Wednesday, 20 November 2019

Kids Story : डाँट का डर ,


आज की story problem based है, हमारी viewer की बेटी की problem है, उनकी बेटी कुछ नहीं करती है, बस एक जगह बैठी रहती है। अगर आपकी भी यही problem है, तो इस पर आप भी जरूर ध्यान दें।
डाँट का डर

श्रुति की बेटी सेजल का किसी काम में मन नहीं लगता था, न तो वो पढ़ने में अच्छी थी, न खेल कूद में। बस वो घंटो एक जगह बैठ कर निकाल देती थी।
    श्रुति उसकी इस आदत से, बहुत परेशान थी। कई डॉक्टर को भी दिखा चुकी थी, पर कहीं से उसे कोई हल नहीं मिल रहा था।
    बल्कि धीरे धीरे उसकी हालत और ज्यादा खराब होती जा रही थी। इधर कुछ दिनों से तो उसके हाथ पैर भी काँपने लगे थे, साथ ही वो हकलाने भी लगी थी।
    किसी को समझ नहीं आ रहा था, कि क्या उपाय किया जाए।
    एक दिन उसके घर के पास एक computer का institute खुला, जहाँ बच्चों को ही सिखाया जाता था। वहाँ बड़े लोगों के admission नहीं होते थे।
    Apartment के बहुत बच्चे जा रहे थे, तो श्रुति ने सेजल को भी भेज दिया।
    कुछ दिन तक सेजल जाती रही, श्रुति ने देखा, सेजल में change आ रहा था। वो थोड़ा ठीक से behave करने लगी थी। और सबसे बड़ी बात computer की classes के लिए वो हमेशा ready रहती थी, बल्कि अगर किसी कारण से श्रुति नहीं भेज पाती थी, तो उस दिन वो बहुत रोती थी।
    एक दिन वो भी गयी, और उसने सेजल की computer की class में बैठने की permission भी माँगी। वहाँ के administration ने इसके लिए मना कर दिया।
    तभी वहाँ से सेजल की computer की ma’am निकल रही थीं। उन्होंने भी श्रुति को allowed करने की request की। तो administration ने permission दे दी।
    Computer ma’am ने श्रुति से कहा - आप teachers corner में बैठ जाइए, वहां की window से आपको सब कुछ दिखेगा, पर जिसको पता ना हो, वो आपको नहीं देख पाएगा और हाँ जब तक class चले, बीच में कुछ मत बोलिएगा। श्रुति ने हाँ कर दी।
    सारे बच्चे रोज़ की तरह पढ़ रहे थे, किसी को नहीं पता था, कि श्रुति वहाँ बैठी है, पर श्रुति को सब दिख रहा था।
    श्रुति ने देखा, सेजल भी बहुत से question के reply दे रही थी। वो भी सही और बहुत confidence के साथ भी।
    श्रुति की आँखों में आँसू भर गए। जब class finish हुई, तो उसने सेजल का माथा चूम लिया। computer ma’am बोलीं, आप सेजल को छोड़कर आइये, मुझे आप से बात करनी है। श्रुति बोली, मुझे भी आप से बात करनी है, मैं बस 15 min. में लौट कर आती हूँ। पूरे रास्ते श्रुति सेजल को प्यार करती रही, जब वो घर पहुँची, तो उसके पति शिखर भी घर में मौजूद थे। 
    अरे शिखर आप घर पर हैं? हाँ, आज half day की leave मिल गयी है, कल से दो दिन के लिए tour पर जाना है। पर तुम बताओ, क्या बात है? आज बहुत खुश दिख रही हो।
    श्रुति ने सेजल को अपनी सास के पास छोड़ा, और कहा माँ जी, आप इसे संभालें, हम अभी आ रहे हैं। कहकर वो शिखर का हाथ पकड़ कर अपने साथ ले गयी।
    दोनों ही computer ma’am के पास पहुँच गए, रास्ते में श्रुति ने शिखर को सेजल के performance के बारे में बता दिया।
जब दोनों पहुँचे, तो computer ma’am ने दोनों से पूछा, कि आप दोनों सेजल को बहुत डाँट लगते हैं? वो बेवकूफ़ है, कुछ नहीं कर सकती है, ऐसा कहते हैं?
    अब दोनों एक दूसरे का मुँह देख रहे थे, क्योंकि ये सच था। तब वो बोलीं, आप लोगों की बेटी बहुत प्यारी है। बस problem ये है, कि उसके मन में बहुत अन्दर तक आप लोगों की डाँट और उम्मीद का डर बैठ गया है। साथ ही आप लोग उसे हमेशा यही एहसास कराते रहते हैं, कि वो कुछ नहीं कर सकती है।
    आपको पता है, मुझे उसकी शुरू की classes अकेले में लेनी पड़ी थी, जिसमें मैंने उसे कुछ नहीं पढ़ाया। उन दिनों मैंने उसके अन्दर बस ये बैठाया, कि वो normal है, वो भी सब कुछ कर सकती है, उसकी बिल्कुल भी डाँट नहीं लगाई, ना उसके हकलाने पर मैंने ध्यान दिया। सिर्फ one week लगे, मुझे फिर वो थोड़ी normal हो गयी। उसके next week मैंने उसे धीमे-धीमे और बहुत low level से पढ़ना शुरू किया। फिर level भी बढ़ाया और time भी। फिर सब के साथ पढ़ना शुरू किया, साथ ही सेजल से यह बोलती रही, तुम्हें ढंग से पढ़ना होगा, वरना हमारी team हार जाएगी। मुझे जीताने के लिए वो सब से ज्यादा पढ़कर आने लगी।
आज श्रुति जी आपने खुद देखा, वो हकला नहीं रही थी, question के reply सही भी दे रही थी, और वो भी पूरे confidence के साथ। श्रुति और शिखर बुत बने सारी बात सुन रहे थे।
    बच्चों को बहुत ज्यादा नहीं डाँटना चाहिए, साथ ही उनमें करने की क्षमता है, इसके लिए boost भी करते रहना चाहिए। जो उनमें कमी है, उससे याद नहीं दिलाते रहना चाहिए, बल्कि धीरे से उसे कम कर के खत्म कर दें, इसका प्रयास करें। result आपके सामने होगा।
    शिखर और श्रुति दोनों ने computer ma’am को बहुत सारा धन्यवाद दिया, और उनकी बताई बातों पर ध्यान भी दिया। कुछ साल की अथक मेहनत से सेजल अपने class में good student की category में आ गयी।

Tuesday, 19 November 2019

Tip : How to convert your normal utensil to non-stick utensil


How to convert your normal utensil to non-stick utensil 

Non stick utensil हमारी ज़िंदगी में इस तरह शामिल हो गए, कि लगा cooking करना बहुत easy है। लेकिन आज कल सब जगह यही बताया जा रहा है, कि Non-stick health के लिए harmful है।

Means health से समझौता या cooking फिर से difficult!.....

No way, आपके इस solution के लिए है, यह Tip.

How to convert your normal utensil to non-stick utensil.


  1. अगर आप कोई sweet dish बनाने जा रहे हैं तो जो भी utensil use कर रही हैं।
  2. उसमें 2 tea spoon घी डालकर बर्तन में चारों तरफ घूमा लीजिये,
  3. फिर घी को खूब तेज गरम कर लीजिये।
  4. उसके बाद घी हटा दीजिये।
  5. लीजिये आपका utensil non-stick बन गया, अब आप अपनी dish बना लीजिये।
  6. अगर आप कोई नमकीन dish बना रही हैं।
  7. तो यही काम olive oil, refined, और  mustard oil के साथ कर लीजिये।

Note  - आप जिस भी घी और oil से अपनी dish prepare कर रहे हैं, non-stick बनाने के लिए utensil भी उसी से seasoned कीजिये।         

Monday, 18 November 2019

Stories of Life : इसमें मेरा क्या कसूर 2


इसमें मेरा क्या कसूर 2

“इसमें मेरा क्या कसूर” में आप सब ने भैया की बातें इतने 
अच्छे से सुनी कि अपनी आपबीती बताए बिना, मुझ से भी नहीं रहा गया, और हाँ आप सब मेरी कहानी भी पूरे ध्यान से सुनिएगा।

हाँ तो हुआ यूँ, जब मैं पैदा हुआ, तब तक सब का जोश ठंडा हो चुका था, क्योंकि आप सब जानते ही हैं, बड़े भैया के समय क्या हुआ था। अब जब माँ को प्रसव पीड़ा हुई, तो कोई साथ चलने को तैयार नहीं था।

सबसे गज़ब बात तो यह थी, कि पिता जी भी आने में आना-कानी कर रहे थे। तभी माँ ने घूर के देखा, और कहा- अगर आप भी नहीं चलेंगे, तो मैं भी hospital नहीं जा रही। माँ के ऐसा बोलने से पिता जी घबरा गए, घर में बच्चा कैसा पैदा होगा? तो साथ चल दिये।

मेरे पैदा होने पर nurse पिता जी को मुझे सौंपने आई, पिता जी मुझे देखकर दुखी हो गए। nurse ने पूछा, क्या हुआ आप दुखी क्यों हैं? गोरा चिट्टा, सुंदर सा बेटा भी आपको खुश नहीं कर पाया?

बेटा!.....  मेरे बेटा हुआ है? जी, nurse 
कहकर चली गयी। पर पिता जी को यक़ीन ही नहीं हुआ, कि कोई लड़का भी इतना गोरा, सुंदर हो सकता है? उन्होंने तुरन्त check किया। तब जा कर वो यक़ीन कर पाये। 

हद तो तब हो गयी, जब पिता जी मुझे, माँ के पास ले गए, क्योंकि, जनाब! माँ भी बिना check करे, यक़ीन ना कर सकीं। अब मैं ऐसा हूँ, तो हूँ, इसमें मेरा क्या कसूर। 

पूरे घर को बता दिया गया, गोरा सुंदर सा बेटा हुआ है, लोग तो कई आए, पर जितनों ने मुँह देखा, उतने ही लोगों की check करने की भी इच्छा थी।

हालात यहीं नहीं थमे, पहले जन्मदिवस पर ना जाने कितनी ही frock मिल गईं। उसमें से कुछ तो बहुत ही खूबसूरत भी थीं, जिसने माँ का मन मोह लिया।

बस फिर क्या था, मुझे उनमें से एक सुन्दर सी frock पहना दी। साथ ही मेरे घुँघराले काले बालों में सुन्दर band लगाकर चोटी भी बना दी। पर इतने से ही मन भर लेती माँ, मत कर ऐसा माँ......।  
पर नहीं जी, माँ तो, माँ होती है। अपने लाडले को इतनी खूबसूरती से तैयार किया था, और facebook पर फोटो upload ना करें। ऐसा कैसे हो सकता था? 

भाई सच! जितने किसी cute लड़की को comments ना मिलें होंगे, उससे बहुत अधिक मुझे मिले थे। सबने लिखा था, इतनी cute baby आज तक नहीं देखी, अब माँ सबको कहती रह रही, बेटी नहीं बेटा है......

दादी अलग गुस्सा हो गयी, अच्छे खासे लड़के को लड़की बना कर रख दिया। अब मैं ऐसा हूँ, तो हूँ, इसमें मेरा क्या कसूर।

कुछ बड़ा हुआ, तो अलग ही मुसीबत का सामना करने लगा, जब भी बीमार पड़ता, और डॉ. को दिखाया जाता, तो सब बोलते, कैसा सफेद रखा है, आपका बच्चा, कुछ खाता नहीं है क्या? इसका तो hemoglobin बहुत कम है, पहले वही check करना होगा। मेरा hemoglobin हमेशा 12 के ऊपर ही रहा, पर  हर बार मेरा hemoglobin check करा दिया जाए। 

सही hemoglobin देखकर भी किसी का मन ना भरे, मुझे दुनिया भर की दवाई और ना जाने क्या क्या खाने की हिदायत मिल जाए। 
checking हमेशा चलती रही ..... अब मैं ऐसा हूँ, तो हूँ, इसमें मेरा क्या कसूर।

भगवान जी भी ज्यादा ही मेहरबान थे, रूप के साथ बुद्धि भी भरपूर दी थी, तो बस क्या था School से लेकर college तक ना जाने कितनी लड़कियाँ दीवानी हो गयी थीं। 

आप सोच रहे होंगे, मज़े थे भाई तुम्हारे तो..... अरे! नहीं थे, जितनी थीं, सब चाहतीं, उन्हें ही भाव मिले, एक को दो, तो दूसरी खफ़ा। homework तक नहीं बताती थीं, अब एक अकेला मैं किस किस को खुश करूँ। अब मैं ऐसा हूँ, तो हूँ, इसमें मेरा क्या कसूर।

जब जवानी आई तो माँ की सख्त हिदायत थी, खबरदार जो किसी को घर ले आया, मेरी पसंद की लड़की से ही शादी करनी होगी।

पर वो बात अलग है, कि माँ भी अपनी ज्यादा चला नहीं पायीं, क्योंकि सारे रिश्तेदार अपनी-अपनी पसंद की लड़की के साथ पहले ही booking करके रखे थे। 

अब तो माँ भी परेशान, बुआ की पसंद वाली से करें, तो चाची खफा, चाची की पसंद देखें तो मामी बोलें, दीदी हमेशा ससुराल वालों की तरफ ही झुकेंगी, मौसी भी कहाँ पीछे रहती, खूब बढ़-चढ़ कर मामी का साथ देतीं, आखिर उन्हें अपनी वाली की setting जो करनी थी। और माँ का रुख जरा मायके पक्ष की ओर हुआ, कि बुआ-चाची की त्योरियाँ चढ़ जाती, खबरदार, भाभी जो उधर की लड़कियाँ देखी तो! 

माँ भी अपना सर पकड़ कर बैठ जाती, एक के लिए कोई बताता नहीं है, दूसरे के लिए कोई छोड़ता नहीं है। अब मैं ऐसा हूँ, तो हूँ, इसमें मेरा क्या कसूर।

और जनाब, शादी क्या हुई, मेरे भी घोड़े के मानिंद पट्टी बांध दी गयी, जिससे मैं सदा सीधे ही देखूँ (मतलब हमेशा बीवी को) , कहीं इधर-उधर नहीं देख सकता था।  तब भी बीवी का शक कम नहीं होता, हर रोज़ तगड़ी checking होती है, ऐसा कैसे हो सकता है, कि कोई पास ना मँडराई हो? 

Checking still continues.....  अब मैं ऐसा हूँ, तो हूँ, इसमें मेरा क्या कसूर।

काले और लाल कपड़े तो मेरे लिए हमेशा ही ban रहे, बचपन में माँ ने पहनने नहीं दिये, कि हाय! मेरे लाल को नज़र ना लग जाए, वैसे ही इतना गोरा है, काले-लाल में और ही खिलेगा। बीवी भी पहनने नहीं देती है, कहती है, वैसे ही गोरे रंग ने आफत मचा रखी है, काला-लाल पहनने दूँगी, तो सारे समय घर के आगे कर्फ़्यू लगा रहेगा, अब मैं ऐसा हूँ, तो हूँ, इसमें मेरा क्या कसूर।

Disclaimer : यह कहानी एक कल्पना मात्र है, आप सबको हास्य  व्यंग्यात्मक कहानी के जरिए हँसाने की कोशिश की है। किसी को किसी भी तरह की चोट पहुँचाने का इरादा नहीं है। 

 Complexion से कोई फर्क नहीं पड़ता है, गम सब के हीं हैं, अलग-अलग। पूरी तरह से जहान में खुश तो कोई भी नहीं।