Monday, 22 May 2023

Recipe : Potato Casserole

Summer vacations, start हो गए हैं, साथ ही बच्चों की बहुत सारी demands भी...

और Shades of Life ने अपने cute viewers का हमेशा से ही ध्यान रखा है.. 

तो चलिए, आज एक ऐसी recipe share करते हैं, जो कि sureshot, सारे ही बच्चों को बहुत पसंद आएगी,  साथ ही बहुत easily prepare भी हो जाएगी और healthy food भी है।

Potato casserole



Ingredients :

  • Potato - 3 (medium sized)
  • Bell pepper - Red, green, yellow
  • Onion - 2 (medium sized)
  • Paneer / Cottage Cheese - 150 grams
  • Spinach leaves - 50 grams
  • American corn - 1 tablespoon
  • Butter - 1 tablespoon
  • Cheese - 1 cup
  • Milk powder - 1 tablespoon
  • Milk - 1 cup
  • Salt - as per taste 
  • Mix harbs - as per taste


Method :

  1. आलू को parboil कर लीजिए। 
  2. Corn को soft होने तक boil कर लीजिए।
  3. सभी veggies (potato, bell pepper, onion, paneer) के thick blocks काट लीजिए।
  4. एक bowl लीजिए, उसमें milk, milk powder, cheese, butter, salt सब डालकर mix कर लीजिए।
  5. अब सारी veggies, paneer और corn को इसमें डालकर अच्छे से mix कर लीजिए।
  6. अब इसे tray में या casserole में डाल दीजिए। एक side में हाथ से तोड़कर पालक के पत्ते डाल दीजिए।
  7. 180°C में half-an-hour के लिए bake कर लीजिए।

Now your crunchy, crispy and juicy Potato Casserole is ready to serve. You can have it with toasted garlic bread or you can serve as it is, in the form of a starter.

चलिए कुछ tips and tricks भी बता देते हैं for perfect potato casserole.


Tips and Tricks :

  • आलू को Al denté होने तक ज़रूर से boil कर लीजिए। ना इससे कम, वरना आलू कच्चे रह जाएंगे ना ही इससे ज्यादा, क्योंकि ज्यादा boil होने से आलू फूट जाएंगे और अपना shape contain नहीं कर पाएंगे।
  • आलू और corn को छोड़, बाकी सभी veggies ऐसी हैं, जिन्हें slightly cook करने से ही delicious taste आता है। इसलिए ही आलू और corn को boil कर के dish में डालें।
  • आप इसमें अपने taste के according और veggies भी add कर सकते हैं, जैसे pea, cabbage, cauliflower, mint leaves, salad leaves, etc.
  • आप चाहें तो microwave and grill combination से भी इसे बना सकते हैं। उसके लिए 4 minutes or cheese melt होने तक microwave कीजिए फिर 5 minutes or browning आने तक grill कीजिए।
  • इसमें base potato है, इसलिए kids की favourite dish है।
  • आप चाहें तो potato avoid भी कर सकते हैं और उसकी जगह green veggies भी base कर सकते हैं।

Saturday, 20 May 2023

Story of Life : रिश्तों की हद (भाग -4)

 रिश्तों की हद (भाग - 1)..

रिश्तों की हद (भाग -2) और

रिश्तों की हद (भाग -3) के आगे...


रिश्तों की हद (भाग -4)



रितिका, तुमने मुझे जो आज समझाया है, ऐसा ना मैंने कभी सोचा, ना ही समझा..

मैं आज ही अपने ससुराल और मायके दोनों तरफ, सबको बता देती हूँ।

जैसे ही श्यामली ने बताया, उसके सास-ससुर तुरंत चल दिए। श्यामली के मां-पापा ने भी शाम तक चलने के लिए कह दिया।

तरुण के बड़े भाई, अरुण एक pharmaceutical company में GM थे, उन्होंंने डाक्टर से बात कर के condition की seriousness समझी, फिर श्यामली को फोन करके कहा, मैंने डाक्टर से बात कर ली है। तुम घबराना नहीं, situation, under control है। मां-पापा रात तक और मैं कल सुबह तक आ जाऊंगा। Operation कल दोपहर का plan हुआ है।

Operation के पहले दोनों परिवारों से लोग पहुंच गए थे। अरुण के बात कर लेने से doctor and hospital ने personal attention दी। Operation, sucessful रहा। 

परिवार और दोस्त सब थे। परिवार के लोगों के आने के बाद, ज्यादातर सारे काम वो लोग ही निपटा दे रहे थे। दोस्तों से कुछ कहने की जरूरत ही नहीं हो रही थी।

सब कुछ इतना smoothly हो गया कि श्यामली और तरुण का कठिन समय बहुत आसानी से कट गया। 

सबका साथ पाकर, घर में जल्दी ही खुशी की लहर दौड़ गई। श्यामली, तरुण और परिवार वाले सभी खुश थे।

श्यामली और तरुण इसलिए कि उनका कठिन समय गुजर गया था और परिवार वाले इसलिए कि उनके बच्चे उनके साथ थे।

तरुण के घर आने के बाद से, सभी दोस्तों ने धीरे धीरे आना बंद कर दिया, चार दिन बाद श्यामली के मां-पापा भी चले गए, क्योंकि श्यामली की भाभी भी job करती थी और उसके मां-पापा के पास ही बच्चे रुकते थे। एक हफ्ते बाद अरुण भैय्या भी सारी व्यवस्था बनाकर चलें गये। पर उसके सास-ससुर, तरुण के plaster खुलने से उसके चलने तक रुके रहे और बराबर से तरुण का ध्यान रखते रहे, साथ ही श्यामली का भी सभी कामों में हाथ बंटाते थे।

जब वो लोग जा रहे थे तो तरुण दुखी था पर श्यामली बहुत रो रही थी।

उन्होंने पूछा कि क्या हुआ? तो वो बोली आप 

मत जाइए, अब जाकर तो मुझे समझ आया है कि मुझे कितनी अच्छी ससुराल मिली है और शादी के बाद, सबसे अपने आप के सास-ससुर ही होते हैं। 

हमें भी तुम्हारे साथ बहुत अच्छा लगा श्यामली, पर अभी हमें जाना होगा, क्योंकि तरुण की खबर सुनकर हम आनन-फानन में आ गए थे, वहां की सारी व्यवस्था ख़राब हो चुकी है।

हमें जाने दो, हम फिर आ जाएंगे, अपने बच्चों को देखे, मिले बिना किस का मन लगता है.. और तुम लोग भी आओगे तो और अच्छा लगेगा।

तरुण कुछ बोलता, उससे पहले ही श्यामली बोली, तरुण के पूरा ठीक होते ही हम आएंगे।

उन लोगों के जाने के बाद, श्यामली का मन बहुत भारी हो रहा था, तो उसने रितिका को घर बुला लिया।

रितिका के आते ही श्यामली उसके गले लग गई और बोली, रितिका मुझे तुम्हारे कारण ही पता चला कि मुझे कितनी अच्छी ससुराल मिली है और इतने सालों से मैं  कितने बड़े सुख से वंचित रह रही थी।

तुम्हारी कहीं बात को, मेरे जीवन की इस घटना ने सत्य साबित कर दिया।

सच में सभी रिश्तों की कद्र करनी चाहिए क्योंकि हर रिश्ता जरुरी है और हर रिश्ते की हद होती है, जो इसे समझ जाएगा, वो हमेशा सुखी रहेगा।

जिसके पास ससुराल, मायका और दोस्तों का प्यार और साथ हैं, उसी के दिल को पूर्णतः मिलती है।‌‌ 💓😊

कोई एक भी अगर साथ नहीं है तो दिल टूटा ही रहेगा  💔

Friday, 19 May 2023

Story of Life : रिश्तों की हद (भाग -3)

रिश्तों की हद (भाग - 1) और

रिश्तों की हद (भाग -2) के आगे..


रिश्तों की हद (भाग -3) 


कितनी खूबसूरत है यह दुनिया!

नहीं श्यामली, तुम ग़लत सोच रही हो..

क्या ग़लत? बताओ तो, क्या तुम सारे दोस्त,  हमारे अपने नहीं हो? क्या तुम हमारी जरूरत में काम नहीं आओगे? 

बिल्कुल अपने हैं, मैंने कब मना किया?

फिर भी मैं तुम से यह कहूंगी कि तुम्हारी सोच ग़लत है।

हम सारे तुम्हारे अपने हैं, पर मैं फिर repeat करुंगी, सारे!  मतलब तुम्हारा मायका, ससुराल और हम दोस्त भी...

और जिस sequence में कहा है, उसी sequence में..

सबसे पहले मायका, फिर ससुराल, फिर दोस्त... 

पर सभी रिश्तों की अपनी एक हद होती है...

मायका भी सबसे पहले इसलिए है, क्योंकि हम उनके ही ज्यादा नजदीक होते हैं और उनसे ही अपने दिल की कहने में संकोच नहीं करते हैं।

पर अगर हम अपने ससुराल वालों के साथ भी उतने ही जुड़ जाएं, जितने मायके वालों के साथ हैं तो नजदीकी उनसे भी हो जाएगी और संकोच भी ख़त्म हो जाएगा। और फिर वो ही सबसे पहले होंगे।

अब तुम कहोगी श्यामली, कि मायके वालों से जुड़ने के लिए तुमने कोई मेहनत, कोई प्रयास नहीं किया, पर यहां तो...

बिल्कुल रितिका, तुमने मेरे मन की बात बोल दी, श्यामली ने जिज्ञासा पूर्वक कहा.. 

करते हैं, हम तब भी मेहनत और प्रयास दोनों कर रहे होते हैं, और वो भी दोनों तरफ से, (हम भी और हमारे मां-पापा भी) पर तब वो इतनी slow and continuous process में चल रहा होता है कि हम समझ ही नहीं पाते हैं। दूसरा उस समय हमारे बुद्धि का विकास भी हो रहा होता है। तो सब मिलकर बहुत smoothly conditioning हो जाती है। 

जबकि जब हम ससुराल आते हैं, बुद्धि विकसित हो चुकी होती है और कम समय में ज्यादा प्रयास करने पड़ते हैं और वो भी दोनों तरफ से कोई भी करना नहीं चाहता हैं। बस इसलिए ही कभी भी दूरी नहीं पटती है और एक gape पूरी जिंदगी बना ही रहता है।

इसलिए दोनों की ही अपनी एक हद बनी रहती है।

यह तो हुई ससुराल और मायके के लोगों से बनने और ना बनने की बात...  

पर जब बात होती है, दोस्तों की, तो उनकी भी हद होती है, पर कुछ अलग..

वो तब ही ज्यादा helpful रहेंगे, जब तक नजदीकी रहेगी, फिर वो चाहे तब हो, जब आप उनके साथ एक ही पढ़ाई करते हों, या एक ही जगह job करते हो या एक ही जगह रहते हों या आपको ऐसी जगह help की जरूरत हो, जहां वो हों, और help भी ऐसी हो कि वो बहुत अधिक दिनों की ना हो... दोस्ती का रिश्ता, तो वैसे भी तब तक ही ज्यादा सशक्त होता है, जब तक नजदीकी ज्यादा रहती है। 

जबकि तुम्हें दूर की या बहुत दिनों की help चाहिए तो उसके लिए अपने means तुम्हारे अपने मां-पापा, भाई-बहन, सास-ससुर जेठ,ननद-देवर ही काम आएंगे। 

दूसरा तुम्हारी हर ख़ुशी और दुःख में दोस्त तब तक ही खड़े रहते हैं, जब तक घर से कोई ना आए, उनके आते से ही दोस्त पीछे हट जाते हैं।

पूरी जिंदगी में ना जाने कितने दोस्त बनते हैं, मिलते हैं, छूटते हैं, पर हमारे घर परिवार के लोग, सारी जिंदगी के लिए एक ही रहते हैं। इसलिए ही उनका फ़र्ज़ भी ज्यादा होता है और हक भी और हद भी... 

हर रिश्ते की अपनी हद होती है और सब उस हद तक ही सहायक होते हैं।

इसलिए दोस्त बनाओ, दोस्ती भी निभाओ, पर अपनों से रिश्ता बनाकर, उनसे जुड़े रहकर, मायके से भी और ससुराल से भी..

रितिका, तुमने मुझे जो आज समझाया है, ऐसा ना मैंने कभी सोचा, ना ही समझा..

मैं आज ही अपने ससुराल और मायके दोनों तरफ, सबको बता देती हूँ।

आगे पढ़ें, रिश्तों की हद (भाग- 4) अंतिम भाग