Thursday, 29 October 2026

Poem : इस करवाचौथ व्रत

दूर बैठे हैं पति तो, सखी ईश्वर से कर रही मनुहार।

हे ईश्वर, लौट आए पति तो करवाचौथ का व्रत पूर्ण हो हर बार…

इस करवाचौथ व्रत 


बैठे हो जो दूर जाकर,

जिंदगी में दूर तलक, 

तन्हाई दिखाई देती है।

जो आगोश में लेते हो,

तो जिन्दगी में हर तरफ, 

शहनाई सुनाई देती है।।

गुमसुम गुपचुप हम,

कब तक बैठे रहेंगे?

एक दूसरे से दूर रहकर,

विरह वेदना सहते रहेंगे?

खत्म हो अब अश्कों का तराना,

मिलन हो फिर से हमारा।

गूंजे फिजाओं में हमारे,

प्यार का अफसाना।।

कहते हैं कि पूरे मन से मांगो,

तो पूरी कायनात भी साथ आती है।

करने पूरी दिल की हसरत,

वो भी साथ निभाती है।।

तो चलो हम इसे आजमाते हैं,

अपनी दुआओं के साथ।

कायनात की शक्ति भी मिलाते हैं,

देखते है कि हमारे नसीब में, 

क्या-क्या आता है।

क्या छूटा हुआ साथ?

एक बार फिर से मिल पाता है, 

इस करवा चौथ पर यही है

ईश्वर से प्रार्थना,

मिल जाए साथ पिया का,

दिल से यही है आराधना।।


हे देवी माता, करवाचौथ व्रत पर सभी सुहागिनों को अपने पति का साथ और प्यार प्रदान करें।

क्योंकि जब हो पति-पत्नी का साथ, तभी हो करवाचौथ व्रत की पूर्णता का एहसास।

आप सभी को करवाचौथ व्रत पर विशेष शुभकामनाएँ!