Thursday, 26 June 2025

Story of Life : प्यार पर घात (भाग-4)

ओह! श्लोक बाबू, स्नेहा से दिल लगा बैठे थे, तभी मुझे जलीकटी सुना रहे थे...

हाय! अब मेरा और मेरे बच्चों का क्या होगा, निर्मोही श्लोक पर सारी जवानी तबाह कर दी। अब जैसी वो दिखती है, ऐसे में कौन उसे पूछेगा?

उसने भारी मन से फोन करके office से तीन दिन की छुट्टी ले ली। 

वो पूरे दिन अनमनी सी रही... रो-रोकर उसकी आंखें लाल हो गई थीं...


प्यार पर घात (भाग-1),

प्यार पर घात (भाग-2) और

प्यार पर घात (भाग-3) के आगे…

प्यार पर घात (भाग-4)


हे भगवान! लगता है स्नेहा ने श्लोक का प्रेम अनुरोध स्वीकार कर लिया... 

श्वेता को बहुत अफसोस हुआ कि उसने अपने पर पहले ध्यान क्यों नहीं दिया, क्यों अपने प्यार पर घात करा दिया?

रात भी उससे ठीक से खाना नहीं खाया गया।

पर अगले दिन से उसने office join कर लिया, आखिर कितने दिन की छुट्टी लेती और किसके लिए?

Office तो उसने ज़रूर join कर लिया था, पर मन उसका टूट गया था। तो वो गुमसुम-सी अपने काम में लगी रहती। 

खाना उससे खाया नहीं जा रहा था तो शरीर में ताकत बनाए रखने के लिए वो नींबू पानी, सूप, सलाद, फल और हल्का-फुल्का खाना, आदि ही ज्यादा खा रही थी। 

हाँ, एक काम उसने ज़रूर start कर दिया था कि उसने अपना ख्याल रखना शुरू कर दिया था, जैसे एक बार beauty parlour में जाकर facial, hair colouring, padicure, manicure करा लिया था।

अब beauty products के साथ homemade product use कर रही थी। हल्की-फुल्की exercise भी कर रही थी, अपना रूप निखारने के लिए...

उधर श्लोक का office से देर से आना और अपने में ही खोए रहना और उसे ignore करना जारी था।

दिन, हफ्ता, महीना बीत गया...

अब तो office में श्वेता के दीवानों ने भी उसके इर्द-गिर्द मंडराना शुरू कर दिया था।

एक दिन श्लोक office से एक घंटा पहले ही घर आ गया, उस दिन श्वेता ने श्लोक की पसंद की red colour की साड़ी पहनी थी और उसके बाल खुले हुए थे, क्योंकि वो उन्हें बांध नहीं पाई थी।

श्लोक, श्वेता को एकटक देखते हुए बोला, बच्चे कहां हैं?

बच्चे तो खेलने गए हैं, कि‌ पापा तो एक घंटा देरी से ही आएंगे।

श्लोक ने श्वेता को बाहों में भर लिया, आहा! क्या बात है madam, बिजली गिरने के mood में हैं। Coffee पीने चलें?

ओह! क्यूं आज आपकी स्नेहा ने coffee पीने से मना कर दिया था, जो जल्दी चले आए और coffee पीने चलने की बात कर रहे हो... श्वेता ने श्लोक की बाहों से छिटक कर बोला...


आगे पढ़ें, प्यार पर घात (अंतिम भाग) में…

Wednesday, 25 June 2025

Story of Life : प्यार पर घात (भाग-3)

उसे श्लोक की jeans में एक गुलाबी, खूशबूदार काग़ज़ और एक दस का सिक्का मिला।

काग़ज़ को पढ़कर श्वेता के पैरों तले जमीन खिसक गई...


प्यार पर घात (भाग-1) और

प्यार पर घात (भाग-2) के आगे…

प्यार पर घात (भाग-3)


आह! यह क्या?

उसने बहुत बार उस कागज़ को पढ़ा, पर हर बार स्नेहा से प्रेम अनुरोध ही दिखा...


“प्रिय स्नेहा 

तुम इतनी सुन्दर हो, कि न चाहते हुए भी तुमसे स्नेह हो जाता है। श्वेता की बेडोल figure के आगे, तुम्हारी figure तो कमाल की है। उसके साथ रहते हुए मेरी जिंदगी नीरस हो गई है। उसके साथ कहीं बाहर निकलने का भी मन नहीं करता, कौन drum के साथ घूमने जाए। अगर तुम्हें ऐतराज़ न हो, तो ज्यादा नहीं, बस क्या शाम के कुछ घंटे मुझे दे सकती हो, मेरा प्रेम अनुरोध समझकर...

तुम्हारे स्नेह के प्रति उत्तर में श्लोक...”


आखिर कब और कैसे श्लोक स्नेहा से स्नेह करने लगा? 

तभी उसे याद आया कि एक दिन, जब वो सारे काम खत्म करके श्लोक के पास आई थी, तो उस ने कहा था कि सारे काम निपटा लो, बस मेरा ही मत सोचा करो, कि कभी मेरे पास भी जल्दी आ जाओ...

अरे इतने काम रहते हैं, खत्म ही नहीं होते, कितना भी जल्दी कर लूं। तुम्हारा क्या है, office से आकर खा-पीकर आराम से बिस्तर पर। श्वेता तुनककर बोली...

श्लोक भी भरा बैठा था, इंतजार करते हुए, तो चिढ़कर बोला - तुम भी वही हो, काम भी वही, पर जब अपना ही शरीर बोझ हो, तो काम कैसे जल्दी हो...

श्लोक! चीख पड़ी थी श्वेता।

फिर अपनी तकिया उठाकर सोफे पर जा धंसी थी, पूरी रात रोते-रोते कटी थी... पर श्लोक बेखबर सोता रहा।

ओह! श्लोक बाबू, स्नेहा से दिल लगा बैठे थे, तभी मुझे जलीकटी सुना रहे थे...

हाय! अब मेरा और मेरे बच्चों का क्या होगा, निर्मोही श्लोक पर सारी जवानी तबाह कर दी। अब जैसी वो दिखती है, ऐसे में कौन उसे पूछेगा?

उसने भारी मन से फोन करके office से तीन दिन की छुट्टी ले ली। 

वो पूरे दिन अनमनी सी रही... रो-रोकर उसकी आंखें लाल हो गई थीं...


आगे पढ़ें, प्यार पर घात (भाग-4) में…

Tuesday, 24 June 2025

Story of Life : प्यार पर घात (भाग-2)

वही लोग आज मेरे पास फटकना तो दूर, देख भी नहीं रहे थे...

कहीं तुम भी बदल तो नहीं जाओगे? मुझसे मुंह तो नहीं मोड़ लोगे?

आह! कैसी बात करती हो श्वेता?


प्यार पर घात (भाग-1) के आगे…

प्यार पर घात (भाग-2)


तुमने मेरे प्यार को खोखला समझ लिया है क्या? या खाली खूबसूरती पर टिका समझ लिया है।

मेरी पहली और आखिरी पसंद हो तुम... तुम जैसी हो, वैसी ही मेरी हो...

I love you, यह कहकर श्वेता, श्लोक के गले लग गई...

कुछ देर बाद श्लोक तो गहरी नींद में सो गया, पर श्वेता उसको देख-देखकर निहाल हुई जा रही थी, कि उसे कितना प्यार करने वाला मिला है।

शादी के दस साल बीत गए थे। उनका परिवार पूरा हो गया था, शौर्य और शिप्रा दो प्यारे बच्चों के साथ, पर श्वेता की व्यस्तता समय के साथ बढ़ती गई। 

श्वेता ने परिवार और काम में अपने आपको इतना डुबा दिया था कि अब वो अपना तनिक भी ध्यान नहीं देती थी। नतीजतन 30 की उम्र होने के बावजूद वो 45 साल की दिखने लगी थी। 

बेडोल शरीर, कच्चे-पक्के बाल, बिना glow का चेहरा... कोई कह नहीं सकता था कि यह वही श्वेता है, जो अपने college की miss fresher and farewell रही थी।

श्लोक भी श्वेता के प्यार की एक झलक पाने को तरस जाता था। घर से बाहर वो जाते नहीं थे, क्योंकि बच्चे बाहर निकलते ही restaurant, mall, खिलौने और dresses की ज़िद्द करने लगते थे।

मतलब जिंदगी को खूबसूरत कहने को कुछ नहीं रह गया था।

एक दिन श्वेता श्लोक के कपड़े धोने के लिए डाल रही थी तो हमेशा की तरह सब जेबें खंगालने लगी कि जरूरत का कुछ है तो नहीं..

उसे श्लोक की jeans में एक गुलाबी, खूशबूदार काग़ज़ और एक दस का सिक्का मिला।

काग़ज़ को पढ़कर श्वेता के पैरों तले जमीन खिसक गई...


आगे पढ़ें, प्यार पर घात (भाग-3) में...