Monday, 25 November 2019

Poem : ख़्वाब


ख़्वाब 


वो रात थी हसीं, 
हर बात लाज़वाब।
आसमां से उतरे थे,
उस दिन दो आफ़ताब।।

हर फ़लसफ़ा डूबा था,
इश्क़  की चाशनी में।
हर ज़र्रा चमक रहा था,
हुस्न  की रोशनी में।।

हर एक नजर,
बस वहीं टिकी थी।
धड़कनें भी सबकी,
उस क्षण रुकीं थी।।

वो पल ही धरती का,
स्वर्ग‌ बन गया था।
जब आपके दिल से,
मेरा दिल मिल गया था।।

आज भी जब यह दिन,
मेरी ज़िन्दगी में आता है।
हर लम्हा मेरा, बहुत ही,
खूबसूरत बन जाता है।।

आज  भी यक़ीन नहीं, 
होता है इस दिल को।
जो था इतना लाज़वाब,
वो सच था, या ख़्वाब।।

आज मेरी शादी की सोलहवीं सालगिरह है, और आज की मेरी यह कविता अपने जीवन साथी को  नज़र !

और उन सब को भी जिनको अपनी शादी हसीं ख़्वाब नज़र आती है। 

शादी की सालगिरह की हार्दिक शुभकामनाएँ!!

Thursday, 21 November 2019

Article : सोच को सलाम


सोच को सलाम


आज का मेरा article एक सच्चे महान इंसान के ऊपर है, जिन्हे दिल्ली में तो बहुत लोग जानते हैं, और अब तो इनकी ख्याति दिल्ली से बाहर भी पहुँचने लगी है।

आज मैं दिल्ली के अनूप खन्ना जी की बात कर रही हूँ, इनकी माँ जब वृद्ध हो गयी, और उनके बहुत से दाँत टूट गए। तो वह कहने लगीं, मैं तो अब भोजन खा नहीं पाती हूँ, तो मेरे हिस्से का खाना किसी जरूरतमन्द को दे दो। तो अनूप जी बोले, आप कितना खाती हैं, जो किसी का भला हो जाएगा।

पर माँ की बात मन में रह गयी, अपने दोस्तों को बात बताई। सब को बात जंच गयी, और शुरू हो गयी, “दादी की रसोई” जहां मात्र 5 रुपए में देसी घी से निर्मित उच्च गुणवत्ता का भोजन दिया जाता है।

ये भोजन इतना स्वादिष्ट होता है, कि गरीब, अमीर सब खाना खाने आने लगे। अनूप जी की सेवा भाव को देख कर लोगों ने धन राशि का दान देना प्रारम्भ कर दिया।

जहां से वो राशन लेते हैं, वो उन्हें सस्ते दाम में राशन देने लगा, सब्जी वाला थोक के भाव में सब्जी दे देता, जिस ऑटो से वो खाना लाते थे, वो इन्हें कम पैसे में पहुंचा देता।

अनूप जी ने कभी इसके लिए सरकार से मदद नहीं मांगी, ना सरकार को कोसा, कि वो कुछ नहीं करती। वे कहते हैं, सरकार को कोसने वालों, तुमने क्या किया है? हर बात का जिम्मा सरकार को क्यों देना? कुछ काम हम भी तो कर सकते हैं।

आप अपना कर्म करें, ये मत सोचिए, कौन क्या कर रहा है? आप कैसे करेंगे? स्वयं ईश्वर इस तरह से आपके पास लोगों की सहायता भेजेंगे, कि आप का काम रुकेगा नहीं। आप बस अच्छा करने की सोच और जज्बा रखिए, अपना  काम पूर्ण ईमानदारी से करिए, फिर कारवाँ तो अपने आप बनता ही जाता है।

रोज 2 घंटे में ये करीब 450-500 तक के लोगों को भोजन करा देते हैं। उसमें भी हर रोज का menu change होता है।

दादी की रसोई के अलावा, बिहार के बाढ़ग्रस्त होने पर 2017 में इन्होंने मदद पहुँचाने की बात की, लोगों ने धन राशि दान की। 5 लाख रुपए एकत्र हुए, भारी मात्रा में राशन इकठ्ठा हुआ। ट्रक द्वारा सहायता पहुंचाई जा रही थी, लोगों को शक था, ना जाने राशन वहाँ पहुंचेगा कि नहीं।

अनूप जी ने ट्रक driver से उसका phone number लिया, पूछा कितने दिन में पहुँचोगे? और उसके पहुँचने के पहले flight से खुद बिहार पहुँच गए। सारे अन्न का वितरण खुद भी किया, उसका video बनाया। फिर सभी दान कर्ताओं को भेज दिया। सबको विश्वास हो गया, दान उचित हाथों तक गया है।

सलाम है, उनकी समाज सेवा के जज्बे और लगन को। जब भी दिल्ली आयें, दादी की रसोई से एक बार खाना जरूर खाएं, और उन्हे दान की राशि देकर समाज सेवा का अभिन्न अंग बने।

Wednesday, 20 November 2019

Kids Story : डाँट का डर ,


आज की story problem based है, हमारी viewer की बेटी की problem है, उनकी बेटी कुछ नहीं करती है, बस एक जगह बैठी रहती है। अगर आपकी भी यही problem है, तो इस पर आप भी जरूर ध्यान दें।
डाँट का डर

श्रुति की बेटी सेजल का किसी काम में मन नहीं लगता था, न तो वो पढ़ने में अच्छी थी, न खेल कूद में। बस वो घंटो एक जगह बैठ कर निकाल देती थी।
    श्रुति उसकी इस आदत से, बहुत परेशान थी। कई डॉक्टर को भी दिखा चुकी थी, पर कहीं से उसे कोई हल नहीं मिल रहा था।
    बल्कि धीरे धीरे उसकी हालत और ज्यादा खराब होती जा रही थी। इधर कुछ दिनों से तो उसके हाथ पैर भी काँपने लगे थे, साथ ही वो हकलाने भी लगी थी।
    किसी को समझ नहीं आ रहा था, कि क्या उपाय किया जाए।
    एक दिन उसके घर के पास एक computer का institute खुला, जहाँ बच्चों को ही सिखाया जाता था। वहाँ बड़े लोगों के admission नहीं होते थे।
    Apartment के बहुत बच्चे जा रहे थे, तो श्रुति ने सेजल को भी भेज दिया।
    कुछ दिन तक सेजल जाती रही, श्रुति ने देखा, सेजल में change आ रहा था। वो थोड़ा ठीक से behave करने लगी थी। और सबसे बड़ी बात computer की classes के लिए वो हमेशा ready रहती थी, बल्कि अगर किसी कारण से श्रुति नहीं भेज पाती थी, तो उस दिन वो बहुत रोती थी।
    एक दिन वो भी गयी, और उसने सेजल की computer की class में बैठने की permission भी माँगी। वहाँ के administration ने इसके लिए मना कर दिया।
    तभी वहाँ से सेजल की computer की ma’am निकल रही थीं। उन्होंने भी श्रुति को allowed करने की request की। तो administration ने permission दे दी।
    Computer ma’am ने श्रुति से कहा - आप teachers corner में बैठ जाइए, वहां की window से आपको सब कुछ दिखेगा, पर जिसको पता ना हो, वो आपको नहीं देख पाएगा और हाँ जब तक class चले, बीच में कुछ मत बोलिएगा। श्रुति ने हाँ कर दी।
    सारे बच्चे रोज़ की तरह पढ़ रहे थे, किसी को नहीं पता था, कि श्रुति वहाँ बैठी है, पर श्रुति को सब दिख रहा था।
    श्रुति ने देखा, सेजल भी बहुत से question के reply दे रही थी। वो भी सही और बहुत confidence के साथ भी।
    श्रुति की आँखों में आँसू भर गए। जब class finish हुई, तो उसने सेजल का माथा चूम लिया। computer ma’am बोलीं, आप सेजल को छोड़कर आइये, मुझे आप से बात करनी है। श्रुति बोली, मुझे भी आप से बात करनी है, मैं बस 15 min. में लौट कर आती हूँ। पूरे रास्ते श्रुति सेजल को प्यार करती रही, जब वो घर पहुँची, तो उसके पति शिखर भी घर में मौजूद थे। 
    अरे शिखर आप घर पर हैं? हाँ, आज half day की leave मिल गयी है, कल से दो दिन के लिए tour पर जाना है। पर तुम बताओ, क्या बात है? आज बहुत खुश दिख रही हो।
    श्रुति ने सेजल को अपनी सास के पास छोड़ा, और कहा माँ जी, आप इसे संभालें, हम अभी आ रहे हैं। कहकर वो शिखर का हाथ पकड़ कर अपने साथ ले गयी।
    दोनों ही computer ma’am के पास पहुँच गए, रास्ते में श्रुति ने शिखर को सेजल के performance के बारे में बता दिया।
जब दोनों पहुँचे, तो computer ma’am ने दोनों से पूछा, कि आप दोनों सेजल को बहुत डाँट लगते हैं? वो बेवकूफ़ है, कुछ नहीं कर सकती है, ऐसा कहते हैं?
    अब दोनों एक दूसरे का मुँह देख रहे थे, क्योंकि ये सच था। तब वो बोलीं, आप लोगों की बेटी बहुत प्यारी है। बस problem ये है, कि उसके मन में बहुत अन्दर तक आप लोगों की डाँट और उम्मीद का डर बैठ गया है। साथ ही आप लोग उसे हमेशा यही एहसास कराते रहते हैं, कि वो कुछ नहीं कर सकती है।
    आपको पता है, मुझे उसकी शुरू की classes अकेले में लेनी पड़ी थी, जिसमें मैंने उसे कुछ नहीं पढ़ाया। उन दिनों मैंने उसके अन्दर बस ये बैठाया, कि वो normal है, वो भी सब कुछ कर सकती है, उसकी बिल्कुल भी डाँट नहीं लगाई, ना उसके हकलाने पर मैंने ध्यान दिया। सिर्फ one week लगे, मुझे फिर वो थोड़ी normal हो गयी। उसके next week मैंने उसे धीमे-धीमे और बहुत low level से पढ़ना शुरू किया। फिर level भी बढ़ाया और time भी। फिर सब के साथ पढ़ना शुरू किया, साथ ही सेजल से यह बोलती रही, तुम्हें ढंग से पढ़ना होगा, वरना हमारी team हार जाएगी। मुझे जीताने के लिए वो सब से ज्यादा पढ़कर आने लगी।
आज श्रुति जी आपने खुद देखा, वो हकला नहीं रही थी, question के reply सही भी दे रही थी, और वो भी पूरे confidence के साथ। श्रुति और शिखर बुत बने सारी बात सुन रहे थे।
    बच्चों को बहुत ज्यादा नहीं डाँटना चाहिए, साथ ही उनमें करने की क्षमता है, इसके लिए boost भी करते रहना चाहिए। जो उनमें कमी है, उससे याद नहीं दिलाते रहना चाहिए, बल्कि धीरे से उसे कम कर के खत्म कर दें, इसका प्रयास करें। result आपके सामने होगा।
    शिखर और श्रुति दोनों ने computer ma’am को बहुत सारा धन्यवाद दिया, और उनकी बताई बातों पर ध्यान भी दिया। कुछ साल की अथक मेहनत से सेजल अपने class में good student की category में आ गयी।