दीपोत्सव का पावन पर्व आ रहा है। इसके आते ही हर छोटे-बड़े घरों में, showrooms, offices, दुकानों में, हर जगह गेंदे की माला की सजावट देखने को मिलती है।
पर कभी सोचा है क्यों?
आप कहेंगे कि गेंदें के फूल का season है, तो यह बहुतायत से और किफायती कीमत पर मिल जाते हैं।
बिल्कुल सही। पर इस कारण से ज्यादा बड़ा कारण है, हर तरफ गेंदें की माला के होने के।
आइए जानते हैं, उन कारणों को आज की इस India's Heritage की post से...
दीपावली व गेंदा
दीपावली के पावन पर्व पर गेंदे की माला का विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व होता है।
(I) शुभता और समृद्धि :
गेंदे के फूल का पीला और नारंगी रंग सूर्य का प्रतीक माना जाता है, जो ऊर्जा, प्रकाश और नई शुरुआत को दर्शाता है। हिन्दू परंपरा में ये रंग बेहद शुभ और समृद्धि दायक माने गए हैं।
(II) देवी लक्ष्मी का स्वागत :
दीपावली की रात माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने और उनका स्वागत करने के लिए घरों के मुख्य द्वार, खिड़कियों और पूजा स्थल पर गेंदे की माला या तोरण बांधे जाते हैं।
(III) सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा :
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गेंदे के फूलों की सुगंध वातावरण को शुद्ध करती है और घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मकता एवं खुशहाली लाती है।
(IV) पूर्णता का प्रतीक :
गेंदे का फूल अनगिनत छोटी पंखुड़ियों से मिलकर एक पूर्ण फूल बनता है, जिसे सनातन परंपरा में ‘पूर्णता’ और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
(V) पारंपरिक सजावट :
पीढ़ियों से घरों, मंदिरों, दुकानों और कार्यालयों को सजाने के लिए गेंदे की प्राकृतिक मालाओं का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाता आ रहा है।
और यही कारण हैं, जहाँ भी शुभ कार्य सम्पन्न होता है, वहाँ गेंदें की माला से सजावट की जाती है, दूसरे शब्दों में कहा जाए तो शुभता का पूरक है, गेंदें के फूल।
तो बस, अपने घर और कार्यस्थल को गेंदें की माला से सजाएँ और माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करें।
