Wednesday, 27 April 2022

Short Story: वरदान या श्राप

 वरदान या श्राप



एक बार की बात है कि तीन मित्र थे। वे चाहते थे कि उन्हें ज़्यादा मेहनत ना करनी पड़े, पर उन्हें सभी सुख-समृद्धि मिल जाए। 

एक दिन उनकी मुलाकात एक महात्मा से हुई। उन्होंने उन तीनों को कहा, ईश्वर से सर्वशक्तिशाली कोई नहीं है। अगर तुम लोग, पूरी आस्था और लगन से तपस्या करो और ईश्वर को खुश कर सको, तो तुम लोगों की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होगी।

तीनों तपस्या में लीन हो गए। चंद महीनों की तपस्या के पश्चात, ईश्वर प्रसन्न हुए।

उन्होंने तीनों से कहा, मेरे पास तीन वरदान हैं, जिसको जो लेना हो, ले लो।

पहला - चारों तरफ बढ़िया खाना, खूब सारे लोग और सब लोग, चाह रहे हों कि तुम‌ उनके पास रहो।

दूसरा - बढ़िया आलीशान कमरा, जिसमें पूरे time, AC चलता रहे और खूब सारे आदमी-औरत तुम्हारी सेवा करें।

तीसरा - तुम्हारे चारों ओर, सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात हों।

पहला बहुत चटोरा था, उसने सोचा, खूब सारा खाना पीना और सब चाहें कि वो ही सब के पास रहे। मतलब खाना-पीना और शोहरत, यही तो चाहिए थी उसे। उसने झट बढ़िया खाना रहे, वो वरदान मांग लिया।

दूसरा बहुत आलसी था, उसने सोचा, दिनभर आराम और आदमी-औरत उसकी सेवा करें। उसकी, ऐसी ही ज़िंदगी की कामना थी। उसने झट दूसरा वरदान ले लिया।

तीसरा बहुत लोभी था, उसने सोचा कि यह दोनों मूर्ख हैं, जिसके पास सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात सब हों, उसे किस बात की कमी? अच्छा हुआ, दोनों ने अपने-अपने दुर्गुणों के कारण, असली चीज़ नहीं मांगी और उसने खुशी-खुशी तीसरा वरदान ले लिया। 

ईश्वर ने कहा, आज से ठीक चार दिन बाद, तुम लोगों की इच्छा पूरी हो जाएगी।

चौथे दिन, पहले मित्र को एक बड़े होटल में वेटर की नौकरी लग गई। उसके हर तरफ खाना-पीना था, खूब सारे लोग उसके चारों तरफ थे। सब उसे आवाज़ दे रहे थे और चाहते थे कि, सबसे पहले वो उनके पास आए।

काम बहुत ज़्यादा था, वो चक्करघिन्नी बना घूमता रहता, पर काम खत्म नहीं होता। उसे अपने खाना खाने का समय भी नहीं मिलता।

दूसरे मित्र का बहुत बड़ा accident हो गया, वो ICU में भर्ती हो गया। दिन भर बिस्तर पर लेटा रहता, पूरे time AC चलता और खूब सारे आदमी-औरत उसकी सेवा करते।

तीसरे मित्र को एक बहुत पुरानी बड़ी सी गुफा मिली, जहाँ सोना चांदी, हीरे जवाहरात सब थे। उसमें घुस तो वो गया, पर उससे बाहर निकलने का रास्ता उसे दिखाई नहीं दे रहा था। 

वहाँ, उसके अलावा कोई नहीं था, खाना-पीना भी नहीं था।

कुछ दिन पश्चात तीनों ही मृत्यु को प्राप्त हुए। तीनों ईश्वर के पास गए और बोले कि हे ईश्वर, यह कैसा वरदान था?

ईश्वर बोले, जब भी तुम चटोरे, आलसी और लोभी बनकर कोई भी कामना करोगे। वरदान, श्राप में ही बदल जाएगा।

जब भी परिश्रम, लगन और निष्ठा से काम करोगे, तभी तुम्हें सुख समृद्धि और प्रसिद्धी का वरदान मिलेगा।

इन सब को पाने का कोई shortcut नहीं है। जिसकी intention गलत होती है, उसके लिए वरदान भी श्राप बन जाता है...

Monday, 25 April 2022

Article : COVID, कितना डर, कितनी सच्चाई

 COVID, कितना डर, कितनी सच्चाई 




यह जो जिंदगी है, इसमें ना जाने कितने उतार- चढ़ाव देखने को मिलते हैं। कभी सुख तो कभी दुःख, कभी कठिनाई, कभी परेशानियांँ, कभी सफलताएं, कभी असफलताएं। पर यह है, तभी तो जीवन है। 

जब सुख में खुशी है तो दुःख से डरना क्या?

जी हाँ, नहीं डरना है, क्योंकि मंज़िल डरने से नहीं, आगे बढ़ने से मिलती है।

जीवन की एक ऐसी ही सच्चाई बन गया है कोरोना...

कोरोना, एक ऐसी सच्चाई है, जिसके होने से रोना-धोना नहीं है बल्कि दृढ़ता से उसका सामना करना चाहिए।

ऐसा नहीं है कि यह बात पीर पराई पर लिख रहे हैं। आप बीती पर लिख रहे हैं।  

हम लोग, पिछले ढाई साल से लगातार, सारे corona protocol, follow कर रहे हैं। Means, सामानों को 10 दिन, quarantine करना, social distancing रखना, means कहीं, किसी भी जगह unnecessary आना-जाना नहीं करना। जहाँ जाना ज़रूरी है, जैसे office, market, hospital etc. तो mask पहनकर निकलना, sanitizer use करना, घर आते से ही सबसे पहले shower लेना, सबके vaccination है, etc.

अभी कुछ दिन पहले‌ बेटे Advay का school खुल गया। वो 10 साल का है, इसलिए उसके vaccination नहीं हुआ है। 

बहुत से बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें cold, cough, fever, diarrhea, nausea, vomiting tendency etc. है, फिर भी school आ रहे हैं।

School में Advay दिन भर mask लगाता है, पर बहुत से बच्चे, दिन भर mask नहीं लगा रहे हैं। और parents उनके mask नहीं लगाने का support भी कर रहे हैं। 

शायद, यह 2 साल schools के online का after effects है कि कुछ parents को बच्चों की safety की कोई चिंता नहीं है। वो चाहते हैं कि बच्चा कुछ देर स्कूल में रहे और उन्हें शांति मिले।

और लोगों की लापरवाही से, फंस मेरा बेटा गया और उसे fever and cough हो गया।

उसके बाद हमें और बेटी को भी fever and cough हो गया।

Doctor को दिखाया, तो वो बोले कि दिल्ली में आजकल corona के case बहुत बढ़ गये हैं, और उनके भी symptoms URTI ही है। अगर आप कहें तो आप को RT PCR test लिख दें।

2 minute के लिए सोचा, कराएं कि नहीं?

फिर अगले ही पल सोचा कि अगर नहीं है तो डरना क्या? और अगर है, तो भी डरना क्या? सही diagnosis and treatment must है। और हमने test करा लिया।

Test positive आया!

जब test positive आ गया, तो हमें सोचना था कि हम इसे सबको बताएं या चुपचाप रहें। पर हमारे ज़मीर ने हमें इसकी इजाज़त नहीं दी कि हम चुप रहें और सब काम यथावत जारी रखें। और बाकी सब को हमारे कारण corona हो जाए।

मेरे पति ने, अपने office में, मेरे और बेटी की positive report के बारे में बता दिया, हमने बेटे के school में और maid को भी बता दिया।

उसके बाद हम लोग home quarantine हो गये। 

जितनी problem, हम लोगों को health regarding नहीं आयी, उससे ज्यादा home quarantine में आयी।

पर सोच लिया था कि एक responsible citizen behaviour रखेंगे, तो वही किया और सच मानिए, problem तो ज़रूर हुई पर मन में जो सुकून था कि हम से कोई और बीमार नहीं होगा, वो बहुत value रखता है।

आज-कल कहा जा रहा है कि corona अब mild हो गया है। पर ऐसा नहीं है, corona पहले भी mild था और आज भी mild है, पर सिर्फ उन लोगों के लिए जो पहले से पूर्णतया स्वस्थ हैं।

लेकिन जो पहले से ही किसी भी तरह की बीमारी से ग्रस्त हैं, जैसे high blood pressure, diabetes, heart problems, low haemoglobin, lungs problem or any such types of problems, उनके लिए corona कल भी धातक था और आज भी है। 

अगर आप, corona के पहले healthy हैं तो आप को सिर्फ fever and cough ही होगा, जो कि 2 से 3 दिन में ठीक भी हो जाएगा।

पर अगर आप पहले से ही किसी problem को face कर रहे हैं, जैसे BP, diabetes, low haemoglobin, lungs or heart problems etc. तो आप को fever and cough के साथ, weakness, dizziness, body ache, smell or taste का जाना, सांस फूलना etc. जैसी problem भी हो सकती है।

पर ऐसा नहीं है कि, जिन्हें इस तरह की problem है, उनका कोई treatment नहीं है, उनका भी treatment है, वो भी ठीक हो जाएंगे, बस उन्हें time थोड़ा ज़्यादा लगेगा। बशर्ते उनका सही diagnosis सही time से हो।

अब हम आपसे जो कहने जा रहे हैं, वो सबसे important है। जब भी आपको corona के symptoms लगें, जैसे cold, cough, fever, diarrhea, nausea, vomiting tendency, smell ना आना etc. तो RT PCR test ज़रुर कराएं, coz COVID positive होने से mild or severe नहीं होता है। वो healthy and unhealthy body पर depend करता है। पर अगर diagnosis सही नहीं होगा तो treatment सही कैसे होगा।

और आप सभी से यह अनुरोध भी है कि corona positive होने पर quarantine भी अवश्य रहें।

क्योंकि corona से पूरी तरह से निजात तभी मिलेगा, जब हम डरें नहीं बल्कि सच्चाई का डटकर मुकाबला करें। सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए भी सोचें।

दूसरों के लिए सोचना, panic होना नहीं है, I repeat - जब हम कोरोना से डरेंगे नहीं, सच्चाई का डटकर सामना करेंगे। सारे protocol follow करेंगे। Symptoms होने पर test कराएं और positive होने पर quarantine हों। तभी सच में कोरोनामुक्त होगा India.

अपने लिए नहीं तो, अपने बच्चों के लिए ही सही, COVID, से डरें नहीं, बल्कि सच्चाई से उसका सामना करें।

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳

Friday, 22 April 2022

Story of Life : सच्चा सोना (भाग -3)

 सच्चा सोना (भाग - 1) और

सच्चा सोना (भाग -2) के आगे...

सच्चा सोना (भाग -3) अंतिम भाग



रितेश सब लेकर अपनी माँ‌ के पास पहुंँचा। माँ की आंखें इतना सोना देखकर फटी की फटी रह गई, वो बोली बेटा, हमारे दुःख के दिन बीत गए हैं। तुझे देवता पुरुष मिला था जा उसी के पास जा, वह तुझे अच्छा काम देगा।

 अगले दिन रितेश रतन सिंह के पास पहुंचा।

आओ आओ, रितेश मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था।

रितेश ने रतन सिंह को धन्यवाद दिया और बोला, मेरी मां ने कहा है कि मैं आपसे काम मांगू पर मैं आपके यहाँ, काम करने से पहले आपकी आपबीती सुनना चाहता हूँ।

 क्या आप मेरी यह विनती स्वीकार करेंगे?

रतन सिंह हंस कर बोला, बिल्कुल, तुम्हें पूरा अधिकार है, तुमने मेरे जीवन को बचाया था।

बात तब की है, जब मैं भी तुम्हारी तरह गरीब, सीधा-साधा, कर्मठ व्यक्ति था।

एक दिन मैं काम की तलाश में निकला था, तो मुझे एक बड़े से घर से एक व्यक्ति निकलता हुआ दिखाई दिया।

वो व्यक्ति, घर से निकलकर थोड़ी दूर गया और एक जगह रुक गया और वहीं जमीन पर बैठ गया।

मैं उसके नजदीक गया तो देखा कि वो तो हमारे गांव के महेंद्र सिंह सुनार हैं। 

वो बहुत थके और बीमार लग रहे थे।

मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ?

तो उन्होंने कहा कि, मुझे एक सच्चे और ईमानदार इंसान की तलाश है, जो उनके सोने के व्यापार को अच्छे से चला सके। जिससे वो आगे का जीवन सुख से बिता सकें।

मैं, काम की तलाश में था, मैंने कहा, आप मुझे आज़मा सकते हैं।

सेठ जी खुश हो गये, उन्होंने मुझे अपने यहाँ रख लिया। मैंने भी पूरी मेहनत और ईमानदारी से उनका काम सम्भाल दिया। साथ ही उनकी खूब सेवा की, जिससे वो पूर्णतः स्वस्थ भी हो गये।

मैं खूब जतन से सोने का व्यापार चलाता और सेठ जी चैन से सोते। सेठ जी और मैं दोनों खुश रहने लगे। 

कुछ साल बाद सुख पूर्वक दिन व्यतीत कर के सेठ जी स्वर्ग सिधार गए और फिर मुझे व्यापार का मालिक बना दिया गया।

मैंने दिन-रात मेहनत कर के सोने के व्यापार को चार गुना बढ़ा दिया। पर इस कारण से मेरा सुख-चैन, नींद सब कहाँ चला गया, मुझे पता ही नहीं चला।

बस मुझे इसी बात की धुन रहती कि थोड़ा और सोना इकठ्ठा हो जाए।

इससे मेरी तबियत ख़राब रहने लगी। 

उस दिन भी मैं एक जगह से सोना लेने के लिए ही निकला था, वो जगह पास ही थी, अतः मैं पैदल ही निकल गया था। पर मेरी तबियत ख़राब होने के कारण मैं, भटक गया था और किस रास्ते आ गया था, मुझे नहीं पता।

और तब तुम मुझे मिले, तुमने खाने के लिए, मुझे रुखी-सूखी रोटी, आलू-प्याज नमक मिर्च, और पीने के लिए कुंए का ठंडा पानी दिया। उसके बाद मैं शाम तक सोता रहा।

उस दिन मैंने समझा, कि सच्चा सोना, बहुत सारा gold नहीं है, बल्कि भूख मिटाने वाला भोजन, और चैन से सोना (नींद) ही है।

जो मैंने महेंद्र सिंह जी को दी थी, जिसके बदले वो मुझे अपना सोने का व्यापार दे गये।

यह है, मेरी आप बीती। रितेश क्या तुम मेरे साथ काम कर के, मुझे सच्चा सोना ( चैन की नींद) दे सकते हो?

रितेश बोला, दे तो सकता हूँ, पर अगर आप यह ना सोचो कि मैं भी आपकी तरह सोना बढ़ाने में अपना सच्चा सोना (भरपूर नींद) खो दूंगा।

मुझे अपनी नींद से बढ़कर कुछ नहीं चाहिए। वो भी तब तो मैं बिल्कुल नहीं छोड़ूंगा, जबकि मैं जान चुका हूँ कि सच्चा सोना (चैन की नींद) ही है।

रतन सिंह, जोर से हंसा और बोला, भाई जो गलती मैंने की थी, मैं नहीं चाहता हूँ कि कोई भी और व्यक्ति करें। हमें जीवन उपयोगी धन अवश्य अर्जित करना चाहिए। पर अपनी कभी नहीं खत्म होने वाली इच्छाओं को इतना नहीं बढ़ाना चाहिए कि उसको पूरा करने में जीवन के सच्चे सोने (चैन की नींद) को ही खो दें।

मुझे बस एक सहायक चाहिए, जिसके साथ मिलकर मैं अपना अब तक का जितना व्यापार है, उसे सुचारू रूप से चला सकूं। साथ ही किसी एक को सक्षम भी बना सकूं। 

और उसके लिए, मुझे तुम उपयुक्त इंसान लगे। अगर तुम चाहो? रितेश ने खुशी-खुशी हामी भर दी।

उसके बाद रतन सिंह और रितेश दोनों को हमेशा के लिए सच्चा सोना (चैन की नींद) मिल गया था।