Wednesday, 10 March 2021

Recipe : Sama rice and Sabudane ka Dosa

कल महा शिवरात्रि का महापर्व है, हम सभी उपवास रखेंगे।

उपवास में, निर्जल व्रत या खाली फलों के सहारे व्रत तो साधक ही रख सकते हैं। समान्य लोग, व्रत के लिए फलाहारी व्यंजन बनाते हैं। 

पर आज कल लोग बहुत diet conscious हो गये हैं। उन्हें पूड़ी-कचौड़ी, पकौड़ी जैसी oily dishes पसन्द नहीं आती हैं।

तो व्रत में क्या बनाया जाए, यह बहुत बड़ी समस्या बन जाती है।

पर जब Shades of Life है आप के साथ तो फिक्र की क्या है बात......

हम पहले भी आपको ऐसी recipe बता चुके है, जिसमें बहुत कम ghee or oil use होता है। उन recipes को पढ़ने के लिए, Recipes for Fasts को click करें।

Kuttu ka dosa हम आपको बता चुके हैं,  इसकी recipe आप को Blog में मिल जाएगी,‌ जिसमें perfect dosa बनाने की पूरी recipe मिल जाएगी। 

आज आपको, समा के चावल (फलाहारी चावल) और साबूदाने से डोसा बनाने की recipe share करेंगे।

संस्कृत में समा के चावल को श्रामक कहा जाता है। गुजराती में इसे सामो या मोरियो कहते हैं। मराठी में समा के चावल को भगर और वरी के नाम से जाना जाता है। हिंदी में मोरधन और समा के चावल या व्रत के चावल कहा जाता है।


समा के चावल व साबूदाने का डोसा




Ingredients

• Sama ke rice - 1cup

• Sago (Sabudana) - 4 tsp.

• Sugar - 1tsp.

• Rock Salt (Sendha Namak) - as per taste

Method 

1. समा के चावल, साबूदाना और चीनी को महीन पीसकर powder बना लें।

2. अब इसमें पानी और सेंधा नमक डालकर पतला batter बना लीजिए।

3. Batter को 30 minutes के लिए छोड़ दीजिए।

4. अब जैसे डोसा बनाते, उसी तरह से इस batter से डोसा बना लीजिए।

5. आप इसमें, आलू की या पनीर की मनचाही filling भर लीजिए।

फलाहारी डोसे को आप नारियल या मूंगफली की चटनी के साथ serve कर सकते हैं।

अगर आप पनीर की filling कर रहे हैं तो, आलू टमाटर के पतले झोल के साथ भी serve कर सकते हैं।

इस batter से बने डोसे का taste almost rice dosa जैसा ही है।

कल ही बनाएं। व्रत में tasty dosa भी खा सकते हैं, यह देखकर पूरा परिवार आप के गुणगान करेगा।

आइए कुछ tips and tricks भी बता देते हैं, जिससे आप का dosa perfect बने।

Tips and Tricks

• डोसे का mixture बिल्कुल महीन पीसें। 

• घोल पतला ready कीजिए, जिससे डोसा crispy बने।

• आप चाहें तो चावल व साबूदाने को भिगाकर भी बना सकते हैं।

   → उसके लिए 2 to 4 minutes के लिए soak कीजिएगा; और batter को grind करते समय, उसमें कम पानी डालकर पीसें, वरना पतला batter नहीं बनेगा।

• अगर आप को डोसे का खट्टा (खमीरे/fermentation वाला) taste पसन्द हो तो आप ¼ cup Curd भी use कर सकते हैं।

• Dosa perfect बनाने के लिए temperature सही होना जरूरी होता है।

   →तवा इतना गर्म होना चाहिए कि batter, फैले पर चिपके नहीं।

       ★ उसके लिए हर डोसा बना कर 1 minute के लिए  gas off कर दीजिए। फिर अगला डोसा बनाएं, इससे तवे का perfect temperature रहेगा और आप के सारे डोसे perfect बनेंगा।

• अगर आप व्रत में साबुदाना नहीं खाते हैं तो उसकी जगह 2 tsp कुट्ट का आटा डाल सकते हैं।

Tuesday, 9 March 2021

Article : योगी जी, तुसी ग्रेट हो!

 योगी जी, तुसी ग्रेट हो!



हम थोड़े देर से प्रभावित होते हैं। हमारे संग ऐसा नहीं है कि, जिस तरफ सारी दुनिया चल रही है, हम भी बिना सोचे चल देंगे।

हम यूं ही नहीं किसी के गुणगान गाने लगते हैं, अगले को अपने काम को proof करना पड़ता है।

पर एक बात और भी है कि यदि कोई अपने कथन को ईमानदारी पूर्वक पूर्ण कर रहा है और वह बात देशहित से जुड़ी है।

तब ऐसे व्यक्ति की हम मुक्त कंठ से प्रशंसा करने से पीछे नहीं रहते हैं।

ऐसे व्यक्ति की प्रशंसा होनी भी चाहिए, क्योंकि प्रशंसा व्यक्ति को प्रोत्साहित करने का कार्य बखूबी करती है।

तो आज उस महान व्यक्ति, जिसके विषय में हम बात कर रहे हैं, वो कोई और नहीं, बल्कि हमारे योगी आदित्यनाथ जी ही हैं।

योगी जी ने उत्तर प्रदेश का कार्य भार सम्हालते हुए कहा था कि वो उत्तर प्रदेश से गुंडाराज ख़त्म कर देंगे। 

योगी जी के कार्यकाल का चौथा साल चल रहा है। 

अब देखते हैं कि उन्होंने अपने कथन को कितना पूर्ण किया।

उन्होंने इन चार सालों में, ना जाने कितने सालों से गुंडागर्दी में धाक जमाएं, गुंडों के शहंशाहों के पैर धरती से उखाड़ फेंके हैं।

फिर वो चाहे कानपुर के विकास दुबे हो, नोएडा के सुन्दर भाटी हो या ऐसे ही और भी....

और गुंडाराज ख़त्म करने की हद तो देखिए, कि अब उत्तर प्रदेश से ना केवल गुंडाराज ख़त्म हो रहा है, बल्कि गुंडे यहांँ आने से भी थर-थर कांपने लगे हैं।

मुख्तार अंसारी इसका जीता जागता उदाहरण है। वो पंजाब की जेल में रहने को तैयार है, दिल्ली आकर पेशी भी कर गया।

पर उत्तर प्रदेश में आने के नाम पर कोर्ट-कचहरी प्रारम्भ करवा दी गई है।

आखिर क्यों? 

जबकि जेल में ही तो पंजाब में भी है।

क्या कहेंगे आप, इसे? 

सालों पहले, जिस राज्य से गुंडों के सरताज बने थे, आज वहीं आने में घिग्गी क्यों बंध गई है?

सीधा सा मतलब है कि योगी जी ने अपनी कथनी पूर्णतया सिद्ध कर दी है। उत्तर प्रदेश में बहुत तेजी से गुंडाराज ख़त्म हो रहा है, साथ ही गुंडे लोग उत्तर प्रदेश में आने से भी कतराने लगे हैं।

गुंडाराज ख़त्म करने के साथ ही योगी जी, उत्तर प्रदेश को उसकी वो पहचान भी दिला रहे हैं, जिसका वो अधिकारी है। इस राज्य में काशी, अयोध्या, मथुरा, प्रयागराज, जैसे ना जाने कितने पवित्र स्थान हैं।

अर्थात् उत्तर प्रदेश जो कि तीर्थस्थानों का राज्य है, आज यह भी सार्थक होता जा रहा है।

इस बात के प्रत्यक्ष साक्षी हैं, प्रयागराज का अर्ध कुम्भ मेला, राममंदिर निर्माण और काशी, प्रयागराज, अयोध्या का कायाकल्प।

कोरोना जैसे महामारी में योगी जी की व्यवस्था देखते ही बनती है। इतनी बड़ी आबादी वाले राज्य को सम्हलना कोई हंसी-खेल नहीं था।

पर योगी जी ने उत्तर प्रदेश में कोरोना को control में रखा। 

गरीबों का, मजदूरों का और बाकी सब का भी पूर्णतया ध्यान रखा।

जहाँ सख्ती अनिवार्य थी, वहाँ सख़्ती रखी और जहाँ सहयोग आवश्यक था, वहाँ सहयोग।

हाँ, बहुत से सरकारी कर्मचारी, उनसे नाखुश भी हैं, क्योंकि उनकी छुट्टियों पर गाज गिरी है। जिनमें हमारे परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। पर देश हित के लिए हम वह सहन कर लेंगे। 

जिसको नहीं देश प्यारा

उसका भविष्य नहीं उजियारा

देश हित पर सब कुर्बान

छुट्टियों का भी बलिदान

हम तो यही कहेंगे, योगी जी तुसी ग्रेट हो, उत्तर प्रदेश की hope हो। हमें सदैव आप जैसे संरक्षक की आवश्यकता है।

Monday, 8 March 2021

Poem : स्त्री

स्त्री 


टूटती है कई बार,

मगर टूट कर भी।

ना टूटती है जो,

स्त्री है वही तो।।


टूटती है वो, जब 

मायके की दहलीज,

छोड़ आती है।

अपना बचपन, अपने सपने,

जिन्हें अब तक कहती थी अपने,

वो सब बिसराती है।

पति ही नहीं, 

पूरे परिवार को अपनाती है।

एक परिवार की थी,

अब दो-दो को निभाती है।

स्त्री टूट कर भी,

कहाँ टूट पाती है।।


टूटती है वो, जब 

पहली प्रसव पीड़ा होती है,

अपने अन्दर असंख्य,

दर्द के बवंडर सहती है।

पहले सा शरीर फिर ना,

कभी पाती है।।

बन के वो माँ, 

अपने दर्द को।

बच्चे की मुस्कान में,

छिपाती है।

स्त्री टूट कर भी,

कहाँ टूट पाती है।।


टूटती है वो, जब

अपने संसार को बनाने में,

ख़ुद से ही बहुत दूर, 

होती चली जाती है।

अपना अस्तित्व खुद, 

अपने हाथों से मिटाती है।

एक कन्या से वो,

गृहणी बन,

पूरे गृह को,

ऋणी कर जाती है।

स्त्री टूट कर भी,

कहाँ टूट पाती है।।


वो टूटती है, 

बिखरती है,

पर पल भर में,

फिर संवर जाती है।

समेटकर अपनी टूटन,

वो फिर निखर जाती है।

उसमें शक्ति है सृजन की,

तभी तो वह स्त्री,

कहलाती है।।


💐अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ 💐