हर दौर में अपनी एक आधुनिकता आती है, जो सबके सिर चढ़कर बोलने लगती है। आजकल का दौर चल रहा है AI का- मतलब ChatGPT, Google Gemini, Meta AI, Grok AI, Perplexity AI, Copilot AI, Claude इत्यादि।
छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गों तक, सब इन्हें use कर रहे हैं। Offices, schools, colleges, competitions, या partues, हर जगह AI का बहुत अधिक use देखा जा सकता है।
सच में इसके use से आपकी problem कुछ पलों में सुलझ जाती है। ऐसा लगता है, मानो कोई जादू की छड़ी हाथ लग गई हो…
Office work हो, जैसे calculations, excel sheet पर काम, ढेरों files में tally करना, कोई presentation prepare करनी हो etc., सब चुटकियों में।
School में बच्चों को नई information देनी हो, उन्हें project ready करना हो, competitions के लिए GD (group discussion) ready करना हो, speech देनी हो, debate करनी हो, etc. सब झटपट ready, वो भी बिना किसी के guidance के।
और parties में चार चांद लगाना, अब न मुश्किल है, न महंगा। बस एक prompt डालिए और ढेरों एक से बढ़कर एक ideas, और खुद न कर पाओ तो कौन कर सकता है उसके ढेरों options भी।
सच में जिंदगी आसान हो गई है AI chatbots के आने से। पर क्या सच में AI boon ही है, या इनके आने से कुछ ऐसा भी हो रहा है, जो अभी दिखाई नहीं दे रहा है। पर कहीं न कहीं बहुत तेजी से खत्म होती जा रही है।
जी हाँ, यह जितना ज़्यादा boon है, उससे कहीं ज़्यादा bane भी है। आप गौर कीजिए कि इसके आने से creativity बहुत तेजी से खत्म हो रही है।
इसका ताज़ा उदाहरण बताते हैं आपको, हमारे बेटे के school में Inter-School Speech Competition था। उसने तो अपनी speach ready की थी।
पर जब speach for and against में start हुई, तो पता चला कि आधे से अधिक schools के बच्चों ने अपनी speech AI से prepare की थी। नतीजा, सारे बच्चे एक सा रटा-रटाया content सुना रहे थे। यहां तक कि examples भी change नहीं किए गए थे। उस speech का result बताने की जरूरत है?
हमारे बेटे की speech top पर थी, हर कोई उसकी तारीफ करते नहीं थक रहा था, उन schools के teachers भी तारीफ कर रहे थे जिन schools के बच्चे AI से speech ready कर के लाए थे।
अब दोष किसको दें- उन बच्चों को, उनके parents को, उनके teachers को, या इस AI को?
यही हाल offices में है, जहाँ पहले घंटों की मेहनत से presentation prepare की जाती थी, वहीं आज मिनटों में काम निपटा दिया जाता है। पर नतीजा, सबकी presentation एक सी, अब ऐसी presentation को marvellous कहा जाए या कामचोरी से नवाजा जाए?
Parties में भी पहले-सी novelty नहीं दिख रही है, सब होड़ में लगे हैं, घंटों का काम मिनटों में करने में। इससे ऐसा लगता है, मानों खूबसूरत पल भी किसी तरह काम-निपटें में तब्दील हो गया है।
हम ऐसा नहीं कह रहे हैं कि AI न करें, पर इस तरह से कीजिए कि वो boon रहे और bane न बने। आप उससे ideas लीजिए, guidance लीजिए, पर उससे नकल मत कीजिए।
क्योंकि जब आप मेहनत करेंगे, अपनी creativity डालेंगे, तभी novelty आएगी। और यही है, जिससे आपके काम की value होगी, वरना क्या होगा, यह आपको अगले article में share करेंगे।
Stay tuned…

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