Monday, 8 June 2020

Tip : अधिक मलाई का राज़

आज आप के साथ हम वो Tip share करने जा रहे हैं, जिसका बहुत लोगों को इन्तज़ार था।

हम अपनी बहुत सी Recipes, में मलाई use करते हैं, क्योंकि वो घर में easily available रहती है, साथ ही healthy option भी है, and Cream के comparatively cheap भी है।

पर viewers का कहना है कि, उनके दूध से इतनी मलाई नहीं निकलती है, कि वो बहुत सारी Recipe में use कर पाएं।

उनका कहना है कि आप, दूध से कैसे अधिक मलाई निकली जाए, उसका राज़ भी बता दें, जिससे उनकी dishes भी ज्यादा delicious बन पाए।

आप कहें, और हम ना बताएं, यह तो shades of life में कभी नहीं हुआ।

तो आज हम आपको वही बताने जा रहे हैं।

हम Full cream Milk use करते हैं। तो आप को नीचे दिए गए method से अधिक मलाई के लिए Full cream Milk का ही use करना होगा।

अधिक मलाई का राज़


  1. दूध boil कर लीजिए।
  2. Boil होने के बाद दूध को दूध ढकने वाली छन्नी से ढकें, lid or plate से ना ढकें।
  3. दूध ठंडा हो जाने पर उसे fridge में रख दें।
  4. दूध को अगले दिन use करना start करें।
  5. मलाई, दूध use करने से पहले निकाल लीजिए।
  6. इससे एक तो मलाई टूटती नहीं है, तो अधिक मलाई निकालती है।
  7. दूसरा मलाई के ठीक नीचे, creamy layer होती है, जो इस समय निकालने से मलाई के साथ निकल जाती है, जिससे मलाई की quantity & quality दोनों बढ़ जाती है।

अगर आप भी इस method से मलाई निकालेंगे तो 2 kg. दूध से निकली मलाई से, 1 week में 400 से 500 gm. घी  निकल आता है।

तो बस अब से आप दूध से इसी method से मलाई ready कीजिए, जिससे खूब सारी dishes और बहुत सारा घी बनाएं।

इससे आपको एक और profit है कि आपको ज्यादा purity मिलेगी, adultration की संभावना कम रहेगी और आप healthy रहेंगे।

Friday, 5 June 2020

Poem : पर्यावरण दिवस

 पर्यावरण दिवस 


कब से तड़प रही थी प्रकृति,
हरियाली को पाने को;
पर मानव की अमिट भूख,
तुली हुई थी, पर्यावरण मिटाने को।
आधुनिकता की चकाचौंध में,
सारे ही नेत्रहीन हो बैठे थे;
उचित, अनुचित का बोध छोड़कर,
खुशियों का रास्ता मोड़ बैठे थे।
प्रकृति करती रही प्रतिक्षा,
संतुलन को पाने में;
मानव उतना ही बढ़ता गया,
सब नाश की कगार पर लाने में।
दुःखी, कुपित सी धरा ने,
अब, अपना वर्चस्व दिखलाया;
भयभीत हो उठा मानव उससे,
खुद को चार दिवारी में बैठाया।
कैद में है, मानव अब जो,
प्रकृति खिलखिला रही;
धरा से अंबर तक देखो,
सर्वत्र हरियाली छा रही।
नदी की कलकल से,
ध्वनि मधुर आ रही;
पक्षियों के कलरव से,
प्रकृति मुस्कुरा रही।
जल स्वच्छ है,
वायु मनोहर;
प्रकृति मना रही,
दिवस पर्यावरण।।

Thursday, 4 June 2020

Article : हद

हद

आज जब हम कोरोनाकाल में जी रहे हैं क्या तब भी हम संवेदना विहीन हो सकते हैं? 

शायद नहीं?

आप कहेंगे, इसमें शाय़द का सवाल ही नहीं उठता है।

जी हम भी यही कहते हैं।

पर जो कुछ भी उस हथिनी के साथ हुआ, उसे किसी भी तरह से संवेदनशीलता नहीं कहा जाएगा।



क्या कसूर था, उस निरीह प्राणी का, मात्र इसके सिवाय कि उसने इन्सानों से इन्सानियत की अपेक्षा कर ली थी।

ऐसे समय में, जहाँ अगले पल क्या होगा, किसी को नहीं पता।

कोरोना तो है ही, इसके साथ ही कहीं भूकंप आ रहा है तो कहीं तूफान। ऐसे समय में संवेदन हीनता तो बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।

आज हम एक-दूसरे को गिरा कर जीवित नहीं रह सकते हैं, बल्कि एक-दूसरे के साथ से ही विजयी हो सकते हैं।

एक-दूसरे के लिए संवेदनशील बनकर। एक दूसरे के मददगार बनकर।

इसके भी आज कल बहुत उदाहरण हैं, हमारे सामने।

बहुत से लोग और कम्पनियाँ, सब आगे से आगे बढ़ कर देश को सुदृढ़ बनाने में लगे हैं।

ऐसे में कभी जमातियों की हरकतें, कभी साधुओं की हत्या, और अब तो बेहद विकृत कार्य!

एक ऐसा कृत्य,  जिसने सम्पूर्ण मानव जाति को शर्मिंदा कर दिया। ऐसी हरकत करने वाले ने यह भी नहीं सोचा, उसकी इस हरकत ने ना केवल माँ, बल्कि अजन्मे शिशु की भी निर्मम हत्या कर दी।

एक माँ को इतना दुखी कर दिया कि उसने अपने बच्चे को इस क्रुर दुनिया में जन्म देने से बेहतर जल समाधि लेना उचित समझा।

एक हथिनी अगर कुपित हो जाए तो वो बहुत तहस नहस कर सकती है, पर उसने शांत रह कर, प्राण त्याग दिए, पर क्या ईश्वर भी माफ़ करेंगे?

पर क्या आप को लगता है, इसके प्रति कोई ठोस न्याय किया जाएगा या महज़ राजनीति का मुद्दा बना कर सब अपना-अपना उल्लू सीधा कर लेंगे।

कृपया इस विषय को केवल राजनीतिक मुद्दे तक मत सीमित रहने दें।

वरना आए दिन, इन्सानियत का यूँ ही खून होता रहेगा और स्थिति कोरोना से ज्यादा भयावह हो जाएगी। बात उस हद तक ना पहुंचने दें 🙏🏻

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