Monday, 9 November 2020

Article : नीरस ना होने दें दीपावली

 नीरस ना होने दें दीपावली




यह साल ना जाने कैसा सा रहा है, कभी तो लगता है बहुत तेज रेत सा फिसला जा रहा हो, पर अगले ही पल एहसास होता है, कि जैसे हर पल थम से गए हों, समय रुक सा गया है।

ऐसा अजीब सा है, कि करने को बहुत कुछ है पर हम, कर कुछ नहीं रहे हैं।

होली, राखी, जन्माष्टमी, नवरात्रि सारे पर्व काल के गाल में समा गये।

ना उत्साह ना उमंग, ना ही त्यौहारों का वैसा रंग।

पर अब भारत का सबसे बड़ा त्यौहार दीपावली आ रहा है, तो चलिए वादा करते हैं, अपने से, कि इसे नीरसता से नहीं गुजरने देंगे।

घर को नया सा चमकाएंगे, चाहे फिर वो vacuum cleaner से ही करना पड़े।

हम पूरे घर के लिए कपड़े खरीदेंगे, चाहे फिर online खरीदें।

घर जगमग सजाएंगे, पर दियों से, ना की चाइनीज समानों से।

घर को खूब महकाएंगे, ताजा फूलों की खुशबू से।

रंगोली भी बनाएंगे, कोई देखने नहीं आ पाएगा, तो whatsapp में दिखाएंगे।

हम खूब सारी variety की मिठाइयाँ और पकवान भी खाएंगे, फिर चाहे घर पर ही बनाएं।

हमने आपको बहुत सारी मिठाइयाँ और पकवान बनाना बताया है, आप उनमें से कोई भी बना सकते हैं।

और आने वाले कुछ दिन, आप को yummy tasty premium sweets like kaju katli and Mysore pak बताएंगे। और कुछ yummy dishes भी बताएंगे।

यह ऐसी मिठाइयाँ हैं, जो आप के त्यौहार में चार चांद लगा देंगे और इन्हें बनाना बहुत ही आसान है।

सबसे मिलने नहीं जा सकते हैं, पर zoom meeting पर मस्ती खूब करेंगे।

तो आप हम से जुड़े रहें और दीपावली में रौनक जगाएं और दीपावली को उत्साह और उमंग से मनाएं।

हम दीपावली को ना नीरस होने देंगे, इसको कोरोना की भेंट ना चढ़ने देंगे।

हम इस साल कुछ नयी सी दीपावली मनाते हैं, इसमें खुशियाँ और उमंग जगाते हैं।

Friday, 6 November 2020

Kids story : Bruno

Bruno




एक छोटा सा कुत्ते का बच्चा, बहुत अधिक ठंड से ठिठुर रहा था।

ना जाने कैसे वो अपनी माँ से बिछुड़ गया था।

शायद वो कुछ आलसी सा था, तभी तो जब माँ को कोई भगाता, उसके सारे बच्चे उसके साथ हो लेते, पर यह छुटकू, कुछ देर से ही हरकत में आता था।

उसका ही नतीजा हुआ कि आज वो अकेला रह गया।

पर अब बहुत अधिक ठंड से वो परेशान हो गया, फिर भूख भी बहुत जोर से लग रही थी, आज माँ जो नहीं थी पास उसकी भूख मिटाने के लिए।

तभी उसकी कूं कूं सुनकर कुछ बच्चों की टोली वहाँ चली आई।

किसी को वो बड़ा प्यारा लग रहा था, तो कुछ को शरारत सूझ रही थी।

किसी ने उसकी पूंछ खींची, किसी ने धक्का दिया तो कुछ बच्चे घर से खाने को बिस्कुट और चाॅकलेट भी ले आए।

भूख तो मिट गयी, पर ठंडा अभी भी लग रहा था।

तो वो बच्चे उसको उठाकर गार्ड अंकल के ब्लोअर के पास छोड़ गए।

गार्ड अंकल, पहले नाराज़ हुए फिर बच्चों की मासुमियत और छोटे से कुत्ते के बच्चे पर उन्हें दया आ गई।

अगले दिन बच्चे उसके लिए, फटा सा blanket और चादर ले आए साथ ही उसके खाने के लिए दूध और बिस्कुट।

आज उन लोगों ने बड़े प्यार से उसका नाम Bruno रख दिया था।

Bruno की एक माँ चली गई थी पर अब उसका ध्यान रखने को बहुत सारे लोग थे।

छोटे छोटे बच्चों के कारण उसे नाम और घर दोनों मिल गया था।

Bruno बड़ा हो गया था, साथ ही वो appartment उसका घर बन गया था। 

अब वो उस appartment की रखवाली करने लगा था, वो बहुत वफादार और तेज़ हो गया था।

आसपास के इलाकों में चोरियां हो रही थीं, पर Bruno के रहते चोर इस appartment में आने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।

गार्ड अंकल, आज भी Bruno को अपने पास रखते थे, और बड़े शान से कहते, बच्चों ने मेरी help के लिए Bruno को रखा है।

Bruno भी खुश होकर पूंछ हिलाता और खूब जोर से भौंकता।

जिससे सारे डर जाते और गार्ड अंकल खूब जोर से हंसते।

Thursday, 5 November 2020

Satire : कोरोना की आत्म कथा

आज आप सब के साथ मुझे इंदौर से श्रीमती उर्मिला मेहता जी के आलेख को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है।

इस लेख में उन्होंने बड़ी खूबसूरती से बयान किया है कि जिस कोरोना से सब इतना डरें हुए हैं, उसकी खुद की क्या अवस्था है।

आइए हम सब इसका आनन्द लें।


कोरोना की आत्म कथा

                 


मैंने सोचा था कि  विकसित देशों की भाँति  विकास शील देशों में ,मैं और भी अधिक  कोहराम मचा दूँगा ।

सब मुझसे थर थर काँपेंगे, और मेरी जन्म भूमि से बचाव की भीख मागेंगे।

        पर मेरे अनुमान के विपरीत मैंने यहाँ पर लोगों को मेरे आने का जश्न मनाते देखा।हर घर में नाना प्रकार के व्यंजन बनना शुरु हो गये। 

    दादी नानी के घरेलू नुस्खों की बाढ़ आ गई।बड़ों एवं बच्चों को घर से काम करने का मौका मिला तो उनकी चाँदी हो गई।आने जाने का समय और पेट्रोल ,डीज़ल की बचत होने लगी।

     मैंने सोचा था कि मेरे आने से यहाँ की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ

    लोग होटल जाने के बदले घर पर भी ज़ोमेटो और स्वीगी के द्वारा खाने का पार्सल मँगवा कर  व्यंजनों का भरपूर आनंद लेने लगे।

     घर घर कपड़े के  मास्क बनने लगे जिससे 

महँगे मास्क की खपत ही कम हो गई! 

    धार्मिक स्थान चाहे बंद कर दिये गए पर चिकित्सक  बनकर  ईश्वर  मुझसे ग्रसित रोगियों का इलाज करने लगे।

     यहाँ तक कि मेरे ही नाम से कोरोनेश्वर  मंदिर  तथा कोरोना नाशी तांत्रिक भी मार्केट में आ गए ! 'बाय गॉड ' ऐसा तो कभी मैंने सोचा भी नहीं था।

    फुरसत के समय में मैंने भी टी . वी  .धारावाहिक देखना शुरु कर दिया।  बुराई के ऊपर अच्छाई की विजय को लेकर कई धारावाहिक  आने लगे।पूरा घर एक जुट होकर ईश्वर की शरण में होकर अपने आपको सुरक्षित समझने लगा।

       जो गृहिणियॉं पहले काम वाली  बाई के न आने पर दूसरी बाई की व्यवस्था में लग जाती थीं वे खुद ही काम करने लगीं !

     सास बहू का नाता मेरी सोच के विपरीत नज़र आया।दोनों को हँसते -हँसते मिल-जुल कर काम करते देखा।पति लोग भी यू -ट्यूब में सुनकर नयी नयी डिश बनाने लगे।

         घर  के सब लोग एक साथ, खाने का लुत्फ उठाने लगे।

    हे  भगवान मैं कहाँ आ कर फँस गया!

   राम, कृष्ण, दुर्गा और  चंडिका देवी के देश में आकर मुझे पता लगा कि परमाणु बम जो विकसित याने बड़े देशों के नाम से प्रसिद्ध थे,यहाँ ब्रह्मास्त्र के रूप में पहले से ही मौजूद थे! 

      तीरों में मंत्र शक्ति डालकर शत्रु को हराना भी  मैंने  फुरसत में बैठे बैठे  टी . वी . में देखा।

   धृतराष्ट्र को संजय नामक पात्र ने टी . वी . जैसे देखकर आँखों देखा हाल सुना दिया।

    मुझे लगता है अब तो मुझे भी श्री कृष्ण की शरण में चले जाना चाहिये ताकि जो पाप मैंने किये हैं  वे क्षमा कर दिये जाएँ !

      वास्तव में मेरी जन्म भूमि चीन के आविष्कारकों ने मुझ जैसे वाइरस को बनाकर बहुत खराब काम किया है।

       यद्यपि मेरे देश को सबसे पहले इसकी सज़ा  भी मिल चुकी है,पर अब जाने का सोच रहा हूँ और समझाऊँगा कि अति शीघ्र वेक्सीन बनाकर पाप से मुक्त हो जाए वरना भारत वाले तो धन्वन्तरि जैसे चिकित्सक वाले देश के हैं।

     एक देश ने तो पहले से ही कब्रें खोद कर रख दी हैं कि मरने वाले को दिक्कत न हो! 

    तोअब मैं जाता हूँ भारतीयों !तुम्हारी जिजीविषा और सकारात्मक जीवन शैली को मेरा सलाम।कोरोना पॉज़ीटिव को भी तुमने नकार दिया 👍👍

Disclaimer:
इस पोस्ट में व्यक्त की गई राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। जरूरी नहीं कि वे विचार या राय इस blog (Shades of Life) के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों। कोई भी चूक या त्रुटियां लेखक की हैं और यह blog उसके लिए कोई दायित्व या जिम्मेदारी नहीं रखता है।