Tuesday, 29 May 2018

Story Of Life : प्यार तो प्यार है - Part 3


अब तक आपने पढ़ा, रितेश और अलिया ने अपने प्यार के लिए क्या-2 सहा, पर क्या उन्हें परिवार वालों की स्वीकृति मिली, जानते हैं, part 3 में  

प्यार तो प्यार  है - Part 3                           

रितेश को पता चला, तो उसने अब्बू को बिना बताए, stockist का सारा काम संभाल लिया, अब दवाइयाँ समय पर आने लगी।
अलिया की बहन की शादी की सारी ज़िम्मेदारी भी रितेश ने ही संभाल ली, वहीं अब्बू की stockist, से बात हुई, अब्बू उसकी सबके सामने प्रसंशा करने लगे, तब उसने बताया, नहीं जनाब, घोड़ा घाँस से यारी करेगा, तो खाएगा क्या? आपके medicine के सारे cheques  रहमान  मियां पहले ही दे जाते हैं।
आज अब्बू को अपने दामाद में अपना बेटा दिख रहा था, कोई हिन्दू लड़का नहीं दिख रहा था
एक दिन रितेश के पापा की तबीयत काफी खराब हो गयी, उन्हें hospital में admit कर दिया गया, रितेश और अलिया ने पैसा पानी की तरह बहाया। बहुत प्रयासों के बावजूद भी वो उन्हें बचा नहीं सके
कुछ दिनों बाद रितेश को एक अच्छी company का offer आया Bombay जाना था रितेश और अलिया आपस में कमरे में बात कर रहे थे, रितेश बोल रहा था, मुझे एक हफ्ते में join करना है, one BHK flat ही मिलेगा, उसने अपने एक दोस्त से अलिया की job के लिए भी बात कर ली है। 
अलिया: आप कल ही flight से निकाल जाइएबड़ा घर ढूंढ लीजिये, तब मैं माँ के साथ आ जाऊँगी, वरना माँ को ऐसे कहाँ छोड़ जाएंगे?
रितेश: माँ कौन से, नए शहर में हैं? फिर मिनी भी तो यहीं है
अलिया: मिनी दी, अपना ससुराल देखेंगीं या माँ को देखेंगीं?
रितेश: तुम्हें फिर पता नहीं, इतनी अच्छी job मिलेगी कि हीं?
अलिया: ना मिले, जो मिलेगी, वही कर लूँगी
रितेश: तुम भी ना, बहुत जिद्दी हो माँ को तुमने इतने मंदिर घूमवा दिये, तीर्थ करा दिये, पर माँ के मन में तो, तुम्हारे लिए कभी प्यार जागा हीं, तुम बैठी रहो यहीं
अलिया: चाहे जो भी होमैं अभी नहीं जा रही हूँ
माँ, बाहर बहू-बेटे की बात सुन रही थीं, और सोचने लगींकि वो हमेशा यही सोचती रहीं, बेटा मंदिर- तीरथ करवा रहा है, कभी सोचा ही नहीं, कि कोई मुस्लिम लड़की भी ऐसा सोच सकती है। मैंने कभी इसे प्यार से नहीं देखाऔर एक ये है, जो अपने पति का साथ, अच्छी नौकरी किसी की परवाह नहीं कर रही है
आज उन्हें बहू में, अपनी बेटी नज़र आ रही थी, कोई मुस्लिम लड़की नहीं
रितेश ने Bombay पहुँच कर बड़ा घर ढूंढ लिया।
15 दिन बाद, आज वो माँ और अलिया दोनों को ले जा रहा था, अलिया के अम्मी-अब्बू भी आए थे, दोनों ही परिवार को रितेश और अलिया पर बहुत नाज़ था।
अब दोनों ही परिवार बड़े गर्व से कहते थे, प्यार तो प्यार होता है, उसमें कोई धर्म-समाज नहीं होता है, इंसान देखना चाहिएजाति धर्म हीं 


Monday, 28 May 2018

Poem : जी चाहता है

जी चाहता है
आज फिर दिल बचपन में लौट जाने को चाहता है,
फिर से वही भाई बहन की नौकझौंक चाहता है
भाई का चिढ़ा के भाग जाना
छोटी छोटी बातों में बेवजह चिल्लाने को जी चाहता है
आज फिर दिल बचपन में लौट जाने को चाहता है,
बहन से हमेशा बराबरी करना
वो, जब ससुराल गयी, तो आंहे भरना
उससे ढेरों गप्पे लड़ाने को जी चाहता है
आज फिर दिल बचपन में लौट जाने को चाहता है,
पापा करते थे सारी फरमाइशें पूरी
नहीं रहती थीं, तब कोई ख्वाहिश अधूरी
फिर से पापा की गोद में बैठ जाने को जी चाहता है
आज फिर दिल बचपन में लौट जाने को चाहता है,
कोई गलती हो, तो मां आगे खड़ी हो जाती
मुझ पे आंच आए, तो वो सबसे लड़ जाती
उसी आंचल में छुप जाने को जी चाहता है
आज फिर दिल बचपन में लौट जाने को चाहता है,
हम इतनी जल्दी बड़े हुए क्यों
सब अपनों से दूर हो गये यूं
फिर उन्हीं गलियों में जाने को जी चाहता है
आज फिर दिल बचपन में लौट जाने को चाहता है,

Friday, 25 May 2018

Story Of Life : प्यार तो प्यार है -Part 2

अब तक आपने पढ़ा, कैसे रितेश और अलिया एक दूसरे से प्यार करने लगे ,तो इसमें ऐसा भी क्या हो गया, कि उनकी दोस्त मीरा सहम गयी, जानने के लिए पढ़िए  
प्यार तो प्यार है -Part 2

ऐसा भी क्या कर दिया, जो तुम इतनी परेशान हो, दोनों समवेत स्वर में बोले?
ये अलिया खान है, और तुम रितेश शर्मा, दोनों ने प्यार करने कि भूल कैसे कर ली? कैसे मिल पाओगे दोनों? क्या तुम्हारे माता-पिता इसके लिए राजी होंगे?
दोनों ने प्यार करते वक़्त, धर्म समाज के बारे में सोचा ही नही था, पर  आज मीरा ने उन्हे सच्चाई से अवगत करा दिया था।
दोनों ने decide किया, आज ही घर में, बात करेंगे।
वही हुआ, जिसका डर था, दोनों घरों में कोहराम मच गया।
रितेश और अलिया भी अडिग रहे कि हम इंसानों ने प्यार किया है, धर्म को नही, इंसानियत को ही माना जाए।
आखिरकार बच्चो की जिद के आगे, दोनों के परिवार वाले मान तो गए,पर इस शर्त पर कि, जब वो अपनी ससुराल में होंगे, तो उन्हे उनके धर्म के नाम के अनुसार नाम से पुकारा जाएगा।
रितेश का रहमान और अलिया का श्वेता नाम रख दिया गया। प्यार के आगे अपनी पहचान खोना, उन्हे मंजूर करना पड़ा।
दोनों एक दूसरे के परिवार मेँ रंगने लगे, पर परिवार ने हाँ तो कर दी, पर उन्हे दिल से नही अपना पाये, कोई अलिया के गोरे रंग कि तारीफ करता तो, रितेश कि माँ को यही लगता, इसी गोरे रंग को देख कर मेरा बेटा ऐसा दीवाना हो गया, कि धर्म -समाज सब भूल गया।
उधर रितेश को भी दामाद सा मान सम्मान नही मिल रहा था। पर दोनों ने अपनी अच्छाई नही छोड़ी, दोनों पूरे भाव से परिवार की सभी मांगों को निभाने में लगे रहे।
अलिया के अब्बू, homeopathy के काफी अच्छे doctor थे, पर अब वो बुजुर्ग हो चले थे, अलिया का कोई भाई नही था, stockist से medicine लाने की भाग दौड़, उन से अब संभव नही हो पा रही थी, जिसके चलते मरीज़ कम हो रहे थे।
रितेश को पता चला, तो उसने अब्बू को बिना बताए.......

अलिया के अब्बू को बिना बताए रितेश ने क्या किया.......


जानते हैं प्यार तो प्यार है के Part 3  में