Wednesday, 5 February 2025

Recipe : Muradabadi Dal Papdi Chaat

आज कल की parties पहले जैसी नहीं होती है, मतलब आज कल parties में main course से ज्यादा ध्यान different stalls or starter में दिया जाता है।

इसका एक बहुत बड़ा कारण यह है कि, इसके कारण parties में variety and freshness आ जाती है, साथ ही different states की cuisine एक ही जगह खाने में मिल जाती है।

तो चलिए, हम भी आपको एक ऐसी ही dish की recipe share कर देते हैं, जो कि winter parties की शान बनी हुई है, फिर चाहे चढ़ती ठंड हो, उतरती या हो अपने परचम पर, यह अपना दीवाना सब को बनाए हुए है।

इसका कारण यह है, कि यह बहुत healthy होने के साथ-साथ tasty भी गज़ब की है।

हमारा इसको share करने का एक और कारण भी है, जिसे सुनकर आप खुश हो जाएंगे, कि यह बहुत easily prepare भी हो जाती है।  

मुरादाबादी दाल पापड़ी चाट।

नाम सुनकर लगता है कि दाल के साथ तो रोटी या चावल खाया जाता है, तो दाल के साथ यह पापड़ी चाट क्या जुड़ गया है।

तो सच मानिए, यह बहुत ही unique flavour है, healthy and tasty combination का... 

दाल का दाल और चाट की चाट...

Muradabadi Dal Papdi Chaat


A) Ingredients :

I. Main recipe -

  • Moong dal - 250 grams
  • Turmeric powder - a pinch 
  • Papdi - 100 grams
  • Amul butter - 200 grams
  • Asafoetida - ½ tsp 
  • Salt - as per taste 
  • Lime juice - as per taste 
  • Coriander leaves - for garnishing 
  • Green chilli - as per taste 
  • Green chutney - as per taste 
  • Ginger juliens - for garnishing 


II. Special masala -

  • Salt - ½ tsp.
  • Black pepper - ½ tsp.
  • Black salt - ½ tsp.
  • Roasted cumin powder - ½ tsp.
  • Amchur powder - ½ tsp.
  • Dry coriander powder ½ tsp. (coarse)
  • Chilli flakes - for garnishing 


B) Method :

  1. धुली मूंग दाल को 2 घंटे के लिए soak करने रख दीजिए।
  2. Special masala के सारे ingredients मिला कर ready कर लीजिए। 
  3. Onion, green chilli, and coriander leaves को finely chop कर लीजिए। 
  4. धनिया की चटनी पीस लीजिए।
  5. मूंग दाल को pressure cooker में डालकर soaked दाल से two times ज्यादा पानी, नमक, हल्दी डालकर 2 whistle high flame पर, और 1 whistle slow flame पर आने तक पका लें।  
  6. Pressure down होने के बाद दाल को अच्छे से whisk कर लीजिए। 
  7. अब pressure cooker को slow flame पर रख दीजिए।
  8. फिर दाल में थोड़ा-थोड़ा मक्खन डालकर बराबर चलाते रहें, जब तक इसमें दूध के जैसी मलाई न पड़ जाए।
  9. Buttery, thick and smooth texture ही पहचान है, proper दाल के बनने की...
  10. अब इस दाल में तैयार special masala, चटनी, हरी, मिर्च, हरा धनिया, ginger julien और पापड़ी से garnish कर लीजिए।

The healthy and tasty Muradabadi Dal Papdi Chaat is ready to serve...


3) Tips and tricks :

  • दाल में पानी का ratio एकदम सही रहना चाहिए। न तो अधिक, वरना दाल का सूप बन जाएगा, न ही बहुत कम की दाल में गुठलियां पड़ जाए। 
  • दाल को लगातार चलाते हुए उसका creamy texture लाना है। अगर लगातार नहीं चलाएंगे, तो दाल नीचे से लग जाएगी। 
  • दाल atleast 2 hours के लिए soak करने ज़रूर से रखें। इससे ही दाल का दाना अंदर तक फूल जाएगा।क्योंकि दाल मूंग की लें रहे हैं, इसलिए over-night soak करने की जरूरत नहीं है।
  • धुली मूंग दाल ही लेनी है, छिलका मूंगदाल या साबुत मूंग दाल लेने से smooth texture नहीं आएगा और न ही देखने में tempting लगेगी।
  • इस में धुली मूंगदाल, butter and creamy texture, perfect दाल बनने के बस यही key ingredients है।
  • दाल में बहुत अधिक butter पड़ता है, जो कि salty होता है, और garnishing में भी special masala, chutney, पापड़ी आदि डालना है, साथ ही दाल के thick होने से भी salty taste बढ़ जाएगा। तो दाल boil करते समय नमक की quantity का ध्यान रखिएगा।
  • अगर आप को इसे और अधिक healthy बनाना है तो मैदे की पापड़ी की जगह, चावल की पापड़ी भी use कर सकते हैं।
  • अगर आप को onion के बिना पसंद न आए तो आप प्याज़ भी डाल सकते हैं। वैसे authentically onion नहीं पड़ता है।
  • टमाटर और मीठी चटनी भी डाल सकते हैं, पर उनका combination बहुत अच्छा नहीं जाएगा। पर अगर आपको खट्टा-मीठा flavour ही पसंद हो तो आप फिर इसमें, खट्टी-मीठी चटनी, दही और पापड़ी को डालकर चाट बनाइएगा। लेकिन फिर वो मटर पापड़ी चाट का flavour देगी, जो मुरादाबादी दाल पापड़ी चाट से entirely different होगा।

तो सोच क्या रहे हैं, बसंत की गुलाबी ठंड की महफ़िल जमाइए, सबके साथ मुरादाबादी दाल पापड़ी चाट का लुत्फ उठाइए...

Tuesday, 4 February 2025

Article : महाकुंभ महोत्सव - सोच का फ़र्क

महाकुंभ महोत्सव, जिसकी पूरे विश्व भर में चर्चा हो रही है, आपने सोचा, कभी पहले इतनी चर्चा क्यों नहीं होती थी?

आखिर इस साल ऐसा क्या हो गया है कि देश-विदेश में बच्चा-बच्चा जानता है कि महाकुंभ हर 12 वर्ष में आयोजित किया जाता है।

आखिर कैसे हर कोई जान रहा है कि महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में होता है।

आखिर क्यों इन्हीं शहरों में आयोजित होता है।

हां, अगर आप को अभी भी नहीं पता है, तो महाकुंभ महोत्सव का article पढ़ सकते हैं।

पर इतनी अधिक चर्चा के पीछे की वजह क्या है?

महाकुंभ का आयोजन तो कांग्रेस और सपा के कार्यकाल में भी होता था...

पर इतना विशाल और भव्य नहीं। क्यों? आखिर क्यों? 

तो उसकी सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही वजह है, और वो है, सोच के फ़र्क की...

महाकुंभ महोत्सव - सोच का फ़र्क




कांग्रेस के काल में, महाकुंभ महोत्सव पर पहुंचने पर tax लगता था। आयोजन की सुव्यवस्था और सुरक्षा से उनका कोई लेना-देना ही नहीं होता था। 

उनके सोच में न तो, सनातन संस्कृति का महत्व था और न ही साधु-संत लोगों की कोई कद्र... 

नतीजा, महाकुंभ के विषय में विदेश तो क्या, देश में भी लोग बहुत अधिक नहीं जानते थे...

फिर आया, सपा का काल...

जिन्होंने राम मंदिर निर्माण न होने देने के लिए कार सेवकों को जेल भेज दिया और उस धार्मिक कार्य में, न जाने कितने लोगों की मृत्यु हो गई...

आपको लगता है कि वो समझते थे, महाकुंभ की महत्ता को?....

चलिए जब बात आई है, तो बताते हैं आपको...

महाकुंभ महोत्सव, सनातन संस्कृति का बहुत बड़ा महोत्सव होता है। अतः उसके आयोजन की सुरक्षा और व्यवस्था सुचारू रूप से हो, इसके लिए लगभग एक वर्ष का अथक प्रयास और परिश्रम चाहिए होता है।

पर सपा के काल में देखा जाए तो, उनका प्रयास कांग्रेस से तो काफ़ी हद तक ठीक था, पर पूर्णतः उचित कहना न्याय संगत नहीं होगा ।

उन्होंने जनवरी में होने वाले, इतने बड़े आयोजन की सुव्यवस्था का प्रारंभ करने के लिए नवम्बर में अनुमति दी और उससे भी बड़ी बात कि इस आयोजन का प्रमुख बनाया आज़म खां को...

यह कोई सामान्य आयोजन नहीं था कि उसका संचालन किसी ऐसे हाथों में सौंप दिया जाए, जिसको सनातन का स तक न पता हो।

जिसे न तो यह पता हो कि महाकुंभ क्यों कराया जाता है, न ही पता हो, मकरसंक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी की विशेषता का...

उसे क्या मतलब, साधु-संत लोग से? और उनके क्रिया कलापों से...

पूरी सुरक्षा व्यवस्था के लिए चंद गोताखोर ही रखे गये थे, और क्या-क्या हुआ, वो तो क्या ही कहें। 

हां, क्या नहीं हुआ, वो जरूर से बता देते हैं। एक तो अखिलेश यादव, एक दिन भी नहीं गये अपने कार्यालय के महाकुंभ महोत्सव में और दूसरा है महाकुंभ महोत्सव के सुयश की देश-विदेश में चर्चा नहीं हुई....

इस बार की सुव्यवस्था की चर्चा तो संपूर्ण विश्व में ही हो रही है, फिर चाहे बात हो रही हो, देश-विदेश से आने वाले लोगों की, या महाकुंभ महोत्सव की भव्यता और दिव्यता की...

वहां की सुरक्षा व्यवस्था की, या वहां उपस्थित साधु-संत लोगों की अखंडता की...

वहां मिल रहे पुन्य की या वहां पर व्यापार या सेवा देने वाले लोगों के लाभ की...

और यह सब संभव हो रहा है, केवल सोच के कारण...

सनातन संस्कृति के महत्व को समझने के कारण...

साधु-संत लोगों को मान देने के कारण।

अपने देश को समृद्धशाली और विख्यात बनाने की इच्छा रखने के कारण...

जब सोच सही दिशा में होगी तो कार्य भी सही दिशा में ही होगा... सफल होगा, सुव्यवस्थित होगा और संपन्नता, दिव्यता, भव्यता और प्रसिद्धि लाने वाला होगा। 

फिर प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या?

जो है सबके सामने है।

बहुत ही विशाल प्रांगण में आयोजन, मुफ़्त से लेकर बहुत महंगी व्यवस्था अर्थात् छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर के लोगों के रहने की, खाने-पीने की व्यवस्था, हर एक की सुचारू सुरक्षा के लिए 300 trained गोताखोर, श्रद्धालुओं को आने-जाने के लिए 50 हज़ार QR code लगाए गए हैं।

इस मेले में 75 हज़ार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जिसमें जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) भी शामिल हैं।

इन पुलिसकर्मियों के अलावा, कई central agencies और paramilitary forces को भी शामिल किया गया है। साथ ही NSG के commando, special task force, anti-terror squad, NDRF, NCC के commando भी तैनात किए गए हैं।

सदियों से चले आ रहे शाही स्नान और पेशवाई का नाम बदलकर, उसे अमृत स्नान और कुंभ मेला छावनी प्रवेश रखकर उसे और अधिक सनातन संस्कृति से जोड़ दिया।

ऐसा नहीं कि प्रयागराज में बिल्कुल भी परेशानियां नहीं हो रही है, सड़कों में जाम लगना, लोगों से अनाप-शनाप मूल्य की मांग इत्यादि सब चल रहा है वहां...

पर क्या इसमें पूरी तरह सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

इतनी अधिक भीड़ की व्यवस्था, मेला प्रांगण में तो है, पर किसी शहर का क्षेत्रफल तो रातोंरात बड़ा नहीं किया जा सकता है। तो उस असुविधा को समझते हुए ही महाकुंभ के लिए प्रस्थान करना होगा।

जहां तक रही, मनमाने दाम की मांग, तो वो सरासर ग़लत है, क्योंकि यह तो उस शहर के मांग रखने वाले लोगों को सोचना चाहिए, कि उनकी चंद दिनों की कमाई, उनके अपने शहर का किस तरह अपयश कर रही है। 

उनके शहर में इतना बड़ा धार्मिक आयोजन हो रहा है तो कुछ धार्मिक सोच वो भी रख लें, लोगों से उचित दाम की मांग करें, वहां आने वाले लोगों की हर संभव मदद करें, वो भी उचित मापदंडों के साथ...

क्योंकि सरकार ने तो, मेला प्रांगण तक पहुंचने के लिए मुफ्त बस सेवा दी हुई है। पर सब तो उससे नहीं पहुंच सकते हैं।

जब सोच बड़ा करने की है, तो सोचना सही दिशा में हर एक को होगा।

हर एक को सनातन संस्कृति और देश की ख्याति को सर्वप्रथम रखकर एक साथ आगे बढ़ना होगा, तभी हमारा देश सर्वश्रेष्ठ बनेगा।

जय भारत, जय सनातन 🚩

Sunday, 2 February 2025

India's Heritage : बसंत पंचमी पर्व

आज बसंत पंचमी पर्व है। इस शुभ पर्व पर आप सभी को विशेष शुभकामनाएं 💐 

कभी आपके मन में आता होगा कि बसंत की पंचमी तिथि इतनी विशेष क्यों है, कि इस दिन को विशेष पर्व का स्थान दिया गया है?

चलिए, मां सरस्वती के आशीर्वाद के साथ ही आज का article शुरू करते हैं। मां सरस्वती का आशीर्वाद ही क्यों? वो भी बताते हैं आपको... 

आरंभ उससे करते हैं, जिस का अनुभव प्रत्येक इंसान ने किया है, जिसे सबने देखा है, जो प्रत्यक्ष है...

बसंत पंचमी पर्व


1) प्राकृतिक सौंदर्य :

भारत में पूरे साल को जिन छह ऋतुओं में बाँटा जाता था, उनमें वसंत लोगों का सबसे प्रिय मौसम होता है। और प्रिय मौसम होने के विभिन्न कारण हैं।

तब फूलों पर बहार आ जाती है, खेतों में सरसों का फूल, ऐसा प्रतीत होता है मानो सम्पूर्ण धरती पर सोना चमक रहा हो, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगती है, आम के पेड़ों पर बौर आ जाती है और हर तरफ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगती हैं। फूल-फूल भंवरे भंवराने लगते हैं। 

ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति अपना सोलह श्रृंगार कर नवयौवना सी इठला रही हो। हर ओर सौन्दर्य ही सौन्दर्य दृष्टिगोचर होता है।

अतः वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन पर एक बड़ा उत्सव मनाया जाता था, जिसमें सरस्वती माता, भगवान विष्णु और कामदेव जी की पूजा होती है, और यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था।


2) माँ सरस्वती की पूजा :

मां सरस्वती विद्या, बुद्धि, ज्ञान और विवेक की देवी हैं। दूसरे शब्दों में मनुष्यों को अज्ञानता रूपी अंधकार से निकाल कर ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाने वाली देवी... जो अंधकार से प्रकाश में ले जाएं, वो ही सर्वश्रेष्ठ है। 

धार्मिक मान्यतानुसार बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। 

यही कारण है कि बसंत ऋतु की पंचमी तिथि इतनी विशेष है और माता सरस्वती की पूजा इस दिन की जाती है। भारत में कुछ स्थानों में मां सरस्वती के सम्मान में इसे सरस्वती पूजा भी कहा जाता है।

क्योंकि मां सरस्वती का दिन है, तो ज्ञान, विद्या, बुद्धि, और विवेक का भी दिन है, अर्थात् गुरु पूजन का भी दिन है। इसलिए जिस जगह भी गुरु की महत्ता ही सर्वोच्च है, उन सब जगह पर बसंत पंचमी पर्व, सबसे विशेष पर्व के रूप में पूजा जाता है।


3) बसंत पंचमी का दिन :

बसंत पंचमी को बसंत ऋतु के आगमन के रूप में भी देखा जाता है। इस वर्ष पंचांग के अनुसार, माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 2 फरवरी की सुबह 9 बजकर 14 मिनट पर हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन 3 फरवरी सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर हो जाएगी।


4) बसंत पंचमी पर्व :

बसंत पंचमी को श्री पंचमी या सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह हिन्दूओं का विशेष पर्व है। 

इस दिन विद्या की देवी सरस्वती, कामदेव और विष्णु की पूजा की जाती है। यह पूजा विशेष रूप से भारत, बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है।

अतः माँ का श्रृंगार पीला, जो पुष्प अर्पित किए जाते हैं वो पीले, भक्तगणों के वस्त्र पीले और चढ़ने वाला प्रसाद भी पीला, जैसे मीठे चावल, बूंदी, मोतीचूर के लड्डू, इत्यादि और भोजन में भी पीला खाना बनाया जाता है, जैसे तहरी, मसाला भात, कढ़ी चावल इत्यादि....

शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है। 

बसंत पंचमी होलिका और होली की तैयारी की शुरुआत का भी प्रतीक है, जो चालीस दिन बाद होती है। पंचमी पर वसंत उत्सव (त्योहार) वसंत से चालीस दिन पहले मनाया जाता है, क्योंकि किसी भी मौसम का संक्रमण काल ​​40 दिनों का होता है और उसके बाद, मौसम पूरी तरह खिल जाता है। 


5) बसंत पंचमी पूजन मंत्र :

बसंत पंचमी पर्व में सभी बच्चों को माता सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त हो, अतः उनके साथ आप, मां सरस्वती का पूजन इन मंत्रों के साथ अवश्य कराएं :

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


अगर बच्चे कर सकें, तो इस स्तुति से भी मां सरस्वती का पूजन कर सकते है: 

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥ 1॥ 

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।

हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥

जिसका हिन्दी में अनुवाद कुछ इस प्रकार से है : 

जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की है और जो श्वेत वस्त्र धारण करती है, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली सरस्वती हमारी रक्षा करें...

जिनके शरीर की कांति समस्त दिशाओं में बिखरती है, अपनी छवि से जिसने शिव सागर को भी अपना दास बना लिया है. मंद मुस्कान से जिसने शरद ऋतु के चंद्रमा को भी फीका कर दिया है. ऐसी श्वेत कमल के आसन पर विराजमान हे सुंदरी सरस्वती मैं आप की वंदना करता हूं।


इसी के साथ ही अपनी कलम को विराम देते हैं। मां सरस्वती के आशीर्वाद से आप सभी का जीवन सुखद और उज्जवल रहे 🙏🏻