Friday, 26 April 2024

Article : चुनाव का पर्व, देश का गर्व

चुनाव का पर्व, देश का गर्व

आज चुनाव का दूसरा चरण था, जिसमें उत्तर प्रदेश के बहुत सारे शहरों के साथ ही हमारा गाजियाबाद भी शामिल था।

तो बस आज सुबह से ही अलग ही उत्साह था,  कि एक बार पुनः देश के प्रति अपने कर्त्तव्य को निर्वह करने का दिन आया है। 

हम लोगों का polling station बहुत ही नज़दीक है, अतः हम हमेशा पैदल ही जाते हैं। वैसे वो स्कूल गली में है, तो अधिकांशतः लोग पैदल ही आते हैं। 

घर से निकले ही थे, तो देखा कि अलग-अलग political parties के लोग वहीं से ही अपनी-अपनी table-chairs को लेकर बैठे थे, जिससे किसी को भी चुनाव से संबंधित कोई भी query हो, तो solve कर सके।

वहा BJP के कार्यकर्ता भी बहुत थे और उनके पास पहुंचने वाले लोग भी बहुत थे।

वहीं congress का अपनी table पर कार्यकर्ता भी एक था और उसके पास लगभग कोई भी नही पहुंच रहा था। बस एक औरत ही गई थी।

खैर हम लोग अपने गंतव्य की ओर चल दिए। बीच में एक और स्कूल दिखा, उसको बहुत सुन्दर फूलों से सजाया गया था और बहुत अच्छे से लोकसभा चुनाव से संबंधित सभी जानकारी भी लिखी थी। साथ ही voting करने जाने वालों के लिए red carpet बिछा था और voters के पहुंचने पर उनका स्वागत गुलाब की पंखुड़ियों से किया जा रहा था। 

वह देखकर लग रहा था कि मानो चुनाव का पर्व, देश का गर्व हो..

जब हम लोग अपने गंतव्य पर पहुंचे तो वहां कोई सजावट नही थी, पर वहां भी सब कुछ बहुत साफ-सुथरा और व्यवस्थित था। हमारा भी गर्म जोशी से स्वागत किया गया। 

सभी अपना काम प्रसन्नचित होकर सुचारू रूप से कर रहे थे। हम सफलतापूर्वक अपना vote डालकर लौट आए। 

वहां का माहौल भी ऐसा ही था, जैसे चुनाव एक पर्व हो, जिस पर पूरे देश को गर्व हो, सभी को इस का इंतजार हो, सभी इसके होने से प्रसन्नचित हों। 

ऐसा होना, किसी भी देश के खुशहाल होने का, सन्तुष्ट होने का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि देश में प्रजातंत्र सुचारू रूप से चल रहा है।

यह सब देखकर बहुत खुशी हुई। धन्यवाद देना चाहेंगे उन सभी कर्मियों को जो चुनाव के सभी कार्यों को सुचारू रूप से संचालित कर रहे हैं, वो भी प्रसन्नचित होकर... 

उनके सफल प्रयास के बिना यह सफलतापूर्वक संपन्न नही हो सकता, तो लगे रहिए सभी और देश को उज्जवल बनाए..

साथ ही आप सब भी vote अवश्य डालने जाएं और चुनाव के पर्व को देश का गर्व बनाए। 

जय हिंद जय भारत 🚩🙏

Thursday, 25 April 2024

Article : An Appeal to the Indian Government

एक appeal सरकार से

Election का दौर चल रहा है, हर राजनैतिक पार्टी बड़ी-बड़ी जीत के दावे कर रही है। 

पर कितने अपने दावे पर खरे उतरेंगे? 

शायद एक भी नहीं...

आप बोलेंगे हम ऐसा किस आधार पर बोल रहे हैं?

कारण, सिर्फ एक है, लोग पहले की तरह voting के लिए जाते ही नहीं हैं। 

जिसमें से कुछ ऐसे हैं, जो अपने अलग-अलग कारणों से नहीं जाना चाहते हैं। कुछ को voting से मतलब नहीं है, कुछ लोगों को किसी भी party को vote नहीं देना है, किसी को यह दिन छुट्टी का समझ आ रहा है, तो उन्हें या तो सोना है, या मौज करनी है। आज, हम ऐसे लोगों की बात ही नहीं कर रहे हैं।

आज तो बात उनकी कर रहें हैं, जो voting के लिए जाना चाहते हैं, फिर भी नहीं जा पा रहे हैं। और इसके लिए पूरी तरह से election commission जिम्मेदार है। 

हम यह क्यों कह रहे हैं, वो बताते हैं। 

कल ही वो slip मिली, जिसे दिखाकर हम लोग voting कर सकेंगे। हमारे घर में हम तीन लोग voting के लिए eligible हैं,  पर slip आई, सिर्फ हमारी और पतिदेव की, बेटी की आई ही नहीं... 

ऐसे ही हमारे apartment में 84 घर हैं, लेकिन voting के लिए slip आई, सिर्फ 15-16 घरों में...

तो जब voting slip ही नहीं आएगी, तो voting के लिए कैसे जाएंगे? और जब लोग जाएंगे ही नहीं, तो फिर बड़ी जीत कैसे हासिल होगी? 

इसीलिए appeal है, election commission board और current government से, कि वो देखें कि जो भी voting के लिए eligible है, उन सब को voting slip मिले।

साथ ही पहले election आने पर हर party के candidates, अपने circle area के हर घरों में जाकर मिलते थे और public से उनकी party को, उनको, vote देने की appeal भी करते थे। पूरा मोहल्ला उन candidates को जानता था। उनकी पहचान केवल अपनी party से ही नहीं, बल्कि अपनी भी होती थी।

पर आज हम जब vote देने जाते हैं, तो केवल party के नाम पर vote देकर आते हैं। जिस candidate को दिया है, उसको तो कभी देखा ही नहीं, और ना ही कभी देखेंगे। 

आखिर यह कहाँ तक उचित है? क्या कभी किसी को कोई problem आएगी, तो party का मुखिया आएगा, solve करने के लिए, क्या यह संभव है कि, हर issue main leader ही solve करे? नहीं हो सकता है... फिर आखिर क्यों नहीं आते हैं candidates, public से मिलने?

किसी एक से नहीं, बल्कि हर political  party से कहना है, कि वो अपने candidates को घर-घर भेजें, और केवल भेजें ही नहीं, बल्कि, वो candidates सामाजिक कार्यो में सक्रिय भी रहें, जिससे public उनको केवल शक्ल से ही नहीं, उनके काम से भी जाने... 

Vote चाहिए, तो इतनी मेहनत तो करनी ही पड़ेगी... सरकार को भी और political parties को भी...

यह एक appeal है हम सारी जनता की, आपको बहुमत से जीत दिलाने के लिए...

जय हिंद, जय भारत 🇮🇳🙏

Wednesday, 24 April 2024

Article : Voting, कितनी सार्थक, कितनी ज़रूरी?

Voting, कितनी सार्थक, कितनी ज़रूरी?



Voting की first stage 19 April को हो चुकी है और 26 April को second stage है। 

पर हम में से कितने ऐसे हैं, जो voting करने जाने के लिए excited हैं? 

और youngsters, उनमें तो कोई excitement ही नहीं है.., बल्कि यह कहा जाए कि, उन्हें तो यह useless or sheer wastage of time लगता है, तो भी अतिशयोक्ति नही होगी।

जबकि हमारे दादा जी, नाना जी लोग तो election वाले दिन, सुबह सबसे पहले voting के लिए ही जाते थे। उनके लिए voting एक महत्वपूर्ण काम था। 

पर ऐसा अंतर क्यों आया? जो पहले important था, वो useless कैसे हो गया? 

इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि, उन्होंने देश को गुलाम और स्वतंत्र, दोनों तरह से देखा था। वो देश की कीमत पहचानते थे, उन्हें एक-एक vote की कीमत पता थी। उनका प्रयास रहता था कि देश सशक्त और सुदृढ हाथों में रहे। इसलिए उनमें से हर एक voting करता था। 

Voting क्यों जरुरी है, और उसकी क्या सार्थकता है, यह सोचने वाली बात है... 

जो यह सोचकर voting नहीं करते हैं, कि हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, कौन आ रहा है, कौन नहीं... we are least bothered...

उनको यह बता दें कि आप के voting नहीं करने से किसी को भी फर्क नहीं पड़ता है, पड़ता है तो, सिर्फ आप को, क्योंकि आप ने अपने सबसे बड़े अधिकार को खो दिया।

Voting करने से आपकी importance बढ़ती है, आप द्वारा यह decide होता है कि, कौन select होगा... 

आप voting नहीं करेंगे, तो क्या? बाकी तो जाएंगे ही, और प्रतिनिधी उनकी पसंद के चुने जाएंगे।

फिर तो यही कहा जाएगा कि, जिनकी उँगली में निशान नहीं, उनको उँगली उठाने का अधिकार नहीं.. 

साथ ही फर्क पड़ता है पूरे देश को, जब चंद लोगों की voting से गलत प्रतिनिधी चुन लिया जाता है...

अब सोचने वाली बात यह है कि कैसे चुना जाए सही प्रतिनिधी?

यह बात तो पूर्णतः सत्य है कि, देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिन प्रतिनिधियों को चुना जाता है, वो ही देश को विकास या पतन की ओर ले जाते हैं। इसलिए हमें हर पहलू पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। 


I. Security :

देश की सुरक्षा... सुरक्षा, सबसे पहले क्यों? तो अगर आप भी यही सोचते हैं, तो एक बार अफगानिस्तान और Ukraine को याद कर लीजिएगा, वहां सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था की कमी थी, जिसने दो उन्नत और सुदृढ देशों का पतन कर दिया। 

साथ ही यह भी याद कर लें, अब से कुछ साल पहले तक, भारत पर भी आतंकवाद, पाकिस्तान और चीन से आए दिन हमले होते रहते थे, या उनका भय व्याप्त रहता था। लेकिन आज भारत में अमन और शांतिपूर्ण माहौल है, इसको voting करते समय ध्यान अवश्य रखें।


II. Economy :

दूसरा देश की अर्थव्यवस्था है... अर्थव्यवस्था क्या है? इसे समझाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योकि सब ही तो लक्ष्मी मां को सर्वश्रेष्ठ समझते हैं। बिल्कुल, जीवन की जरूरत और अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता मिलनी ही चाहिए और वो सुदृढ़ भी रहनी चाहिए। 


III. Development :

तीसरा देश का विकास, क्योंकि जब विकास होगा, तभी हम पूरी दुनिया में survive कर पाएंगे, अपने को सिद्ध कर पाएंगे। हर क्षेत्र में आगे बढ़ पाएँगे, आत्मनिर्भर बन पाएँगे। 


IV. Global Leader :

चौथा देश का विश्वविजयी होना, कोई भी देश तभी विश्वविजय बन सकता है, जब वो इन मानदंडों पर खरा उतरे। और सच कहते हैं, जो प्रतिनिधी इस सोच का हो, उन्हें ही चुनें। 

एक बार, देश को पहले रखकर और अपने स्वार्थ को पीछे छोड़कर vote डालने जाएं। क्योकि इस बात में कोई दो राय नहीं कि जब देश सशक्त और सुदृढ रहेगा तो देशवासी भी सुखी और खुशहाल रहेंगे। 

अब शायद आप भी यह समझ गए होंगे कि voting, कितनी सार्थक और कितनी जरुरी है...

जय हिंद जय भारत 🇮🇳