(I) Her Emergence :
नवरात्रि पर्व चल रहा है, जिसमें जग-जननी माँ जगदम्बा की पूजा-अर्चना करते हैं। पर माँ दुर्गा का प्रकटीकरण किस प्रकार हुआ?
किस कारण हुआ? और वो शक्ति स्वरूपा क्यों कहलाती हैं। वो इतनी विशेष क्यों है? महिषासुर कौन था, उसे किस से और वरदान प्राप्त था। माँ दुर्गा क्यों उन्हें महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है?
ऐसे बहुत से प्रश्न दिमाग में घूमते हैं। इन्हीं प्रश्नों के उत्तर share कर रहे हैं आज के India's Heritage segment में…
The Rise of Navadurga
(II) Traditional Stories :
पौराणिक कथाओं के अनुसार माँ दुर्गा का जन्म देवताओं के सामूहिक तेज (ऊर्जा) से हुआ था। इसकी मुख्य कहानी कुछ इस प्रकार है।
महिषासुर नाम का एक अत्याचारी दुराचारी राक्षस था, लेकिन उसमें बहुत अधिक बल तब आया, जब उसने भगवान ब्रह्मा की कठिन तपस्या करके यह वरदान प्राप्त किया था कि किसी भी पुरुष या देवता के हाथों उसकी मृत्यु नहीं होगी।
ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर वही हुआ, जो होना था। महिषासुर के अत्यंत अहंकारी और बलशाली हो गया।
उसने स्वर्ग पर आक्रमण कर देवराज इंद्र को हरा दिया और देवताओं को स्वर्ग से बाहर निकाल दिया।
महिषासुर के अत्याचारों से त्रस्त होकर सभी देवता भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महादेव (शिव) के पास सहायता मांगने पहुँचे।
देवताओं की बात सुनकर त्रिमूर्ति ने विचार-विमर्श किया कि अब कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे महिषासुर का अत्याचार समाप्त हो जाए।
लेकिन रुकावट ब्रह्मा जी का वरदान बन रहा था। उनके अनुसार कोई भी पुरुष या देवता महिषासुर का अंत नहीं कर सकता था।
सोचा किसी देवी से महिषासुर का अंत करने को कहा जाए। लेकिन वरदान के पश्चात् महिषासुर अत्यंत बलशाली हो चुका था।
साथ ही त्रिदेव यह भी चाहते थे कि उसे अधिक मौके न दिए जाएँ और एक भी बार के युद्ध के साथ महिषासुर के अत्याचार को समाप्त कर दिया जाए।
(III) Shakti's Rise :
इस सोच के साथ ही माँ दुर्गा का प्रकटीकरण इस प्रकार हुआ।
- त्रिदेवों और सभी देवताओं के शरीर से एक दिव्य और तेजस्वी ऊर्जा (तेज) प्रकट हुई।
- भगवान शिव के तेज से माँ का मुख बना।
- भगवान विष्णु के तेज से भुजाएँ बनीं।
- ब्रह्मा जी के तेज से चरण बने।
- अन्य सभी देवी-देवताओं के तेज से शरीर के विभिन्न अंग और दिव्य शक्तियाँ प्रकट हुईं।
- इस प्रकार समस्त शक्तियों के पुंज से एक अद्युत और त्रिलोकी शक्ति माँ दुर्गा (आदिशक्ति) का प्रकटीकरण हुआ।
जब शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का प्रकटीकरण हो गया, तो निर्धारित किया गया कि माँ दुर्गा को विभिन्न अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित किया जाए।
अतः त्रिदेवों व देवताओं द्वारा माँ दुर्गा को अस्त्र-शस्त्र और सवारी प्रदान किए गए।
प्रकटीकरण के बाद सभी देवताओं ने माँ दुर्गा को अपने-अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए।
- भगवान शिव ने त्रिशूल दिया।
- भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र दिया।
- इंद्र देव ने वज्र प्रदान किया।
- वरुण देव ने शंख और पाश दिया।
- हिमालय पर्वत ने सवारी के लिए सिंह (शेर) भेंट किया।
इस तरह से शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का प्रकटीकरण हुआ। इसके पश्चात् माँ दुर्गा ने महिषासुर के साथ भीषण युद्ध किया और उसका वध किया।
इस प्रकार माँ जगदम्बा का प्रकटीकरण हुआ, महिषासुर के मर्दन के लिए, उसके बाद ही उनका नाम महिषासुरमर्दिनी पड़ा।
उनके अंदर त्रिदेवों व देवताओं की शक्ति समाहित थी, इसलिए ही उन्हें शक्ति-स्वरूपा कहा जाता है, और इसलिए वह विशेष भी हैं।
बोलो दुर्गा माता की जय!
माँ, आपके सभी भक्तों पर आपकी अनुकम्पा बनी रहे।
कल आपको बताएंगे कि षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, और नवमी को अधिक महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं?
Stay tuned…
