Monday, 6 August 2018

Story Of Life बस एक कदम (भाग -३)



सुधा ने अपने बेटे आर्यन का विवाह श्रेया से कराया। सुधा के इस विवाह से बड़े अरमान थे. पर सुधा और श्रेया में बिलकुल भी नहीं बनती है,प्रेमा मौसी जो सुलझे ख्यालात की हैं, उन्होंने कैसे सब व्यवस्थित किया ।

अब आगे...

बस एक कदम (भाग -३) 


प्रेमा बहुत ही सुंदर embroidery वाला colour full मखमली suit श्रेया के लिए और jeans  और long top सुधा के लिए लायी। और दोनों को दे दिया। बोली आज ऐसा ही पहनेंगे।
Suit बहुत सुंदर था तो श्रेया तो लेके चली गयी, पर सुधा आना-कानी करने लगी। प्रेमा ने झूठमूठ का गुस्सा दिखाया, क्या जिज्जी, आपसे अच्छी तो श्रेया है, तुरंत मान गयी, आप तो मेरी सुनती ही नहीं हैं। सुधा भी ड्रेस ले के चली गयी। जब दोनों तैयार हो कर आयीं, तब तक आर्यन भी आ गया था। वो दोनों को देखता ही रह गया। 
श्रेया, जहाँ गज़ब की सुंदर लग रही थी।

वहीं सुधा हद की smart, आर्यन ने दोनों के लिए कसके सीटी बजाई। दोनों ही शरमा गए। सब मिल के movie देखने गए। आज श्रेया को भी लग रहा था, कि वो बहुत ही सुंदर लग रही है, और मखमली कपड़ा उसे बहुत गुदगुदा रहा था। वहीं सुधा को आज पहली बार साड़ी का पल्लू सभालने की चिंता नहीं थी। घर आ कर सुधा बोली, श्रेया आज से तुम जो पहनो, मुझे कोई एतराज नहीं है, सच में western dresses  को सभालने का कोई झंझट नहीं रहता है। श्रेया बोली, माँ मुझे भी suit बहुत पसंद आया, अब से कभी कभी suit  भी पहनूंगी। सब प्रसन्न थे।
अगले दिन से सुधा और श्रेया में बातें होने लगी, दोनों ही एक दूसरे की पसंद का ध्यान रखने लगे। अब कोई भी अकेला नहीं था। दुखी नहीं था।
प्रेमा के जाने का वक़्त आ गया था, उसका काम भी पूरा हो गया था। उन्होंने आर्यन को बोला बेटा दो दिन बाद मेरी train है, station छोड़ देना।
मौसी आप जा रहीं हैं, आर्यन दुखी हो कर बोला।  हाँ बेटा तेरे मौसा जी मेरी राह देखते होंगे। फिर यहाँ का काम तो खत्म हो गया। मौसी आपका  बहुत बहुत धन्यवाद। आप ही हैं, जो सब संभव कर सकती हैं।
बेटा उसमें कुछ नहीं है, बस एक कदम चलने की, अपनी बात सूझबूझ और प्यार के साथ रखने की आवश्यकता होती है। अकेले कोई खुश नहीं रह सकता, सबको ही साथ चाहिए होता है।

मौसी चली गयीं, पर जाने से पहले अपनी जिज्जी का अकेलापन भर गईं थीं। आज वो अपने बहू-बेटे के साथ बहुत खुश थीं, श्रेया और आर्यन भी।

Sunday, 5 August 2018

Poem : Friendship Day

Friendship Day

जब हम इस दुनिया में आते हैं
कितने ही रिश्तों से
बिन बांधे बंध जाते हैं  
दुनिया में बस एक
दोस्ती ही रिश्ता ऐसा 
जो हम खुद बनाते हैं
कोई दोस्त इतना करीब होता है
खून के रिश्तों से भी
ज्यादा अज़ीज़ होता है
चलिये हम भी आज
Friendship day मनाते हैं
अपने पुराने दोस्तों को
Phone घनघनाते हैं
कुछ मीठी यादों में
फिर से खो जाते हैं
कुछ सच्ची, कुछ अच्छी
कुछ मीठी, कुछ खट्टी
बातों को फिर से
अपनी ज़िंदगी का हिस्सा
बनाते हैं
चलो आज फिर से जीवन
जी आते हैं

Saturday, 4 August 2018

Story Of Life : बस एक कदम (भाग-२)

अब तक आपने पढ़ासुधा अपने बेटे आर्यन का विवाह श्रेया से कर देती है। उसके अपनी बहु को लेकर बहुत अरमान थे, पर दोनों सास बहु में बिलकुल नहीं पटती है। प्रेमा मौसी के आने से क्या हुआ?
अब आगे  

बस एक कदम (भाग-२) 


एक दिन आर्यन की प्रेमा मौसी आई। उनके ख़यालात बड़े सुलझे हुए थे। चंद ही दिनों में उन्हें घर का माहौल समझ आ गया। उनसे अपनी जिज्जी की ऐसी हालत देखी नहीं जा रही थी।
उन्होने श्रेया के शौक पता किए, फिर वैसे ही वो भी करने लगीं। श्रेया और उनकी कुछ ही दिनों में टने लगी। वो बड़ी समझदारी से दोनों को समझाने लगी। दोनों ही उनकी बात मानते थे।
उन्होंने श्रेया से पूछा, बेटा तुम अपनी माँ से भी बात नहीं करती हो?
वो बोली नहीं, माँ और मेरी तो बहुत बनती है। मेरी बहुत सी आदत भी माँ से ही मिलती है।
अच्छा! जैसे? अरे जैसे देर से उठना, फिर दिन भर chat करना, facebook पर रहना आदि , अरे हाँ मैं और माँ,video game भी खेलते थे, उसमे तो माँ एकदम champion हैं।
सही है life enjoy ही करना चाहिए, कह कर प्रेमा चली गई।
अब वो सोचने लगी, ऐसा क्या किया जाए? जिससे जिज्जी और बहू के बीच नज़दीकी जाए।
उन्होने आर्यन से बात की, कि वो क्या चाहता है, आर्यन बोला मैं तो हमेशा से यही चाहता हूँ कि माँ और श्रेया में अच्छे संबन्ध हों। मैंने तो कोशिश भी की थी मौसी, पर दोनों यह कह कर मुझसे ही लड़ने लगते हैं, कि मैं तो उसका ही पक्ष लूँगा। क्या करूँ मैं? किसका साथ ना दूँ। इसलिए मैंने बोलना ही बन्द कर दिया, आर्यन बहुत ही उदास होकर बोला।
पर बेटा हार मानने से तो कुछ नहीं होगा। जिज्जी बहुत अकेले होती जा रहीं है। मेरा साथ देगा, दोनों को एक करने में? क्यूँ नहीं मौसी, आर्यन चहक कर बोला।
प्रेमा ने आर्यन से नए नए video game सीखे। फिर सुधा को अपनी कसम दिलाकर अपने साथ खेलने को मजबूर कर दिया। जब सुधा expert हो गयी, तो एक दिन तेज़ आवाज़ में video game खेलने लगी।
तेज़ शोर से श्रेया की नींद खुल गयी, उसने जब मौसी और माँ को game खेलते हुए देखा, तो वो हैरान हो गयी। पर अपने आपको खेलने से रोक भी नहीं पा रही थी। बोली मैं भी एक game खेलूँ ?
प्रेमा तो इसी फिराक में ही थी, वो तुरंत उठ गयी। बोली हाँ बैठो, मैं कुछ खाने को लाती हूँ, कहकर चली गयी। उसके जाने के बाद थोड़ी देर तो शांति रही, पर कुछ देर में ही हंसी की आवाज़ें आने लगी। प्रेमा ½ घण्टे बाद ही अपने हाथ में cold drink, पकौड़े और baked नाश्ते ले आई। खेलते खेलते दोनों सास बहू ने सब तरह की चीज़ खा ली। खेल खत्म होने पर श्रेया बोल उठी, मौसी मज़ा आ गया। माँ तो बहुत ही अच्छा खेलती हैं? मुझे तो पता ही नहीं था, और उस पर ये पकौड़े, इनका तो जवाब ही नहीं है। प्रेमा बोली ये पकौड़े तो दीदी की specialty है, उन्हीं से सीखे हैं। सच माँ! आप मुझे ऐसे पकौड़े कब बना के खिलाएँगी? श्रेया को चहकता देखकर सुधा भी बहुत खुश थी। वो बोली मुझे तो ये baked नाश्ता ज्यादा अच्छा लगा। अरे माँ वो, तो मौसी कल ही मुझसे लेके गईं थी। ठीक है जब तुम मुझे ये baked नाश्ता खिलाओगी, तब मैं भी तुम्हें पकौड़ी खिला दूँगी, सुधा ने मुस्कुरा के बोला। माँ पक्का, आप जब कहेंगी। इसके साथ ही सब खिलखिला के हँसने लगे

अगले दिन प्रेमा ने दोनों को बोला, आज हम लोग अदला-बदली वाला game खेलेंगे। दोनों बोल पड़ी, इसमे क्या होगा?
प्रेमा मौसी ने और कौन सी युक्ति लगाई, दोनों को पास लाने में
जानते हैं बस एक कदम (भाग-३) में