Friday, 16 August 2019

Tip : Preserving coriander leaves

Adding coriander leaves to any dish, enhances it's taste. But isn't it really hard to keep the coriander leaves in rainy season? They either get dried up or start to rot.

So, I have a solution to this problem.

Preserving coriander leaves
  • Try to buy fresh leaves and see that it shouldn't be wet.
  • Clean the  leaves as soon as possible, after buying. Remove the roots, dust particles and other unwanted plants. Don't wash the leaves.
  • Wrap the leaves in a clean newspaper.
  • Now, keep this newspaper in a polythene. Don't tie the mouth of the poly bag. This will allow air circulation.
  • Now store it as usual.

  • The leaves may wither(कुम्हला), but would neither rot, nor get dried up. Also, it's fragrance will remain for a longer period.

Thursday, 15 August 2019

Poem : राखी का यही तोहफा होगा

भारत की सभी बहनों की सरहद पर तैनात फौजी भाइयों से बस यही कामना है।

राखी का यही तोहफा होगा

चन्दन की सुगंध,
नेह का धागा
राखी संग भेजा है प्यार
प्यारे प्यारे भैया मेरे
करना उसको स्वीकार
साल भर में आता है
यह मधुर त्यौहार
मिलने की थी आस
जो मैं ना पहुंच सकी
राखी ही पहुंचे पास
गर तुम होते साथ मेरे
चन्दन का तिलक लगाती
बांध हाथ में नेह का धागा
केसर का घेवर खिलाती
पर वीरा तुम तो हो
सरहद पर तैनात
रक्षा मां भारती की करने को
दिया है तुमने सब त्याग
एक बात मेरी रखना याद
बहुत हो चुके अमर शहीद
तुमको हरपल जीना होगा
दुश्मन का सीना चीर कर
जीते जी, युद्ध जीत लेना होगा
जीत हमारी तभी जीत ‌है
जब सेना का हर सैनिक साथ हो
जश्न  पूर्ण तभी होगा
जब तिरंगा लहराता वीर के हाथ हो
बहुत बह चुका रक्त वीर का
अब आगे से यह ना होगा
मुझको तुम्हारा दिया हुआ
राखी का यही तोहफा होगा‌।

जय हिन्द जय भारत

Wednesday, 14 August 2019

Story Of Life : अब और नहीं (भाग- 2)



अब और नहीं (भाग- 2) 


कुछ नहीं माँ जी, सोते हुए हाथ दब गया था, तो दर्द कर रहा है।

जब अमर चला गया, तो माँ जी रीना के पास गईं और पूछने लगीं, कहाँ दर्द हो रहा है? दिखा, मैं तेल गरम करके लाई हूँ।

अरे नहीं माँ जी, अभी ठीक हो जाएगा। पर माँ नहीं मानीं, बोली मुझे खूब पता है, कहाँ, और कैसे दर्द है। कहते हुए जब उन्होंने sleeves हटाई, तो रीना की बाहें सूजी हुईं थीं, जैसे किसी ने मरोड़ दी हो।

मुझसे कुछ छिपा नहीं है लाडो। कहते हुए माँ ने गर्म तेल 
लगाना शुरू कर दिया। 

मेरे आए दिन तेरे जैसा दर्द हुआ करता था। अमर के पिता 
भी अमर के जैसे ही जब पीकर आते थे, तो ऐसे ही मार-पीट किया करते थे, और मैं घर में सबसे झूठ बोला करती थी, सोते में दुख गया, टकरा गई थी, गिर गयी थी।

जिससे घर में कलेश ना हो। ना जाने अमर ने कब देख लिया, अपने पिता को ये सब करते हुए, जो ये भी हैवान हो गया।

बेटा, मुझे माँ ने ये शिक्षा दे कर भेजा था, चाहे पति कुछ भी करे, सहन करना, मायके लौट के ना आना। शादी करके बेटी पराई हो जाती है। मैं सहन करती गयी, सबसे छुपाती रही और तेरे ससुर के अत्याचार बढ़ते गए।

पर तेरे साथ ऐसा नहीं होगा, तू अकेली नहीं है। मैं तेरे साथ हूँ, आज ही अमर से बात करूंगी।

शाम को अमर आया, तो माँ क्रोध से भरी हुई थीं। आते से ही बोलीं, तुझे अपनी माँ पर कभी तरस नहीं आया, जो तू भी, अपने पिता की तरह हैवान बन गया।

अमर, रीना की तरफ देखने लगा। माँ बोलीं, उसे ना घूर! उसने मुझे कुछ नहीं बताया।

आज नारी उतनी असहाय नहीं है, अकेली नहीं है, मैं हूँ इसके साथ। तू इसके साथ ठीक से रहेगा, तो ठीक।  नहीं तो मैं तेरे खिलाफ पुलिस में complain कर दूँगी। और इसे अपने साथ ले जाऊँगी।    

माँ का ऐसा रूप देखकर अमर डर गया, बोला आगे से आपको 
कभी ऐसी शिकायत नहीं होगी।

आज रीना को समझ आ रहा था, माँ जी दुखी क्यों नहीं थीं, शांत क्यों थीं। वो पापा जी के अत्याचार से मुक्त जो हो गईं थीं।

रीना सोच रही थी, जो काम मेरी माँ ने करने की नहीं सोची थी, वो मेरे लिए मेरी सास ने कर दिया था, माँ जी के डांटने के बाद से अमर ने फिर ना कभी शराब पी, ना कभी हाथ ही उठाया।

कुछ दिन और रुक कर वो बोलीं, मैं यहाँ यही देखने आई थी, कि 
अमर का व्यहवार तेरे साथ कैसा है? जब सब ठीक हो गया है, तो अब मुझे अपने घर जाने दे। अब ही तो मैं अपने घर को सही मायने में अपना महसूस कर पाऊँगी। 

जाते जाते माँ जी कह कर गईं थीं, अगर मेरे जाने के बाद अमर परेशान करे, तो मेरी बाट जोहती मत बैठना, सहन करने से अत्याचार कम नहीं होते हैं। सशक्त बन, अत्याचार अब और नहीं!