Thursday, 2 August 2018

Story of Life : बस एक कदम

बस एक कदम


श्रेया अपने माँ– पापा की एकलौती बेटी थी, उसके पापा का पानी का बड़ा business  था।
श्रेया बेहद सुंदर, अमीर घर की नकचढ़ी लड़की थी।
आर्यन के पिता की भी textile  की बड़ी मिल थी। पिता के ना रहने के बाद, वो ही सारा काम देख रहा था। एक दिन business community की बड़ी meeting थी।
वहीं पापा के साथ ही श्रेया भी आई थी। आर्यन और श्रेया की वहीं मुलाक़ात हुई। श्रेया के पापा को आर्यन वहीं भा गया।
घर आ कर श्रेया के पापा ने अपने मन की बात, अपनी पत्नी और श्रेया को बताई, सुन कर श्रेया शरमा गयी।
श्रेया के पापा और मम्मी आर्यन के घर मिलने गए। आर्यन के संस्कार और अपने  कार्य की सूझ-बूझ ने श्रेया की माँ का मन भी मोह लिया। वो लोग सुधा को अपने घर का निमंत्रण दे कर आ गए।
सुधा वहाँ गयी, तो उसने देखा कि श्रेया बहुत सुंदर है, और आर्यन की आँखों में ये साफ झलक रहा था कि उसे श्रेया पसंद है।
दोनों ही परिवार धनाड्य थे। उनकी शादी के चर्चे पूरे शहर में होने लगे। बड़े ही आलीशान तरीके से विवाह सम्पन्न हुआ।
शादी के बाद का 1st month तो श्रेया और आर्यन के घूमने, मस्ती करने और लोगों के घर निमंत्रण में जाने में ही व्यतीत हो गया।
फिर धीरे धीरे आर्यन अपने काम में व्यस्त रहने लगा। और श्रेया ने अपने दिन सोने में, facebook, chatting  में व्यतीत  करने शुरू कर दिये।
सुधा के आर्यन के विवाह से बड़े-बड़े अरमान थे, उसने सोचा था, बेटा तो business में busy रहता है। बहू आएगी, तो उसे बेटी मिल जाएगी। उसके साथ दिन भर गप्पे लड़ाऊँगी ,बाज़ार जाऊँगी, खूब सारा घूमा करूंगी, और सारी जगह खाएँगे-पीएंगे।
पर श्रेया को सुधा का साथ फूटी- कौड़ी नहीं भाता था। उसे तो देर तक सोना, friends से chat  करना, और आर्यन के साथ घूमना पसंद था।
दोनों की सोच भी नहीं मिलती थी। श्रेया को छोटे छोटे western कपड़े पसंद थे, तो सुधा को indian.
श्रेया को fat free food पसंद थे, तो सुधा से तो ऐसा खाना गले से भी नीचे नहीं उतरता था।
शुरू शुरू में तो आर्यन ने दोनों में सामंजस्य बैठाने की कोशिश भी करी। पर दोनों में से कोई भी adjust करने को तैयार नहीं हुआ।
समय के साथ आर्यन श्रेया की तरफ झुकने लगा।
आए दिन उसे वैसे भी business related party में श्रेया को अपने साथ ले जाना भी पड़ता था।
सुधा घर में अक्सर अकेले रहने लगी थी। अब उसे आर्यन के पिता की कमी बहुत ज़्यादा खल रही थी। उसने बहू का साथ चाहा था, बेटे का भी छूट गया।
एक दिन आर्यन की प्रेमा मौसी आई। उनके ख्यालात.....

क्या प्रेमा मौसी सास बहु के मिलाप के लिए कुछ कर पाएंगी, या उनकी दूरियों को और बढ़ा देंगी?जानते हैं  बस एक कदम (भाग -२) में  

Wednesday, 1 August 2018

Kids Story : चोट

चोट

अमिता अपने बेटे मणि को बेहद प्यार करती थी। इस हद तक वो उसे प्यार करती थी, कि वो उसे कुछ भी नहीं करने देती थी। मणि के पिता सुंदर कहते भी, कम से कम उसे अपना काम तो अपने आप से करने दिया करो, तुम्हारा लाडला अब 10 वर्ष का हो गया है, पर आलम ये है कि ना तो ये अपने आपसे खा पाता है, ना खुद नहाता है, और ना ही अपने कपड़े इससे खुद पहने जाते हैं। अपने आप न पढ़ता है ना सोता है। इसे आता है तो बस एक ही चीज़, हर काम के लिए माँ माँ चिल्लाते रहना।
आप भी ना! अमिता तुनक कर बोलती, अपना एक ही तो बच्चा है, उसे भी प्यार ना करूँ, आपको तो नहीं बुलाता ना, तो आप शांत रहा करिए।
हाँ खूब सिर चढ़ाओ, बाद में पछताओ तो, कहना मत। हमेशा यही बड़बड़ाते हुए कमरे से निकल जाते।
एक दिन अमिता बाज़ार से लौट रही थी। अचानक से उसका accident हो गया। उसके पैर की हड्डी के तीन टुकड़े हो गए थे। तुरंत ही hospital ले जाया गया। Dr. ने operation  के लिए बोल दिया।
6 घंटे के लंबे operation के बाद उसे room में shift किया गया। डॉ. ने 6 month का total bed rest बता दिया था।
इन सब में अमिता सब से ज्यादा मणि के लिए परेशान थी। उसने सुंदर से मणि को hospital में लाने को कहा। मणि जब आया, तो माँ की ऐसी हालत देखकर सहम गया। और उसके बाद जितने दिन तक अमिता hospital में रही, मणि कभी नहीं आया।
जिस दिन वो घर पंहुची, उसने देखा उसका घर पहले से भी ज्यादा साफ और व्यवस्थित था। मणि भी नहाया हुआ लग रहा था। नाश्ते में उसकी favorite dish थी। मणि ने अपनी माँ को serve की, उन्हें खिलाया, और फिर खुद भी खाया।
मणि के कमरे से बाहर जाते ही सुंदर ने बताया, कि जब तुम hospital में थी, तब से ही मणि सारे घर को साफ और व्यवस्थित रख रहा है, क्योंकि मेरे पास तो office और hospital के चक्कर से ही फुर्सत नहीं थी। पर मणि नहीं चाहता था, कि माँ को आकर गंदा घर देखकर दुख लगे। अब वो अपने सारे काम भी करने लगा है। अमिता तुम्हारी एक चोट ने अपने बेटे को बहुत ही जल्दी बड़ा बना दिया।
सब सुनकर अमिता की आँखों से अश्रु निकलने लगे। उसने मणि को रुँधे गले से आवाज़ लगाई। माँ की इस तरह की आवाज़ सुनकर मणि दौड़ के आ गया। माँ क्या हुआ?
बेटा तुम्हें कितना करना पड़ रहा है, अपनी माँ की वजह से, अमिता रोते हुए बोली। नहीं माँ, इसमें से बहुत कुछ मुझे पहले ही शुरू कर देना चाहिए था। पहले मुझे ये सब करने में परेशानी हुई थी, उसमें पापा ने मदद कर दी थी। पर अब मैं सब सीख गया हूँ। सब ठीक तो है ना माँ?
सब बहुत अच्छा है, बेटा। पर मन में सोच रही थी, उसके प्यार ने 10 साल के मणि को 4-5 साल का बना रखा था, पर एक चोट ने 2 हफ्ते में परिपक्व बना दिया। 

Tuesday, 31 July 2018

Recipe : Aam-e-Khaas

Aam-e-Khaas

Mango is not Aam like Aam Aadmi, its our Royal Indian Fruit. Giving a khaas touch to Mango, I present here Aam-e-Khaas.




Ingredients:


  • Mango (preferably Dashahri): 1 big
  • Amul Fresh cream: 200 ml.
  • Sugar Powder: As per taste.

Method:


  1. Prepare mango puree from mango pulp and taste it for its sweetness.
  2. Keep the packet of cream in refrigerator for 5-6 hours.
  3. Then take out the thickened cream and mix sugar into it as per the taste of the mango and your taste desire.
  4. Now, whisk the cream to make it fluffy. When the cream gains fluffiness, mix mango puree into it.
  5. Then, pour the mixture into moulds and let it freeze.
  6. Now, de-mould it and Aam-e-Khaas is ready to serve.