Monday, 10 May 2021

Kids story : विश्वास

 विश्वास 




माधो अपने पापा के साथ अपनी दादी जी को लेने गांव गया था।

उसकी दादी जी का गांव हरियाली से भरा हुआ था, उनके आंगन में बहुत से पंछी आया करते थे।

पापा, दादी के सामान बांधने में उनकी मदद कर रहे थे और माधो चिड़ियों के पंख इकठ्ठे कर रहा था। 

वो जब भी अपनी दादी जी के घर आता था, उसे यह पंख हमेशा ही अपनी ओर खींचते थे।

उसे एक मोर पंख मिला, वो उसे लेकर दौड़ाता हुआ अपनी दादी जी के पास आया, और बोला दादी जी यह पंख भी मिला, आज आंगन में।

उसके पापा बोले, आज मोर भी आया होगा।

दादी ने माधो को झट अपनी गोद में बिठाते हुए कहा, अरे कान्हा जी आए होंगे। उन्हीं का गिर गया होगा।

कान्हा जी, कौन दादी जी?

अरे! तुम्हें कान्हा जी नहीं पता?

अच्छा चलो, तुम्हें उनकी कहानी सुनाती हूँ। 

कहानियाँ सुनते सुनते, माधो सो गया। 

अगले दिन सुबह वो लोग शहर वापस आ गए।

कहानियों का और दादी जी की बातों का माधो के बाल मन पर गहरा असर पड़ा।

वो कान्हा जी की पूजा करने लगा और कान्हा जी के आने का इंतजार करता, रोज़ सुबह शाम। 

बालकनी में मोरपंख को ढूंढता, पर शहर में कहाँ मिलता मोरपंख?

हाँ शहर में कोरोना रूपी महामारी का प्रकोप जरुर बहुत जोर से फैलने लगा था।

उसके चलते, दादी जी को भी कोरोना हो गया। उनका oxygen level भी कम होने लगा था, घर में सब बहुत घबरा रहे थे कि ना जाने क्या हो?

पर माधो अपने कान्हा जी का बेसब्री से इंतजार कर रहा था, कि वो अब जरुर से आएंगे। और उसकी दादी जी ठीक हो जाएंगी। 

एक दिन वो अपनी बांसुरी बजा रहा था, तभी ना जाने कहांँ से एक मोरपंख खिड़की से उसके पास आ गया।

मोरपंख देखकर वो खुशी से उछल पड़ा। उसने बांसुरी अपनी कमर में फंसाई, मोरपंख बालों में लगाया। और अपनी दादी जी के कमरे की तरफ दौड़ गया।

और जब तक कोई उसे, वहाँ जाने से रोकता, वो दादी जी के कमरे के दरवाजे के पास पहुंच गया था।

माधो अभी दरवाजे पर था, तो दादी जी ने माधो को देखा, वहांँ हल्का धुंधला दिखाई दे रहा था। जिसमें दादी को माधो की कमर की बांसुरी और लहराता मोरपंख दिख रहा था।

 ऐसा लग रहा था कि कान्हा जी खड़े  हों, दादी ने प्रणाम किया। 

तभी माधो, चिल्ला उठा, दादी जी! कान्हा जी आ गये। अब आप ठीक हो जाएंगी।

माधो की आवाज में सशक्त आस्था और विश्वास था। जिसने दादी में प्राणवायु का संचार कर दिया।

दादी बहुत जल्दी ठीक होने लगीं। कुछ दिनों में वह पूरी तरह से ठीक हो गईं। 

Doctors भी आश्चर्य कर रहे थे, उनकी fast recovery पर।

जब दादी जी पूरी ठीक हो गईं, तो पापा बोले देखा माँ, शहर में थीं तो doctors ने बचा लिया, गांव में रहतीं तो ना बचतीं।

दादी जी बोलीं, मुझे doctors ने नहीं तुम्हारे बेटे के विश्वास ने बचाया है।

जिसका कान्हा हो रखवाला, उसका कहाँ कुछ बिगड़ने वाला।

Sunday, 9 May 2021

Poem : आइए सम्मान दें उन्हें


 आइए सम्मान दें उन्हें




आइए सम्मान दें उन्हें

जिन्होंने हमें जन्म दिया 

आइए सम्मान दें उन्हें

जिसने हमें जीना सिखा दिया 


आइए सम्मान दें उन्हें

जो पल पल हमारे साथ हैं

आइए सम्मान दें उन्हें

जो मुश्किल में छोड़ती नहीं हाथ हैं


आइए सम्मान दें उन्हें

जिनके लिए, हम उनका संसार हैं

आइए सम्मान दें उन्हें

जिन्होंने दिए हमें संस्कार हैं


आइए सम्मान दें उन्हें

जो दुनिया में ईश्वर का अवतार हैं

आइए सम्मान दें उन्हें 

जिन्हें इसका अधिकार है


क्योंकि

 माँ सिर्फ एक शब्द नहीं हैं

माँ, एक एहसास हैं

जो हर बच्चे के लिए

बहुत खास हैं


आइए हम मातृदिवस में

यह संकल्प करें 

सिर्फ आज ही नहीं

सदैव उनका सम्मान करें🙏🏻🙏🏻


सभी माँ को समर्पित 🙏🏻🙏🏻


मातृदिवस के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ

Happy Mother's day

💐 🙏🏻❤️

Thursday, 6 May 2021

Article : किस ओर जाता भारत!

 किस ओर जाता भारत!




Corona period में पहले रैली, फिर election और अब चुनाव समापन के बाद बंगाल में बढ़ी हिंसा, किसी भी तरह से सहनीय नहीं है।

लूटपाट, बलात्कार, हत्या..... 

सब कुछ ही तो हो रहा है। 

आखिर क्यों?

जीत-हार किसी की भी हो, पर हिंसा तो कहीं भी नहीं होनी चाहिए। 

वोट देना व किसी भी पार्टी के समर्थक होना तो मौलिक अधिकार है। फिर यह हिंसा क्यों?

इसको तुरन्त ही रोका जाना चाहिए। क्योंकि इस तरह की घटनाएं, देश में अराजकता को बढ़ावा देती हैं। देश की अखंडता का हनन करती हैं।

आज बंगाल जलने पर हमारा शांत रहना, हमारे लिए आने वाले ख़तरे को निमंत्रण देना है।

कोई भी राज्य हो, शांति सर्वत्र व्याप्त होनी चाहिए। और वो भी तब तो और ज्यादा, जब देश पहले से ही महामारी के ख़तरे से जूझ रहा है।

अभी तो सब जगह केवल मानवता व्याप्त होनी चाहिए।

 जब तक सब एक साथ इस महामारी को दूर करने की कोशिश नहीं करते हैं, यह संकट टलने वाला नहीं है।

अभी तो सबका ध्यान इस ओर केन्द्रित होना चाहिए कि सबका vaccination हो जाए। Oxygen व दवाई पर्याप्त मात्रा में patients को प्राप्त करवाया जाए।

किसी तरह की कोई काला-बाज़ारी ना हो।

अगर आप चाहते हैं कि आप धनवान हों, आप के पास power हो, तो यह सब तब ही संभव होगा, जब सर्वत्र सुख-शांति व्याप्त होगी, सभी निरोगी और काम काज करने योग्य होंगे।

देश को अंधकार में मत धकेलिए। धनार्जन और राजनीति, फिर कर लीजिएगा। 

अभी देश सम्भाल लीजिए। जिसकी जिम्मेदारी, किसी एक सत्ता, नेता, धनाढ्य वर्ग की नहीं अपितु हम सब की है। अतः ख़ुद भी mask पहनिए, social distancing का पालन करिए, sanitizer का उपयोग करिए और सबसे महत्वपूर्ण, घर पर रहिए, और हिंसा के खिलाफ़ सही माध्यम से आवाज़ उठाइए।

तभी देश सुरक्षित रहेगा, विकास करेगा।