Sunday, 12 May 2019

Poem : माँ हैं या, कोई जादू


Happy Mother’s Day

माँ हों साथ तो, हर दिन ही happy होता है, माँ से हर बच्चे का अस्तित्व होता है। मेरी ये कविता, हर माँ को समर्पित है।     

 माँ हैं या, कोई जादू 




माँ हैं या, कोई जादू हैं
हर बात कैसे जान लेती हैं
कैसे हम से पहले,
हमको पहचान लेती हैं 
ना जाने कौन सा जादू
मेरी माँ को आता है
वो मुझसे पहले जानती हैं
मुझको क्या भाता है
किससे मैं डरता हूँ
प्यार किससे करता हूँ
एतबार किस पे करता हूँ
इंतज़ार किस का करता हूँ
वो जानती हैं,
मैं भूखा रह जाता हूँ
जब तक उनके हाथ से
दो निवाला नहीं खाता हूँ
वो जानती हैं,
मैं सुकून से नहीं सोता हूँ
जब तक उनकी गोद में
सिर नहीं रख लेता हूँ
उनके लिए हूँ मैं सब 
माँ सब हैं मेरे लिए
पूजता हूँ मैं उनको
माँ रब हैं मेरे लिए

विश्व की सभी माँ को मेरा कोटि कोटि नमन
Happy Mother’s Day

Friday, 10 May 2019

Story Of Life : मजबूरी का सौदा (भाग-4)

अब तक आपने पढ़ा, कांता बहुत गरीब औरत है, जो अपने बीमार बच्चे को डॉ. समीर को दिखाना चाहती है, पर clinic बन्द होने के कारण दुखी है। क्योंकि Sunday को डॉ. घर में देखते हैं, जो बहुत दूर है, तभी वहाँ सरजू रिक्शेवाला आ जाता है, वो  उन्हें डॉ समीर के पास ले जाता है।  डॉ  समीर की Sunday की फीस हज़ार रूपये हैं , पर कान्ता के पास केवल 700 रूपये हैं।  और इतने रूपये में डॉ समीर, मंगलू को देखने को तैयार नहीं हैं । उसी रात मंगलू का जीवन ख़त्म हो जाता है। 2 साल बीत गए हैं , कांता को एक बड़े घर से काम करने का offer मिलता है..... 

अब आगे.....    
    

मजबूरी का सौदा (भाग-4) 


वहाँ पहुँच कर कांता को पता चला, वो तो डॉ. समीर के घर का ही काम था।

डॉ. समीर की पत्नी सुलेखा बोली, तुम्हारी बड़ी तारीफ सुनी है, कि तुम बहुत ईमानदार हो, और घर का बड़ा अच्छा काम करती हो। मेरे घर करोगी, तो 5000 रुपया महिना दूँगी। कुछ ही महीने में बेटी की शादी है, तो बहुत ईमानदार औरत ही चाहिए।

एक बार तो कांता का मन किया, कि अपने बेटे के हत्यारे के घर काम नहीं करूंगी। फिर इतने सारे पैसे देख कर छोटे बेटे का ध्यान आ गया।

कांता ने काम पकड़ लिया। कई बार डॉ. समीर से आमना-सामना हुआ, पर वे कांता को पहचान नहीं पाये, उनके लिए तो कांता जैसे बहुत लोग, मरीज को ले कर आते थे।

कांता ने बहुत मन लगा कर काम किया। उसकी ईमानदारी और बहुत अच्छे से काम करने के कारण डॉ. के घर के सब लोग उस पर निर्भर करने लगे।

डॉ. के घर में सब एक से एक आलसी और काम चोर लोग थे। अतः घर में क्या समान कहाँ रखा है? कौन सा काम कैसे करना है? सबकी जानकारी केवल कांता को ही थी।

कल रात को डॉ. की बेटी नेहा की engagement थी, और आज सुबह से ही कांता के छोटे बेटे की तबीयत खराब होने लगी। कांता ने कहलवा भेजा, कि वो दो दिन नहीं आएगी।

कांता नहीं आएगी, सुनकर पूरे घर की हालत खराब हो गयी, सब कुछ तो उसे ही पता है, अब क्या होगा?..... लड़के वालों के सामने क्या इज्ज़त रह जाएगी? कोई घर आ गया तो?.......  कांता के नहीं आने से घर भी पूर्णतः अस्तव्यस्त पड़ा  था।

डॉ. समीर और उनकी पत्नी सुलेखा, कांता के घर आ गए। और गिड़गिड़ाने लगे, काम करने आ जाओ, नहीं तो बेटी के ससुराल वालों को क्या मुँह दिखाएंगे?

सरजू भी आया हुआ था, बोला जब छुट्टी ली है, तो नहीं आएँगी, दो दिन बाद आ जाएंगी।

कैसी बात कर रहे हो, दो दिन बाद आकार क्या करेंगी? डॉ. समीर ने झल्ला कर कहा, Engagement तो कल है।

अच्छा ठीक है, तो इन दो दिन के 10 हज़ार अभी दो।

10 हज़ार..... दिमाग तो ठीक हैं, पूरे महीने के 5 हज़ार देते हैं, तुम्हें 2 दिन के 10 हज़ार चाहिए। डॉ. गुस्से से भर कर बोला।

ठीक है, मत दो, तब भौजी दो दिन बाद ही आएँगी।

क्या कांता ने अपना बदला ले लिया, जानते हैं मजबूरी का सौदा (भाग-5) में  

Thursday, 9 May 2019

Story Of Life : मजबूरी का सौदा (भाग- 3)


अब तक आपने पढ़ा, कांता बहुत गरीब औरत है, जो अपने बीमार बच्चे को डॉ. समीर को दिखाना चाहती है, पर clinic बन्द होने के कारण दुखी है। क्योंकि Sunday को डॉ. घर में देखते हैं, जो बहुत दूर है, तभी वहाँ सरजू रिक्शेवाला आ जाता है, वो  उन्हें डॉ समीर के पास ले जाता है।  डॉ  समीर की Sunday की फीस हज़ार रूपये हैं , पर कान्ता के पास केवल 700 रूपये हैं।  और इतने रूपये में डॉ समीर, मंगलू को देखने को तैयार नहीं हैं ....  



अब आगे.....    


मजबूरी का सौदा (भाग- 3)  

सुनो तुम जैसे हजारों गरीब, मजबूर आते हैं, मेरे पास। ऐसे ही खैरात करूंगा, तो अपने परिवार के लिए कहाँ से पैसे लाऊँगा?

कांता बहुत गिड़गिड़ाई, पर डॉ. समीर का मन ना पसीजा, वो भारी मन से बाहर आ गई।

सरजू बोला, क्या कहा, डॉ. बाबू ने? नहीं देखा सरजू भैया, उनकी हज़ार रुपए फीस है। और तुम तो जानते ही हो, मेरे पास केवल 700 हैं, जिससे फीस दवा सब करना है।

भौजी तुम पहली सवारी हो, इसलिए मेरे पास भी पैसा नहीं है, घर से 100 रुपया लेकर चला था। फिर कुछ सोचते हुए सरजू बोला, भौजी तुम एक काम करो, अपने 700 और मेरे 100 मिलाकर 800 रुपया डॉ. बाबू को दे दो, मात्र 200 रुपए ही तो कम हैं, शायद मान जाएँ?


फिर दवा कैसे आएगी? कांता उदासी से भरकर बोली। तुम डॉ. को तो दिखा लो, दवा का भी कुछ इंतजाम हो जाएगा।

कांता फिर वापस डॉ. बाबू  के पास पहुँच गयी, पर डॉ. हज़ार से कम में, मंगलू को देखने के लिए कैसे भी तैयार नहीं थे, अबकी बार तो उन्होंने ये भी बोल दिया, मैं देखकर क्या करूंगा? जब इसे दवा, और खाना नहीं मिलेगा, तो ये तो वैसे भी मर ही जायेगा।

डॉ. समीर के मुँह से ऐसी बात सुनकर कांता का कलेजा धक्क से रह गया।

कांता और सरजू लौट आए, और अगले दिन का इंतज़ार करने लगे। पर मंगलू की साँसों ने दूसरे दिन का इंतज़ार नहीं किया। रात में ही मंगलू ने कांता की बाहों में दम तोड़ दिया।

इस बात को दो साल हो गए। एक दिन एक अमीर घर से उसे घर-बर्तन का काम करने का offer आया। जब कांता वहाँ पहुंची। तो पता चला......

वहाँ पहुँच कर कांता को क्या पता चला..... जानते हैं मजबूरी का सौदा (भाग 4)