Friday, 18 January 2019

Story Of Life : जलन (भाग - 3)

अब तक आपने पढ़ा..... 
मनीषा और शिखा दो बहने हैं। मनीषा गोरी व शिखा सांवली है, जिससे शिखा मनीषा से बहुत जलती है पर बेटी शिखा की गोरी व मनीषा की सांवली होती है । पर तब भी शिखा की बेटी से ज्यादा सब मनीषा की बेटी को ही प्यार करते हैं, तब नानी शिखा को समझती हैं...... 
अब आगे.......  
जलन (भाग - 3)  

नानी ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरा, बोली मेरी बात ध्यान से सुनेगी ना, मेरी प्यारी सोनपरी?
नानी हमेशा से ही शिखा को ऐसे ही प्यार से बुलाती थीं, हाँ नानी सुनुंगी, शिखा आँसू पोछते हुए सी बोली, बेटा सबसे पहले तो तुम ये बताओ, क्या कभी मनीषा ने तुम पर अपने गोरे होने का घमंड दिखाया है क्या?
नहीं नानी, कभी भी नहीं। हाँ मुझे लगा ही था, नानी उसकी बात का समर्थन करती हुई बोली। अच्छा तो मेरी बात ध्यान से सुनना, देख बेटा रंग-रूप किसी की पहली नज़र खींचने के लिए आवश्यक तो हैं, पर वो नज़र आप पर टिकी रहे, इसके लिए अच्छा व्यहवार की आवश्यकता अधिक होती है। तुम्हें एक बात और बताऊँ? जिसका स्वभाव अच्छा होता है, धीमे धीमे उनके चहरे में, एक अलग सा नूर आ जाता है। जो खूबसूरत से खूबसूरत लोगों को मात दे देता है। अगर कोई ऐसा महफिल में शामिल होगा, तो सब बरबस उसी तरफ खींचे चले जाते हैं। उसके आगे परी को भी कोई नहीं देखता है।
यही कारण है, कि तुम्हारी परी सी सुंदर स्नेहा, को छोड़ सब मृदुल को देख रहे थे, क्योंकि वो मनीषा की  तरह ही बहुत अच्छे स्वभाव की, मासूम और सबका ध्यान रखने वाली है। बल्कि वो अपनी माँ से भी ज्यादा अभी से दूसरों के लिए बहुत सोचने लगी है। अत: वो साँवली होते हुए भी बड़ी मोहिनी लगती है।
आज शिखा समझ पायी थी, कि मनीषा का गोरा रंग नहीं अच्छा स्वभाव ही था, जिसके कारण ही सब मनीषा को इतना प्यार करते थे।
शिखा भी शाम को अपने घर निकाल गयी। अब उसने अपना सारा ध्यान स्नेहा को अच्छे संस्कार देने में लगा दिया था। चंद साल बाद फिर से जब मनीषा और स्नेहा दोनों मायके में मिले। अबकी बार सब जगह स्नेहा स्नेहा गूंज रहा था, साथ ही सब शिखा की भी बड़ी तारीफ कर रहे थे।
शिखा नानी से जा कर गले लग गयी, नानी उस दिन आपने अगर समझाया ना होता, तो सब मेरी स्नेहा को यूं प्यार ना दे रहे होते। काश जब में छोटी थी, तब ही मुझमें ये अक्ल आ गयी होती, तो मैं भी सबका प्यार पाती, और मनीषा से जलन भी ना करती।      

Thursday, 17 January 2019

Story Of Life : जलन (भाग- २ )

अब तक आपने पढ़ा, मनीषा व शिखा दो बहने हैं । मनीषा बहुत गोरी है, जबकि शिखा सांवली है। शिखा हमेशा मनीषा से जलती है। पर जब दोनों की बेटी होती हैं, तब मनीषा की सांवली व शिखा की बेटी गोरी होती है........ 
अब आगे...... 

जलन (भाग-२)


आज पांच साल बाद बुआ की 25 anniversary में दोनों बहन फिर से मिल रहीं थी। आज दोनों पहली बार एक दूसरे की बेटी को देखने वाली थीं।
इत्तेफाक ऐसा हुआ कि दोनों एक साथ ही घर पहुंचे। पर ये क्या आज भी सब मनीषा की तरफ ही देख रहे थे।

मनीषा की बेटी साँवली जरूर थी, पर वो बहुत ही मासूम, सरल, और संस्कारी भी थी। उसके कपड़े भी बिलकुल साफ थे। उसने दूर से सबको प्रणाम प्रणाम करना शुरू कर दिया था। उसकी ऐसी मासूमियत ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। यहाँ तक शिखा की माँ की भी पहली नज़र मनीषा की बेटी मृदुल पर ही गयी।
वहीं शिखा की बेटी स्नेहा, शैतान और नकचड़ी थी।
शिखा ने उसे ड्रेस तो बहुत सुदर पहनाई थी, पर उसमे कई जगह chocolate लगी थी, और कुछ कुछ जगह और भी गंदी ही हो रही थी।
वो बहुत तेज़ी से सबको धक्का देती हुई निकल गई, जिसमे शिखा की माँ गिरते गिरते बचीं, उन्हें मृदुल के नन्हें हाथों ने थाम लिया था।
शिखा माँ के पास आ कर स्नेहा की सफाई देती हुई बोली, माँ आप तो जानतीं हैं ना? स्नेहा को अगर doggy दिख जाता है, तो बस, फिर उसे किसी बात का होश नहीं रहता है। जब घर से चली थी, तभी मैंने उसे Bruno के बारे में बताया था, तभी से वो उससे मिलने को आतुर थी। बुआ खिसियानी हंसी हंसने लगी, और शिखा स्नेहा की तरफ दौड़ गयी।
दो दिन तक स्नेहा बस Bruno में ही लगी रही, जबकि मृदुल सबसे प्यारी प्यारी बातें करके सबका दिल जीतती रही। अब दोनों के लौटने का दिन आ गया, मनीषा सुबह की ट्रेन से निकल गयी, शिखा को शाम की ट्रेन पकड़नी थी। शिखा जिस किसी से बात करती, सब बस मृदुल की याद में डूबे उसकी बात करते मिलते। सब बस यही कहने में लगे हुए थे, मृदुल कितनी प्यारी है, बिलकुल माँ जैसी ही सुंदर है, और उसकी मासूम बातों का तो क्या कहना, मन मोह लेती थी। कितनी छोटी सी है, पर सबका ध्यान रखने में तो, अपनी माँ से भी आगे निकल गयी है। कितनी सलीकेदार थी। मनीषा उसे सुबह तैयार करती थी, तो कपड़े बदलने तक भी उसके कपड़े साफ ही रहते थे। भगवान ऐसी बेटी सबको दें।

सब जगह बस मृदुल मृदुल..... स्नेहा की तो कोई बात भी नहीं कर रहा था, करते भी क्या? वो कहाँ किसी से घुली मिली थी, वो तो बस दिनभर शरारते करती, या Bruno के साथ खेलती, कोई कुछ बात करता तो बस बदतमीजी से भरे जवाब देती। और कपड़े, हाथ, उनका तो क्या ही कहना, शिखा दिन भर उसे अच्छे कपड़े पहनती रहती, पर वो 5 मिनट से ज्यादा देर साफ ना रहती।
शिखा मृदुल की तारीफ सुन सुन के पक गयी थी। वो अन्दर जा कर रोने लगी। उसे रोता देख नानी ने पूछा, क्या हुआ बेटा क्यों रो रही हो?
वो बोली जब मैं छोटी थी, मनीषा के गोरे रंग के कारण सब उसे ही ज्यादा प्यार देते थे। और मुझे कोई देखता नहीं था। जब उसकी साँवली और मेरी गोरी बेटी हुई।  तब भी सब मनीषा की बेटी को ही प्यार कर रहे हैं। मेरी स्नेहा, मृदुल से कितनी गोरी और सुंदर है। पर वो किसी को दिख ही नहीं रही है।
नानी ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरा, बोली मेरी बात ध्यान से सुनेगी ना, मेरी प्यारी सोनपरी?........
  नानी ने शिखा से क्या कहा, जानने के लिए पढ़ें जलन (भाग-३)  

Wednesday, 16 January 2019

Story Of Life : जलन

जलन

मनीषा बेहद सुन्दर थी, उसका गोरा रंग सबको अपनी ओर खींचा करता था।
उसके मोहपाश से कोई बचता नहीं था। पर उसे इस बात का कभी घमंड नहीं था। वो बहुत मिलनसार थी, जितना उसके रूप के सब दीवाने थे, उतना ही उसके अच्छे स्वभाव के कारण भी लोग उसे बहुत पसंद किया करते थे। वहीं उसकी बुआ की बेटी शिखा बिलकुल भी मिलनसार नहीं थी, उसे सबसे पहले अपनी ही परवाह रहा करती थी, रंग भी उसका सांवला था।
अतः कोई उसे विशेष पसंद भी नहीं किया करता था। शिखा, मनीषा से बेहद जलती थी, और सदैव इसी उधेढ़बुन में रहती कि कैसे मनीषा को लोगों कि नज़र से गिराया जाए।
वो आए दिन धूप में जाने का काम मनीषा से करवाने के ही चक्कर में रहा करती, जिससे उसका गोरा रंग धूमिल हो जाए। और अगर गलती से भी मनीषा कुछ गलत कर दे, तब तो बस! सबको ये बताने से ना चुकती, कि वो कितनी बड़ी वाली बेवकूफ़ है, कि इतना जरा सा काम भी वो ठीक नहीं कर पाती है।
इसी तरह से दिन गुजर रहे थे, दोनों लड़कियाँ बड़ी हो गईं। शिखा को जब भी लड़के वाले देखने आयें, मनीषा को साफ हिदायतें दे दी जाती, कि वो बिलकुल भी बाहर न निकले। शिखा के रंग-रूप व स्वभाव के कारण कितने ही लड़के आए और गए, पर रिश्ता तय नहीं हुआ।
उधर मनीषा के लिए भी रिश्ते आने लगे, जब सुयोग्य वर मिला, तो दोनों के मिलने की बात की गयी, पहली बार ही कोई मनीषा को देखने आया था, पर उसके रंग-रूप व अच्छे स्वभाव के कारण बात एक बार में ही तय हो गयी। धूमधाम से मनीषा की शादी हो गयी, शादी में शिखा मनीषा से भी ज्यादा तैयार होकर सब जगह इतराती फिर रही थी, इकलौती बहन होने के कारण वो भाव भी बहुत खा रही थी।
चंद दिनों बाद शिखा की भी शादी तय हो गयी, कितने ही रिश्तेदार बुलाये गए, नहीं बुलाया तो केवल मनीषा को। शिखा को यही डर लगता रहा, कि मनीषा आ गयी, तो मनीषा की खूबसूरती के आगे आज फिर वो मद्ध्म पड़ जायेगी। सबने उसे बहुत समझाया भी, कि अब क्या है? एक तो उसकी शादी हो गयी है, दूसरा शादी की रात दुल्हन से ज्यादा कोई खूबसूरत नहीं लगता है।
पर जब वो नहीं मानी, तो शिखा की माँ भी कहने लगीं, इसकी शादी में इसका जिसे मन करेगा, उसी को बुलाया जायेगा। मेरे लिए शिखा की खुशी से बढ़कर कुछ नहीं है।

मनीषा अपनी इकलौती बहन की शादी में नहीं पहुँच पायी। उस दिन वो अपने मायके को याद करके पूरे दिन गुमसुम रही। जब गलत मायके में हो रहा हो, तो बेटी कहे भी तो किससे?
चंद दिनों पश्चात मनीषा के बेटी हुई, वो साँवली थी। जब ये बात शिखा को पता चली तो वो बहुत खुश थी, कि अब मनीषा को पता चलेगा, कि जब गोरा रंग नहीं होता है, तो कैसा लगता है।
शिखा के भी एक बेटी ही हुई, वो बहुत ही गोरी हुई, उसे देखकर शिखा की बांछे खिल गयी। वो अपनी बेटी को देखकर सोचने लगी, अब मनीषा से मिलना चाहिए.......

शिखा और मनीषा के मिलने पर क्या होगा? जानते हैं जलन(भाग-२)