Thursday, 15 December 2022

Shades of Life: गरीब की बेटी (भाग -4)

 गरीब की बेटी ( भाग - 1),

गरीब की बेटी (भाग -2 )  व

गरीब की बेटी ( भाग - 3)  के आगे... 

गरीब की बेटी (भाग-4) 

दूसरा बच्चा भी लड़का ही हुआ, सभी बहुत खुश थे और अंजली खुशी से नाच रही थी, उसने बहुत प्यार से उसका नाम राजा रखा... 

कुछ दिन बाद से मम्मी, फिर से काम पर जाने लगे, कन्हैया स्कूल और अंजली...

अंजली, अपने दूसरे भाई और घर के कामों में जतन से लग गई। 

अभी राजा को हुए 2 साल भी नहीं हुए थे कि पूरे विश्व में कोरोना का कहर छा गया।

अंजली के मम्मी-पापा दोनों का काम छूट गया। उनके ज्यादातर पड़ोसी गांव चले गए, बहुत सोच विचार के बाद अंजली का परिवार भी गांव चला गया।

तीन-तीन बच्चों की जिम्मेदारी और घर के खर्चों के चलते, उनकी जमा-पूंजी खत्म होने लगी।

हालात से परेशान होकर, अंजली के पापा ने शराब पीना शुरू कर दिया।

अब तो हालात, बद से बद्तर होने लगे।

कोरोना से थोड़ी राहत मिली, तो सब पुनः काम की तलाश में शहर वापस आने लगे। 

अंजली और उसका परिवार भी लौट आया। पर जब समय ख़राब चल रहा हो तो अपना साया भी साथ छोड़ने लगता है।

मकान मालिक ने कहा, तुम कमरे में तब रह सकोगे, जब अभी के किराया देने के साथ ही पिछला भी दोगे। 

अंजली के पापा बोले कि पिछले 1 साल से तो हम गांव में रह रहे थे, फिर किराया किस बात का?

मकान मालिक, गुस्से से चिल्लाया, हमें ज़्यादा कानून ना बताओ, 1 साल से अपने सड़े हुए समानों से हमारा कमरा घेरकर बैठे हो, और बोलते हो किराया किस बात का?

अगर नहीं दोगे तो तुम्हारा सारा सामान बेचकर पैसा वसूल लूंगा, तुम दूसरा घर देखो... 

यह सुनकर अंजली के मम्मी-पापा बहुत गिड़गिड़ाने लगे कि घर खोल दो, हम धीरे-धीरे सारा पैसा चुका देंगे।

मकान मालिक ने कहा, ज्यादा किराया, पहले महीने से ही देना होगा। दोनों ने हामी भर दी...

अभी घर खुले महीना भर भी नहीं हुआ था कि उसकी मां को पता चला कि वो फिर से गर्भवती हैं।

जब यह बात,अंजली के पापा को पता चली, तो वो बोले, अब हम लोग और बच्चों की जिम्मेदारी नहीं उठा पाएंगे, इसे हटा देंगे। 

पर खाने के अभाव के कारण शरीर कमजोर था, इसलिए कोई भी बच्चा हटाने को तैयार नहीं हुआ। 

जिम्मेदारी इतनी सारी, और काम ढंग से मिल नहीं रहा था, पैसे का अभाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था।

इसलिए तंग आकर, एक दिन अंजली के पापा, घर छोड़कर चले गए।

अंजली और उसकी मां ने सब जगह उनकी बहुत खोज कराई, पर वो नहीं मिले।

आगे पढ़े गरीब की बेटी (भाग -5) अंतिम भाग में...

Wednesday, 14 December 2022

Shades of Life: गरीब की बेटी (भाग -3)

गरीब की बेटी ( भाग - 1) और

गरीब की बेटी (भाग -2 ) के आगे... 

गरीब की बेटी (भाग -3)


अंजली ने सुना तो बोली, मेरी मां बहुत अच्छी है, मुझे जल्दी स्कूल भेजेगी और सिलाई सिखाने के लिए तो यूं झट तैयार हो जाएगी... 

रेखा सुनकर खुश हो गई, बोली अच्छी बात है, चार दिन बाद से सिलाई सीखने जाना है, 300 रुपए लेगी टीचर, तुम पैसे के साथ मेरे घर आ जाना, मां हम लोगों को लेकर चले चलेगी।

दोपहर के खाने के बाद, अंजली ने अपनी मम्मी से कहा, आज रेखा आई थी, उसका भी स्कूल छूट गया है और वो सिलाई सीखने जाएगी, मुझे भी भेज दोगी? 300 रुपए लेगी टीचर, हफ्ते में चार दिन क्लास लगेगी...

अच्छा, तेरे पापा आ जाएं तो बात करुंगी...

रात में अंजली के सोने के बाद दोनों पति-पत्नी ने बात की और इस निष्कर्ष पर निकले कि पढ़ाने-लिखाने से तो कुछ होना नहीं है, कौन बड़ी आफिसर बन जाएगी।

सिलाई सीख लेगी तो चार पैसे कमा लेगी। वैसे भी सिलाई सिखाने के पैसे, स्कूल की फीस से कम थे।

दूसरे दिन अंजली की मम्मी, अंजली को साथ लेकर, रेखा के घर पैसे लेकर पहुंच गई।

अंजली, रेखा से चहकते हुए बोली, मैं बोली थी ना, मम्मी मुझे सिलाई सिखाने को झट तैयार हो जाएगी। लो, हम आ गए..

वहां से सभी, सिलाई की क्लास में चले गए। वहां पैसे जमा कर दिए और अंजली ने सिलाई सीखना शुरू कर दिया। 

अंजली बहुत खुश थी, उसे अपने मम्मी-पापा दुनिया के सबसे अच्छे मम्मी-पापा लग रहे थे। वो स्कूल नहीं जा पा रही थी, पर अब उसे इसका कोई अफसोस नहीं था। 

अंजली होशियार थी, लगन की पक्की थी, उसने जल्द ही काज बनाना, उल्टी बखिया, छोटी-मोटी सिलाई और पेटीकोट बनाना सीख लिया। 

उसकी टीचर बोली, मैं तुम्हें अगले हफ्ते से सलवार सूट बनना सिखाऊंगी। ऐसा करना, तुम अब से शनिवार और रविवार की सुबह भी आ जाया करना... 

अंजली अत्यंत प्रसन्न थी, अब मैं अपने और मम्मी के लिए कपड़े घर में ही बना दिया करुंगी। 

यह बात, जब उसने अपनी मम्मी को बताई, तो वो शांत थी, उसने कोई खुशी नहीं दिखाई।

अंजली को समझ नहीं आया कि क्या हुआ? वो आशा भरी निगाहों से अपनी मां को देख रही थी।

तो उसके पापा ने अंजली को बताया कि कुछ दिनों में तेरा एक और भाई आने वाला है...

भाई की बात सुनकर, अंजली खुश हो गई, सच पापा, एक और भाई आएगा?

हाँ अंजली...

और सुन, अब तेरी मम्मी से काम नहीं हो रहा है, इसलिए तेरी सिलाई की पढ़ाई बंद करनी पड़ेगी... 

बंद...!

हाँ, वैसे भी तेरी टीचर अब 500 रुपए मांग रही है... उतने रुपए कहां हैं, हमारे पास? माँ दुःखी होते हुए बोली। वैसे ही कन्हैया की पढ़ाई के पैसे मुश्किल से जुटते हैं।

अब, तू ही बता कैसे होगा सब?

मम्मी को दुखी देखकर, अंजली बोली, ठीक है मम्मी, मैं छोड़ दूंगी सिलाई, तुम चिंता मत करो... तुम आराम करना, मैं घर के सारे काम कर लूंगी...

अंजली खुशी-खुशी मम्मी की तीमारदारी और घर के कामकाज में जुट गई...

दूसरा बच्चा भी लड़का ही हुआ, सभी बहुत खुश थे और अंजली खुशी से नाच रही थी, अंजली ने बड़े प्यार से उसका नाम राजा रखा... 

अभी राजा को हुए, 2 साल भी नहीं बीता था कि पूरे विश्व में कोरोना की लहर छा गई....

आगे पढें गरीब की बेटी (भाग -4) में ....

Tuesday, 13 December 2022

Story of Life : गरीब की बेटी (भाग-2)

गरीब की बेटी ( भाग - 1) के आगे...


 गरीब की बेटी (भाग-2)



अंजली खुशी में बांवरी हुई जा रही थी, सबसे कहती, देखा, मैं ना कहती थी कि भाई आएगा... 

पर वो नहीं जानती थी, जिस बात के लिए, वो इतनी खुश हैं, वो असलियत में उसके लिए खुशी के दिन नहीं थे.... 

पूरे घर में खुशी का माहौल था। दादी बहुत सारा सामान लेकर गांव से आईं थीं। अंजली ने बड़े प्यार से अपने भाई का नाम कन्हैया रखा। 

अंजली आज कल स्कूल नहीं जा रही थी, उसका पूरा दिन, कन्हैया के साथ खेलते हुए बीत जाता...

कुछ दिन घर में दादी रही, फिर जब उसकी मम्मी बिस्तर से उठ गई तो दादी गांव लौट गईं। 

जब सब लोग चले गए तो अंजली को अपने स्कूल की सुध जागी। वो अपनी मम्मी से पूछने लगी, मैं फिर से स्कूल कब जाऊंगी? 

मम्मी ने, बड़े प्यार से अंजली से बोला बिटिया, तेरे पापा और मैं तो अब काम पर जाएंगे, तभी पैसे और खाना ला पाएंगे।

अगर तुम भी चली जाओगी, तो कन्हैया अकेला रह जाएगा, वो छोटा सा है ना... तुम उसे अकेला छोड़ दोगी, घर में?

अंजली ने बड़े प्यार से कहा, नहीं... पर फिर दुःखी होकर बोली, लेकिन स्कूल?...

मेरी रानी बिटिया, जब कन्हैया बड़ा हो जाए, तो तुम और कन्हैया दोनों स्कूल चले जाना... ले जाएगी ना अपने भाई को स्कूल?...

हां, बिल्कुल मैं और कन्हैया दोनों जाएंगे... कहकर उसके नन्हें हाथों ने कन्हैया को उठा कर बहुत प्यार से मम्मी को बॉय बोल दिया।

मम्मी और पापा दोनों काम पर जाने लगे और छोटी सी अंजली, ने कन्हैया की सारी जिम्मेदारी बड़े जतन से निभानी शुरू कर दी, इस इंतजार में की, कि कन्हैया जल्दी बड़ा हो जाएगा और वो दोनों स्कूल जाएंगे। 

चार साल, कन्हैया के बड़े होने में गुज़र गए, पापा ने कन्हैया का स्कूल में दाखिला (admission) करा दिया। वो स्कूल जाने लगा।

अंजली ने पूछा, मम्मी अब तो कन्हैया बड़ा हो गया, स्कूल भी जाने लगा है, मैं कब जाऊंगी?...

बिटिया थोड़े पैसे जमा हो जाए, फिर तू चली जाना, 

यह सुनकर, अंजली गुमसुम हो गई...

फिर मां बोली, अच्छा सुन मेरी समझदार बिटिया, कुछ घर के काम में मेरी मदद कर दिया कर.... मैं बहुत थक जाती हूं। घर बाहर सारे काम करते करते... 

अंजली ने बड़े मन से हामी भर दी, वो अब घर के काम में माँ का हाथ बंटाने लगी।

दो दिन बाद अंजली की पक्की सहेली, रेखा उसके पास आई। और बोली, अंजली पता है मेरा भी स्कूल छूट गया, पर मेरी मां, मुझे सिलाई सिखाने की बात बोल रही है। तू भी बात कर लें, तो दोनों साथ चली जाया करेंगी...

अंजली ने सुना तो बोली, मेरी मां बहुत अच्छी है, मुझे जल्दी स्कूल भेजेगी और सिलाई सिखाने के लिए तो यूं झट तैयार हो जाएगी...

आगे पढ़ें, गरीब की बेटी ( भाग - 3) में...