Thursday, 12 December 2024

Story of Life : मजबूर (भाग-4)

 मजबूर (भाग-1) ,

मजबूर (भाग-2)  व

मजबूर (भाग-3) के आगे 

मजबूर (भाग-4)



वो दिनभर आराम करती और अपने पापा के भेजे हुए रुपए-पैसों से मज़े करती...  

वरुण ने बहुत प्यार से अपने बेटे का नाम राजकुमार रखा। यह नाम अंकिता को भी बहुत अच्छा लगा, क्योंकि वो तो अपने आपको राजकुमारी और रानी से कम समझती नहीं थी।

तो बस बहुत धूमधाम के साथ बेटे का नाम राजकुमार रखा दिया गया।

जैसे जैसे राजकुमार बड़ा हो रहा था, वरुण की कमजोरी बनता जा रहा था।

जो वरुण अंकिता की फिजूलखर्ची पर चिढ़ जाया करता था, वही अंकिता का राजकुमार के लिए किए गए फिजूलखर्ची पर कुछ न बोलता था। बल्कि उसके लिए आए सामान को बड़े प्यार से निहारता है और सराहना भी करता था।

उसके इस रूप को देखकर अंकिता भी एक पल को उस पर रीझ जाया करती थी। 

वरुण घर आने के बाद, एक पल को भी राजकुमार को अपनी आंखों से ओझल नहीं होने देता था।

यहां तक कि hide and seek खेलने में भी पांच मिनट से भी ज्यादा समय लगने पर वो बैचेन हो उठता था।

एक दिन जब वो आफिस से लौटा तो राजकुमार पार्क में जाने के लिए मचल रहा था। 

वरुण को एक बहुत important assignment बनाना था, पर राजकुमार ज़िद्द किए जा रहा था।

आखिरकार मजबूर होकर, उसने अंकिता के एक servant के साथ उसे‌ यह कहकर पार्क भेज दिया कि वो 15 minutes में पार्क पहुंच जाएगा।

राजकुमार के पार्क पहुंचने के ठीक 15 minutes बाद वरुण भी पार्क पहुंच गया।

पर वो देखता क्या है, रमेश इधर-उधर कुछ ढूंढ रहा है और राजकुमार उसके साथ नहीं है।  

वरुण ने रमेश से एक साथ बहुत से सवाल कर डाले, राजकुमार कहां है? वो तुम्हारे साथ क्यों नहीं है? उसे तुमने अकेला क्यों छोड़ा? तुम्हें अंकिता के लिए उसके पापा ने लगवाया था, इसलिए मैंने तुम पर कितना भरोसा करके राजकुमार को तुम्हारे साथ भेजा था...

रमेश, राजकुमार के खो जाने से पहले से ही परेशान था, फिर वरुण के सवालों की झड़ी से अंदर तक कांप उठा।

आगे पढ़े, मजबूर (भाग-5) में...

Wednesday, 11 December 2024

Story of Life : मजबूर (भाग-3)

मजबूर (भाग-1) व

मजबूर (भाग-2) के आगे 

मजबूर (भाग -3)



अंकिता के यूं चले जाने से वरुण को यह एहसास होने लगा कि एक ग़लत फैसला, इंसान को कितना अपमानित और मजबूर बना देता है।

एक सुबह, वरुण को फोन आता है कि वो एक ख़ूबसूरत से बच्चे का पिता बन गया है।

यह सुनते ही वरुण बच्चे से मिलने, उसे देखने के लिए बैचेन हो उठता है।

आनन-फानन वो अपनी ससुराल की ओर दौड़ जाता है।

वहां मुकेश जी और सविता दोनों ही उसका विशेष रूप से आतिथ्य सत्कार करते हैं। फिर वो बताते हैं कि उसका बेटा थोड़ा serious condition में है। उसे incubator पर रखा गया है। साथ ही उसे blood requirements भी होगी।

वरुण तुरंत hospital पहुंचता है और doctor से अपने बेटे से मिलने देने की request करता है।

जब वो अपने बेटे को देखते हैं तो देखता रह जाता है, उसका बेटा, हुबहू उसकी photo copy था। वही चेहरा-मोहरा वही रंग-रूप...

साथ ही उसे पता चलता है कि बच्चे का blood group भी उसी से मिलता है AB negative (AB-), जो कि rare blood group होता है।

उसने doctor को बोला कि तुरंत से बच्चे का treatment शुरू कर दें, वो अपना खून देने को तैयार है। 

सारे treatment start हो गये और दो दिन में ही बच्चा normal condition में आ गया और अंकिता को दे दिया गया।

Coming week में discharge हो गया था, पर अंकिता अब वापस वरुण के पास नहीं जाना चाहती थी।

पर उसकी मां सविता जी ने कहा, वरुण का भी उस बच्चे पर पूरा अधिकार है, वैसे भी बच्चा, उसके खून दिए बिना शायद ही बचता। 

मुकेश जी ने भी अंकिता को अपने घर लौट जाने को कहा, साथ ही आश्वासित भी किया कि अंकिता और बच्चे दोनों के ख़र्च के लिए वो रुपए-पैसे भेजते रहेंगे। अनमने मन से अंकिता लौट आई।

वरुण अपने बेटे पर जान छिड़कता था। जब भी वो घर पर रहता, अपना पूरा समय अपने बेटे की देखरेख में व्यतीत कर देता।

अंकिता, उसके इस तरह से बेटे के लिए प्यार देखकर मन ही मन हर्षित होती, क्योंकि इस कारण से उसे बच्चे का कोई भी काम नहीं करना पड़ता था।

वो दिनभर आराम करती और अपने पापा के भेजे हुए रुपए-पैसों से मज़े करती...

आगे पढ़े, मजबूर (भाग-4) में...

Tuesday, 10 December 2024

Story of Life : मजबूर (भाग-2)

मजबूर (भाग-1) के आगे…

मजबूर (भाग-2)


शादी बहुत धूमधाम से हुई, एक-एक मेहमान की विशेष खातिरदारी की गई, पूरे शहर में वरुण की शादी की चर्चा हो रही थी। पर अंकिता के पिता, मुकेश जी ने जितना भी जो कुछ दिया, सब आरती और उसके होने वाले बच्चों के नाम पर दिया। 

वरुण को मिला बहुत कुछ, पर सब अप्रत्यक्ष रूप में... जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

खैर करता भी क्या? अंकिता का चुनाव, उसकी ख़ुद की choice थी। 

कुछ ही दिनों में अपने ग़लत चुनाव का खामियाजा, वरुण ने भुगतना शुरू कर दिया...

अंकिता के अक्खड़ और ज़िद्दी स्वभाव के कारण दोनों में आए दिन तू-तू मैं-मैं होती, साथ ही उसका अत्यधिक खर्चीला होना वरुण को बहुत ज़्यादा irritate करता था। 

अंकिता, जब कभी भी shopping करने जाती, 1-2 लाख से लेकर लाखों-करोड़ तक खर्च कर डालती और वो भी बेकार और बेमतलब की चीजों पर...

वरुण कुछ कहता, तो अंकिता हमेशा यही कहती, जब औकात नहीं थी, तो शादी क्या सोचकर करने आए थे? 

वैसे तुम्हारी self ego, जिस दिन दम तोड़ दे, बता देना, तुम्हें अपने पापा के पास ले चलूंगी, वो तुम्हारे जैसे बहुत से कड़कों का ख़र्च वहन कर सकते हैं।

जाने क्यों, मैं तुम्हारी smartness पर फ़िदा हो गई थी, मुझे समझना चाहिए कि दो कौड़ी का इंसान, ज्यादा दिन तक मुझे खुश नहीं रख सकेगा।

तो एक तरह से देखा जाए तो, हर तरह से 19 अंकिता, सिर्फ पैसे के ज़ोर पर वरुण पर 21 हो जाती थी। और आए दिन उसका अपमान करने से बाज नहीं आती है।

तो जैसा भी शादी के पहले वरुण ने सोचा था, सब उसके विपरीत होने लगा। न तो उसे पैसे मिले न ही मन की शांति..

आए दिन की तू-तू मैं-मैं और irritation से वरुण के business पर भी effect पड़ने लगा।

उन्हीं दिनों न जाने कौन से क्षण का वरुण को फल मिला था कि अंकिता pregnant हो गई...

अब तो अंकिता के नखरे इस हद तक बढ़ गये कि मुकेश जी खुद उसे अपने साथ, यह कहके ले गए कि अब तो अंकिता delivery के बाद ही आएगी।

अंकिता, वरुण को यह सख़्त हिदायत दे कर गई कि, बच्चा होने तक वो उसके पास बिल्कुल भी न फटके, वो नहीं चाहती कि उसके यह pamper वाले दिन, एक कंगले इंसान को देखते हुए बीते...

अंकिता के यूं चले जाने से वरुण को यह एहसास होने लगा कि एक ग़लत फैसला, इंसान को कितना अपमानित और मजबूर बना देता है।

आगे पढ़े, मजबूर (भाग -3) में...