Tuesday, 17 March 2020

Article : गर्व से कहें, हम हिन्दुस्तानी

गर्व से कहें, हम हिन्दुस्तानी

सच है, जिन्दगी तब तक है, जब तक हम जिंदा हैं।

अरे, नहीं जनाब, हमारे कहने का यह मतलब कतई नहीं है कि आप, तब तक जिंदा हैं, जब तक आप की आत्मा आप के अन्दर है।

नहीं, बिल्कुल भी नहीं, बहुतों को हम ने सब ठीक होने के बाद भी मरे के सामान देखा है।

हमारे कहने का अर्थ है, जब तक आप जिंदादिल रहते हैं, तब तक यमराज भी सामने खड़े हों, ले नहीं जाते हैं।

और आप को पता है, जो जिंदादिल होते हैं, उनके सामने ही कठिन परिस्थितियां घुटने टेकती हैं।

अब सांच को आंच क्या!

जिस कोरोना virus से पूरे विश्व में सब डर रहे हैं, वहीं अपने India में, उस पर jokes, songs, poems, stories and articles लिखे जा रहे हैं। 

घर-घर में लोग घरेलू उपचार बता रहे हैं, कोई लौंग, इलाइची, कपूर, जावित्री रखने को बोल रहा है, तो कोई प्याज़ में नमक डालकर खाने की सलाह दे रहा है।

कोरोना भी सोच रहा होगा, India वालों को बस topic मिलना चाहिए, बाकी ग्रन्थ, उपन्यास, jokes, songs वो सब बना सकते हैं। घरेलू उपचार भी हर बड़ी बीमारी का होता है।

शायद, भारत एक मात्र ऐसा देश है, जहाँ डर से मिली छुट्टी को लोग enjoy कर रहे हों, और जिन्हें नहीं मिल रही है, वो कुढ़ रहे हों।

इसी कारण कोरोना ने भारत में घुटने टेक दिए हैं।

हम भारतवासियों के लिए यह गर्व की बात है कि भारत में कोरोना virus से संक्रमित रोगियों का उपचार किया जा रहा है, और वह पूर्णतया स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं।

भारत में कोरोना पर बहुत जल्दी नियंत्रण पा लेने का बहुत अधिक श्रेय मोदी जी को है।

उनकी दूरदर्शिता के चलते ही school, college, offices, malls, cinema halls close कर दिए गए, जिसके चलते स्थिति में नियंत्रण पाना संभव हो पा रहा है।

साथ ही कोरोना से यह भी सिद्ध हुआ है कि भारतीय संस्कृति ही सर्वश्रेष्ठ है।

लोगों से मिलने पर नमस्कार करना ही सबसे ज्यादा उचित है, ना कि बात बात पर हाथ मिलाना, एक-दूसरे को touch करना।

वहीं अंतिम संस्कार में भी भारतीय संस्कृति का अग्नि दाह-संस्कार ही सर्वोपरि माना गया है।

आज जहाँ-जहाँ भी दफनाने की प्रक्रिया थी, सब जगह अग्नि दाह-संस्कार किया जा रहा है।

तो आप गर्व किजिए, आप सबसे अच्छे देश और सबसे अच्छी संस्कृति से जुड़े हैं।

और इसके उत्थान में सहयोग प्रदान कीजिए।

इसका विकास और विस्तार कीजिए और गर्व से कहें कि हम हिन्दुस्तानी हैं।

जय भारत, जय भारती 🙏

Monday, 16 March 2020

Short Stories : नाना जी का चश्मा


नाना जी का चश्मा 

हाँ तो कहानी कुछ यूँ है, कि हमारा बचपन आजकल जैसा तो था नहीं, कि बस पूरी ज़िंदगी अकेले में gadgets के साथ गुज़ार दी।

गर्मी की लंबी छुट्टियाँ हुआ करती थी, जिसमें कभी दादी, कभी नानी के घर जाया करते थे। तो बस, हम खूब सारे बच्चे, दिन-दिन भर मस्ती में गुजार दिया करते थे।

जब हम नानी के घर जाते थे, तो हम बच्चों की धमा-चौकड़ी 
नाना जी के इर्द-गिर्द हुआ करती थी, क्योंकि वो बहुत मस्त थे, तो हमारी मस्ती से गुस्सा नहीं होते थे। बाकी बड़ों से ज्यादा उधम करने पर डांट पड़ जाती थी।

पर नाना जी की एक आदत थी, कि वो अपना चश्मा यहाँ- वहाँ रखकर भूल जाया करते थे, तो बस आए दिन चट्ट...... की आवाज़ होती, और हम सब में किसी एक की कान खिंचाई.......

इस कारण से बच्चे बहुत परेशान रहते, साथ ही जब तक टूटा चश्मा बन नहीं जाता, नाना जी को भी परेशानी झेलनी पड़ती।

पर नाना जी जितने मस्त-मौला थे, उससे बहुत ज्यादा बुद्धिमान भी।

तो उन्होंने ऐसी युक्ति निकली, कि अब ना तो उनका चश्मा टूटता था, बल्कि उन्हें बहुत जल्दी मिल भी जाता था।

अब आप सोच रहे होंगे, ऐसी भी क्या युक्ति निकली?

कुछ नहीं, बस उन्होंने ऐलान कर दिया, अब से उनका चश्मा जिससे टूटेगा, वो ही चश्मा बनवाएगा। और अगर किसी बच्चे से टूटेगा तो....., उसकी कान खिंचाई नहीं की जाएगी, बल्कि उसके मम्मी-पापा बनवाएंगे। और बाद में जब भी बच्चे के पास पैसा इक्कठा होगा, उससे ले लिया जाएगा।

दरअसल जब भी कोई मेहमान घर से जाता था, तो हम बच्चों को दस-पाँच रुपए देकर जाता था, वही हमारी कमाई होती थी। पर यकीन जानिए बहुत कमाई हो जाती थी, क्योंकि मेहमानों का तांता लगा ही रहता था।

हाँ जी, तो उस ऐलान से हुआ यूँ, कि हम बच्चे तो बच्चे, बड़े भी उनका चश्मा संभाल कर रखने लगे। जिससे अब नाना जी का चश्मा उनको हमेशा मिल जाता था, टूटता नहीं था, और न ही होती थी हम बच्चों की कान खिंचाई....... 

तो अब चश्मे के टूटने की चिंता से सब मुक्त थे, या यूँ कहें, अब नाना जी को छोड़, बाकी सबको नाना जी के चश्मे की चिंता रहती थी।

तो जय हो नाना जी की ..........   

Friday, 13 March 2020

Tip : Cooker की होली


Cooker की होली 


अब जब माहौल होली का चल ही रहा है, तो हम ladies जिस होली से रोज़ परेशान रहते हैं, उसके बारे में भी बात कर लें, जी हाँ वही रोज़ की cooker की होली! क्या आप भी परेशान हैं?

जब भी दाल, खिचड़ी आदि... बनाने जाते हैं, तो whistle बजने के समय cooker से इतना पानी निकलता है की पूरा kitchen में messy हो जाता है। तो चलिये इसी विषय पर आज हम tip share करते हैं।
                 Cooker की होली 




  1. Cooker के ढक्कन के चारों तरफ थोड़ा सा oil लगा दीजिये।
  2. दाल पकाने के समय उसमें  ¼   tsp ghee डाल दीजिये।
  3. पानी की quantity का ध्यान रखें, अगर आपको दाल या खिचड़ी पतली पसंद है तो पानी बाद में add कर लीजिये।

अगर आप इन tips को follow करेंगे तो आपके cooker से पानी नहीं निकलेगा और आप cooking enjoy कर पाएंगे।

Note- 

अगर यह Tip करगर सिद्ध न हो तो cooker आप एक बार check करवा लीजिए, May be cooker में कुछ fault हो।