Thursday, 3 June 2021

Satire : चौकीदार बन गये हम🤪

चौकीदार बन गये हम🤪



जब हम हुए तो सब हमको घेर कर खड़े हो गए। हम हुए ही थे एकदम गोरे चिट्टे, बहुत ही खूबसूरत।

कोई हमें लाल परी कहें, तो कोई दुर्गा माता। अप्रैल के महीने में नवरात्र में जो हुए थे।

पर कभी घमंड नहीं किया।

बचपन बीता, जवानी आयी। 

सबकी तरह हमारे शादी की भी बात चलने लगी।

अरे भईया, इतने रिश्ते आए कि पूछो नहीं।

एकदम स्वयंवर वाली feeling आ रही थी।

हमने भी एकदम संस्कारी रुख़ अपना लिया कि मम्मी, आप जिससे कहेंगी, उसी से शादी करेंगे।

उससे दो फायदे होने थे, एक तो माता जी प्रसन्न हमारी आज्ञाकारिता पर, दूसरा पति जी की कुछ भी कमी होने से जिम्मेदारी उनकी और हमें जिंदगी भर यह बोलने का अधिकार कि कैसे के पल्ले बांध दिया है...

खैर मम्मी भी बड़ी होशियार हैं। देख-परख कर एक सांवला सलोना बांका जवान ऑफीसर ढूंढ ही लिया।  

शादी हो गई। 

और जब आयी रातें....

तो देखते क्या हैं कि, पति जी मच्छरदानी लगा रहे हैं। हम तो पंखे की direct हवा लेने वाले, यह जाल-वाल हमें रास ना आए, ससुरी पंखे की हवा कम हो जाए सो अलग...

खैर, पंखे की समस्या को तो उन्होंने A.C. लाकर खत्म कर दी।

पर मच्छरों के प्रकोप के मारे, मच्छरदानी नहीं छूटी। करते भी क्या, मच्छर थे ही बहुत, सो मच्छरदानी तन जाती,  पर एक-दो मच्छर घुस भी जाता तो, पति जी तो आराम से सोते रहते, और सारे मच्छर हम से ही चिपटे रहते, काय कि हम गोरे चिट्टे और चिकने जो ठहरे। 

ऐसा नहीं था कि एक भी छिपकली ना हों। 

थीं, पर वो भी निरी निकम्मी, खाली शो-पीस बनी रहती, हमें डराने के लिए।

जैसे तैसे दिन रात गुज़रे, और हमारे लाल गोपाल हो गये। हमारे ही तरह गोरे चिट्टे बहुत ही सुन्दर।

इधर वो हुए और उधर सारी नर्सें, और supporting staff लगे भकाभक उसकी फ़ोटो खींचने।

हम बेहद गर्व से भर गये। तभी मन के आकाश में भविष्यवाणी हुई, जिस बालक को देखकर तुम इतनी खुश हो रही हो, वो एक दिन तुम्हें चौकीदार बना देगा.....

चंद दिनों में ही वो भविष्यवाणी सत्य साबित हो गई।

काहे कि अब मच्छरदानी में मच्छर घुसते तो, हमसे नहीं उससे ही चिपटे रहते, मस्त गोरे चिट्टे, soft soft बच्चे के आगे, अब हमारी पूछ खत्म हो गई थी। और हम मच्छर का रेकेट लेकर चौकीदारी करते। सारी रात चौकन्ने रहते कि बाल गोपाल को मच्छर ना काट लें। 

तब लगता, अभी तो मच्छर हैं, रेकेट से मर जाते हैं, पर आगे....

सच्ची, चौकीदार ही तो बन गये थे हम....🤪😛😄😄

Wednesday, 2 June 2021

Poem : कितनी कहानियाँ ले गया...

गर्मियों की छुट्टियों में रद्दी वाले का आना और घर से तमाम चीज़ें ले जाना, याद दिला देता है, गुज़रा ज़माना, आज उसी को याद कर, चंद पंक्तियाँ लिखीं हैं...


कितनी कहानियाँ ले गया...



किसी का बचपन, 

किसी की जवानी, 

किसी का बुढ़ापा ले गया

रद्दी वाला आया, 

और घर से 

कितनी कहानियाँ ले गया.....


वो पहला खिलौना, 

जो मेरा बचपन था सलौना

वो पहली साइकिल, 

जो सौगात में दी थी नानी ने

जो ख़ज़ाना था मेरा, 

वो कौड़ी के भाव ले गया।


किसी का बचपन, 

किसी की जवानी,

किसी का बुढ़ापा ले गया

रद्दी वाला आया, 

और घर से 

कितनी कहानियाँ ले गया.....


जिन किताबों ने हमें बहुत ज्ञान दिया था, 

जिसके कारण समाज ने 

बहुत सम्मान दिया था

उन किताबों को जिल्द से

अलग कर मानों, 

बेदाम ले गया।


किसी का बचपन, 

किसी की जवानी, 

किसी का बुढ़ापा ले गया

रद्दी वाला आया, 

और घर से 

कितनी कहानियाँ ले गया.....


गुलाबी कागज़ पर लिखे

वो दिल के किस्से, 

जिनकी बदौलत आप का 

साथ आया था मेरे हिस्से।

उन कागजों की रंगत 

वो सरेआम ले गया।


किसी का बचपन, 

किसी की जवानी, 

किसी का बुढ़ापा ले गया

रद्दी वाला आया, 

और घर से 

कितनी कहानियाँ ले गया.....


वो दादा जी का

 टूटा हुआ चश्मा,

जिसने उन्हें तर्जुबा 

तमाम दिया था, 

ता जिंदगी बहुत

आराम दिया था।

उनके अनुभव का 

साजों सामान ले गया।


किसी का बचपन, 

किसी की जवानी, 

किसी का बुढ़ापा ले गया

रद्दी वाला आया, 

और घर से 

कितनी कहानियाँ ले गया.....

Tuesday, 1 June 2021

Article : क्या Doctor हैं बुरे?

क्या डाॅक्टर हैं बुरे?




आज कल एक नया मुद्दा सामने आ गया है की Ayurvedic and Allopathy में से बेहतर कौन?

आपको क्या लगता है?

हमारे अनुसार तो दोनों की अपनी अपनी महत्ता है।

भारतीय संस्कृति का द्योतक है आयुर्वेद और आयुर्वेद बहुत ही बेहतर है। बावजूद इसके allopathy का महत्व कम नहीं होता है।

एक saying है, prevention is better than cure.

अगर इस तरह से समझें तो prevention, आयुर्वेद है और cure है allopathy.

Means आयुर्वेद को follow करके, अगर आप योग, व्यायाम, काढ़ा, उचित आहार-विहार, सकारत्मक दृष्टिकोण, जप, तप आदि करते हैं तो आप कभी बीमार नहीं पड़ेंगे। 

आयुर्वेद को follow करने वाले को by pass surgery की requirements नहीं होती है।

जो दातुन करते हैं, उनके दांतों को RCT की requirements नहीं होती है।

यही बात और भी बीमारियों और परेशानी में भी लागू होती हैं।

बाबा रामदेव का ह्रदय से अनेकानेक आभार कि उन्होंने योग और आयुर्वेद को सहज बना कर जन जन तक पहुँचा दिया। उन्होंने पूरे विश्व को बताया कि अपनी काया को निरोगी कैसे रखा जाए।

पर फिर भी बीमार पड़ गये तो cure means allopathy का नम्बर आता है। 

पर यह कहा जाना कि doctor बेकार होते हैं वह मरीजों की जान ले लेते हैं यह कथन पूर्णता सत्य नहीं है। जैसे आयुर्वेद से जुड़ा हुआ प्रत्येक व्यक्ति बाबा रामदेव नहीं हो सकता है।

कुछ doctor ऐसे हो सकते हैं, जिनके लिए धन ही सब कुछ होता है वह मरीजों की जान की परवाह नहीं करते हैं।

पर यह कहना कि सभी doctor खराब होते हैं बेकार होते हैं वह मरीजों की जान की परवाह नहीं करते हैं यह पूर्णता मिथ्या है।

सालों से बहुत से ऐसे doctor हैं, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना भी मरीजों का इलाज किया है यही कारण है कि doctor को भगवान के समतुल्य माना गया है। 

और आजकल की covid situation को देखते हुए तो हम यह पूरी तरह से कह सकते हैं कि ना जाने कितने doctors ने अपने परिवार की, अपनी जान की, किसी की भी परवाह नहीं की। सिर्फ और सिर्फ मरीजों को ठीक करने के लिए जी-जान से जुटे हैं।

यहां तक की कितने ही doctors की corona period में जान भी चली गई, उनकी शहादत को इस तरह से नकार देना पूर्णता गलत होगा।