादा कठिन था, ऐसे तपस्वी, दयालु परोपकारी और ज्ञानी ऋषि के शरीर से देह और अस्थियों को अलग करना...

तब इस समस्या का समाधान करते हुए महर्षि दधीचि जी ने अपने शरीर पर मिष्ठान्न का लेपन किया और समाधिस्थ हो गए। 

कामधेनु गाय ने उनके शरीर को चाटना आरंभ कर दिया। कुछ देर में महर्षि के शरीर की त्वचा, मांस और मज्जा उनके शरीर से विलग हो गए। मानव देह के स्थान पर सिर्फ उनकी अस्थियां ही शेष रह गईं। 

जिन्हें देवता अपने साथ ले गए...

जैसे महर्षि दधीचि महान थे, वैसी ही पतिव्रता उनकी पत्नी गभस्तिनी भी थीं।

अतः जब उनकी पत्नी गभस्तिनी को पता चला कि महर्षि दधीचि ने देह त्याग दी है तो उन्होंने अपने गर्भ को पीपल के कोटर में रख दिया और महर्षि दधीचि के साथ सती हो गई। 

देवताओं के राजा इन्द्र के लिए विश्वकर्मा जी ने महर्षि दधीचि की रीढ़ की हड्डियों से वज्र बनाया। जिसकी सहायता से, देवताओं ने युद्ध में विजय प्राप्त की। 

पर देवताओं के इस विजय अभियान में, महर्षि दधीचि व गभस्तिनी का पुत्र पैदा होने से पहले ही अनाथ हो गया। क्या हुआ उनके पुत्र का? कैसे उसका जीवन व्यतीत हुआ? जानते हैं विरासत के अगले अंक में...

महर्षि दधीचि के पुत्र की कहानी तो अपने पिता से भी अधिक अविश्वसनीय और रोचक है.. आप सबसे अनुरोध है, उसे भी अवश्य पढ़िएगा, वह कहानी, बहुतों की अनसुनी कहानी होगी...

तब तक के लिए...

जय हिन्दुत्व जय भारत 🕉️ 🇮🇳

Friday, 21 July 2023

Article : जिंदगी में मज़े कीजिए

आजकल, जिसको देखो, वही depressed है, परेशान है, दुखी है, उलझा और थका हुआ है। तो आज एक ऐसा article डाल रहे हैं, जिसे दिल से पढ़िएगा, यह आपको एक ऐसी दुनिया में ले जाएगा, जहां सुकून है, सफलता है, नाम है, यश है और संतुष्टि भी है...

कुछ दिन पहले एक article डाला था, Have Fun( मज़े कीजिए) उसे आप सबने बहुत सराहा है, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद!  इसलिए आज यह article लिख रहे हैं, जो आपको जिंदगी के और करीब ले जाएगा...

जिंदगी में मज़े कीजिए  

   

हमारे पतिदेव और बेटा दोनों ही workaholic हैं, साथ ही साथ जिन्न भी हैं...

आप बोलेंगे कि workaholic तो समझ आया, पर जिन्न?...

जिन्न, मतलब जो भी काम दो, वो perfection के साथ बहुत जल्दी खत्म कर लेते हैं कि अब दूसरा काम बताओ... 

हमने आपको उनकी यह विशेषता क्यों बताई, आप आगे correlate कर लेंगे...

हम अपने पति, बेटी, बेटा, जो भी अपने work place पर जाते हैं, उनको जाते वक्त कहते हैं, जाइए मज़े कीजिए... 

बच्चे अभी छोटे हैं, job नहीं कर रहे हैं, college and school जाते हैं, पर बच्चों का work place तो वहीं है ना...

रोज़-रोज़ यह सुनकर, एक दिन पतिदेव बोले, तुम्हें क्या लगता है हम लोग मज़े करने जाते हैं? 

इतना काम रहता है कि सिर उठाने की फुर्सत नहीं है, सुबह से शाम तक में हालत ख़राब हो जाती है। बच्चे भी अपनी पढ़ाई में व्यस्त हैं तो मज़े काहे बात के? ऐसा वो तब बोल रहे थे, जबकि वो सब workaholic और जिन्न हैं..

हमने कहा, ठीक है नाराज़ ना होइए, पहले आप के मज़े कैसे होते हैं, वो बताते हैं.. 

आप जब office जाकर अपना काम perfection के साथ करते हैं तो आप की तारीफ होती है, सभी आपको सम्मान देते हैं, आपका एक अस्तित्व है, एक पहचान है। आपको आपके work performance के लिए handsome salary मिलती है। कितने लोगों से मिलने का मौका मिलता है, उनके विचार जानने को मिलते हैं और कितने ही लोग आपके विचारों को समझते हैं, उन्हें साझा करते हैं। मतलब आपको name, fame, wealth सब मिल रहा है, वो मज़े ही तो हैं..

यह सब तब मिलते हैं, जब दुनिया भर का काम करो और stress लो, ऐसे ही नहीं मिल जाते हैं...वो अभी भी नहीं मान रहे थे..

बिल्कुल बिना काम के कौन पूछता है, पर इससे यह सिद्ध होता है कि आप अपने काम में perfect हैं, आप deserve करते हैं कि वो सब आपको मिले जो आपको मिल रहा है, वो आप को कामचोरी, बेइमानी या किसी source के कारण नहीं मिल रहा है। आपकी मेहनत, लगन और ईमानदारी के कारण मिल रहा है।

आपको ईश्वर ने इस लायक बनाया है कि सफलता को प्राप्त करें, जीवन में मज़े करें, क्योंकि जब किसी भी व्यक्ति को अपने कर्म का मूल्य मिलता है वो मज़े का ही पर्याय होता है। 

अच्छा चलो, बच्चों का बताओ...

बच्चे अगर पढ़ने जा रहे हैं तो यही, यह सिद्ध करता है कि वो मज़े करने जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें वो करने को मिल रहा है, जो उन्हें इस उम्र में मिलना चाहिए...

उसके साथ ही ज्ञान, अच्छे teacher, friends, एक अच्छा atmosphere, playground etc भी उन्हें मिलता है... उन्हें ईमानदारी से अपनी पढ़ाई करनी है और stress free life गुजारनी है, तो हुए ना मज़े...

अच्छा तो मतलब, बाहर जाने वाले सबके मज़े होते हैं... और मज़े नहीं होते हैं, तो केवल house wife के ना? 

नहीं... हमने कब कहा? काम तो उनके पास बेइंतहा होता है, फिर भी उनके भी मज़े हैं, वो सबको भेजकर, खुद घर में रह जाती हैं। इस त्याग से उन्हें आत्मसंतुष्टि मिलती है कि घर के हर एक सदस्य की जिंदगी में शामिल हैं, उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचने में...

साथ ही उनका कोई Boss नहीं होता है, वो किसी दूसरे के लिए काम नहीं करती हैं वो अपनी मालकिन खुद होती हैं। वो दिन भर के तमाम कामों को अपने हिसाब से कब करना है, decide कर सकती हैं। जब चाहे काम करें, जब चाहे तब आराम... बस इतना ध्यान रखना रहता है कि सब काम हो जाए, तो हुए ना मज़े... 

पर उनके मज़े तब ज्यादा हैं, जब उन्हें house wife नहीं Home maker समझा जाए, और इतना तो वो deserve भी करती हैं, क्योंकि वो हैं तभी सब अपनी जिंदगी में सफलता पाते हैं, मज़े करते हैं।

वाह! क्या बात है, मतलब सब मज़े कर रहे हैं?..

बिल्कुल सब अगर इस दृष्टिकोण से सोचें तो सब मज़े ही कर रहे हैं और वही करना भी चाहिए, क्योंकि आप को अपने सभी कार्य और कर्तव्यों का पालन तो करना ही है। फिर दुखी होकर क्यों करना, मज़े लेकर ही करें... 

दूसरों को कोसकर या उनसे जलकर करने से क्या होगा, सिवाय अपने दुःख बढ़ने के...

इसलिए आप अपने सभी काम को खुश होकर मज़े लेकर कीजिए, देखिएगा जिंदगी खुबसूरत लगने लगेगी... कभी परेशानी भी आए, और वो तो आएगी ही, क्योंकि जिंदगी सुख दुःख का नाम है... तो उसका भी डटकर मुकाबला कीजिए, तो परेशानी भी आपको छोड़ कर जल्दी चली जाएगी...

तो बस जिंदगी में मज़े कीजिए, चाहें आप जिस भी किरदार को निभा रहे हों, वो सफल ही होगा। 

एक बार इस नजरिए से जी कर तो देखें, जिंदगी ज्यादा खुबसूरत और खुशनुमा लगेगी

 

जिंदगी छोटी सी है

ना जाने कब 

शाम हो जाए

काम तमाम हो जाए 

पर वो वक्त आए 

उससे पहले

जिंदगी में मज़े कीजिए...  

क्योंकि अपनों का साथ

बार बार नहीं मिलता

सुख का यह संसार

बार बार नहीं मिलता...

तो बस मज़े कीजिए...

हम जब job करते थे, जब Home maker थे और अब जबकि एक blogger हैं, हम सब ही रूप में मजे के साथ ही जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं। सुख दुःख सभी के साथ, क्योंकि वो तो जिंदगी का हिस्सा है, सबकी ही कहानी का किस्सा है... 

पर जब से आप सबका साथ मिला है, उसने हमारी जिंदगी सुख से भर दी है, अनेकानेक आभार के साथ

सुखी रहें, स्वस्थ रहें, सफल‌ रहें, प्रसन्न रहें 😊

Thursday, 20 July 2023

Article: International Chess Day

आज का article, उन सभी बच्चों के लिए है, जो life में कुछ बड़ा पाना चाहते हैं।

यह हम किस आधार पर बोल रहे हैं, यही सोच रहे हैं ना आप?

तो हमारा यह कहना इसलिए है क्योंकि हमेशा से यह thumb rule रहा है कि, जिसको कुछ बनना है, उसे बहुत ज्यादा पढ़ना चाहिए। अच्छी पढ़ाई ही आपको अपने सपने सार्थक कराने में कारगर सिद्ध होती है।

होती है, बिल्कुल होती है। लेकिन सिर्फ पढ़ते रहने से आप अपने goal को तो achieve कर सकते हैं पर जल्दी नहीं कर सकते हैं।

अगर आप को अपना जल्दी goal achieve करना है तो उसको हासिल करने के लिए आप को कोई दो खेल को भी चुनना होगा। 

एक indoor और एक outdoor...

आप कहेंगे कि ऐसा क्यों?

तो हम बताते हैं कि इसके पीछे scientific reason है...

हमारा दिमाग एक ही सी चीजें करते-करते जल्दी थक जाता है। उसका एक कारण, एक ही चीज़ करते हुए बोरियत होना भी है।

जबकि खेल खेलने से आपका mind fresh हो जाता है। तो वो पढ़ाई में अधिक concentrate कर पाता है।

अब आपको बताते हैं, indoor and outdoor games क्यों...

सबसे पहली बात तो यह है कि कोई भी games हो, उसे जीतने के लिए, different strategies and skills लगती है। जो कि हमें difficulties से निकलना सिखाती है।‌‌ हमें जीतना सिखाती है...

अब outdoor games and indoor games  कैसे helpful है, वो देख लीजिए।

Outdoor games से हमारी bones and muscles strong होती है, जिससे हमारा stamina strong होता है। हम पढ़ने में अधिक मेहनत कर सकते हैं।

जबकि indoor games से हमारे mind की sharpness बढ़ती है। हमारी thinking power बढ़ती है। mentally हम strong होते हैं।

यहां indoor games का मतलब online games, video games, etc. से बिलकुल नहीं है।

हां तो आप अपने बच्चे की पसंद के अनुसार कोई भी games उन्हें ज़रूर से खेलने को प्रेरित कीजिए। जैसे

Outdoor में cricket, football, hockey, badminton, tennis, swimming etc..

Indoor में Chess, carom board, battle ship, jenga, बहुत छोटे बच्चे हैं तो Ludo, snake and ladder, etc...

हमारे घर में indoor games में mostly mind game खेलें जाते हैं, जिसमें से एक chess भी है। Chess, indoor games में खेले जाने वाले brain games में सबसे ज्यादा well known and popular game है।

हमारे पापा जी बहुत अच्छा chess खेलते थे तो उन्होंने हम सब भाई-बहनों को इसे सिखाया...

Husband के दादा जी भी बहुत अच्छा chess खेलते थे तो उनसे पति जी भी अच्छा chess खेलना सीख गये।

जब chess हम दोनों का ही favourite game है तो फिर बच्चों को तो इस खेल में रुचि होनी ही थी...  

International Chess Day

आज‌ international chess day है, और हम लोगों का favourite game भी, तो आज उस पर लिखना तो बनता ही है। 

पर आज यह article लिखने का बड़ा कारण यह है कि यह एक भारतीय खेल है, जो बहुत कम लोग जानते हैं। 

बहुत से लोग इसे अरब का, तो वहीं कुछ इसे यूरोप का खेल समझते हैं।

उन सबको बताना है कि शतरंज, भारतीय खेल है। यह हमारे राजा-महाराजाओं के समय से खेला जा रहा है। वैसे भी जहां बल, बुद्धि, विद्या, ज्ञान, विज्ञान से जुड़ा कुछ भी है, उसका आरंभ हमारे भारत से ही होता है, भले ही कालान्तर में उसकी प्रसिद्धि के बाद उसे किसी अन्य देश से जोड़ दिया जाए...

शतरंज दो खिलाड़ियों के बीच खेला जाने वाला एक खेल है। खेल की शुरुआत 7वी शताब्दी के आसपास चतुरंग नाम से भारत में हुई थी, जो बाद में अरबी लोगो ने यूरोप में फैला दी। शतरंज का आधुनिक रूप यूरोप में 15वी शताब्दी के आखिर में बना। 

आज, chess world का most popular game है, जिसे पूरे विश्व में लाखों लोग खेल रहे हैं।

शतरंज एक रणनीति खेल है जिसमें कोई छिपी हुई जानकारी शामिल नहीं है और इसमें dice or card का भी कोई इस्तेमाल नहीं है। इस्तेमाल है तो बस चंद मोहरे और आप के दिमाग का...

Chess, दो players के द्वारा खेले जाने वाला एक board game है। जिसमें White and Black रंग के मोहरे (chess pieces) होते हैं। 

इसमें हर players के एक राजा, एक रानी, ​​दो हाथी, दो ऊंट, दो घोड़े, और आठ सिपाही। एक तरह से देखा जाए तो युद्ध के लिए पूरी army...

इसमें खेल रहे players में से जिसके white chess pieces होते हैं वो पहले चलते है, उसके बाद black। 

इसमें players को एक colour की choose की गई  army chess pieces को control करते हुए, ऐसे move करना होता है कि opponent के king को checkmate (ऐसी मात, जिसमें राजा के बचने के लिए कोई move ना बची हो) कर दें व जीत हासिल करें।

19th century से organized तरीके से chess खेला जाने लगा। आजकल chess competitions को internationally FIDE (the International Chess Federation) द्वारा govern किया जाता है। 

1886 में Wilhelm Steinitz को विश्व का पहला World Chess Champion कहा जाता है। Ding Liren को current World Champion कहा जाता है। 

Chess का connection दूसरी fields के साथ भी माना जाता है, जैसे mathematics, computer science, and psychology.... Means जो chess खेलता है, उसके maths, computer science and psychology में भी अच्छी पकड़ होगी। उसके यह subjects strong होंगे...

आप से यही कहेंगे कि अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा intelligent and sharp हो तो उसे chess game ज़रूर सिखाएं और अगर वो chess का world champion बन जाए तो बात ही क्या..

तब उसे chess से wealth, name, fame, सब मिल जाएगा। 

विश्वनाथन आनंद ने भारत से शतरंज में पहला विश्व चैंपियन बनने का इतिहास रचा। विश्वनाथन आनंद 2007 से 2013 तक खेल पर हावी रहे और उन्होंने 2000, 2007, 2008, 2010 और 2012 में पांच बार world championship जीती और 2007 से निर्विवाद विश्व चैंपियन रहे। 

हमें अपने बच्चों को उनकी तरह ही आगे ले जाना है और chess में world champion बनाना है, क्योंकि जब खेल हमारा है तो world champion भी हमारा ही होना चाहिए...

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳