Wednesday, 18 September 2019

Kids Story : Advay the hero : Pain


 Advay the hero: (Pain)



Advay अपने परिवार के साथ घूमने मथुरा, वृन्दावान गया था। उनके होटल के पास ही मंदिर था, जिसमें बहुत बड़ा मैदान भी था। उस मैदान में कुछ गायें बंधी थी, और वहाँ के local बच्चे भी खेलते रहते थे।

एक दिन शाम को advay की family का घूमने जाने का समय हो गया था, advay सबसे पहले ready हो गया था।

Mumma, पापा, दीदी सब तैयार हो रहे थे, तो advay खिड़की से बाहर झांक रहा था। उसने देखा कुछ लड़के मंदिर के मैदान में काँच की बोतल को wicket बनाकर cricket खेल रहे थे।

Advay को उनका खेल देखना बहुत अच्छा लग रहा था। तभी पापा बोले, आज तुम्हें जन्मभूमि ले कर चलता हूँ।

सब घूमने चले गए। अगले दिन, advay एक गाय और बहुत सारे लोगों के शोर से उठ गया।

उसके पापा ने mumma से कहा, मैं जरा देखकर आता हूँ, क्या हो रहा है?

Advay बोला, पापा मैं भी चलूँगा

पापा बोले, अच्छा चलो, पर हम लोग काफी दूर रहेंगे, पास नहीं जाएंगे। advay मान गया।

जब वो लोग उस मंदिर के मैदान में पहुंचे, तो उन्होंने देखा, एक गाय बुरी तरह चिल्ला रही थी, रस्सी तुड़वाना चाह रही थी, और अगर कोई उसके पास जा रहा तो वो बहुत खतरनाक हो जा रही थी, उसे पैर और सींग से मारना चाह रही थी।

वहाँ खड़े कुछ लोग बोल रहे थे, गाय पागल हो गयी है, इसे मार दो, वरना ये हमको भी मार सकती है। कुछ कह रहे थे भूत-प्रेत का साया है जी, तभी तो रातों रात कैसी पागल हो गयी है, झाड-फूंक, मंत्र-सिद्धि करने चाहिए।

तभी advay का ध्यान .......


आगे पढ़िए Advay the hero: (Pain, part -2) में 


Tuesday, 17 September 2019

Article : कौए के दिन


कौए के दिन

श्राद्ध-पक्ष, पितृपक्ष, या कनागत के दिन आ गए हैं। ये वो दिन हैं, जब लोगों को कोयल से ज्यादा कौए भाते हैं। वैसे तो ये काला काग और उसकी काएँ-काएँ किसी को फूटी आँख नहीं सुहाती है। पर जब बात कनागत की हो तो, लोग ढूँढ-ढूँढ कर कौए को भोजन खिलाते हैं।


पर क्या आपके मन में ये सवाल कभी नहीं आया, कि कौए को ही क्यों खिलाते हैं? तो आज आपको इस विषय में बताते हैं।

ऐसा इसलिए है, क्योंकि पक्षियों में कौआ चंडाल का प्रतीक है, उसे यमराज जी का दूत माना गया है। अतः ये माना जाता है, ये हमारे पितरों के पास से आते हैं। जिसके कारण symbolic रूप में, इन्हें खिलाया गया भोजन हमारे पितरों तक पहुँच जाता है। उन्हें तृप्ति मिल जाती है।

गरुण पुराण में भी व्याख्या की गयी है, कि कौए को भोजन खिलाने से पितरों तक भोजन पहुँच जाता है।

कहा जाता है इंद्र भगवान के पुत्र जयंत ने सबसे पहले कौए का रूप धारण किया था, तब भगवान श्री राम जी, ने उसे वरदान दिया था, कि तुम्हें(कौए) अर्पित किया गया भोजन पितरों को मिलेगा।

पर ऐसा नहीं है, कि हिन्दू धर्म में केवल श्राद्ध पक्ष में कौए को भोजन कराना चाहिए, बल्कि रोज़ ही हमें भोजन को पाँच लोगों को अर्पण करना चाहिए।

पहले ईश्वर को, दूसरा गाय को, तीसरा कुत्ते को, चौथा कौए को, और पांचवा चींटियों को। ऐसा इसलिए कहा गया है, क्योंकि पूरा ब्रह्मांड पाँच तत्वों का बना है। जिसमें ईश्वर आकाश का, गाय धरती का, कुत्ता जल का, कौआ वायु का और चींटी अग्नि का प्रतीक मानी गयी है।

अगर आप पंडितों की सुनते हैं, तो वे, श्राद्ध में, पंडितों को भोजन व दान आदि करने की बात करते हैं।

माना जाता है, जब हम इस संसार में आते हैं, तो हमारे ऊपर पितृ-ऋण आ जाता है, जिन्हें पितृपक्ष के दिनों में पूजा-पाठ, दान, तर्पण से उतारा जाता है।

ये तो बात हुई शास्त्र, पुराणों और पंडितों की। 

पर जो प्यार, श्रद्धा, और विश्वास हम इन कौओं के प्रति अपने पूर्वजों के जाने के बाद दिखाते हैं, काश वही प्यार, श्रद्धा, और विश्वास माता-पिता के जीवित रहते ही दिखाएँ।

सच जानिए, कौओं को भोजन कराने से ज्यादा पुण्य माता-पिता की सेवा में है।

उनके इस दुनिया से जाने के बाद नहीं, उनके जीते-जी सेवा करके आप इस ऋण से मुक्त हो सकते हैं। और इससे सरल और उचित कोई भी विधि नहीं है।  

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Article: पितृपक्ष, बस 15 मिनट... ( https://shadesoflife18.blogspot.com/2018/09/article-15.html?m=1 )

Monday, 16 September 2019

Story of Life: एहसास (भाग - 4)


एहसास (भाग - 4)

मालिनी बोली, Sorry Sir...
पर ऐसा ही treatment हम patient को देते हैं। जिसकी permission तो आप ने ही दी है।

डॉ मालिनी की ऐसी बात सुनकर डॉ नितीश कुछ क्षण चुप रहे, फिर बोले, डॉ मालिनी आप मुझ से इन सब बातों की हमेशा शिकायत करती रहीं, पर मैं, धन के लोभ में अंधा, कभी  patient की तकलीफ समझ ही नहीं सका। पर आप ने जब मेरे साथ भी वैसा किया, तो एक एक बात को समझ पा रहा हूँ।

आज से ये hospital फिर से वैसे ही चलेगा, जैसा डॉ अमर के सामने चलता था। सारे  doctors और staff को बता दें, जो ठीक से अपना काम नहीं करेगा, उसे निकाल दिया जाएगा। अब सभी ठीक से अपना काम करने लगे, और जो नहीं सुधरे उन्हें निकाल दिया गया।

डॉ नितीश को तुरंत अच्छे room में shift कर दिया गया, अच्छे से treatment भी शुरू हो गया। जिससे डॉ. नितीश जल्दी ही ठीक हो गए‌। 

अब से उन्होंने दो heads की post कर दी, एक वो खुद थे, और दूसरी head डॉ मालिनी थीं।

त्रिवेणी hospital फिर पहले-सा अच्छा हो गया। क्योंकि डॉ नितीश पर जब खुद पर पड़ी थी, तो उन्हें सबके दर्द का एहसास हो गया था। अब वो बहुत अच्छे से जान चुके थे, कि doctor सिर्फ पैसे कमाने के लिए नहीं वरन समाज सेवा के लिए भी बनते हैं।