Wednesday, 12 November 2025

Article : वंदे मातरम्@150 years

वंदे मातरम्, एक शब्द, एक उद्धोष, एक प्रेरणा, एक ज्वाला है, जिसने भारत में स्वतंत्रता की मशाल जला दी। हर बच्चा, युवा, बुजुर्ग- पुरुष और महिला, सबके मन-मस्तिष्क पर वंदे मातरम् अंकित हो गया था।

हर व्यक्ति के लिए अपने स्वार्थ के ऊपर देश था। और जब जन-जन के मन में देश प्रथम होता है, तब स्वर्णिम बेला अवश्य आती है, जो भारत में आजादी के रूप में आई।

देश की आजादी के पश्चात इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मानित किया गया।

वंदे मातरम्@150 years


7 नवंबर को, वन्दे मातरम् को 150 वर्ष पूरे हो गए हैं। अतः सरकार द्वारा यह निर्धारित किया गया है कि इस शुभ अवसर को पूरे एक वर्ष तक उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।

Government & public places पर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् बजाया जाएगा, साथ ही साथ समय-समय पर कुछ विशेष कार्यक्रमों को भी आयोजित किया जाएगा।

वन्दे मातरम् महान बंगला साहित्यकार और देशप्रेमी बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा संस्कृत और बाँग्ला मिश्रित भाषा में रचित एक गीत है।

उन्होंने इस देशभक्ति गीत की रचना 7 नवंबर 1875 में अक्षय नवमी के दिन की, जिसका publication सन् 1882 में उनके उपन्यास आनन्द मठ में अन्तर्निहित गीत के रूप में हुआ था। इस गीत से सदियों से सुप्त भारत देश जग उठा।

यह गीत British सत्ता के विरोध और देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत एक ऐसी कहानी है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम को नये आयाम दिए। 

दरअसल उस समय पर बड़े पैमाने में राजनैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तन हो रहा था। राष्ट्रीय पहचान और British सत्ता के प्रति प्रतिरोध की भावना बलवती हो रही थी।

ऐसे में वंदे मातरम् गीत ने माँ भारती को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता के रूप में प्रतिष्ठित किया, तथा देश की एकता व अखंडता की भावना को जाग्रत करते हुए उसे एक काव्यात्मक स्वरूप दिया। जल्दी ही यह गीत भक्ति, समर्पण और अमरता का प्रतीक बन गया।

राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् को एक वर्ष तक विशेष महत्व देना, मात्र इस गीत को विशेष सम्मान प्रदान करना नहीं है वरन् उसके रूप में उन सभी देशभक्त क्रान्तिकारियों के सामने नतमस्तक होना है, जिन्होंने अपने स्वार्थ से ऊपर देश को रखा, जिन्होंने अपने बहुमूल्य जीवन को हंसते-हंसते देश की आजादी के लिए निछावर कर दिया। 

यदि उन्होंने देशभक्ति को सर्वोपरि नहीं माना होता तो भारत को स्वतंत्रता दिलाना असंभव था।

आज हम स्वतंत्र भारत में, स्वेच्छा से अपना जीवन यापन कर रहे हैं, तो उन्हीं देशभक्त क्रान्तिकारियों के कारण ही..

तो क्यों न सरकार के इस सराहनीय कार्य को और शुभ करते हैं। हम अपने बच्चों को, अपने युवाओं को उस पल के विषय में जितना अधिक जागरूक कर सकते हैं, करते हैं। उनके मन में देश-प्रथम की भावना को बलवती करते हैं।

जब हमारा भारत सर्वोपरि, सशक्त, अखंड और समर्थ होगा, तब ही सच्चा नमन होगा, राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् को और सच्ची श्रद्धांजलि देशभक्त क्रान्तिकारियों को।

जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳 

Tuesday, 11 November 2025

Shaadi-Vivah Song : बन्नी Reels बनाए बात बात में‌

शादी-विवाह से जुड़े रीति-रिवाजों के गीत साझा कर रहे हैं, उस श्रृंखला में हल्दी चढ़ने की रीति पर पहला गीत है- बन्नी तेरी हल्दी में

दूसरा गीत भात मांगने पर आधारित है- मेरे भैया चले आना 

तीसरा गीत, दुल्हन की मनमोहक रुप को पूर्ण करती हुई, मेंहदी पर आधारित है-मेंहदी रचने लगी हाथों में

शादी-विवाह में बन्ना बन्नी और चुहलबाज़ी वाले गीत बहुत पसंद किए जाते हैं।

बन्ना बन्नी पर आधारित तीन गीत, जिसमें दो चुहलबाज़ी और शरारत से भरपूर हैं:

बन्ना जी जरा जमके कमाना

रात को आ गये चोर

तो एक विवाह के बाद का प्रेम, लज्जा और संस्कार से परिपूर्ण-

बन्ना बुलाए, बन्नी नहीं आए

जो भी शादी करने जा रहे हैं, उनको आगाह करता, आज का यह मजेदार गीत, जिसमें यह प्रस्तुत किया है कि आजकल की बन्नी कैसी हैं, और ससुराल में आकर, वो क्या-क्या करने वाली हैं...

बन्नी Reels बनाए बात-बात में


मतवाली 

वो Instagram वाली 

Mobile रखे हाथ में 

बन्नी reels बनाए बात बात में 


सासु बोली 

बहू पोंछा लगा लो

पोछा लगाते reels बनाए वो 

सास फिसल गई 

कमर टूट गई 

बहू को दे रही गाली

 

मतवाली 

वो Instagram वाली 

Mobile रखे हाथ में 

बन्नी reels बनाए बात बात में 


सासु बोली 

बहू खाना बना लो

खाना बनाते reels बनाए वो 

रोटी जल‌ गई 

खाक हो गई 

सब्जी हो गई काली

 

मतवाली 

वो Instagram वाली 

Mobile रखे हाथ में 

बन्नी reels बनाए बात बात में 


सासु बोली 

बहू कपड़े तो धोलो

कपड़े धोते reels बनाए वो 

कपड़े फट गये

चिथड़े हो गये 

सर्फ हो गया खाली 


 मतवाली 

वो Instagram वाली 

Mobile रखे हाथ में 

बन्नी reels बनाए बात बात में 


सासु बोली 

बहू बर्तन तो धोलो

 बर्तन धोते reels बनाए वो 

बर्तन रह गए 

पानी बह गया 

टंकी हो गई खाली 

 

मतवाली 

वो Instagram वाली 

Mobile रखे हाथ में 

बन्नी reels बनाए बात बात में 


Monday, 10 November 2025

Shaadi-Vivah Song : बन्ना बुलाए, बन्नी नहीं आए

शादी-विवाह से जुड़े रीति-रिवाजों के गीत साझा कर रहे हैं, उस श्रृंखला में हल्दी चढ़ने की रीति पर पहला गीत है- बन्नी तेरी हल्दी में

दूसरा गीत भात मांगने पर आधारित है- मेरे भैया चले आना 

तीसरा गीत, दुल्हन की मनमोहक रुप को पूर्ण करती हुई, मेंहदी पर आधारित है-मेंहदी रचने लगी हाथों में

शादी-विवाह में बन्ना बन्नी और चुहलबाज़ी वाले गीत बहुत पसंद किए जाते हैं।

बन्ना बन्नी पर आधारित दो मजेदार गीत-

आज का यह गाना, मेरी नानी जी का प्रिय गीत था, उसे ही साझा कर रहे हैं, वो तब जितना सुरीला और तर्कसंगत था, आज भी है। विवाह के तुरंत बाद का वार्तालाप (संवाद) गीत है, जिसमें प्रेम भी है, लज्जा भी, संस्कार भी और सबसे बढ़कर,  ससुराल से जुड़ने के बाद, सबसे मीठी याद भी...

बन्ना बुलाए, बन्नी नहीं आए


बन्ना बुलाए, 

बन्नी नहीं आए 

आजा प्यारी बन्नी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


मैं कैसे आऊं 

ससुर जी खड़े हैं 

सास भी खड़ी हैं 

पायल मेरी बजनी रे

अटरिया सूनी पड़ी

 

लंबा घूंघट डाल के 

पायलिया उतार के 

आजा प्यारी बन्नी रे 

अटरिया सूनी पड़ी 


बन्ना बुलाए, 

बन्नी नहीं आए 

आजा प्यारी बन्नी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


मैं कैसे आऊं 

ताऊ जी खड़े हैं 

ताई भी खड़ी हैं 

पायल मेरी बजनी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


लंबा घूंघट डाल के 

पायलिया उतार के 

आजा प्यारी बन्नी रे 

अटरिया सूनी पड़ी 


बन्ना बुलाए, 

बन्नी नहीं आए 

आजा प्यारी बन्नी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


मैं कैसे आऊं 

चाचा जी खड़े हैं 

चाची भी खड़ी हैं 

पायल मेरी बजनी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


लंबा घूंघट डाल के 

पायलिया उतार के 

आजा प्यारी बन्नी रे 

अटरिया सूनी पड़ी 


बन्ना बुलाए, 

बन्नी नहीं आए 

आजा प्यारी बन्नी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


मैं कैसे आऊं 

फूफा जी खड़े हैं 

बुआ भी खड़ी हैं 

पायल मेरी बजनी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


लंबा घूंघट डाल के 

पायलिया उतार के 

आजा प्यारी बन्नी रे 

अटरिया सूनी पड़ी 


बन्ना बुलाए, 

बन्नी नहीं आए 

आजा प्यारी बन्नी रे

अटरिया सूनी पड़ी


मैं कैसे आऊं 

भैय्या जी खड़े हैं 

भाभी भी खड़ी हैं 

पायल मेरी बजनी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


लंबा घूंघट डाल के 

पायलिया उतार के 

आजा प्यारी बन्नी रे 

अटरिया सूनी पड़ी 


बन्ना बुलाए, 

बन्नी नहीं आए 

आजा प्यारी बन्नी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


मैं कैसे आऊं 

जीजा जी खड़े हैं 

दीदी भी खड़ी हैं 

पायल मेरी बजनी रे


अटरिया सूनी पड़ी 

लंबा घूंघट डाल के 

पायलिया उतार के 

आजा प्यारी बन्नी रे 

अटरिया सूनी पड़ी 


बहुत ही मीठा, प्रेम, लज्जा और संस्कार में ढला, बन्ना बन्नी वार्तालाप गीत