Friday, 3 May 2024

Story of Life: विवाह भाग - 4

 विवाह भाग - 1,

विवाह भाग -2 व

विवाह भाग-3 के आगे…

विवाह भाग - 4 



घर पहुंचने के बाद से दोनो को पहली बार यह एहसास हुआ कि वो जीवन साथी हैं।

इतना खूबसूरत जीवन साथी पाकर, संजय मौका तलाशने लगा, चंदना के निकट रहने का... 

एक दिन संजय, जब office से लौट कर आया तो वो अपनी मां से बोला, बहुत गर्मी हो रही है क्यों ना, Mango shake और आम पन्ना पिया जाए? 

ठीक है, तुम कच्चे पक्के दोनो तरह के आम लेते आना, तो मैं एक एक दिन कर के दोनो बना दूंगी, मां ने कहा।

लेते आना, नहीं मैं अभी लेकर आता हूं। साथ ही तरबूज और खरबूजा भी लेता आऊंगा।

ठीक है, लेकर आजा सब, चंदना को भी गर्मी में फलों का आनन्द मिल जाएगा।

मां, अगर आप को ठीक लगे तो चंदना को भी ले जाऊं? फलों को छांटने और पकड़ने में मदद हो जाएगी। 

ठीक है, ले जा, पर तेरे पापा जी आएं, उससे पहले आ जाना, वर्ना वो नाराज होंगे कि नई बहू को भेज दिया, काम कराने।

हां हां, मां जल्दी आ जाएंगे।

संजय, चंदना को लेकर,  सीधे रमेश चाट भंडार वाले के पास पहुंच गया।

रमेश चाट भंडार वाले को देखकर, चंदना ने प्रश्न सूचक निगाहों से संजय को देखा...

कल जब हम लोग लौट रहे तो मैंने  तुम्हें इस ओर बड़ी हसरत भरी नजरों से देखते हुए देखा था,, फलों का तो बहाना था, दरअसल तुम्हे यहां लाना था...

और फल?

वो भी ले लेंगे, पहले तुम चाट के मजे तो ले लो। 

चंदना, संजय के प्यार और care से खुश हो गई। उसने मन ही मन, अपने सब बड़ों को धन्यवाद दिया कि उन्होंने उसके लिए इतना अच्छा जीवन साथी ढूंढ के दिया।

लौटते समय वो लोग फल लेकर लौटे..

चंदना ने खाना खाने के बाद सबके लिए Mango shake बनाया।

सबको कांच का गिलास दिया, पर संजय को स्टील का।

मां ने पूछा, स्टील का क्यों दे रही हो, तो उसने बोल दिया कि कांच के गिलास खत्म हो गए थे। 

जबकि हकीकत यह थी कि उसने संजय के लिए ज्यादा गाढा Mango shake बनाया था, क्योंकि संजय को Mango shake ज्यादा आम वाला पसंद था।

दिन-दिन बीतते गये और दोनो का एक-दूसरे के लिए प्यार और care बढ़ती ही गई। 

आज उनकी 10 anniversary थी। उसमें जब रंजना बुआ आई तो दोनो ने उनका आशीर्वाद लेते हुए धन्यवाद दिया और कहा कि अगर आप ने, उस दिन हम लोगों को विवाह और उसमें भी arrange marriage का सही अर्थ  ना समझाया होता तो यह शुभ दिन भी नही आता।

और आप ने सही कहा था कि arrange marriage, बहुत सारे gift rapers में लिपटा जिंदगी का सबसे खुबसूरत gift है। जिसमें हर दिन एक नया सा लगता है।

Thursday, 2 May 2024

Story of Life : विवाह भाग - 3

विवाह भाग - 1 व

विवाह भाग -2 के आगे…

विवाह भाग - 3


मैं 2 दिन बाद, चंदना को अपने घर ले जाऊंगी, तुम भी आ जाना। 

यह कहकर रंजना ने phone काट दिया। 

चंदना और संजय दोनों की धड़कनें तेज़ हो चली थी, दोनों ही रंजना के घर में मिलने का इंतजार बेसब्री से करने लगे। 

2 दिन बाद, चंदना और संजय, रंजना के घर पर मिले। रंजना बुआ ने दोनों से कहा, तुम लोग ऐसे पवित्र रिश्ते में बंधे हो, जो सृष्टि के निर्माण में सहयोग करेगी।

तुम लोगों को एक-दूसरे से मिलवाने का काम हम सब परिजन का था, जो हमने सफलतापूर्वक संपन्न किया।

देखो बच्चों, arrange marriage इसलिए आवश्यक होती है, क्योंकि उसमें अनुभवी लोगों की सोच शामिल होती है, जो अपने बच्चों के लिए वरदान होती है। 

तुम दोनो, एक-दूसरे के पूरक हो, मैं अपनी शुभकामनाओं के साथ यहां से जा रही हूं। अब आगे का सफर तुम लोगों को सफलतापूर्वक पूर्ण करना है।

रंजना बुआ के जाने के बाद, चंदना और संजय एक दूसरे की तरफ मुखातिब हुए, पर अब उन्हें अजनबीपन का एहसास नहीं था।

शरम और झिझक तो अभी भी थी, पर साथ ही अपनापन भी लग रहा था। 

बहुत झिझकते हुए संजय, चंदना के नजदीक गया और बोला, बहुत देर हो चली है, घर चलें?

संजय के नजदीक आने से, चंदना के पूरे शरीर में एक सिरहन सी दौड़ गई और दिल की धड़कन बहुत तेज हो गई।

जी... 

हम लोग bike से चलें? Actually मैं अभी उसी से आया था।

हाँ.. 

चंचल और अल्हड चंदना अभी भी, सिमटी सकुची सी, बस हां और ना में ही जवाब दे रही थी।

दोनो जब bike से घर लौट रहे थे तो उन्होंने पहली बार एक दूसरे की छुअन को महसूस किया था, जो दोनो को ही रोमांस की अनुभूति दे रहा था।

घर पहुंचने के बाद से दोनो को पहली बार यह एहसास हुआ कि वो जीवन साथी हैं।

इतना खूबसूरत जीवन साथी पाकर, संजय मौका तलाशने लगा, चंदना के निकट रहने का...

आगे पढ़ें विवाह भाग - 4 में...

Tuesday, 30 April 2024

Story of Life: विवाह भाग - 2

 विवाह भाग - 1 के आगे 

विवाह भाग - 2  


रास्ते में बुआ जी ने पूछा भी, क्यों री लाडो, कैसे लगे जमाई सा?

कैसे? 

मुझे नही पता... चंदना ने सोच में डूबे हुए कहा..

फिर बुआ जी ने उसी समय, संजय को फोन घनघना दिया, और जमाई सा, आपके दिल में उतर गई, हमारी लाडो?...

दिल में...  थोड़ी देर शांत रहा संजय, फिर बोला...

मामी (असल में चंदना की रंजना बुआ, संजय की दूर के रिश्ते से मामी लगती थीं)

चंदना तो उस दिन ही मेरे दिल में उतर गई थी, जिस दिन मैंने पहली बार उसे देखा था।

उसकी हिरनी सी चंचल आंखें और मासूम सा खूबसूरत चेहरा, मेरे मन मस्तिष्क में बस गया है। वो धाराप्रवाह, सब बोलता चला गया, मानो जैसे बेचैन था, अपने दिल का हाल किसी को सुनाने को.. 

फिर थोड़ा ठिठककर बोला, पर आप सब बड़े लोगों ने, जिस तरह से हम लोगों की शादी की है, हम दोनों के बीच यही ख़ामोशी छाई रही, तो वो दिन दूर नहीं, जब आपकी लाडो, मेरे दिल से उतर भी जाएगी... जब संजय यह बोल रहा था, उसकी आवाज से दुख और मायूसी साफ छलक रही थी। 

बुआ जी ने mobile speaker पर रखा था, अपने पति के द्वारा की जाने वाली तारीफ से जहा चंदना, शरमा कर इतरा रही थी, वही संजय के दिल से उतर जाएगी, यह सोचने मात्र से सिहर गई। 

संजय की बात ने बुआ जी को भी सोच में डाल दिया था। 

फिर रंजना ने कहा, बेटा संजय, मैं जो बोल रही हूं, तुम सुनो, चंदना भी सुन रही है। तो सुनो दोनों, arrange marriage, जीवन में मिलने वाला सबसे खुबसूरत तोहफ़ा है, जिसमे बहुत सारे gift wrappers चढ़े होते हैं और वो धीरे-धीरे हटते हैं। पर उनका धीरे-धीरे हटना, जिन्दगी को बहुत रोमांटिक बनाता है।  

मैं 2 दिन बाद, चंदना को अपने घर ले जाऊंगी, तुम भी आ जाना। 

यह कहकर रंजना ने phone काट दिया। 

चंदना और संजय दोनों की धड़कनें तेज़ हो चली थी, दोनों ही रंजना के घर में मिलने का इंतजार बेसब्री से करने लगे।

आगे पढ़े विवाह भाग-3 में..