Friday, 6 August 2021

Story of Life : हसीन मुलाकात (भाग-3)

 हसीन मुलाकात (भाग-1) व

हसीन मुलाकात (भाग-2) के आगे....


हसीन मुलाकात (भाग-3)




शायद आज की मुलाकात इतनी ही थी। पर आज उसकी खनखनाती हंसी और मीठी आवाज़ ने मुझे पूरी तरह दीवाना बना दिया था...

ना जाने कहाँ से आई है, ना जाने कहाँ को जाएगी, दीवाना किसे बनाएगी यह लड़की...

अगले दिन जब मैं उठा तो रात में देर तक भीगने के कारण बहुत तेज़ fever हो गया था और बदन बुरी तरह से टूट रहा था। 

आह! आज कैसे मिलूंगा उससे... 

मैं बहुत ही sincere employee हूँ। कभी बगैर बात के छुट्टी नहीं लेता था।

पर आज ना जाने क्या हो गया था कि office से छुट्टी की परवाह नहीं थी, पर उससे नहीं मिल पाना मुझे बहुत सता रहा था।

तभी बाहर बारिश की झड़ी लग गई, और आज तो ऐसी झड़ी लगी थी कि रात तक एक पल को भी नहीं थमी। उसे देखकर मन गा उठा,

लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है, वही आग सीने में फिर जल उठी है.... 

और मैं कब उसे याद करता हुआ, नींद के आगोश में चला गया, मुझे नहीं पता। 

आज कुछ तबियत ठीक लग रही थी, मैंने सोचा office नहीं जाऊंगा पर उससे मिलने जरूर जाऊंगा। 

Office से पहुंचता था तो थका-हारा दिखता था, आज घर से जाना था तो बन-ठन कर gift लेकर गया था।

आज बारिश नहीं हो रही थी, पर मौसम बहुत ज्यादा humid था। मैं बहुत देर तक इधर-उधर घूम कर उसका इंतज़ार कर रहा था।

तभी एक आदमी आया, बोला तुम अंकिता का इंतजार कर रहे हो?

अंकिता... अंकिता कौन? मैंने उससे पूछा...

एक बहुत सुन्दर मासूम सी लड़की, जिसे सावन बहुत पसंद था...

मैं उसका नाम नहीं जानता, पर मैं जिसका इंतजार कर रहा हूँ, शायद आप उसी के बारे में बोल रहे हैं...

वो थोड़ी दूर पर ही रहती थी... उसका नाम अंकिता था। वो बड़ी मासूम और दयालु थी।

यह आप बार-बार थी.. थी... क्यों बोल रहे हैं?

क्योंकि कल वो तुम्हारे इंतज़ार में बहुत देर तक यहाँ खड़ी भीगती रही, पर तुम नहीं आए, लेकिन कोई और आ गया!

कौन?... मैंने घबराते हुए पूछा?  

उसकी मौत!

क्या...

तुम्हारे नहीं आने से उसका दिल टूट गया और बहुत अधिक भीगने से शरीर...

आज सुबह ही उसे ICU में भर्ती करवाया गया था और शाम तक शायद उसे तुम्हारा इंतज़ार था, पर तुमने बहुत देर कर दी...

मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई‌, मैं उससे अब कभी नहीं मिल पाऊँगा। मैं यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। मैं वहीं घुटनों के बल बैठ कर रोने लगा।

क्या आप मुझे बता सकते हैं कि वो कहाँ रहती थी?

अब क्या करोगे जानकर?...

आप पहेली ना बुझाएं, कहां रहती थी, वो... वो बताएं....

वो जो चौराहे पर पीली कोठी है, वहीं घर है उसका। यह कहकर वो चला गया।

मैं उसके बताए हुए रास्ते पर गया, तो देखा वहाँ तो पीली कोठी, खंडर में बदल चुकी थी। 

मुझे कोठी देखकर, अजीब सी सिरहन हुई, क्या यहाँ रहती थी अंकिता?

मैं अंदर जाने वाला था कि लगा कोई मेरे पीछे खड़ा था। मैं जैसे ही पलटा तो, मेरे मुंह से निकला - अरे अंकिता तुम जिंदा हो?

कौन अंकिता?.. मैं तो अंजलि हूँ...

मुझे नहीं पता कौन अंकिता, तुम ठीक हो, बस यही मेरे लिए सच है। कहकर मैंने उसका माथा चूम लिया...

वो कुछ पल जिसमें मुझे लगा था कि मैंने अपने प्यार को खो दिया, वो मुझे हजारों मौत दे गया था।

पर उसी समय, अंजलि का मुझसे मिलनाआना, मेरी जिंदगी की सबसे हसीन मुलाकात थी...

तभी बहुत तेज बारिश होने लगी, हमारे प्यार की साक्षी बनकर, जैसे वो भी हमारे मिलन से खुशी से झूम उठी हो।

बरसो रे मेघा मेघा.... बरसो रे मेघा मेघा, बरसो रे मेघा बरसो....

Thursday, 5 August 2021

Story of Life : हसीन मुलाकात (भाग -2)

 हसीन मुलाकात (भाग -1) के आगे...

हसीन मुलाकात (भाग -2)


Office पहुँच कर भी दिल जनाब के अंदाज ना बदले। आज office में काम कुछ कम था, तो जल्दी खत्म हो गया। सब अपना-अपना बोरिया बिस्तर समेटने लगे। पर हम आराम से बैठे हुए थे। 

Friends पूछने लगे, यार अमन, घर नहीं जाना है?

अब उन्हें कौन बताए कि दिल जनाब बांवरे हो गये हैं, 12 बजे के पहले घर के लिए प्रस्थान ही नहीं करेंगे।

खैर 12 बजे तक बेवजह का over time कर के घर चल दिया। आज पहली बार पैदल चलने में बहुत आनंद अनुभव हो रहा था। आज लग रहा था, मुझसे ज्यादा भाग्यशाली और कोई नहीं है..

रात कल सी ही थी, मतलब काले बादल और वैसा ही माहौल, बारिश की पड़ती बौछारें...बस इंतजार था, उस हसीना का।

पर यह क्या, अब तो घर बस 10 minute की दूरी पर था और वो हसीना... वो तो अभी तक दिखाई नहीं दी थी, दिल बैठा जा रहा था।

तभी ज़ोर से बिजली कड़की और साथ ही वो हसीना सामने थी।

उसे देख कर मन मयूर नाच उठा, और गाने लगा, 

एक लड़की भीगी भागी सी, सोती रातों में जागी सी, मिली एक अजनबी से, कोई आगे ना पीछे...

आज वो काले कपड़ों में थी, उसे देखकर लग रहा था कि ईश्वर ने उसे बहुत फुर्सत में तराशा है। आज से पहले मैंने इतनी खूबसूरत कोई लड़की नहीं देखी थी, शायद वो अप्सराओं से भी बहुत ज्यादा हसीन थी। मैं तो उसे देखकर पलकें झपकाना ही भूल जाता था।

आज तो वो भी मुझे देखकर हंस दी, शायद मेरा दीवानापन उसे भी समझ आ रहा होगा।

उसको हंसता देखकर, हम तो वहीं सड़क पर रपट गये। उसने मुझे उठने के लिए अपना हाथ दिया... 

उस समय तो लगा, हम भी किसी हीरो से कम नहीं हैं, और लगे गाना गाने, 

आज रपट जाएं तो हमें ना उठ्ठइयो, हमें जो उठ्ठइयो तो खुद भी रपट जइयो....

वो मेरा बेसुरा गाना सुनकर खिलखिला कर हंसने लगी, और बोली बड़े फिल्मी हो आप...

उसकी यह बात सुनकर मैंने झेंप कर मुंह नीचे कर लिया। पर जब मैंने फिर ऊपर देखा तो वो कहीं नहीं थी। 

आगे पढ़े, हसीन मुलाकात (भाग-3) में..

Wednesday, 4 August 2021

Story of Life : हसीन मुलाकात

अपने वादे के अनुसार, सावन के सौंदर्य से परिपूर्ण मौसम में एक बार फिर आप के लिए गीतों से सजी हुई कहानी लेकर आए हैं, हर बार की तरह इस बार भी कहानी को अपना स्नेह दीजिएगा..


हसीन मुलाकात




बरसात की काली स्याह अंधेरी रात, 12 बजे के ऊपर का समय रहा होगा। शायद अब तक तो आधी से ज्यादा दुनिया नींद के आगोश में जा चुकी होगी।

बरसात की रात होने के कारण, अजीब सा माहौल था, सन्नाटा तोड़ती, झिंगुर की झांय-झांय की आवाज, तो कभी, बीच-बीच में मेढ़क के टर्राने की आवाज।

तभी बचा-खुचा श्रेय तेजी से कड़कती बिजली की आवाज से पूरा हो गया।

सोच रहा था कि तेज़ क़दमों से चलते हुए, बारिश शुरू होने से पहले घर पहुंच...

पर मन का सोचा पूरा हो जाए, यह तो भाग्यशाली लोगों के साथ होता है। और भाग्य तो कितना बड़ा वाला था, यह तो आधी रात को पैदल घर आ रहा था, उससे ही पता चल रहा था।

बस घर जाने की पूरी बात सोच भी नहीं पाया था कि, मोटी-मोटी बूंदों ने टिप-टिप कर के गिरना शुरू कर दिया था।

मैं सबको कोसता हुआ आ रहा था कि अचानक कोई मुझ से टकराता है, हवा के झोंके के साथ ही उसके शरीर की भीनी खुशबू से मेरा रोम-रोम पुलकित हो उठा। पर वो है कौन यह मालूम नहीं पड़ रहा था।

और तभी अनायास बिजली कड़की, तो देखा बेहद बला की हसीन लड़की मेरे सामने थी। उसके दूधिया रंग पर उसके बालों की काली लट से टपकता पानी, बेहद दिलकश लग रहा था और बारिश से भीगा बदन, उसे और हसीन बना रहा था। 

कुछ क्षण तो मैं स्तब्ध सा उसे देखता ही रहा, पर अगले ही पल वो ओझल हो गई...

उसके जाने के बाद भी मेरे कदम आगे नहीं बढ़ रहे थे। पर वहाँ से तो वो कब की जा चुकी थी।

उसके ही ख्यालों में खोया हुआ मैं घर आ गया।

घर पहुंचने पर भी मन वहीं रुक गया था। और बस एक ही गीत गुनगुना रहा था,

एक अजनबी हसीना से यूं मुलाकात हो गई, फिर क्या हुआ यह ना पूछो, कुछ ऐसी बात हो गई.... 

सुबह हो गई, मैं जल्दी-जल्दी office जाने की तैयारी में लगा हुआ था और यह मन... यह तो जैसे बांवरा होकर निरा निक्कमा हो चला था। मैं physically जितना भड़भड़ा रहा था, mentally उतना ही उस हसीना के ख्यालों में खोया निष्क्रिय था। बस यह गाना मस्तिष्क पर हावी हो रहा था,

ज़िन्दगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात, एक अंजान हसीना से मुलाकात की रात...

आगे पढ़े, हसीन मुलाकात ( भाग -2)...