Friday, 5 February 2021

Article : India Together

 India Together



हमारे देश में होने वाले किसान आंदोलन की इंतहा बढ़ती जा रही है। 

26 January में जिस तरह से आंदोलन का रुख हुआ था, तो लगा था कि शायद सब ठीक हो जाएगा।

पर अब तो लग रहा है कि इसका अंत ना जाने ही कहाँ होगा? क्योंकि अब यह किसान आंदोलन कम और राजनैतिक जंग ज्यादा लगने लगा है, क्योंकि ना जाने कितने राजनेता और अन्य लोग ने किसान आंदोलन का बखेड़ा बनाकर रख दिया है।

आप को भी देखकर वही लग रहा होगा, जैसा हमें लग रहा है कि, एक तरफ BJP है और दूसरी तरफ बाकी सारे।

सभी के मत एक नहीं होते हैं, मतभेद चलते ही रहते हैं और सभी देशों में ऐसा होता है।

पर हमने इंतहा शब्द इसलिए use किया है क्योंकि, राजनैतिक जंग का नतीजा यह है कि आज विदेश के वो लोग, जिन्हें हमारे देश से कोई सरोकार नहीं है, ना ही उन्हें हमारे देश की कोई समझ है, ना वो कोई विशेष हस्ती हैं, हमारे देश के लिए अनर्गल बातें कर रहे हैं।

यह कहाँ तक उचित है?

अपने देश का पूर्ण सम्मान कीजिए। अपने देश की किसी भी बातों को व्यर्थ में बढ़ा चढ़ा कर देश को बदनाम ना करें।

जो बात हमारे देश की है, उसका निर्णय करने के लिए हमारा देश सक्षम है और वो ही उचित निर्णय लेगा।

व्यर्थ में अन्य देश के लोग, उसके लिए कुछ ना बोलें, वो ही अच्छा है। 

हम भारतवासियों को इस समय एक रहना होगा, किसी को भी अपने देश की संप्रभुता को नष्ट नहीं करने देना होगा।

सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि उन विदेशियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हमारे देश की हस्तियों ने भी कमर कस ली है।

अभी सबका एक ही लक्ष्य होना चाहिए,

India together, protest propaganda.

अगर आप को भी है देश से प्यार, तो बना लीजिए राष्ट्रीय एकता को हथियार।

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳🙏🏻


Thursday, 4 February 2021

Article : भरोसेमंद दुश्मन या गद्दार दोस्त! बेहतर कौन?

 भरोसेमंद दुश्मन या गद्दार दोस्त! बेहतर कौन?


आजकल की तो सुर्खियाँ भी कमाल की हैं।

कल news में सुनने को मिला कि जिस तरह भारत ने अपने कुछ पड़ोसी देश, जो की आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन तक vaccine की कुछ dose free में भेजी है, बतौर gift. 

वैसे ही चीन ने भी पाकिस्तान के बहुत गिड़गिड़ाने के बाद vaccine के free dose भेजी है, gift के रूप में। पर साथ में दिया एक * T&C  

T&C, अब यह क्या बला है?

आइए जानते हैं, यह *T&C  क्या है?

चीन ने साथ में यह बात भी रख दी है कि अगली dose के पैसे देने होंगे।

बात यहीं खत्म नहीं होती है, बल्कि शुरू होती है‌।

 उन doses को जिसे चीन ने gift के रूप में भेजी है, उसके लिए वहाँ के health minister ने कहा है कि वहाँ की public उसे अपने risk पर लगवाएं।

वहीं दूसरी तरफ वहाँ के foreign minister यह सोच रहे हैं कि क्या India से vaccine मंगा ली जाए?

आप थोड़ा गौर कीजिए, दोनों ही statment पर।

एक तरफ चीन, जो पाकिस्तान का बहुत बड़ा खैरख्वाह है, दोस्त है, हितैषी है। उस पर वहाँ के लोग तो क्या, सरकार भी विश्वास नहीं कर पा रही है।

वहीं दूसरी तरफ भारत, जिसे पाकिस्तान अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझता है, आए दिन हमले करता रहता है, उसे ध्वस्त करने के मंसूबे बनाता रहता है।

उसे जब अपने लोगों की जीवन सुरक्षा का ख्याल आया, तो उसे भारत की याद आ रही है। 

आप सोच सकते हैं कि ऐसा क्यों?

क्योंकि वो भी जानता है कि भारत दुश्मनों के साथ भी ईमानदार रहता है। अगर वो दवा भेजेगा तो वो संजीवनी ही होगी।

तो सोचिए, जिसकी विश्वनीयता पर दुश्मनों को भी विश्वास है, उस पर अपने देश के लोगों को विश्वास ना होना, अपने देश के प्रति कितना बड़ा अपराध है ?

गर्व कीजिए कि हम भारतवासी हैं और मोदी जी हमारे प्रधानमंत्री, हमें हर तरह से सुरक्षित रखेंगे।

हमारा विश्वास, ही भारत को सर्वोपरि बनाएगा।

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳🙏🏻



Wednesday, 3 February 2021

Kids story : सब कुछ बताना और पूछ्ना

 सब कुछ बताना और पूछ्ना




सूरज बहुत ही मेहनती और समझदार बच्चा था। उसके पिता सुरेश दूसरों के खेत पर काम करते थे। सूरज उनके साथ रोज काम करने जाता था। साथ ही रात को school पढ़ने जाता था।

एक दिन सूरज के महेश चाचा, शहर से किसी काम के सिलसिले में आए थे। 

सुबह काम खत्म करके महेश, जब सूरज और अपने भाई के साथ खाना खा रहा था तो, उन्हें बातों के जरिए पता चला कि सूरज पढ़ने में बहुत होशियार है और साथ ही बहुत आज्ञाकारी भी।

महेश ने कहा- सुरेश दद्दा, कब तक गांव से बंधे रहोगे, ना तो अपने खेत खलिहान हैं, ना घर मकान। फिर तुमने जो क़र्जा लिया था, भाभी के इलाज के लिए, वो भी पट गया है। मेरे संग शहर चलो, वहाँ एक कमरा तुम भी ले लेना।

सूरज थोड़ा बड़ा भी हो गया है और होनहार भी बहुत है, इसका यहाँ कोई भविष्य नहीं है।

शहर में तुम दोनों मिलकर मेहनत मजदूरी कर लेना, तो दोनों की गुजर हो जाएगी।

रात में सूरज सरकारी स्कूल में पढ़ लेगा, भगवान ने चाहा तो कुछ बन जाएगा।

भाई की बात, सुरेश को सही लगी। सूरज की माँ के जाने से घर भी काटने को आता था।

सुरेश और सूरज दोनों शहर आ गये। महेश ने कमरा और काम दोनो दिलवा दिए, साथ ही सूरज का night school में admission भी करा दिया।

सूरज होनहार था, बहुत जल्दी वो अपने school में first आने लगा।

वहाँ के एक अध्यापक को सूरज बहुत अच्छा लगने लगा, वो बोले, बेटा तुम बहुत होशियार हो, night school की जगह तुम सुबह के school में आना शुरू कर दो। और काम रात में कर लो।

सूरज बोला, पापा से पूछकर बताऊंगा।

वो बोले, तुम्हारे पापा क्या करते हैं?

वो बोला, जी मजदूर हैं।

मजदूर......, तो वो तुम्हे क्या बता पाएंगे? जब वो खुद पढ़े-लिखे नहीं है।

सूरज बोला सर जी, मैं अपने पापा को सब कुछ बताकर और पूछकर ही करता हूँ।

बहुत अच्छा है, तुम पूछकर बता देना।

सूरज ने अपने पापा से कहा, कि उसको teacher जी, बोल रहे हैं कि, वो अब से दिन का school और रात में काम करना शुरू कर दें। 

तो क्या वो ऐसा कर ले?

सुरेश बोला, बेटा मैं कहाँ पढ़ा-लिखा हूँ।  teacher जी अच्छे के लिए बोल रहे हैं, तू कर ले, उनका कहा।

सूरज ने teacher को बता दिया। तब से उसने सुबह पढ़ना और शाम को काम करना शुरू कर दिया।

होनहार सूरज, आगे ही आगे बढ़ता गया, पर वो जो कुछ भी करता, तो अपने पापा से अपनी सारी बात उन्हें बताकर और पूछकर करता।

सुरेश हमेशा कहता, बेटा मैं कहाँ पढ़ा-लिखा हूँ। अब तो तुम्हें मुझसे ज्यादा समझ है, हर बात की, तुम समझ लो, क्या करना है।

पर सूरज ना पूछ्ना छोड़ता, ना बताना। और काम भी वही करता, जिसमें उसे पापा, हाँ करते।

बेटे की आदत के कारण सुरेश अपनी समझ से कभी हाँ और कभी ना कर देता।

सूरज IAS officer बन गया। बहुत से Newspapers वाले उसका interview लेने आए, सबने उसकी सफलता का कारण पूछा।

उसने सबसे कहा, मैं अपनी सारी बातें अपने पापा को बताता था और पूछता था कि क्या करूं। वो जो भी कहते थे, मैं वहीं करता था। तो आज मैं जो कुछ भी हूँ, उनके कारण हूँ।

Newspaper वालों को जब पता चला कि सूरज के पिता जी अनपढ़ हैं और मामूली से मजदूर हैं तो उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ कि इतना बड़ा officer अपने पिता जी को कितना मान देता है।

अगले दिन अखबारों की सुर्खियों में था, IAS officer सूरज की सफलता का राज उनकी मेहनत, लगन और अपने पिता जी पर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास है।

सभी को सफलता प्राप्त करना है तो अपने माता-पिता को सब कुछ बता कर और पूछकर करें। ऐसे लोगों पर ईश्वर जल्दी कृपा करते हैं और उन्हें जल्दी सफलता मिलती है।