Monday, 1 March 2021

Story of Life : प्यार (भाग- 4)

 प्यार (भाग- 1),

प्यार (भाग- 2),

प्यार (भाग-3) के आगे......

प्यार (भाग- 4)




कार अपनी रफ़्तार से चल रही थी। घर बमुश्किल ½ घंटे की दूरी पर था कि तभी.....

शहर में दंगे भड़क उठे। 

एक बड़ा जत्था हमारी तरफ    तेजी से बढ़ने लगा।

मैं बुरी तरह से सहम गया।

पर मेरी छुईमुई सी नाज़ुक सी बेला के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी।

उसने मेरा हाथ बहुत मजबूती से पकड़ा और कहा, डरने की क्या बात है? जब हम दोनो साथ हैं।

अगर अभी मौत भी आ जाए तो मुझे गम नहीं, आप की बाहों में दम टूट गया, तो मुझे स्वर्ग ही मिलेगा।

उसकी इन बातों से मेरी आंखें छलक आई।

नहीं जान, मैंने तुम्हें खोने के लिए अपना नहीं बनाया है।

अभी तो मेरे ख्वाबों में ही हो तुम!

तुम्हें हकीकत में पाना तो अभी रह ही गया है।

डर के साए में भी वो मुझे मोहब्बत की हसीन वादियों में ले गयी थी।

उस समय कार भी मुझे फूलों की सेज सी प्रतीत हो रही थी।

तभी मेरी तरफ किसी ने बहुत तेजी से लोहे की छड़ से वार किया।

मैं सम्भल पाता, उससे पहले ही बहुत फुर्ती से बेला ने वो वार अपने ऊपर ले लिया।

उसके सिर से खून की धारा बह निकली। मैं यह देखकर बुरी तरह विचलित हो उठा।

भाइया जी, मैं Car hospital की ओर ले चल रहा हूँ? Driver ने पूछा।

मैं मौन रहा, मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था।

Driver ने Car, घर की तरफ मोड़ने की बजाय, hospital की तरफ घूमा दी।

हम Hospital पहुंँच गए। वहांँ पहुँच कर driver ने ही doctor से बात की।

बेला के लिए stretcher भी वही लाया।

मैं तो बस बेला को एकटक देख रहा था, उसके चेहरे पर मुस्कराहट बनी हुई थी, वो मुझे ऐसे देख रही थी, मानों उसे कोई दर्द ही ना हो।

जैसे ही doctor ने उसे देखा, तो बोले इन्हें तुरंत ICU में admit कीजिए।

बेला ने कसकर मेरा हाथ थामा और धीरे से कहा, क्या आप मुझे वो देंगे, जिस पर मेरा हक़ है?

मैंने पूछा क्या?

वो बोली, आप मुझे बांहों में लेकर चूम लें।

मैंने उसे अपनी बाहों में लेकर जैसे ही उसका माथा चूमा।

वो बोली, मैंने सब पा लिया। अब स्वर्ग में आप का इंतजार करूंगी।

यह कहकर उसने मेरी बाहों में अपनी आखिरी सांस ली।

उसका नैसर्गिक सौंदर्य, अभी भी कायम था। वो अभी भी बेला के ताज़े फूल सी प्रतीत हो रही थी।

उसने मुझे बचाकर, अपना पत्नी धर्म निभा दिया था, साथ ही मेरी बाहों में समा कर अपनी आखिरी इच्छा भी पूरी कर ली थी।

उसे शायद सब मिल गया हो, पर मैंने सब कुछ खो दिया था।

ना मैं अपना पति धर्म निभा सका, कि उसकी जान बचा पाता, ना उसे अपना बना सका, ना वहाँ जा सका, जहाँ उसको मेरा इंतजार था।

सब खो दिया था मैंने, बस साथ रह गया था मेरा पास, साथ बिताए गए पलों की हसीन यादें और उसका बेपनाह प्यार!


Friday, 26 February 2021

Story of Life : प्यार (भाग -3)

प्यार (भाग -1) और....

प्यार (भाग -2) के आगे......

प्यार (भाग -3)




Car purchasing के regarding, मेरा बेला के घर बहुत आना जाना हुआ।

उनके घर में मेरी खूब आवभगत होने लगी या यूं कहें कि दोस्ती ही हो गई।

मैंने उन लोगों को Car बहुत अच्छी deal में दिलवा दी। 

बेला के पापा जी के कहने से मैं उसे driving भी सिखाने लगा।

सिखाने के दौरान, कब हमारी दोस्ती, प्यार में बदल गई, दोनों ही नहीं जान पाये।

हमने, दोनों के parents को भी बता दिया था कि हम एक-दूसरे को पसन्द करते हैं। दोनों ही परिवार ने हमारी पसंद स्वीकार कर ली थी। 

उसका साथ पाकर मुझे लगने लगा, life set हो गई है।

जिन्दगी के सुनहरे दिन व्यतीत हो रहे थे। 

हमारे परिवार वालों ने हमें प्रणय सूत्र में बांधने की तैयारी भी शुरू कर दी थी।

सब कुछ मन की इच्छाओं के अनुरूप चल रहा था।

मुझे मेरा प्यार, चंद दिनों में मिलने वाला था। मन हसीन ख्वाब सजाने लगा।

शादी का सुहाना दिन भी आ गया।

शेरवानी और सहरे की लड़ियों के साथ मैं तैयार हो गया था।

बारात लेकर मैं अपनी दुल्हन को लेने पहुंच गया।

फूलों और गहनों से सजी मेरी बेला.....

उफ्फ! बिल्कुल अप्सरा सी प्रतीत हो रही थी। आज उसकी गोरी बाहें, चंचल निगाहें कातिलाना अदाएं सब मेरी होने वाली थी।

हम दोनों का विवाह बहुत धूम से हुआ।

हम दोनों घर के लिए विदा हो गए। घर पर माँ हमारे स्वागत की तैयारी कर रही थी।

कार अपनी रफ़्तार से चल रही थी। घर बमुश्किल ½ घंटे की दूरी पर था कि तभी.......

आगे की कहानी पढ़ें, अन्तिम भाग, प्यार (भाग -4) में........

Thursday, 25 February 2021

Story of Life : प्यार (भाग- 2)

प्यार (भाग- 1) के आगे......

प्यार (भाग- 2) 



आज भी दरवाजा उसने ही खोला, मुझे देखते ही खिलखिला उठी।

ओह! आप हैं। आज तो पूरे papers हैं ना?

जी!...... मैंने झेंपते हुए कहा।

आइए बैठिए, मैं पापा जी को बोल देती हूँ। यह कहकर वो अन्दर चली गई।

और अपने पापा जी के साथ बाहर आई।

Good evening sir

Good evening बेटा, बताओ कैसे आना हुआ?

जी, मैं सुशांत हूँ, Car की company में marketing manager हूँ। हमारी company survey कर रही है कि कितने लोग automatic car में interested हैं।

वैसे तो हमारी team का कोई salesman ही आता आप के पास।

पर आप ने कुछ दिन पहले इसके regarding inquiry की थी, इसलिए आप को सारी details देने में personally आया हूँ।

जी, सही कहा आपने, मैंने कुछ दिन पहले पूछा तो था। दरअसल बेला ही कह रही थी कि अब हम automatic car लेंगे।

आओ बेटा, तुम भी समझ लो।

ओह तो नाम बेला है, शायद इसीलिए यह हर समय बालों में बेला का फूल लगाती है।

दोनों ही बार उसके बालों में बेला का फूल लगा था।

Actually पापा जी को, पैरों में problem है तो हम लोग सोच रहे थे कि automatic car ही लें। 

आप का क्या कहना है सुशांत जी, इस बारे में?

जी, बिल्कुल..... अगर ऐसा है तो आप लोगों का बहुत ही अच्छा decision है।

उसके बाद मैंने सारी details उन्हें बता दी।

और यह कहकर वापस चला गया कि एक बार showroom जरुर आइएगा, तो सब कुछ और अच्छे से समझ आ जाएगा।

जी, इस Saturday की evening आते हैं।

अब मुझे Saturday का बेसब्री से इंतज़ार था। मेरा double benifit था।

एक तो उसका दीदार, दूसरा Car की deal.

Saturday आया, और ठीक 5 बजे, वो अपने पापा जी के साथ थी।

मैंने खूब आवभगत की। मेरे colleague and junior सब उसे एकटक देखने में लगे हुए थे।

बहुत सी cars देखकर, वो यह कहकर चले गए, decision लेने के लिए थोड़ा time चाहिए।

आप अच्छे से सोच लीजिए, मेरा number आप के पास है ही, कुछ और पूछ्ना हो तो आप call कर लीजिएगा और जरुरत हो तो, बता दीजिएगा, मैं घर भी आ जाउंगा।

उनके जाने के बाद सबने मुझे घेर लिया।

क्या Boss, क्या खूबसूरत लड़की है। 

तो कोई बोल रहा था, चक्कर क्या है? बड़ी आवभगत हो रही थी।

तब ही किसी ने चुटकी ली, ओह! घर के चक्कर लगा रहे हैं.....

आगे पढ़े, प्यार (भाग-3) में......